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Azamgarh Murder: आजमगढ़ में भूत भगाने के लिए पूजा, 4 कत्ल, क्या है तंत्र-मंत्र, जिसके चक्कर में फंसता है परिवार


Azamgarh Murder Case: उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले के शंभूपुर गांव में मंगलवार को घटी खौफनाक घटना से पूरा देश हिल गया. कथिततौर पर भूत भगाने के चक्कर में अरविंद के घर में चार दिनों से पूजा चल रही थी, जिससे अरविंद नाराज था. उसने मंगलवार शाम पूजा बंद करने को कही, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी. तब गुस्से में उसने दो पंडितों महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्र को गोली मार दी. पत्नी को अपने भाई की मौत की वजह बताते हुए उसे भी गोली मार दी. इस घटना में उसने बेटे को भी गोली मारी, पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वो भी मारा गया. अरविंद की मां ने बताया कि घर में महामृत्युंजय का जाप चल रहा था, जबकि पड़ोसियों का कहना है कि 8 साल पहले अरविंद के भाई की हत्या हुई थी, जिसके बाद से उन लोगों के घर में कुछ ठीक नहीं चल रहा था. उन लोगों को लग रहा था कि भाई का भूत उन लोगों को परेशान कर रहा है. कुछ लोगों ने नारायण बलि का भी जिक्र किया.

फिलहाल आजमगढ़ का मामला तंत्र-मंत्र की ओर इशारा कर रहा है, लेकिन असली वजह पुलिस जांच में पता चलेगी. किसे पता था कि आत्मा की शांति के लिए पूजा या तंत्र-मंत्र कराया जा रहा है, उस दौरान ऐसी स्थिति पैदा होगी, जिसमें 5 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ जाएगा. दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों ने अंधविश्वास में आकर खुदकुशी कर ली, वहीं काशी में एक ही परिवार के 4 लोगों ने कथिततौर पर मोक्ष के लिए आत्महत्या कर ली है. अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के चक्कर में लोग जान गंवा देते हैं. तंत्र-मंत्र का क्या है रहस्य? तंत्र-मंत्र में क्यों फंसते हैं लोग?

बुराड़ी की खौफनाक घटना: अंधविश्वास में 11 लोगों ने की खुदकुशी

2018 में दिल्ली के बुराड़ी में सामूहिक आत्महत्या की एक ऐसी घटना हुई थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. संत नगर के भाटिया परिवार के 11 सदस्यों के शव उनके घर में फंदे से लटके मिले थे. उस परिवार के 10 सदस्यों का शव घर के एक बड़े हॉल में लोहे की ग्रिल से लटके हुए मिले थे, उनके हाथ और आंखें बंधी हुई थीं. जबकि 77 साल की नारायण देवी का शव दूसरे कमरे में जमीन पर पड़ा था.

पुलिस जांच के समय कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं. पुलिस को घर से एक डायरी मिली थी, जिसमें मोक्ष प्राप्त करने और अंधविश्वास से जुड़े अजीबोगरीब निर्देश लिखे हुए थे. परिवार के छोटे बेटे ललित को ऐसा लगता था कि उस पर उसके मृत पिता की आत्मा आती है. वो सपने में पिता गोपालदास से बातें करता था. मरे पिता के निर्देशों को मानकर परिवार के लोगों ने मोक्ष पाने के लिए ऐसा खौफनाक कदम उठाया.

काशी में मोक्ष के लिए एक ही परिवार के 4 लोगों ने की खुदकुशी!

2023 में काशी यानि वाराणसी में एक ही परिवार के 4 सदस्यों ने खुदकुशी कर ली थी. आंध्र प्रदेश का यह परिवार काशी कैलाश भवन के कमरा नंबर S6 में ठहरा हुआ था. उसमें 50 साल के कोंडा बाबू, पत्नी लावण्या, दो बेटे राजेश और जयराज थे.

खुदकुशी से पहले की पूजा, हाथ में बंधा था नया कलावा

पुलिस जांच में सामने आया कि परिवार ने खुदकुशी का सारा सामान पास के बाजार से खरीदा था. चारों ने आत्महत्या करने से पहले उस कमरे में पूजा पाठ की थी. घटनास्थल से कुमकुम की एक शीशी, पॉलिथीन में रोली और चंदन मिला था. चारों सदस्यों के मा​थे पर तिलक लगा हुआ था और चारों के हाथों में कलावा भी बंधा था. सबसे पहले माता-पिता और छोटे बेटे ने खुदकुशी की थी, उसके बाद बड़े बेटे राजेश ने खुदकुशी की थी. सुसाइड नोट से पता चला कि उन पर कर्ज था.

2012 में मां-बेटी ने की खुदकुशी

काशी में 2012 की घटना है, जिसमें आंध्र प्रदेश की रहने वाली एक महिला ने मोक्ष पाने के लिए अपनी बेटी के साथ आत्महत्या कर ली थी.

खुदकुशी करने से नहीं मिलता है मोक्ष

पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में जीवात्मा को जीवन और मरण के चक्र से मुक्ति के लिए मोक्ष का मार्ग बताया गया है. मोक्ष के लिए भगवान के शरण में जाना है. इसके लिए मनुष्य का शरीर मिला है. जब कोई खुदकुशी कर लेता है तो उसे मोक्ष नहीं मिलता है. ईश्वर की भक्ति करते हुए जब प्राकृतिक मृत्यु होती है यानि ईश्वर द्वारा जो हमें आयु प्राप्त है, उतना जीवन व्यतीत करने के बाद मृत्यु होती है तो फिर आगे मोक्ष का मार्ग मिलता है.

अकाल मृत्यु पर मिलती है भूत, प्रेत और पिशाच योनि

गुरुड़ पुराण के अनुसार अकाल मृत्यु होने पर जीवात्मा को भूत, प्रेत, पिशाच योनि में भटकना पड़ता है क्योंकि उसकी सांसारिक इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं. उनकी शरीर अचानक छूट जाता है और आत्मा सूक्ष्म रूप में भटकती रहती है क्योंकि उनकी प्राकृति आयु पूरी नहीं हुई होती.

तंत्र-मंत्र का मायाजाल, जिसमें फंसते हैं परिवार

ज्योतिषाचार्य चंद्रकांत सारस्वत कहते हैं कि जिसकी अकाल मृत्यु होती है, उसे भूत, प्रेत और पिशाच योनि प्राप्त होती है. इससे मुक्ति के लिए वैदिक उपाय बताए गए हैं, जिसको सभी लोग अंतिम संस्कार के बाद श्राद्ध और पिंडदान के रूप में करते हैं. पितृ पक्ष में भी तर्पण, श्राद्ध आदि करते हैं. वैदिक प्रक्रिया में समय लगता है. जिनको मुक्ति नहीं मिलती है, उनके लिए नारायण ब​लि, त्रिपिंडी श्राद्ध आदि करते हैं.

चंद्रकांत सारस्वत, ज्योतिषाचार्य.

लेकिन तंत्र-मंत्र का खेल तब शुरू होता है, जब लोग लालच के भंवर में फंसते हैं. तंत्र-मंत्र करने वाले लोग पैसे ऐंठने के मकसद से लोगों को फंसाते हैं और जो परेशान हैं, वे तत्काल मुक्ति के लिए पैसे देते हैं. वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द उनकी समस्या का समाधान हो जाए, चाहें उसके लिए अनैतिक मार्ग ही क्यों न चुनना पड़े. कम समय में जल्द पा लेने के लिए लोग तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ जाते हैं. फिर जो तांत्रिक कहता है, उसे मानकर काम करते हैं.

ढोंगी और पाखंडी करते हैं तंत्र-मंत्र

ज्योतिषाचार्य सारस्वत के अनुसार, तंत्र-मंत्र की साधना में देवी और देवता को उनकी इच्छा के विरुद्ध विवश किया जाता है, जबकि वैदिक साधना में भक्ति मार्ग से चलकर उनको प्रसन्न करके अपने मनोकामनाओं की पूर्ति की जाती है. तंत्र-मंत्र को पहले मानव कल्याण के लिए किया जाता था, लेकिन आज के समय में अपने सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए ढोंगी और पाखंडी तंत्र-मंत्र की क्रियाएं करते हैं. जो सही नहीं है. लोगों को मेरी सलाह है कि वे वैदिक मार्ग को अपनाएं. उससे ही कल्याण हो जाएगा.

मुक्ति के उपाय क्या हैं?

इन आत्माओं को मुक्ति प्रदान करने के लिए गुरुड़ पुराण में कुछ उपाय बताए गए हैं, जिनके अनुसार आत्मा की शांति के लिए विधिपूर्वक श्राद्ध और पिंडदान करते हैं. पितृ पक्ष के समय में महालया, सर्वपितृ अमावस्या या त्रयोदशी पर उनके लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि किया जाता है.

नारायण बलि और त्रिपिंडी श्राद्ध

अकाल मृत्यु वाली आत्माओं की शांति के लिए गया, काशी, त्र्यंबकेश्वर या अन्य पवित्र तीर्थों पर नारायण बलि और त्रिपिंडी श्राद्ध कराते हैं. इससे वह आत्मा भूत, पिशाच, प्रेत योनि से मुक्त होती है और सद्गति प्राप्त करती है. इसके अलावा श्रीमद्भागवत गीता या गरुड़ पुराण का पाठ कराते हैं.

नारायण बलि क्या है?

नारायण बलि में कुश से मृत व्यक्ति का प्रतीकात्मक शरीर बनाते हैं. फिर विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार और पिंडदान होता है. इसमें जीवात्मा को भौतिक शरीर के समान बोध कराते हैं ताकि उसकी मुक्ति हो सके. इसमें भगवान नारायण की पूजा होती है. वे मुक्ति के दाता हैं, उनकी कृपा से जीवात्मा को सद्गति प्राप्त होती है.



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