Homeटेक्नोलॉजीसुपर अल नीनो से 20 दिन में चीनी 10% महंगी: दूध...

सुपर अल नीनो से 20 दिन में चीनी 10% महंगी: दूध और आटा 6%; 2027 तक रह सकता है असर; गन्ने की फसल भी प्रभावित


नई दिल्ली32 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मानसून कमजोर करने वाले सुपर अलनीनो का दुष्प्रभाव अब खाने-पीने की चीजों पर दिखने लगा है। पिछले 20 दिन में एक किलो चीनी 10.16%, दूध 6.12%, दालें 4.68%, आटा 6.67% तक महंगा हो चुका है।

मौसम विभाग का कहना है कि दिसंबर में सुपर अलनीनो का प्रभाव अपने चरम पर होगा और इसका असर अगली गर्मियों के आखिर तक बना रह सकता है। यानी जून 2027 तक फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका ज्यादा है। खाने-पीने के सामानों के बढ़ते दामों और मौसम के पूर्वानुमान ने खाद्य उद्योग की चिंता बढ़ा दी है।

इंडियन पल्सेज एंड ग्रेन्स एसो. के अध्यक्ष बिमल कोठारी का कहना है कि हम 2027 के हालातों को लेकर तनाव में हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की स्थिति रबी मौसम की चने की फसल के लिए चुनौती बन सकती है। गन्ने की फसल भी प्रभावित हो सकती है। श्री रेणुका शुगर्स के निदेशक अतुल चतुर्वेदी ने सोयाबीन और मूंगफली की पैदावार पर गंभीर खतरे की आशंका जताई है।

1d2cfce7 52d5 4e7c b12d 4199b893b9c3 1791686313086

चीनी का मिल भाव 30% बढ़ने की आशंका

इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रेन एनर्जी के दिलीप पाटिल के मुताबिक अगले दो साल यानी वित्त वर्ष 2027-28 के आखिर तक चीनी उत्पादन और उपलब्धता दोनों ही चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं। अभी चीनी के मिल भाव 42 रु. प्रति किलो हैं, फुटकर में चीनी 55 रु. तक बिक रही है। जून से अक्टूबर 2027 के बीच मिल भाव 30% तक बढ़ सकता है।

क्या है अल नीनो और ये क्यों आता है

प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में जब समुद्री हवाएं कमजोर पड़ती हैं, तो दक्षिण अमेरिकी तट का पानी असामान्य रूप से गर्म होने लगता है। समुद्र के पानी के गर्म होने को अल नीनो कहते हैं। यह वैश्विक हवाओं और बादलों के पैटर्न को बदलकर दुनियाभर के मौसम को तहस-नहस कर देता है।

2 1778920735 1790032210480

जलाशयों में पिछले साल से 21% कम पानी

अगस्त तक खरीफ की बुवाई 1.7% कम थी। आईसीआरए के अनुसार, रकबा 2% घट सकता है। कम बारिश, ज्यादा तापमान और अल नीनो से मिट्टी की नमी घटी है। इससे उपज घटेगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि चावल उत्पादन 1 करोड़ टन घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है। यानी पिछले साल की तुलना में 6.5% कम।

रबी की बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी। शुरुआती सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता कमजोर है। उत्तर व दक्षिण भारत में जल भंडार में गिरावट को आईसीआरए ने रबी के लिए जोखिम बताया। गेहूं, चना जैसी फसलों पर दबाव बढ़ेगा।

178 प्रमुख जलाशयों में 131.17 अरब क्यूबिक मीटर पानी है। पिछले साल से 21% कम। इससे बिजली पर दो असर होंगे। पहला, बिजली आपूर्ति में हाइड्रो का योगदान घटने का जोखिम होगा। दूसरा, बिजली की मांग बढ़ेगी।

—————————-

ये खबर भी पढ़ें… मानसून लौटने लगा, 45% जिलों में बारिश का कोटा अधूरा:10 साल पहले ऐसा हुआ तो ट्रेन से पानी पहुंचाना पड़ा, अबकी क्या होगा

mmsgoodbye monsoon 14092026 cover 21 1789901343 1790032325593

राजस्थान से मानसून की विदाई की शुरुआत हो चुकी है। धीरे-धीरे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, एमपी, यूपी, बिहार और महाराष्ट्र में कमजोर होते हुए पूरे देश से विदा होगा। पूरी खबर पढ़ें…



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments