अगर आप कम छुट्टियों में किसी ऐसी जगह घूमना चाहते हैं, जहां समुद्र किनारे सुकून भी मिले, प्राचीन मंदिरों की खूबसूरती भी देखने को मिले और स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का मौका भी मिले, तो ओडिशा अच्छा विकल्प हो सकता है. यहां की चार दिन की ट्रिप में पुरी, कोणार्क और भुवनेश्वर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को कवर किया जा सकता है. भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की वेबसाइट Incredible India पर भी ओडिशा का चार दिन का ट्रैवल प्लान साझा किया गया है. इसमें जगन्नाथ मंदिर के दर्शन, चिलिका झील में बोट राइड, कोणार्क सूर्य मंदिर और रघुराजपुर के आर्ट विलेज की सैर शामिल है. खास बात यह है कि इस ट्रिप में आप मशहूर डालमा रेस्टोरेंट में ओडिया खाने का स्वाद भी ले सकते हैं.
पहला दिन: पिपिली घूमते हुए पहुंचें पुरी
अपनी यात्रा की शुरुआत भुवनेश्वर के बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करें. यहां से कैब लेकर पुरी के लिए निकल सकते हैं. रास्ते में पिपिली गांव जरूर रुकें, जो अपनी खूबसूरत अप्लिक वर्क यानी कपड़ों पर रंगीन कपड़ों की कतरनों से की जाने वाली सजावट के लिए मशहूर है. यहां छतरियां, बैग, दीवारों पर लगाने वाली सजावटी चीजें और दूसरे हस्तशिल्प मिलते हैं.
पुरी पहुंचकर होटल में आराम करें और शाम को जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के लिए जाएं. इसके बाद पुरी बीच और ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन प्राप्त गोल्डन बीच पर समय बिता सकते हैं. दिन का अंत भुवनेश्वर के मशहूर Dalma Restaurant में ओडिया डिनर के साथ करें. यहां दालमा, माछा बेसरा और दूसरे पारंपरिक ओडिया व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं.
दूसरा दिन: चिलिका झील में देखें डॉल्फिन
दूसरे दिन पुरी से करीब 44 किलोमीटर दूर सतपड़ा स्थित चिलिका झील घूमने जाएं. यह एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील है. यहां बोट राइड के दौरान प्रवासी पक्षियों और इरावदी डॉल्फिन को देखने का मौका मिल सकता है. Incredible India पर साझा ट्रैवल अनुभव के मुताबिक, करीब साढ़े तीन घंटे की बोट राइड के लिए उस समय 5,500 रुपये खर्च हुए थे. हालांकि, मौजूदा किराया और बोट की उपलब्धता पहले जांच लें. शाम को पुरी लौटकर गोल्डन बीच पर सूर्यास्त का आनंद लें.
तीसरा दिन: रघुराजपुर और कोणार्क सूर्य मंदिर की सैर
तीसरे दिन सुबह पुरी बीच पर टहलने के बाद रघुराजपुर आर्ट विलेज के लिए निकलें. यह गांव अपनी पारंपरिक पट्टचित्र पेंटिंग के लिए मशहूर है. यहां लगभग हर घर में कलाकार पारंपरिक चित्रकारी और हस्तशिल्प तैयार करते नजर आते हैं. आप यहां से पेंटिंग और दूसरी कलाकृतियां खरीदकर यादगार के तौर पर ले जा सकते हैं.
इसके बाद कोणार्क सूर्य मंदिर पहुंचें. 13वीं शताब्दी में बना यह मंदिर अपनी शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है. इसे विशाल रथ के आकार में बनाया गया है, जिसमें पत्थर के पहियों और घोड़ों की अद्भुत नक्काशी देखने को मिलती है. मंदिर को ठीक से देखने के लिए कम से कम 2-3 घंटे का समय रखें. शाम तक भुवनेश्वर पहुंचकर होटल में ठहरें.
चौथा दिन: भुवनेश्वर के मंदिर और प्राचीन गुफाएं देखें
ट्रिप के आखिरी दिन भुवनेश्वर की सैर करें. यहां सबसे पहले लिंगराज मंदिर के दर्शन कर सकते हैं. यह भगवान शिव को समर्पित प्राचीन मंदिर है और कलिंग वास्तुकला का शानदार उदाहरण है. इसके बाद उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं देखने जाएं. ये प्राचीन जैन गुफाएं अपने ऐतिहासिक महत्व और चट्टानों को काटकर बनाई गई संरचनाओं के लिए जानी जाती हैं.
अगर आपके पास समय बचता है, तो सुदर्शन आर्ट्स एंड क्राफ्ट विलेज भी जा सकते हैं. यहां ओडिशा की पारंपरिक कला और मूर्तिकला को करीब से देखने का मौका मिलेगा. शाम को अपनी फ्लाइट या ट्रेन के समय के अनुसार एयरपोर्ट अथवा रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाएं.
4 दिन की ओडिशा ट्रिप में कितना आएगा खर्च?
अगर आप इस ट्रिप को बजट में पूरा करना चाहते हैं, तो होटल, स्थानीय ट्रांसपोर्ट, खाने और घूमने की जगहों के हिसाब से खर्च तय कर सकते हैं. ओडिशा टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (OTDC) की वेबसाइट पर गोल्डन ट्रायंगल टूर का 3 रात और 4 दिन का पैकेज भी दिया गया है. इसमें डबल ऑक्यूपेंसी के लिए 18,700 रुपये प्रति व्यक्ति और ट्रिपल ऑक्यूपेंसी के लिए 15,310 रुपये प्रति व्यक्ति का पैकेज रेट सूचीबद्ध है. यह पैकेज रेट है, जिसमें हवाई या ट्रेन का किराया शामिल नहीं है. बुकिंग से पहले मौजूदा कीमत और सुविधाओं की पुष्टि जरूर करें.