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- CDS Anil Chauhan Statement On India China Relations | LAC Border Dispute
नई दिल्ली4 मिनट पहले
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पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने शनिवार को कहा कि चीन भारत के लिए लंबे समय की और व्यापक चुनौती है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद अब भी सुलझा नहीं है और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की साझा परिभाषा भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के रिश्तों को सिर्फ सीमा विवाद का बंधक नहीं बनाया जा सकता। दोनों देश एशिया की बड़ी ताकतें, बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्राचीन सभ्यताएं हैं। इसलिए भारत को चीन के साथ बातचीत जारी रखनी होगी।
अनिल चौहान ने यह बात नई दिल्ली के टीन मूर्ति भवन परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कही।
सीमा पर तनाव की वजहें
पूर्व CDS ने कहा कि दोनों देशों की सीमाओं पर स्थिरता के लिए सतर्कता, भरोसेमंद क्षमताएं, साफ समझौते और उनका लगातार पालन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सीमा विवाद के साथ-साथ दोनों देशों की अलग-अलग धारणाएं, बुनियादी ढांचे का विकास और सीमा पर सैन्य मौजूदगी तनाव और स्थिति बिगड़ने की संभावना बढ़ाते हैं।
चीन से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने कहा, “हमारे उत्तरी पड़ोसी के सामने बिल्कुल अलग और लंबे समय की व्यापक चुनौती है। सीमा विवाद अब भी सुलझा नहीं है और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की भी कोई साझा परिभाषा नहीं है।”
डोभाल-वांग वार्ता के बाद बयान
अनिल चौहान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की है। इस वार्ता में सीमा के सीमांकन और सीमा पार सहयोग जारी रखने पर चर्चा हुई।
यह बातचीत विशेष प्रतिनिधि वार्ता के ढांचे के तहत हुई। यह वार्ता चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत में होने वाले आगामी BRICS सम्मेलन की संभावित यात्रा से कुछ हफ्ते पहले हुई है। BRICS सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को होना है।
पूर्व CDS ने शनिवार के एक अखबार में छपी संभावित हॉटलाइन शुरू करने और पूर्वोत्तर में कोर कमांडर स्तर की बातचीत से जुड़ी रिपोर्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे “स्वागत योग्य विकास” बताया।
भारत-चीन को साथ बातचीत करनी होगी
जनरल चौहान (रिटायर्ड) ने कहा कि भारत और चीन दोनों सहयोग भी करते हैं और प्रतिस्पर्धा भी। क्षेत्रीय और वैश्विक व्यवस्था को लेकर दोनों देशों के विचार अलग हैं, लेकिन इसके बावजूद चीन के साथ बातचीत की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “हम शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) और अब BRICS के तहत यही कर रहे हैं। एशिया का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत और चीन का एक साथ उभरना किस तरह आगे बढ़ता है।”
पड़ोसी देशों में अस्थिरता भी चुनौती
अपने व्याख्यान में पूर्व CDS ने भारत के सामने मौजूद कई चुनौतियों और उनसे निपटने के तरीकों पर भी बात की। उन्होंने भारतीय पड़ोस के कई देशों में अस्थिरता को भी एक खतरा बताया, जिसे संभालना जरूरी है।




