भारतीय बाजार की गिरावट अब सिर्फ कुछ शेयरों तक सीमित नहीं रह गई है। बृहस्पतिवार को लगातार चौथे दिन बाजार में तेज बिकवाली हुई। सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79% गिरकर 71,909.70 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसमें 1,187.41 अंक तक गिरावट आई और यह 71,292.88 के एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88% टूटकर 22,421.95 अंक पर आ गया। इसके साथ ही निफ्टी लगातार आठवें हफ्ते कमजोर होकर 25 साल की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट के दौर में पहुंच गया है।
पिछले नौ हफ्तों में निफ्टी करीब 2,156 अंक यानी 8.7% नीचे आ चुका है। सितंबर में निफ्टी 6.1% गिरा था। इस साल जनवरी में बना 26,373 का रिकॉर्ड स्तर करीब 15% टूट चुका है। अगर निफ्टी रिकॉर्ड स्तर से 20% नीचे जाता है तो तकनीकी तौर पर बाजार लंबे दौर की मंदी में पहुंच जाएगा। इससे पहले 2001 में निफ्टी लगातार नौ हफ्ते तक गिरा था। 1993 में निफ्टी के नाम लगातार 10 हफ्ते तक गिरावट दर्ज करने का रिकॉर्ड है।
एफआईआई ने 3 दिन में निकाले 29 हजार करोड़
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक एफआईआई ने बृहस्पतिवार को भारतीय बाजार से 9,484.22 करोड़ रुपये निकाले।
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बुधवार को विदेशी निवेशकों ने 10,148 करोड़ और मंगलवार को 10,743 करोड़ के शेयर बेचे थे। केवल तीन कारोबारी दिनों में उनकी बिकवाली 29,000 करोड़ से ज्यादा रही। लगातार विदेशी निकासी से बाजार में खरीदारी की भावना कमजोर पड़ रही है।
80% शेयर 50 दिन के औसत से नीचे आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक, निफ्टी 500 में करीब 80% शेयर अपने 50 दिन के औसत भाव से नीचे कारोबार कर रहे हैं। यानी कमजोरी कुछ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार के बड़े हिस्से में फैली हुई है।
कहां तक टूट सकता है बाजार : सेबी रजिस्टर्ड शोध विश्लेषक विपिन डिक्सेना के मुताबिक, निफ्टी इस समय करीब 22,400 के समर्थन स्तर के आसपास है। यह टूटता है तो 22,200 से 22,000 तक गिरने का दबाव बढ़ सकता है। ऊपर की तरफ 22,600 से 22,800 तक तत्काल प्रतिरोध है।



