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Biz Updates: पेट्रोल-डीजल, LPG की बिक्री पर रोज 1700 करोड़ का नुकसान; पिरोजशा अगस्त से संभालेंगे गोदरेज समूह


पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि अब सरकारी तेल कंपनियों पर भारी पड़ने लगी है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां पिछले करीब ढाई महीने से पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पुराने दामों पर कर रही हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 1,600 से 1,700 करोड़ तक का घाटा उठाना पड़ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, बीते 10 सप्ताह में पेट्रोलियम कंपनियों की कुल अंडर-रिकवरी एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। अंडर-रिकवरी का मतलब है, पेट्रोल-डीजल-एलपीजी को वास्तविक लागत से कम कीमत पर बेचने से होने वाला घाटा। युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 फीसदी तक वृद्धि हो चुकी है, लेकिन देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम लंबे समय से स्थिर बने हुए हैं। मार्च में घरेलू एलपीजी सिलिंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे, बावजूद सिलिंडर की बिक्री लागत से नीचे बनी हुई है।

उपभोक्ताओं को ईंधन कीमतों के अतिरिक्त बोझ से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में भी कटौती की थी। पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल पर यह पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इससे सरकार को हर महीने करीब 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा हालात में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है, सिर्फ इसकी मात्रा और समय को लेकर निर्णय होना बाकी है।



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