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मुक्त व्यापार समझौता: भारत ने एफटीए की उपयोगिता बढ़ाने के लिए बनाया प्रकोष्ठ, 32 विकसित बाजारों में अवसर


वाणिज्य विभाग ने घरेलू उद्योगों को मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से मिलने वाले अवसरों के बारे में जागरूक करने के लिए एक उपयोगिता प्रकोष्ठ स्थापित किया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये समझौते निर्यातकों और उद्योगों को शुल्क की निश्चितता प्रदान करते हैं। इस पहल का उद्देश्य भारतीय कारोबारों को वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद करना है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन में कहा कि प्रकोष्ठ का मुख्य विचार देशभर के उद्यमियों को एफटीए के लाभ समझाना है। यह कार्य उद्योग संघों, निर्यात संवर्धन परिषदों और राज्य सरकारों के माध्यम से किया जाएगा। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग समझें कि मुक्त व्यापार समझौता क्या प्रदान करता है। साथ ही, कारोबारों को इन नए अवसरों पर कैसे ध्यान देना चाहिए, यह भी बताया जाएगा। भारत ने चार-राष्ट्र ईएफटीए गुट, न्यूजीलैंड, मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ओमान, यूरोपीय संघ और यूके के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है। 

भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता पिछले साल अक्तूबर में लागू हुआ था। ईएफटीए के सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड हैं। वाणिज्य सचिव ने बताया कि ईएफटीए समझौते को अकेले नहीं देखा जाना चाहिए। भारत ने 27-राष्ट्र यूरोपीय संघ और यूके के साथ भी व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है। कुल मिलाकर, भारत के पास इस क्षेत्र में 32 देशों के साथ मुक्त व्यापार व्यवस्था होगी। इन समझौतों के तहत भारत का अधिकांश व्यापार शून्य शुल्क पर होगा।

एफटीए उपयोगिता प्रकोष्ठ कैसे काम करेगा?

प्रकोष्ठ का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य सभी निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ मिलकर एफटीए उपयोगिता में सुधार करना है। इसका उद्देश्य प्रत्येक भागीदार देश के बाजार के लिए एक ठोस कार्य योजना तैयार करना है। अगले 4-5 वर्षों तक इस योजना पर काम किया जाएगा। इससे एफटीए भारतीय बाजार के साथ भागीदार देश के बाजार के वास्तविक एकीकरण को बढ़ावा देंगे। भारत ने इन देशों के लिए अपने बाजार खोले हैं और उन्होंने भारत के लिए अपने बाजार खोले हैं।

व्यापार समझौतों से क्या लाभ मिलेंगे?

व्यापार समझौते केवल शुल्क और शुल्क मध्यस्थता के बारे में नहीं होते हैं। समझौतों में सबसे महत्वपूर्ण बात शुल्क की निश्चितता है। इससे कारोबारों को यह पता होता है कि भविष्य में शुल्क स्थिर रहेंगे और कोई अप्रत्याशित बदलाव नहीं होगा। शुल्क की निश्चितता के कारण कारोबार निवेश जोखिम ले सकते हैं। वे इसके आधार पर आपूर्ति शृंखलाएं बना सकते हैं। साथ ही, अपनी भविष्य की कारोबार वृद्धि की योजना भी बना सकते हैं। यही इन समझौतों की ताकत है। राजेश अग्रवाल ने यह भी कहा कि ये 32 देश उच्च प्रति व्यक्ति आय वाले विकसित राष्ट्र हैं।

निर्यातकों के लिए कृषि और बाजार के अवसर क्या हैं?

उच्च प्रति व्यक्ति आय के साथ, ये बाजार मात्रा और मूल्य दोनों में उच्च खपत वाले होते हैं। ये गुणवत्ता की मांग करते हैं और मूल्य भी प्रदान करते हैं। निर्यातकों को दीर्घकालिक कारोबार निर्णय लेकर इन समझौतों का लाभ उठाना चाहिए। ये समझौते कृषि क्षेत्र में भी निर्यात के अवसर प्रदान करते हैं। ये बाजार एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक के कृषि उत्पाद आयात करते हैं। कृषि में शुल्क हर क्षेत्र में शून्य नहीं हुए हैं, पर कई उत्पादों में अधिमान्य पहुंच मिली है जहां भारत की ताकत है। ईएफटीए के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 2-3 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो एक फीसदी से भी कम है। भारत अगले 3-4 वर्षों में इस बाजार का इंपोर्ट बास्केट दो फीसदी तक पहुंच सकता है।



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