International
oi-Sumit Jha
Khamenei Death: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। थरूर ने केंद्र सरकार की ‘देरी’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को समय रहते शोक संवेदनाएं भेजनी चाहिए थीं।
उन्होंने इसे कूटनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा बताया और 2024 में पूर्व राष्ट्रपति रईसी के निधन पर दिखाए गए भारत के रुख की याद दिलाई। थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है, जिससे सरकार के लिए कूटनीतिक संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

Shashi Tharoor on Khamenei Death: शोक संदेश में देरी पर सवाल
शशि थरूर ने स्पष्ट रूप से कहा कि खामेनेई के निधन के तुरंत बाद भारत को आधिकारिक संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी। उनके अनुसार, ईरान में खामेनेई का कद और भारत-ईरान के पुराने संबंधों को देखते हुए यह एक सही कदम होता। थरूर ने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मानवीय संवेदनाएं और कूटनीतिक औपचारिकताएं किसी भी गठबंधन या दबाव से ऊपर होनी चाहिए। देरी करने से गलत संदेश जाता है, जिसे समय रहते सुधारा जाना चाहिए था।
Ayatollah Khamenei Death News: पुरानी घटना का दिया हवाला
अपने तर्क को मजबूती देने के लिए थरूर ने साल 2024 की घटना का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब तत्कालीन ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई थी, तब भारत सरकार ने तुरंत राजकीय शोक की घोषणा की थी। थरूर का मानना है कि खामेनेई के मामले में भी वैसी ही सक्रियता दिखानी चाहिए थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि बाद में विदेश सचिव को शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर के लिए भेजा गया।
ये भी पढे़ं: Khamenei Death: खामेनेई से सिक्योरिटी चीफ तक, 18 दिन में ईरान के 6 सबसे बड़े लीडर ढेर, अब किसकी बारी?
Iran America War Update: निंदा और शोक के बीच अंतर
कांग्रेस नेता ने कूटनीति के एक बारीक पहलू को समझाया। उन्होंने कहा कि भारत भले ही अमेरिका या इस्राइल के हमलों की निंदा न करे (राजनीतिक मजबूरियों के कारण), लेकिन शोक जताना एक अलग मानवीय प्रक्रिया है। शोक व्यक्त करना किसी हमले का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि दुख की घड़ी में सहानुभूति दिखाना है। थरूर के मुताबिक, एक परिपक्व राष्ट्र के रूप में भारत को अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए था।
ये भी पढ़ें: Khamenei Death: बेटा, बहू, साला! खामेनेई पर हुए अटैक में किन-किन लोगों की मौत, लीक ऑडियो ने खोला खौफनाक सच
संयम और राष्ट्रीय हित की सलाह
लेख और पार्टी स्टैंड पर बात करते हुए थरूर ने कहा कि तनावपूर्ण समय में ‘संयम’ बरतना कमजोरी नहीं बल्कि ताकत की निशानी है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच देश के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए। थरूर ने जोर दिया कि विपक्ष एक नैतिक स्टैंड ले सकता है, लेकिन सरकार को बहुत सावधानी और संतुलन के साथ कदम उठाने चाहिए ताकि भारत के रणनीतिक हित सुरक्षित रहें और किसी भी पक्ष से रिश्ते न बिगड़ें।
-

LPG Cylinder: कमर्शियल गैस सिलेंडर पर सरकार का चौंकाने वाला फैसला, आज से बदल गए नियम!
-

Hormuz Strait Crisis: ईरान का ‘टोल टैक्स’ मॉडल, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा? समझें पूरा खेल
-

ईरान की $200 प्रति बैरल तेल की चेतावनी, हमले जारी रहे तो क्या होगा? MP में Petrol-Diesel कितने का मिलेगा
-

Irani Nepo Kids: अमेरिका में मौज कर रहे ईरानी नेताओं-कमांडरों के बच्चे, जनता को गजब मूर्ख बनाया, देखें लिस्ट
-

Benjamin Netanyahu: जिंदा हैं नेतन्याहू, PC में गरजे, कहा- ‘ईरान की मिसाइल ताकत खत्म’
-

US Iran War: ईरानी Drones मचा रहे खाड़ी देशों में तबाही, जंग में फंसे जेलेंस्की से Trump ने लगाई मदद की गुहार
-

ईरान की मिसाइल का कतर के LNG सप्लाई हब पर हमला, चौंकाने वाला वीडियो आया सामने, क्या भारत पर आएगा नया संकट
-

Iran Vs America: ईरान के बाद अब चीन पर कहर बनकर टूटेंगे ट्रंप! अमेरिकी रिपोर्ट के खुलासे से हड़कंप
-

Ali Larijani: कौन थे अली लारीजानी जिन्हें ईरान ने बताया शहीद? ट्रंप ने कहा था- ‘ठोंक देंगे’
-

Oil LPG Crisis: तेल बेचकर दुनिया का सबसे अमीर देश बनेगा ओमान! कैसे युद्ध के बीच निकली लॉटरी
-

आरईसी लिमिटेड और नेशनल टेस्ट हाउस के बीच समझौता, आरडीएसएस में गुणवत्ता व्यवस्था होगी मजबूत
-

Iran America War: शशि थरूर की अध्यक्षता में संसदीय समिति की बैठक, किन-किन मुद्दों पर चर्चा



