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Digital Arrest Case: जयपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग दंपती से 2 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में पुलिस ने आरोपी ललित विश्वास को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने पुलिस, ATS, NIA और RBI अधिकारी बनकर दंपती को 20 दिन तक आतंकी फंडिंग का डर दिखाया. मामले में अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं.
आरोपी ललित विश्वास
जयपुर. राजस्थान में साइबर ठगी के एक बड़े मामले में पुलिस को अहम सफलता मिली है, बुजुर्ग दंपती को डिजिटल अरेस्ट कर करीब 2 करोड़ रुपए की ठगी करने के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी ललित विश्वास को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है. आरोपी ने खुद को पुलिस, एटीएस, एनआईए और आरबीआई का अधिकारी बताकर बुजुर्ग दंपती को अपने जाल में फंसाया था. आरोपियों ने दंपती पर आतंकी गतिविधियों में फंडिंग करने का आरोप लगाकर उन्हें मानसिक दबाव में रखा और करीब 20 दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर निगरानी में रखा.
इस मामले की जानकारी डीआईजी (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह ने दी, उन्होंने बताया कि साइबर ठगी के इस प्रकरण में पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश कर रही थी. जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने पश्चिम बंगाल में कार्रवाई करते हुए ललित विश्वास को गिरफ्तार किया. इस मामले में अब तक कुल तीन आरोपियों को पकड़ा जा चुका है, पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर ठगी के नेटवर्क और अन्य संलिप्त लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है.
आतंकी गतिविधियों में फंडिंग का डर दिखाकर बनाया दबाव
जांच के अनुसार, ठगी करने वाले आरोपियों ने बुजुर्ग दंपती को विश्वास दिलाया कि वे जांच एजेंसियों की कार्रवाई के घेरे में हैं. आरोपियों ने खुद को पुलिस, एटीएस, एनआईए और आरबीआई जैसे संस्थानों का अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया. इसके बाद दंपती पर आतंकी गतिविधियों में फंडिंग से जुड़े होने का आरोप लगाया गया. इस गंभीर आरोप से दंपती घबरा गए और आरोपियों के निर्देशों का पालन करने लगे. आरोपियों ने कथित जांच और कार्रवाई का डर दिखाकर दंपती को लगातार अपने संपर्क में रखा. करीब 20 दिनों तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा, इसी दौरान उनसे करीब 2 करोड़ रुपए की ठगी की गई.
साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच जारी
डिजिटल अरेस्ट के इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ठगी की रकम किन खातों में पहुंची और इस अपराध में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं. पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है.
क्या है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या किसी केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं. वे वीडियो कॉल या फोन के जरिए पीड़ितों पर लगातार नजर रखने और किसी से संपर्क नहीं करने का दबाव बनाते हैं. इसके बाद जांच, सत्यापन या खाते की सुरक्षा के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं. पुलिस लोगों से अपील करती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर डरकर पैसे ट्रांसफर न करें. याद रखें, कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई आधिकारिक प्रक्रिया नहीं है. यदि कोई व्यक्ति जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर धमकाए या पैसों की मांग करे, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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