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Credential Fraud: 57 फीसदी नियोक्ताओं ने माना- कंपनियां भर्ती के लिए सत्यापन मानकों से कर रहीं समझौता


आधे से अधिक नियोक्ताओं का मानना है कि कंपनियां तेजी से भर्ती करने के लिए पृष्ठभूमि के सत्यापन से समझौता कर रही हैं। इससे तेजी से नियुक्ति और सावधानीपूर्वक जांच के बीच अंतर बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 

कार्यबल और मानव संसाधन समाधान प्रदाता जीनियस एचआरटेक ने रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 57 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना था कि संगठन तेजी से भर्ती के लिए पृष्ठभूमि के सत्यापन के मानकों से समझौता कर रहे हैं।  

‘हायरिंग ब्लाइंड – क्या संगठन पृष्ठभूमि सत्यापन जोखिमों को नजरअंदाज कर रहे हैं?’ नाम की यह रिपोर्ट जारी की गई है। यह रिपोर्ट एक अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच 1647 मानव संसाधन पेशेवरों और व्यापार क्षेत्र के दिग्गजों से मिली जानकारी पर आधारित है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया, जैसे-जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ रहा है, आंकड़े दिखाते हैं कि भर्ती की गति और सही तरीके से जांच करने के बीच दूरी बढ़ रही है, जिसका सीधा असर काम करने वाले लोगों की विश्वसनीयता और लंबे समय में कंपनी या संगठन को होने वाले नुकसान के खतरे पर पड़ रहा है।

प्रमाणपत्र धोखाधड़ी एक लगातार और बढ़ती हुई चुनौती के रूप में सामने आई है। 33 फीसदी उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्हें सत्यापन प्रक्रिया के दौरान फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए शैक्षिक प्रमाणपत्र मिले हैं, जबकि जबकि 33 फीसदी ने पहचान या पते से जुड़ी विसंगतियों की पहचान की है।

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इसके अलावा, 21 फीसदी प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने दोहरी नौकरी या मूनलाइटिंग के मामले देखे हैं, जो हाइब्रिड और वर्क फ्रॉम होम के वातावरण में कार्यबल सत्यापन की बढ़ती जटिलता को दर्शाता है। इन निष्कर्षों में गिग कार्यबल सत्यापन से जुड़ी चिंताओं को भी उजागर किया गया है। 71 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना है कि सभी गिग प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य पहचान और आपराधिक सत्यापन लागू किया जाना चाहिए। 

जब गिग या असंगठित श्रमिकों की भर्ती में सबसे बड़ी सत्यापन चुनौती के बारे में पूछा गया, तो 42 फीसदी उत्तरदाताओं ने उच्च मात्रा में नियुक्ति को मुख्य समस्या बताया। अन्य चुनौतियों में पहचान और दस्तावेजों की प्रामाणिकता संबंधी चिंताएं, श्रमिकों का कई प्लेटफॉर्म पर काम करना और औपचारिक पते के दस्तावेजों की कमी शामिल रही।

 



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