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Parliament Budget Session: मिडिल ईस्ट तनाव पर संसद में चर्चा, एस. जयशंकर ने बताया क्या है भारत का रुख?


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Parliament Budget Session 2026: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत आज हंगामेदार रही। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव की गूंज आज भारतीय संसद के ऊपरी सदन, राज्यसभा में सुनाई दी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के मौजूदा संकट और अमेरिका-ईरान युद्ध की स्थिति पर भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

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विपक्ष के भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच जयशंकर ने भारत की विदेश नीति और भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार का पक्ष रखा।

S Jaishankar Rajya Sabha Speech: संवाद और कूटनीति ही रास्ता: जयशंकर का स्पष्ट संदेश

राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जिस तरह से तनाव बढ़ा है, वह पूरी दुनिया और विशेष रूप से भारत के लिए “गहरी चिंता का विषय” है। उन्होंने कहा, भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि किसी भी संघर्ष का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और चर्चा (Dialogue and Discussion) के जरिए निकाला जाना चाहिए। हम सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हैं।”

प्रधानमंत्री खुद कर रहे हैं ‘क्लोज मॉनिटरिंग’

जयशंकर ने सदन को आश्वस्त किया कि भारत सरकार इस मुद्दे पर हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों की निगरानी कर रहे हैं। भारत की प्राथमिकता न केवल क्षेत्रीय स्थिरता है, बल्कि खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी है।

20 फरवरी के बयान का दोहराव

विदेश मंत्री ने सदन को याद दिलाया कि भारत सरकार ने 20 फरवरी को ही एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि भारत आज भी उस रुख पर कायम है और तनाव को कम करने (De-escalation) के लिए कूटनीतिक रास्तों को अपनाने की वकालत करता है।

भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा संकट पर नजर

सत्र के दौरान सरकार ने उन चिंताओं को भी संबोधित किया जो खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों (कच्चे तेल की आपूर्ति) से जुड़ी हैं। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर है, इसलिए युद्ध का लंबा खिंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

विपक्ष का विरोध और अन्य मुद्दे

जब विदेश मंत्री अपना बयान दे रहे थे, तब विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। गौरतलब है कि बजट सत्र का यह हिस्सा काफी तूफानी रहने वाला है क्योंकि विपक्ष ने न केवल पश्चिम एशिया संकट, बल्कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते’ (Indo-US Trade Deal) को लेकर भी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी ‘अमेरिकी दबाव’ के कारण ईरान जैसे पुराने मित्र देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज किया है।

कूटनीतिक संतुलन की चुनौती

विदेश मंत्री के बयान से साफ है कि भारत इस वैश्विक संघर्ष में किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय ‘शांतिदूत’ की भूमिका निभाना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी की सक्रियता यह दर्शाती है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए पूरी सावधानी के साथ कदम बढ़ा रहा है।



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