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अजमेर पुलिस ने ऑपरेशन ‘म्यूल हंटर’ के तहत साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए सरगना सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि गिरोह ने पिछले दो-तीन वर्षों में करीब 70 संदिग्ध बैंक खाते खुलवाकर उनमें करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद कर नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी है.
अजमेर. पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के कब्जे से आठ एटीएम कार्ड, आठ मोबाइल फोन एवं सिम कार्ड, दो बैंक पासबुक, दो खाली चेकबुक और आधार और पैन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं. पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह पिछले दो-तीन वर्षों में 70 से 80 संदिग्ध बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम का लेन-देन कर चुका है.
यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक अजमेर रेंज डॉ. रवि (आईपीएस) एवं पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला (आईपीएस) के निर्देश पर की गई. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़ और पुलिस उप अधीक्षक मनीष बड़गुर्जर के नेतृत्व में रामगंज थाना प्रभारी हरिपाल सिंह एवं उनकी टीम ने संयुक्त जांच अभियान चलाते हुए संदिग्ध स्थानों पर दबिश दी.
रेलवे अस्पताल के पास पकड़े गए आरोपी
28 जुलाई 2026 को गश्त के दौरान रेलवे अस्पताल के निकट हजारी बाग रोड क्षेत्र में सात संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया गया. पूछताछ में उनकी पहचान प्रवीण भाटी, ध्रुव सुखारिया, शबरे आलम, मनीष, प्रिन्स यादव, राजेन्द्र और सुनील कुमार के रूप में हुई. जांच में इनके पास से साइबर ठगी में प्रयुक्त बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले. पुलिस के अनुसार, गिरोह का सरगना शबरे आलम लोगों को 10 से 25 हजार रुपये का लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाता था. खाते खुलने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेता था. गिरोह का सदस्य प्रवीण भाटी बीटेक शिक्षित है और बैंकिंग नियमों की जानकारी का फायदा उठाकर खातों का संचालन करता था. खातों की जानकारी टेलीग्राम के माध्यम से विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाई जाती थी, जहां से ठगी की रकम इन खातों में ट्रांसफर होती थी.
विदेशों तक फैला नेटवर्क
जांच में सामने आया कि साइबर ठगी की रकम एटीएम से निकालकर उसका एक हिस्सा कमीशन के रूप में रखा जाता था, जबकि शेष राशि गिरोह के अन्य सदस्यों लोकेश और माही उर्फ महावीर को सौंप दी जाती थी. इसके बाद रकम यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) के माध्यम से विदेशों में बैठे मुख्य संचालकों तक पहुंचाई जाती थी. प्रारंभिक जांच में आरोपियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की पुष्टि हुई है. पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और अन्य सहयोगियों के संबंध में गहन पूछताछ शुरू कर दी है. अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर ठगी से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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