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Maharashtra GRP News: बिहार का एक शख्स जैसे ही महाराष्ट्र के ठाणे रेलवे स्टेशन प पहुंचा तो जीआरपी की टीम ने उसे घेर लिया. पुलिस ने फिर उसकी क्राइम कुंडली निकलवाई तो पता चला कि उसने 28 साल पहले अपने ही जीजा का मर्डर किया था. पुलिस इस मामले में अब आरोपी से पूछताछ कर रही है और इस केस की और परतें खोलने में लगी है.
28 साल बाद जीआरपी ने हत्यारे को अरेस्ट किया (फोटो: एआई)
ठाणे. हर क्राइम करने वाला आरोपी अपने आप को ज्यादा समार्ट समझता है और उसे लगता है कि वो बचकर निकल जाएगा. पर कभी न कभी वो ऐसी गलती कर बैठता कि उसे सलाखों के पीछे जाना ही पड़ता है. सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने ऐसे ही शख्स को पकड़ा है जो अपराध करने के 28 साल बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर था. आखिर उस अपराधी ने रेलवे स्टेशन पर आकर ऐसी कौन सी गलती कर दी जिसके चलते वह सलाखों के पीछे जा बैठा.
ठाणे रेलवे स्टेशन पर जीआरपी ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो तलाक के विवाद को लेकर अपने जीजा की कथित तौर पर हत्या करने और वारदात को ट्रेन हादसे का रूप देने के बाद 28 साल से फरार चल रहा था. रेलवे पुलिस ने बताया है कि मुख्य आरोपी की पहचान 55 वर्षीय संदीप कृष्णन के रूप में हुई है, जिसे जीआरपी की एक विशेष टीम ने आधुनिक तकनीकी सर्विलांस और डेटा विश्लेषण के जरिए सुराग मिलने के बाद 18 अक्टूबर को बिहार से दबोच लिया.
जब पुलिस को रेल की पटरियों पर मिला था शव
रेलवे पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह घटना 14 जनवरी 1998 की है जब स्टेशन मास्टर ने डोंबिवली रेलवे पुलिस को डोंबिवली और कोपर स्टेशनों के बीच पटरियों पर एक शव मिलने की सूचना दी थी. मौके का मुआयना करने के बाद जांचकर्ताओं को शक हुआ क्योंकि चोटों के निशान और शव की स्थिति से यह रेलवे दुर्घटना के बजाय एक सोची-समझी हत्या लग रही थी. मृतक की पहचान 22 वर्षीय शैलेश मोरे के रूप में हुई थी. जांच में सामने आया कि मोरे और आरोपी एक-दूसरे को जानते थे और पुरानी बातों को लेकर हुए विवाद से पहले उन्होंने साथ मिलकर शराब पी थी.
3 दशकों तक पुलिस की पकड़ से रहा बाहर
जीआरपी के एक अधिकारी ने बताया कि मुख्य मकसद इस बात को लेकर नाराजगी थी कि मृतक ने आरोपियों में से एक की बहन को तलाक दे दिया था. उन्होंने कहा कि हाथापाई के दौरान आरोपियों ने मोरे का गला घोंटकर हत्या कर दी और फिर सबूत मिटाने के लिए उसके शव को रेलवे पटरियों पर रख दिया. इस वारदात के बाद तीनों सह-आरोपी छिप गए. हालांकि पुलिस ने पहले ही फरार आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी लेकिन वे करीब तीन दशकों तक पकड़ से बाहर रहा.
CDR से निकाली आरोपी की लोकेशन
अधिकारियों ने बताया कि यह सफलता तब मिली जब पुराने अनसुलझे मामलों के भगोड़े अपराधियों का पता लगाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम बनाई गई. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मोबाइल टॉवर लोकेशन डेटा का इस्तेमाल करते हुए जांचकर्ताओं ने आखिरकार बिहार में कृष्णन का पता लगा लिया. पुलिस की एक विशेष टीम को बिहार भेजा गया जहां उन्होंने इस भगोड़े को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद कृष्णन को बिहार की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया जहां से ट्रांजिट रिमांड मिल गई.उसे वापस डोंबिवली लाया गया और अदालत में पेश किया गया जिसने उसे दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. अधिकारी ने आगे कहा कि इस मामले में शामिल बाकी आरोपियों का पता लगाने के प्रयास अभी भी जारी हैं.
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अरुण बिंजोला वर्तमान में News18 हिंदी में एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह करीब 19 वर्षों से काम कर रहे हैं, जिसमें 13 वर्षों से अधिक समय डिजिटल मीडिया में बी…
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