भारत में बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और डाटा सेंटर की बढ़ती मांग से इंजीनियरिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टर को नए अवसर मिलने की उम्मीद है। एएनआई पर आई एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) तकनीक इस क्षेत्र की ग्रोथ में अहम भूमिका निभा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की HVDC क्षमता वित्त वर्ष 2027 के 34.5 गीगावाट से बढ़कर 2032 तक 55 गीगावाट होने की उम्मीद है। वहीं, 2036 तक 78 गीगावाट की अतिरिक्त परियोजनाओं की पहचान की गई है। डाटा सेंटर की क्षमता भी बढ़ने की संभावना है। भारत में अभी यह 2 गीगावाट से कम है, जबकि 2030 तक इसके 13 से 18 गीगावाट होने का अनुमान है। इससे ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर और ग्रिड उपकरणों की मांग बढ़ सकती है। हालांकि, परियोजनाओं में देरी, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक निवेश में अनिश्चितता सेक्टर की वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं। घरेलू विनिर्माण बढ़ने से आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
यूपीआई पेमेंट पर शुल्क से बढ़ सकती हैं कीमतें, IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में चेतावनी
मोबाइल से राशि भुगतान यानी यूपीआई पेमेंट पर प्रस्तावित शुल्क का बोझ ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। IIT बॉम्बे के प्रोफेसरों की तकनीकी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुकानदार शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं ले सकेंगे, लेकिन इसकी भरपाई सामान की कीमतें बढ़ाकर कर सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर 0.40 फीसदी तक शुल्क लग सकता है। प्रति लेनदेन इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। 2,000 रुपये तक के भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच ट्रांसफर मुफ्त रहेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यवस्था से पेमेंट सेवा प्रदाताओं को सालाना करीब 18,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। प्रोफेसरों ने UPI पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए शुल्क व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई है।रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि शुल्क केवल ऑनलाइन कारोबारियों और 50 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाले व्यवसायों पर लगाया जाए। प्रतिशत आधारित शुल्क की अधिकतम सीमा 40 रुपये रखने और बैंकों से UPI व्यवस्था के लिए योगदान लेने की भी सिफारिश की गई है।