मुंबई. सीबीआई ने बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में जांच शुरू कर दी है. बॉम्बे हाईकोर्ट आदेश के बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी. सीबीआई ने हत्या, गैंगरेप और सबूत मिटाने के आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. दिशा सालियान केस में सीबीआई के एफआईआर में 27 लोगों के नाम लिखे हैं. यह संख्या 50 तक भी पहुंच सकती है. सीबीआई की तहकीकात जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी और नाम जुड़ और हट सकते हैं. फिलहाल सीबीआई के एफआईआर में सिक्योरिटी गार्ड से लेकर नेता, एक्टर, आईपीएस और डॉक्टरों के भी नाम हैं. जानें एफआईआर में किस-किस के बारे में क्या लिखा है? क्या आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती, सचिन वाजे, मुंबई पुलिस के पूर्व सीपी परमबीर सिंह, शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और अनिल देशमुख जैसे नामों से सीबीआई पूछताछ शुरू करेगी? क्या इनमें से किसी की गिरफ्तारी भी हो सकती है.
बॉम्बे हाईकोर्ट 2 सितंबर 2026 के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज की गई है. हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दिशा सालियान के पिता सतीश ईश्वर सालियान का बयान 11 सितंबर 2026 को दर्ज किया गया, जिसमें उनकी ओर से उनकी बेटी की मौत को आत्महत्या के बजाय कथित गैंगरेप और हत्या के रूप में जांचने की मांग की गई. इसके बयान के बाद सीबीआई ने उनके बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की. पिता के बयान से जो-धाराएं जुड़ी, उसको एफआईआर में दर्ज किया गया. अब सवाल उठता है कि एफआईर के बाद कब एक्शन शुरू होगा?
सीबीआई मामले की जांच करेगी.
क्या आदित्य ठाकरे और सूरज पंचोली होंगे गिरफ्तार?
सीबीआई ने इस मामले में गैंगरेप, हत्या और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत जांच शुरू की है। इसके साथ ही सबूत मिटाने और मामले को छिपाने से जुड़े आरोपों की भी जांच हो रही है. एफआईर में सिर्फ दिशा सालियान की मौत को लेकर सवाल नहीं उठाए गए हैं, बल्कि यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद सबूतों को दबाने, मिटाने या उनमें बदलाव करने की कोशिश हुई. पुलिस की जांच और रिकॉर्ड में भी कथित गड़बड़ी की बात कही गई है. इसी वजह से एफआईआर में आईपीसी की धारा 201, 217 और 218 को भी शामिल किया गया है. यानी सीबीआई यह भी जांच करेगी कि क्या किसी ने जानबूझकर सबूतों से छेड़छाड़ की या गलत रिकॉर्ड बनाकर किसी को बचाने की कोशिश की. अगर सीबीआई को जांच के दौरान ये सबूत मिलते हैं तो फिर गिरफ्तारी हो सकती है.
क्या एफआईआर में नाम आने से गिरफ्तारी होगी?
कानून के जानकारों की मानें तो नहीं. एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम आना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता. इस मामले में तो एफआईआर की भाषा स्वयं कई व्यक्तियों के संबंध में यह कहती है कि उनकी भूमिका की जांच की आवश्यकता है. हां, अगर जांच में सीबीआई को लगता है कि कुछ गड़बड़ हुआ है तो फिर गिरफ्तारी हो सकती है. इसलिए फिलहाल कानूनी स्थिति यह है कि सीबीआई ने आरोपों और पिता के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया है. अब जांच एजेंसी को यह तय करना होगा कि किस व्यक्ति के खिलाफ प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य है और किसकी भूमिका संदिग्ध होने के बावजूद अपराध से जुड़ती नहीं है.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान केस में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं. (फाइल फोटो)
दिशा के पिता ने क्यों लिया बड़े चेहरों का नाम?
दिशा के पिता ने 13-14 सितंबर 2026 को बयान दिया था. उनक बयान के आधार पर सीबीआई ने धाराएं लगाई हैं. सीबीआई ने सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और साजिश की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की. दिशा सालियान केस में 13 सितंबर 2026 को एफआईर ने जांच को एक नए कानूनी चरण में पहुंचा दिया है. अब मामला केवल यह सवाल नहीं रह गया है कि दिशा की मौत आत्महत्या थी या नहीं. एफआईआऱ ने कथित गैंगरेप, हत्या, आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी जैसे कई पहलुओं को जांच के दायरे में ला दिया है.
एफआईआर में नाम आने से हत्या या गैंगरेप सिद्ध नहीं होता
लेकिन इस एफआईआर की सबसे अहम कानूनी विशेषता यह है कि इसमें लगाए गए आरोपों और नामों को अभी जांच योग्य आरोप के रूप में ही देखा गया है. सीबीआई को अब पुराने रिकॉर्ड को दोबारा खंगालने के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा, मेडिकल दस्तावेज, एफएसएल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम सामग्री, गवाहों के बयान और कथित सीन दोहराने और स्वतंत्र फॉरेंसिक जांच करनी होगी. क्योंकि, अब काफी सबूत नष्ट हो गए होंगे. हो सकता है कि कुछ सबूत को बचाकर रखा गया हो. सीबीआई अब इन सभी कड़ियों से एक चेन बनाएगी, तो केस की दिशा पूरी तरह बदल सकती है. लेकिन यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक और स्वतंत्र साक्ष्य नहीं मिलते हैं, तो केवल एफआईआऱ में दर्ज आरोपों के आधार पर हत्या या गैंगरेप को कानूनी रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता.
8 जून 2020 की रात क्या हुआ था, दिशा सालियान कैसे गिरी थीं? पढ़ें. (फाइल फोटो)
इस लिहाज से देखें तो अभी जिन-जिन लोगों के नाम एफआईआर में दर्ज है, उनकी गिरफ्तारी की कोई संभावना नहीं बनती है. हां, उन्हें सीबीआई जांच में सहयोग करना होगा. अगर सीबीआई को लगेगा कि उनमें से कुछ की भूमिका संदिग्ध है तो सीबीआई गिरफ्तार कर सकती है. लेकिन संदिग्ध के आधार भी गिरफ्तारी नहीं होगी जब तक सीबीआई के पास ठोस सबूत नहीं मिल जाते. इस लिहाज से देखें तो जिन 27 नामों का एफआईआर में जिक्र है, उनकी फिलहाल गिरफ्तारी नहीं हो सकती है.



