सेबी निर्देश के बाद जिसमें नामांकित व्यक्तियों और कानूनी वारिसों के लिए दावों को आसान बनाने के लिए कहा गया है। उसी को देखते हुए एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) ने निवेशकों की मृत्यु हो जाने के बाद म्यूचुअल फंड इकाइयों के हंस्तारण की प्रक्रिया को सरल बना दिया गया है। एमएमएफआई ने बताया है कि म्यूचुअल फंड इकाइयों निवेशकों की मृत्यु के बाद इकाइयों और प्रोसीड्स क्लेम करने के लिए प्रक्रियों में बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य म्यूचुअल फंड हस्तांतरण इकाइयों के प्रक्रिया को असान बनाना है। यह बदलाव विशेष रूप से ऑपरेशनल परेशानियों को समाप्त करने और यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि मृत्यु होने के बाद निवेशक के वारिसो को आसानी से इकाइयां का क्लेम मिल सके।
एएमएफआई के एलान के बाद क्या बदलेगा?
संशोधित नियम के अनुसार अगर रिकॉर्ड में दर्ज पता मेल नहीं खाता है, तो परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां (एएमसी) मृतक यूनिट धारक के नए उपलब्ध पते पर संबंधित दस्तावेजों के साथ भरोसा कर सकती हैं। एएमएफआई ने मृतक निवेशक के नाम या हस्ताक्षर में मामूली और बड़े अंतर से निपटने के लिए एक सामांजस्यपूर्ण ढांचा पेश किया है। जिससे यह प्रक्रिया सेबी के फरवरी 2026 के परिपत्र के तहत रिजट्रार और हस्तांतारण एजेंट्स पर लागू प्रावधानों के अनुरूप होगी।
यह बदलाव मामूली दस्तावेजों की विसंगतियों के कारण म्यूचुअल फंड निवेश का दावा करते समय परिवार को होने वाले परिचालन संबंधी परेशानियों और चिंता के बाद किए गए हैं। एएमएफआई ने कहा कि वह इन प्रक्रियाओं के एक समान कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एएमसी के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा।
पते में बदलाव से जुड़े मामलों के लिए किया गया यह बदलाव?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा दिए गए निर्देश अनुसार परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां (एएमसी) मृतक यूनिट धारक के नवीनतम उपलब्ध पते पर भरोसा कर सकती हैं, बशर्ते कि यह प्रासंगिक दस्तावेजों द्वारा समर्थित हो, उन मामलों में जहां म्यूचुअल फंड रिकॉर्ड में दर्ज पता दावेदार द्वारा प्रस्तुत पते से भिन्न है। सेबी ने नाम और हस्ताक्षर में विसंगतियों को दूर करने के लिए एक सामंजस्यपूर्ण ढांचा भी पेश किया है।
इसमें एएमसी अब इश्यू के रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट (आरटीए) के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं के समान प्रक्रियाएं अपना सकती हैं। इन दिशा-निर्देशों के तहत, नाम में विसंगति होने पर दावेदार आधार कार्ड या पासपोर्ट जैसे स्व-प्रमाणित पहचान दस्तावेज जमा कर सकते हैं। हस्ताक्षर में विसंगति होने पर, एएमसी (मानक प्रबंधन प्राधिकरण) आरटीए (संदर्भ-संपत्ति) ढांचे के अनुरूप, विसंगति की प्रकृति के आधार पर उचित प्रक्रिया अपना सकती हैं।
कानूनी वारियों के बारे में नए बदलावों में क्या?
एएमएफआई के अनुसार, यूनिटों का हस्तांतरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत मृतक यूनिटधारक की ओर से धारित यूनिटों को या तो नामांकित व्यक्ति को या मृतक यूनिटधारक के कानूनी वारिसों को हस्तांतरित किया जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया अच्छी तरह से स्थापित है, फिर भी पते में अंतर, नामों की वर्तनी में भिन्नता, या अभिलेखों और पहचान दस्तावेजों के बीच हस्ताक्षरों के बेमेल होने के कारण दावेदारों को अक्सर देरी का सामना करना पड़ता है। वैध सहायक दस्तावेजों के माध्यम से इस तरह की विसंगतियों के सत्यापन में अधिक लचीलापन प्रदान करके और सत्यापन प्रक्रियाओं में सामंजस्य स्थापित करके, सेबी का लक्ष्य परिवारों या नामांकित व्यक्तियों के लिए दावा प्रक्रिया को तेज और कम तनावपूर्ण बनाना है।



