देश के ऊर्जा क्षेत्र के सामने फिर संकट खड़ा हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के लगभग एक तिहाई कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन का भंडार खतरनाक स्तर तक घट गया है।
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ऐसे बिजली संयंत्र जहां कोयले का भंडार कुल जरूरत का 25 फीसदी से भी कम बचा है यानी जिनके पास मात्र 3 दिन का कोयला शेष है उनकी संख्या 9 सितंबर तक 59 हो गई है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषक मनोज कुमार का कहना है कि घटता कोयला भंडार ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चेतावनी है। मई में देश की बिजली की अधिकतम मांग 270.70 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, जो पिछले कुछ दिनों से लगातार 267 गीगावॉट के आसपास बनी हुई है।
n देश में 267 गीगावॉट बनी हुई है बिजली की मांग : गर्मी के लंबे दौर और अल नीनो के असर से बिजली की मांग में कमी नहीं आ रही है, जिससे ग्रिड और बिजली उत्पादन पर भारी दबाव बन गया है। मई महीने में देश की बिजली की अधिकतम मांग 270.70 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, जो पिछले कुछ दिनों से लगातार 267 गीगावॉट के आसपास बनी हुई है। सौर ऊर्जा थोड़ी राहत जरूर दे रही है, लेकिन बैटरी स्टोरेज की कमी और जलाशयों में पानी का स्तर घटने के कारण जल विद्युत पर निर्भरता बनी हुई है।
आपूर्ति बढ़ाने को युद्ध स्तर पर काम
संकट से निपटने के लिए सरकार और कंपनियां युद्ध स्तर पर जुटी हैं। भारतीय रेलवे ने बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने के लिए रैक/ट्रेनों की संख्या 3 सितंबर के 370 से बढ़ाकर 6 सितंबर को 444 कर दी है। दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी कोल इंडिया और उसकी सहायक इकाइयों ने खदानों पर लगभग 76 मिलियन मीट्रिक टन का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा करते हुए सड़क मार्ग से भी कोयले की आपूर्ति बढ़ा दी है।
पंजाब : राजपुरा प्लांट की यूनिट भी बंद
पटियाला। पंजाब में राजपुरा थर्मल प्लांट की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 शुक्रवार को तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई, जिससे बिजली संकट गहरा गया है। रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 पहले से ही बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीआईडीसी की तीन यूनिटें ठप हैं।



