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‘मां बनने के पैसे नहीं, कोख खाली रहेगी’, 56 साल की फेमस एक्ट्रेस का छलका दर्द, फिर बताया ऐसा सच


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oi-Purnima Acharya

Ashwini Kalsekar: टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में अपने दमदार अभिनय के लिए पहचानी जाने वाली अश्विनी कालसेकर ने हाल ही में अपनी जिंदगी के उस पहलू पर खुलकर बात की, जिसके बारे में वह अब तक कम ही बोली थीं।

निजी जिंदगी के दर्द पर खुलकर बोलीं अश्विनी कालसेकर
पर्दे पर सशक्त किरदार निभाने वाली इस एक्ट्रेस ने अपनी निजी जिंदगी के दर्द को शेयर करते हुए बताया कि मां बनने का सपना अधूरा रह जाना उनके लिए कितना भावनात्मक सफर रहा है, एक ऐसा सच, जो उनके दिल में आज भी कहीं गहराई से बसता है। उन्होंने बताया है कि वह जिंदगीभर मां नहीं बन पाईं और ये दर्द आज भी उनके दिल में कहीं न कहीं मौजूद है।

Ashwini Kalsekar

मां बनने की ख्वाहिश रह गई अधूरी

अश्विनी कालसेकर ने बताया कि वह और उनके पति मुराली शर्मा (Murali Sharma) बच्चे चाहते थे लेकिन ये सपना कभी पूरा नहीं हो सका। हॉटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने कहा कि उन्होंने कोशिश जरूर की लेकिन उनकी स्वास्थ्य समस्या इस राह में सबसे बड़ी बाधा बन गई।

किडनी की बीमारी बनी सबसे बड़ी वजह

अश्विनी कालसेकर ने खुलासा किया कि उन्हें किडनी से जुड़ी समस्या थी जिसकी वजह से प्रेग्नेंसी उनके लिए बेहद जोखिम भरी हो सकती थी। डॉक्टरों ने साफ कहा था कि अगर वह मां बनने की कोशिश करती हैं तो इससे उनकी खुद की जान या बच्चे की सेहत को खतरा हो सकता है। यही वजह रही कि उन्हें ये कठिन फैसला लेना पड़ा।

‘सरोगेसी की भी नहीं ले पाई मदद’

अश्विनी कालसेकर ने ये भी बताया कि उस समय सरोगेसी इतना आम विकल्प नहीं था और अगर था भी तो आर्थिक स्थिति इसकी अनुमति नहीं देती थी। अश्विनी के मुताबिक उस दौर में वह और उनके पति अपने करियर को संभालने और जीवन को स्थिर करने में लगे थे इसलिए ये विकल्प अपनाना संभव नहीं हो पाया।

‘मां न बन पाना बहुत दुखद होता है’

-एक्ट्रेस अश्विनी कालसेकर का मानना है कि मां न बन पाना उनके लिए दुखद जरूर है लेकिन अब वह इसे किस्मत का हिस्सा मान चुकी हैं। उन्होंने कहा कि वह पारंपरिक सोच रखती हैं और जीवन के उस पूरे चक्र को जीना चाहती थीं लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

-अश्विनी कालसेकर ने बताया कि अब वह अपने माता-पिता और सास-ससुर की देखभाल को ही अपना कर्तव्य और खुशी मानती हैं। उनके लिए यही लोग उनके बच्चों जैसे हैं, जिनकी सेवा करके उन्हें संतुष्टि मिलती है।

पालतू जानवरों में ढूंढा मां बनने का एहसास

-मां बनने का एहसास पाने के लिए अश्विनी कालसेकर ने अपने पालतू कुत्तों को ही बच्चों की तरह अपनाया। वह उनकी देखभाल वैसे ही करती हैं जैसे कोई मां अपने बच्चों की करती है। यहां तक कि उनके लिए उन्होंने एक नैनी भी रखी हुई है।

-अश्विनी कालसेकर की ये कहानी उन कई महिलाओं की भावनाओं को दर्शाती है, जो किसी वजह से मां नहीं बन पातीं। दर्द और अधूरेपन के बावजूद उन्होंने अपनी जिंदगी को सकारात्मक नजरिए से अपनाया और मजबूत होकर आगे बढ़ीं।



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