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नागपुर10 घंटे पहले
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नागपुर स्थित RSS मुख्यालय में विजयादशमी उत्सव मनाया गया। संघ प्रमुख भागवत ने शस्त्र पूजन कर संबोधित किया।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश हो रही है। दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनका मकसद सत्ता परिवर्तन कर हालात सुधारना नहीं, बल्कि अपने पिट्ठू बैठाना है।
भागवत मंगलवार को नागपुर संघ मुख्यालय में आयोजित विजयादशमी उत्सव में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को तोड़ना चाहते हैं और उन्हें ऐसे नेताओं का भी समर्थन मिलता है।
RSS हर साल विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। 1925 में इसी दिन संघ की स्थापना हुई थी। भागवत ने कार्यक्रम में शस्त्र पूजन किया।
भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें
1. आंदोलन का उद्देश्य समाधान हो, समाज में विभाजन नहीं
समस्याओं के कारण आंदोलन होते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान होना चाहिए, न कि समाज में द्वेष और विभाजन पैदा करना। कई बार आंदोलनों को दूसरे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है और वे राजनीति का साधन बन जाते हैं। समाज और देश को सिर्फ नेता नहीं चलाते, बल्कि समाज की सक्रियता से भी समस्याओं का समाधान होता है।
2. एकता के सूत्र में बंधे रहेंगे तो कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता
दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनके प्रभाव में आकर हमें उत्तेजित नहीं होना चाहिए। लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया था, जिसे चार साल बाद वापस लेना पड़ा। लेकिन 1947 में देश का विभाजन नहीं रुक सका, क्योंकि लोगों के मन में आ गया था कि जो अलग दिखते हैं, वे अलग ही हैं।
3. हमारे पूर्वज एक, सबको साथ लेकर चलना जरूरी
हम सभी के पूर्वज एक हैं और हमारी संस्कृति का मूल भी एक है। किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। भारत की परंपरा और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है।
4. विकास हो, लेकिन प्रकृति का नुकसान न हो
भागवत ने नेपाल बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास के लिए तकनीक को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन इससे प्रकृति को नुकसान नहीं होना चाहिए। विकास ऐसा हो, जिसमें इकोनॉमी के साथ इकोलॉजी और एथिक्स का भी ध्यान रखा जाए।
5. OTT के नियम तय हों, AI का सही इस्तेमाल हो
आज लोगों को हर तरह की जानकारी मिल रही है, लेकिन सही-गलत समझे बिना उसका इस्तेमाल करने से नुकसान हो सकता है। OTT प्लेटफॉर्म पर नियम होने चाहिए और सरकार-प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा AI का सही इस्तेमाल करना जरूरी है।
कार्यक्रम में इजराइल के काउंसल जनरल भी पहुंचे
कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे।
मोहन भागवत ने कार्यक्रम में शस्त्र पूजन किया।
भागवत ने RSS संस्थापक केशवराव बलीराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि भी दी।
कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे।
अपडेट्स
05:48 AM20 अक्टूबर 2026
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मोदी बोले- भागवत का संबोधन प्रेरणादायक, राष्ट्रीय एकता पर दिया जोर
पीएम नरेंद्र मोदी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भागवत ने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत करने जैसे कई मुद्दों पर बात की। मोदी ने सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता और ‘पंच परिवर्तन’ के जरिए सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने पर भी जोर दिया।
04:37 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- छोटे-छोटे अहंकार भूलें, देश के लिए जिएं
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि एकता के सूत्र में रहेंगे, उनका कोई कुछ नहीं कर सकता। लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम के आधार पर बंगाल का विभाजन किया, लेकिन 4 साल बाद विभाजन वापस लेना पड़ा।
लेकिन 1947 में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि मन में विचार आ गया था कि हम दिखते अलग हैं, इसलिए सब अलग है। तुष्टिकरण के कारण हमे तोड़ने वाली मानसिकता का बढ़ावा मिला।
जिस सुख और शांति की सोच के साथ विभाजन किया गया था, वो तो हुआ नहीं, लेकिन सीमा पर आज भी अशांति है। अपने छोटे-छोटे अहंकार भूल जाइए। देश के लिए जीना हमारा कर्तव्य है।
सबको जोड़ने वाला, एकसाथ ऊपर उठाने वाला जो तत्व है, उसी को धर्म कहते हैं। हमें धर्म तत्व से विकास करने वाला भारत बनाना है। हमें दुनिया के सामने उदाहरण पेश करना होगा।
04:24 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- आंदोलन से समस्या हल होगी, इसके उदाहरण कम
मोहन भागवत ने कहा कि समस्या के कारण आंदोलन होते हैं, लेकिन आंदोलन समाधान के लिए होने चाहिए। आंदोलन करने वाला कोई समूह हो, अखंड समाज में किसी प्रकार का विभाजन, द्वेष नहीं होना चाहिए। आंदोलन से समस्या का समाधान होगा, इसके उदाहरण बहुत कम हैं।
समाज की सक्रियता से समाधान के कई उदाहरण है। समाज और देश को केवल नेता नहीं चलाते। समाज भी देश को चलाता है। आंदोलन किसी दूसरे लक्ष्य से चले तो राजनीति का साधन बन जाता है, विरोध भड़काने का काम करता है।
04:20 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- पश्चिम से आंधी आई, भारत को तोड़ने की कोशिशें हो रहीं
मोहन भागवत ने कहा- पश्चिम से एक ऐसा तूफान आया है, जो सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल का जिक्र करते हुए कहा कि विकसित देश भी इससे प्रभावित हैं।
भागवत ने कहा कि भारत भी इन ताकतों के निशाने पर है और देश, हिंदुओं तथा संघ को तोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं। सत्ता बदलने से हालात बदलने का दावा किया जाता है, लेकिन ऐसा न पहले हुआ और न अब हो रहा है।
04:15 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- जिससे समाज का भला हो, संघ वही करता है
संघ प्रमुख ने कहा कि संघर्ष के कारण मन में घाव पड़े हैं। गांठें भी पड़े हैं। ये गांठें सुलझ जाए, नई गांठें न पड़े, ऐसा हमारा व्यवहार होना चाहिए। छोटी छोटी बातों पर उकसाने वाले ताक लगाकर बैठे हैं।
कई लोग झगड़ा लगाना चाहते हैं। संघ पर भी उछालते हैं। जिनका संघ से कोई लेना देना है, फिर भी संघ पर सवाल उठाते हैं। संघ सबसे प्रति प्रेम रखता है। संघ स्वयं के लिए कुछ नहीं चाहता, न लोकप्रियता, न प्रतिष्ठा। समाज का जिससे भला हो, हम वो करते हैं।
04:08 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- कैप्टन स्मित मच्छर ने जो किया वह हिंदू स्वभाव
भागवत ने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छर ने हाल ही में जो किया, वह उनके संस्कारों का स्वाभाविक परिणाम था। ऐसी स्थिति में क्या करना है, इसकी उन्हें कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। परीक्षा की घड़ी में उनके भीतर पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कार और परंपराएं सामने आईं।
04:04 AM20 अक्टूबर 2026
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संघ प्रमुख बोले- हमारे पूर्वज एक, स्वभाव परंपरा से आया
भागवत ने कहा- किसी की छोटी-सी पहचान को नष्ट किए बिना सबको साथ लेकर चलने की क्षमता होनी चाहिए। हम सबके पूर्वज और मूल एक हैं। हमारा स्वभाव परंपरा से आया है। आज के समय के अनुसार जीवन को गढ़ते हुए यही आदर्श दुनिया के सामने रखना है।
04:04 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- पूजा करते हैं या नहीं, हिंदू दृष्टि ये नहीं पूछती
भारत की प्रगति हो रही है, लेकिन दुनिया को एक नई रास्ता देने की जरूरत भी है। हिंदू दृष्टि में किसी अमुख पूजा का अनिवार्यता नहीं है। पूजा कौन सी है, पूजा करते हैं कि नहीं करते , हिंदू दृष्टि यह नहीं पूछती। ये सबके लिए है। यह मानवीय धर्म है।
04:00 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- ऐसा विकास नहीं चाहिए कि विकास करने वाला ही न बचे
भागवत ने कहा- नेपाल में जो हुआ, उसके पीछे हिमालयी क्षेत्र में एकतरफा विकास भी एक कारण है। हिमालय जिन-जिन देशों और क्षेत्रों से गुजरता है, वहां विकास के प्रयासों के कारण प्रकृति में अस्थिरता पैदा हुई है। तकनीक को बढ़ावा दिया गया, जिसके कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। विकास होना चाहिए, जो सभी को साथ लेकर चले। ऐसा विकास नहीं चाहिए कि विकास करने वाला ही न बचे।
भागवत ने कहा- ज्ञान और तकनीक का विकास होना चाहिए, लेकिन इसके सही इस्तेमाल की समझ भी विकसित करनी होगी। इकोनॉमी के साथ इकोलॉजी और एथिक्स को लेकर चलना होगा। पर्यावरण और नैतिकता का ध्यान रखना जरूरी है। AI जैसी और भी टेक्नोलॉजी आएंगी, लेकिन उनका सही इस्तेमाल करना आना चाहिए।
03:58 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- तकनीक सिर्फ साधन, कैसा इस्तेमाल हो, ये जरूरी
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने की बात करते हैं, लेकिन इसका भार नई पीढ़ी के कंधों पर आने वाला है। नई पीढ़ी को इस दायित्व के लिए तैयार होना पढ़ेगा। हमें उन्हें तैयार करना पड़ेगा। तकनीक के लाभ हैं, उसे रोका नहीं जा सकता। लेकिन ज्ञान और तकनीक सिर्फ साधन है। मायने यह रखता है कि इनका उपयोग कैसे कर रहे हैं।
03:54 AM20 अक्टूबर 2026
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संघ प्रमुख बोले- बिना सही-गलत समझे किया तो गलत नतीजे
RSS प्रमुख ने बताया कि पहले आचरण पड़ोसियों, किताबों से, समाज से मिलता था, लेकिन धीरे-धीरे यह खत्म हो रहा है। यह बिना विवेक के कैसे होगा।
शराबबंदी के प्रचार के लिए अफसर गांव गए, एक ग्लास शराब में कीड़े डाल दिए और पूछा कि इससे क्या समझ रहे हैं। एक शराबी ने कहा कि पेट के कीड़े भी ऐसे ही मर जाएंगे।
क्या सिखाने गए थे, लोग क्या सीख गए। लोगों को पता है कि नशीली दवाओं के दुष्परिणाम हैं, फिर भी लोग इसका सेवन कर रहे हैं। बिना सही, गलत समझे आचरण करने से गलत परिणाम हो सकता है।
03:48 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- वैश्विक समस्याओं का समाधान भारत के पास
भागवत ने कहा- दुनिया में भारत को लेकर जिज्ञासा बढ़ रही है। देश का कद बढ़ रहा है और वह आगे बढ़ रहा है। भौतिक सुख-सुविधाओं के बावजूद दुनिया कई समस्याओं से जूझ रही है। इनमें पर्यावरण संकट, आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और वर्चस्व की लड़ाई शामिल हैं। दुनिया यह समझने की कोशिश कर रही है कि विविधताओं के बीच तालमेल कैसे बनाया जाए। विश्व को पता है कि भारत के पास इनके जवाब है।
03:42 AM20 अक्टूबर 2026
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संघ प्रमुख बोले- विविधता का सम्मान भारत का स्वभाव, समय के साथ बदलना भी जरूरी
भागवत ने कहा कि मंदिरों, मठों और गुरुद्वारों में एक जैसी आध्यात्मिक सीख मिलती है। भारतीय विचारधारा में विविधता का सम्मान करने, उसे स्वीकारने और सभी को संरक्षण देने की भावना रही है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा पीढ़ियों से भारत के स्वभाव का हिस्सा रही है।
भागवत ने कहा कि विविधता में बदलाव भी होता है। जीवन में जो चीजें समय के साथ बदल सकती हैं, उन्हें बदलना चाहिए, जबकि शाश्वत सत्य पर अडिग रहना जरूरी है।
03:39 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- संघ का उद्देश्य ‘स्व’ को जगाना, एकता से मजबूत होगा भारत
भागवत ने कहा कि संघ पिछले 100 साल से ‘स्व’ यानी अपनी पहचान और मूल चेतना को जगाने का काम कर रहा है। इसी विचार के आधार पर भारत को एकजुट और मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भागवत ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में ‘हम भारत के लोग’ के रूप में ‘स्वबोध’ की भावना दिखाई देती है।
03:35 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत बोले- संत रविदास ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया
भागवत ने विजयादशमी उत्सव के दौरान अपने संबोधन में संत रविदास का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब देश विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों से जूझ रहा था और स्वधर्म का पालन करने वालों में भय का माहौल था, तब संत रविदास ने स्वधर्म निष्ठा, सामाजिक समरसता और भक्ति का संदेश दिया।
03:13 AM20 अक्टूबर 2026
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विजयादशमी उत्सव में RSS स्वयंसेवकों ने परेड की
03:08 AM20 अक्टूबर 2026
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कार्यक्रम में महाराष्ट्र CM फडणवीस भी मौजूद…4 तस्वीरें…
02:57 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत ने शस्त्र पूजन किया
02:56 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत ने गोलवलकर की समाधि पर फूल चढ़ाए
02:51 AM20 अक्टूबर 2026
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भागवत ने रेशिमबाग मैदान में हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी
02:35 AM20 अक्टूबर 2026
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स्वयंसेवकों ने प्रदक्षिणा संचालन किया, खास मौकों पर होता है यह मार्च
RSS मुख्यालय में स्वयंसेवकों ने प्रदक्षिणा संचालन किया। यह आमतौर पर संघ के वर्ग शिविरों या विजयादशमी जैसे खास उत्सवों पर आयोजित किया जाता है।
इसमें प्रशिक्षित स्वयंसेवक एक तय मार्ग पर कदम से कदम मिलाकर चलते हैं, जिसे पथ संचलन भी कहा जाता है और कार्यक्रम स्थल की प्रदक्षिणा करते हैं।
