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North Korea Election: उत्तर कोरिया में 99% हुई वोटिंग, किम जोंग ने भी दिया वोट, क्या है चुनाव का पूरा प्रोसेस?


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oi-Sumit Jha

North Korea Election 2026: उत्तर कोरिया में चुनावों का जिक्र होते ही पूरी दुनिया हैरान रह जाती है। हाल ही में वहां सर्वोच्च सदन (सुप्रीम पीपुल्स असेंबली) के लिए मतदान हुआ, जिसमें खुद किम जोंग उन ने एक कोयला खदान में जाकर अपना वोट डाला। लोकतंत्र वाले देशों के उलट, यहां चुनाव का मकसद सरकार बदलना नहीं, बल्कि किम जोंग उन की सत्ता पर मुहर लगाना होता है।

यहां वोट डालना सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है जिसे निभाना हर नागरिक के लिए अनिवार्य है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि किम जोंग के इस देश में चुनाव की प्रक्रिया आखिर काम कैसे करती है।

North Korea Election 2026

Kim Jong Un voting: हर सीट पर केवल एक ही उम्मीदवार

उत्तर कोरिया में चुनाव का मतलब उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं होता। यहां हर सीट पर केवल एक ही उम्मीदवार खड़ा होता है, जिसे किम जोंग उन की पार्टी चुनती है। जनता के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। वोट डालने का असली मकसद यह दिखाना होता है कि पूरी जनता अपने नेता के साथ खड़ी है। इसी वजह से वहां मतदान का प्रतिशत हमेशा 99% के ऊपर रहता है।

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North Korea voting process Hindi: वोट देना है मजबूरी

यहां 17 साल से ज्यादा उम्र के हर नागरिक के लिए वोट डालना जरूरी है। अगर कोई वोट नहीं डालता, तो इसे देशद्रोह माना जाता है। सरकार मतदान के जरिए यह भी चेक कर लेती है कि देश का कौन सा नागरिक कहां है। यहां तक कि दूसरे देशों (जैसे रूस या चीन) में काम कर रहे उत्तर कोरियाई नागरिकों को भी वोट डालना पड़ता है।

North Korea 99 percent voting: सीक्रेट बैलेट का दिखावा

कहने को तो मतदान बैलेट पेपर से होता है, लेकिन यहां ‘सीक्रेट’ जैसा कुछ नहीं है। पोलिंग बूथ पर एक ही डिब्बा होता है जिसमें उम्मीदवार के समर्थन वाला पर्चा डालना होता है। अगर कोई उम्मीदवार के खिलाफ वोट डालना चाहे, तो उसे एक अलग पेन का इस्तेमाल करके नाम काटना पड़ता है। ऐसा करना अपनी जान जोखिम में डालने जैसा है, क्योंकि वहां मौजूद अधिकारी सब देख रहे होते हैं।

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North korea election kim jong un hindi: सुप्रीम पीपुल्स असेंबली का रोल

उत्तर कोरिया की इस संसद में कुल 687 सीटें हैं। तकनीकी रूप से यह सदन कानून बनाता है, लेकिन असल में यहां वही होता है जो किम जोंग उन चाहते हैं। यह चुनाव हर 5 साल में होते हैं। संसद की बैठक साल में सिर्फ एक या दो बार होती है, जिसमें केवल सरकार के फैसलों पर बिना किसी विरोध के मुहर लगाई जाती है।

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क्यों कराए जाते हैं ऐसे चुनाव?

जब नतीजा पहले से तय है, तो चुनाव क्यों? जानकारों का मानना है कि किम जोंग उन इसके जरिए जनता की एकजुटता दुनिया को दिखाना चाहते हैं। साथ ही, स्थानीय स्तर पर चुनाव कराकर छोटे-मोटे मुद्दों की जिम्मेदारी स्थानीय नेताओं पर डाल दी जाती है, ताकि किम जोंग की छवि पर कोई आंच न आए।



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