Homeव्यवसायAgriculture: पश्चिम एशिया संघर्ष से भारत के 11.8 अरब डॉलर के कृषि...

Agriculture: पश्चिम एशिया संघर्ष से भारत के 11.8 अरब डॉलर के कृषि निर्यात पर कैसे खतरा? GTRI ने किया बड़ा दावा


पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात पर भी पड़ने लगा है। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग रूट प्रभावित हो रहे हैं, बीमा लागत बढ़ रही है और लॉजिस्टिक्स को लेकर अनिश्चितता पैदा हो रही है। इससे भारत के लगभग 11.8 अरब डॉलर के निर्यात पर खतरा मंडरा रहा है।

पश्चिम एशिया में कितना होता है कारोबार?

जीटीआरआई के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को करीब 11.8 अरब डॉलर के कृषि और खाद्य उत्पाद निर्यात किए थे। इसमें अनाज, फल-सब्जियां, डेयरी उत्पाद और मसाले जैसे सामान शामिल हैं। यह भारत के कुल कृषि निर्यात का लगभग 21.8 प्रतिशत हिस्सा है।

रिपोर्ट के अनुसार, भौगोलिक नजदीकी और बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी के कारण खाड़ी क्षेत्र लंबे समय से भारत के खाद्य उत्पादों का प्रमुख बाजार रहा है।लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों में बाधा, बीमा प्रीमियम में वृद्धि और सप्लाई चेन में अनिश्चितता पैदा हो रही है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को अनाज, फल-सब्जियां और मसालों की करीब 7.48 अरब डॉलर की आपूर्ति की, जो इस श्रेणी के भारत के कुल वैश्विक निर्यात का 29.2 प्रतिशत है। इसमें चावल, केले, प्याज, दालें, मेवे, कॉफी, चाय और कई तरह के मसाले प्रमुख हैं।

चावल निर्यात पर कैसे पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?


  • जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि सबसे ज्यादा असर चावल के निर्यात पर पड़ सकता है।

  • भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 4.43 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया था, जो देश के कुल चावल निर्यात का 36.7 प्रतिशत है।

  • इससे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसानों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

  • इसके अलावा भारत ने पिछले वर्ष पश्चिम एशिया को 396.5 मिलियन डॉलर के केले और 111 मिलियन डॉलर के प्याज-लहसुन का निर्यात किय।

  • वहीं जायफल, जावित्री और इलायची जैसे मसालों का निर्यात 295.5 मिलियन डॉलर, जीरा-धनिया जैसे स्पाइस सीड्स का 163 मिलियन डॉलर और अदरक-हल्दी का 173 मिलियन डॉलर रहा।

  • रिपोर्ट के अनुसार, कॉफी का निर्यात 240.7 मिलियन डॉलर और चाय का 410.1 मिलियन डॉलर रहा।

  • इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड, चीनी और कोको उत्पादों का निर्यात 1.35 अरब डॉलर तथा मछली, मांस और प्रोसेस्ड उत्पादों का निर्यात 1.81 अरब डॉलर रहा।

डेयरी उत्पाद पर भी मंडरा रहा खतरा

GTRI ने यह भी बताया कि भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 281.1 मिलियन डॉलर के डेयरी उत्पाद निर्यात किए, जो भारत के कुल डेयरी निर्यात का 28.9 प्रतिशत है। वहीं शराब और गैर-शराब पेय पदार्थों का निर्यात 197.5 मिलियन डॉलर रहा, जो इस श्रेणी के कुल निर्यात का 43.3 प्रतिशत है।



थिंक टैंक के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत के कृषि निर्यात की पश्चिम एशियाई बाजारों पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। ऐसे में अगर क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर भारत के किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यातकों पर पड़ सकता है।






Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments