शेयर बाजार नियामक- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने डिबॉक इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक मुकेश सिंह पर कड़ी कार्रवाई की है। सेबी ने दोनों को सात साल के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। मामला कथित अकाउंटिंग फ्रॉड और वित्तीय आंकड़ों में हेरफेर से जुड़ा है। सेबी के मुताबिक कंपनी ने फर्जी बिक्री और खरीद दिखाकर अपने वित्तीय आंकड़े बढ़ाए। सर्कुलर लेनदेन के जरिए भी आंकड़ों में हेरफेर किया गया।
- सेबी ने कुल 59.30 करोड़ रुपये की अवैध कमाई जब्त करने का आदेश दिया।
- कंपनी को राइट्स इश्यू से डायवर्ट किए गए 49 करोड़ रुपये वापस करने होंगे।
- इस रकम पर 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
- कंपनी और अन्य लोगों पर कुल 29 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना।
- मुकेश सिंह पर अकेले 20.10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा।
सेबी ने कहा कि फर्जी लेनदेन के जरिए कंपनी के वित्तीय आंकड़ों को बढ़ाया गया। बाद में फर्जी तरीके से हासिल करीब 4.21 करोड़ शेयर निवेशकों को बेच दिए गए। सेबी ने सुनील कलोट पर पांच साल और प्रियंका शर्मा तथा गौरव जैन पर तीन साल का बाजार प्रतिबंध लगाया है।
IPO अनियमितताओं के बाद ट्रैफिकसोल पर सेबी की कार्रवाई
सेबी ने ट्रैफिकसोल आईटीएस टेक्नोलॉजिज लिमिटेड (Trafiksol ITS Technologies Ltd) और उसके प्रमोटर-निदेशकों जितेंद्र दास और पूनम दास पर कार्रवाई की है। तीनों को एक साल के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है। सेबी ने कुल 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कंपनी के SME IPO को सितंबर 2024 में 345.65 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। IPO से कंपनी ने करीब 44.87 करोड़ रुपये जुटाए थे।
- कंपनी पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगा।
- जितेंद्र दास पर 50 लाख और पूनम दास पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगा।
- तीनों को 45 दिन में जुर्माना भरना होगा।
सेबी ने IPO से जुटाई रकम के इस्तेमाल और वित्तीय खुलासों में गंभीर अनियमितताएं पाईं। करीब 17.70 करोड़ रुपये सॉफ्टवेयर खरीदने के लिए रखे गए थे। सेबी के मुताबिक, कंपनी ने Oasis Corpcare से जुड़ा एक कथित फर्जी कोटेशन इस्तेमाल किया। इस विक्रेता की तकनीकी क्षमता पर भी सवाल थे। शिकायतों के बाद BSE ने कंपनी की लिस्टिंग टाल दी थी। सेबी ने मामले की विस्तृत जांच के बाद यह कार्रवाई की।



