वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) के अध्यक्ष जौ जियायु से मुलाकात की। इस बैठक में भारत और एआईआईबी के बीच साझेदारी को और मजबूत करने के अवसरों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। यह महत्वपूर्ण चर्चा नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर हुई।
वित्त मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर बात की। इसमें भारत की बुनियादी ढांचा और परिवहन संपर्क प्राथमिकताओं को समर्थन देना शामिल था। स्थानीय-मुद्रा वित्तपोषण को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। एआईआईबी की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करने के अवसरों पर भी विचार किया गया। यह शिखर सम्मेलन रविवार को समाप्त होगा।
साझेदारी को और कैसे गहराया जाएगा?
बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और एआईआईबी के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था। दोनों पक्षों ने भारत के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में एआईआईबी का निवेश भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। परिवहन संपर्क परियोजनाओं से देश के विभिन्न क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। स्थानीय-मुद्रा में वित्तपोषण से भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिल सकती है।
एएआईबी की भूमिका और भारत के लिए क्या मायने?
एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक एक बहुपक्षीय विकास बैंक है। इसकी स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी। यह बैंक मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण पर केंद्रित है। भारत एआईआईबी के सबसे बड़े सदस्यों में से एक है। इस बैंक के साथ भारत की साझेदारी देश में बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं को गति देती है। निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी से परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा।



