असम की ब्रह्मपुत्र नदी के बीच बसा माजुली भारत की उन खास जगहों में शामिल है, जहां प्रकृति और संस्कृति एक साथ देखने को मिलती हैं. चारों तरफ पानी, हरियाली, छोटे-छोटे गांव और पारंपरिक जीवनशैली इस द्वीप को बाकी पर्यटन स्थलों से अलग बनाती है. अगर आप भीड़भाड़ से दूर किसी ऐसी जगह घूमना चाहते हैं, जहां स्थानीय संस्कृति को करीब से समझने का मौका मिले, तो माजुली की यात्रा यादगार हो सकती है.
माजुली में क्या-क्या देख सकते हैं?
माजुली की पहचान यहां मौजूद वैष्णव मठों यानी सत्रों से है. इनकी शुरुआत 15वीं-16वीं शताब्दी में संत और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव की परंपरा से जुड़ी है. ये सत्र केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि असम की कला, संगीत, नृत्य और नाटक को सहेजने वाले सांस्कृतिक केंद्र भी हैं. यहां आने पर आप असम के पारंपरिक सत्रिया नृत्य और भाओना नाटक के बारे में जान सकते हैं.
द्वीप के प्रमुख सत्रों में औनियाती, दक्षिणपाट, कमलाबाड़ी और गरमूर शामिल हैं. वहीं, समागुरी सत्र पारंपरिक मुखौटे बनाने की कला के लिए खास तौर पर मशहूर है. यहां कलाकार मिट्टी, कपड़े और बांस जैसी चीजों की मदद से देवी-देवताओं और पौराणिक पात्रों के चेहरे वाले मुखौटे तैयार करते हैं. इनका इस्तेमाल धार्मिक नाटकों में किया जाता है.
माजुली की खूबसूरती सिर्फ इसके मठों तक सीमित नहीं है. यहां मिशिंग और देओरी जैसे समुदायों के गांव भी हैं. मिशिंग समुदाय के पारंपरिक घर, जिन्हें चांग घर कहा जाता है, जमीन से ऊंचाई पर बनाए जाते हैं. स्थानीय लोगों की बुनाई, हस्तशिल्प और खानपान को करीब से देखना भी इस यात्रा का खास अनुभव हो सकता है. इसके अलावा, सलमोरा गांव में मिट्टी के बर्तन बनाने की पारंपरिक कला देखने को मिलती है.
फेरी से पहुंचने का सफर भी है खास
माजुली पहुंचने के लिए सबसे लोकप्रिय रास्ता जोरहाट से होकर जाता है. जोरहाट शहर से करीब 14 किलोमीटर दूर निमाती घाट पहुंचना होता है. यहां से ब्रह्मपुत्र नदी पार करने के लिए फेरी मिलती है, जो यात्रियों को माजुली के कमलाबाड़ी या अफलामुख घाट तक ले जाती है. नदी के विशाल विस्तार के बीच फेरी से सफर करना अपने आप में यादगार अनुभव है. इस दौरान आप पानी, आसपास के छोटे टापुओं और पक्षियों को देख सकते हैं.
फेरी का समय और उपलब्धता मौसम तथा नदी की स्थिति के अनुसार बदल सकती है. इसलिए यात्रा से पहले समय-सारणी जरूर जांच लें. यात्री और वाहन ले जाने वाली फेरी के लिए पहले से बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है.
घूमने का सही समय और ठहरने की व्यवस्था
माजुली घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय अच्छा माना जाता है. नवंबर में यहां रास महोत्सव का आयोजन होता है, जिसमें भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी कथाओं को नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए दिखाया जाता है. इस दौरान द्वीप की सांस्कृतिक रौनक देखने लायक होती है.
यहां ठहरने के लिए होमस्टे, गेस्ट हाउस और बांस से बने कॉटेज मिल जाते हैं. अगर आप असम की संस्कृति, ग्रामीण जीवन और प्रकृति को एक साथ महसूस करना चाहते हैं, तो माजुली की यात्रा आपके लिए एक अलग अनुभव हो सकती है.