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BRICS: ‘ब्रिक्स वैश्विक इकोनॉमी का नया पावरहाउस, हाई-टेक निर्यात में एक-तिहाई हिस्सेदारी’, बोले पुतिन


दुनिया में आर्थिक मोर्चे पर एक नया बदलाव दिख रहा है और ब्रिक्स देश इसके विकास का मुख्य इंजन बन चुके हैं। 29वें सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (एसपीआईईएफ) के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक जीडीपी वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा (49 प्रतिशत) ब्रिक्स देशों से आया है। यह आंकड़े बताते हैं कि उभरते बाजार अब वैश्विक पटल पर एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित हो रहे हैं। 

व्यापार और अर्थव्यवस्था पर ब्रिक्स का दबदबा

वर्तमान में, क्रय शक्ति समता के आधार पर वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स का योगदान लगभग 40 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा, व्यापारिक मोर्चे पर भी इन देशों ने तेजी से प्रगति की है। पुतिन ने कहा है कि ब्रिक्स के अस्तित्व में आने के बाद से वैश्विक माल व्यापार में इसकी हिस्सेदारी दोगुनी से अधिक हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है।

प्रमुख आंकड़े और क्षेत्रीय प्रभाव


  • जीडीपी में योगदान: वैश्विक जीडीपी वृद्धि (पिछले 5 वर्षों में) का 49 प्रतिशत हिस्सा ब्रिक्स से आया।

  • क्रय शक्ति: पीपीपी के संदर्भ में वैश्विक जीडीपी का 40 प्रतिशत हिस्सा ब्रिक्स के पास।

  • आपसी व्यापार: ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार एक ट्रिलियन डॉलर के पार।

  • तकनीकी निर्यात: वैश्विक हाई-टेक निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक। 

तकनीक और इनोवेशन में भारत-चीन का नेतृत्व

ब्रिक्स देश अब केवल पारंपरिक व्यापार या कमोडिटी निर्यात तक सीमित नहीं हैं। वैश्विक हाई-टेक निर्यात में इनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक हो गई है। राष्ट्रपति पुतिन ने तकनीकी क्षेत्र में विशिष्ट देशों की ताकत का उल्लेख करते हुए बताया कि वैश्विक सॉफ्टवेयर उद्योग में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। वहीं, चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पेटेंट के मामले में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। रूस भी डिजिटल प्लेटफॉर्म, वित्तीय तकनीक और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। 

बहुध्रुवीय विश्व और समान विकास की वकालत

आर्थिक विकास के साथ-साथ इस मंच पर वैश्विक समानता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पुतिन ने कहा, “दुनिया तब अधिक न्यायसंगत बनती है जब आर्थिक विकास उन अरबों लोगों तक पहुंचता है जो पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था के हाशिये पर थे”। इसी कड़ी में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग ने वैश्विक प्रशासन की एक निष्पक्ष प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन और रूस संप्रभु समानता, अंतर्राष्ट्रीय कानून और वास्तविक बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उभरते बाजारों का भविष्य: अफ्रीका और मध्य एशिया

इस आर्थिक महाकुंभ में अफ्रीका और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों की विकास क्षमता को भी रेखांकित किया गया। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने बताया कि रूस और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग अब केवल व्यापारिक नहीं रहा, बल्कि यह तकनीकी गठबंधन और संयुक्त उत्पादन परियोजनाओं में बदल गया है, जिसका कुल पोर्टफोलियो 50 अरब डॉलर से अधिक है। 



तंजानिया की राष्ट्रपति सामिया सुलुहू हसन ने भविष्य के अफ्रीका का खाका खींचते हुए कहा कि 2050 तक दुनिया का हर चौथा व्यक्ति अफ्रीकी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में दुनिया की 20 सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से नौ अफ्रीका में होंगी।



यह आर्थिक सत्र इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पश्चिमी देशों के एकाधिकार से परे, ब्रिक्स देश और उभरते बाजार अब केवल वैश्विक विकास के भागीदार नहीं, बल्कि उसके मुख्य संचालक बन गए हैं। तकनीक, आपसी व्यापार और नई रणनीतिक साझेदारियों के बलबूते यह समूह भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय करने के लिए पूरी तरह तैयार है।



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