देश के ई-कॉमर्स बाजार में क्विक कॉमर्स मार्केट सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि खरीदारी का शक्तिशाली जरिया बन चुका है और तेजी से बदल रहा है। महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी इसकी पैठ लगातार बढ़ रही है।
गूगल और रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय क्विक कॉमर्स मार्केट अगले पांच साल में वित्त वर्ष 2026 के लगभग 13 अरब डॉलर से सात गुना बढ़कर 90 अरब डॉलर (लगभग 867 हजार करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह महानगरों में इसकी गहरी पैठ और टियर-2 व टियर-3 शहरों में ग्राहकों की तेजी से बढ़ती संख्या है।
क्विक कॉमर्स मार्केट, ऑनलाइन रिटेल का एक ऐसा मॉडल है, जिसमें ऑर्डर किए गए उत्पाद (जैसे किराने का सामान, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें) मात्र 10 से 30 मिनट के भीतर उसके घर पहुंचा दिए जाते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2031 तक देशभर में हर महीने लेनदेन करने वाले यूजर्स की संख्या 10 करोड़ से अधिक हो सकती है। इस दौरान होने वाली कुल बढ़ोतरी में अकेले महानगरों की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रो रिटेल खर्च में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी मौजूदा 6 प्रतिशत से बढ़कर 20 से 23 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
ये भी पढ़ें: टाटा समूह विवाद: सात ट्रस्टों ने दाखिल किए 84 कैविएट; नोएल-नेविल टाटा पर क्यों बढ़ा दबाव?
निकट भविष्य की बात करें तो त्योहारी सीजन के दौरान क्विक कॉमर्स की बिक्री में साल-दर-साल 110 प्रतिशत की भारी वृद्धि का अनुमान है और यह त्योहारों के दौरान होने वाले कुल ऑनलाइन खर्च का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा बनेगा।
किराने के सामान से नियोजित खरीदारी तक
रिपोर्ट के मुताबिक, क्विक कॉमर्स की सफलता का अगला चरण केवल छोटे-मोटे किराना सामानों तक सीमित रहने के बजाय बड़े घरेलू सामानों, नियोजित खरीदारी और नॉन-ग्रॉसरी श्रेणियों की ओर बढ़ने पर निर्भर करेगा। नॉन-ग्रॉसरी श्रेणी में ब्यूटी, पर्सनल केयर, और इलेक्ट्रॉनिक्स आते हैं । इस सेगमेंट के वित्त वर्ष 2026 में लगभग 3 अरब डॉलर से बढ़कर 2031 तक 21 से 27 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
रोजमर्रा की वस्तुओं से लेकर महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स तक खरीदारी का व्यवहार तेजी से बदल रहा है। छोटे शहरों में छोटे बास्केट साइज, सामान की ताजगी को लेकर चिंताएं और खरीदारी में भरोसा अभी भी मुख्य बाधाएं बनी हुई हैं। भविष्य के विस्तार के लिए प्लेटफॉर्म्स और ब्रांड्स को स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार अपने मॉडल ढालने होंगे तथा ऑनलाइन खोज को तेज स्थानीय डिलीवरी से जोड़ना होगा।