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EAC-PM की रिपोर्ट: साल 2050 तक 3 करोड़ केयरगिवर्स की होगी जरूरत, देश में आएगा बड़ा आर्थिक बदलाव


प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने देश के केयर सेक्टर यानी देखभाल क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव की वकालत की है। परिषद के अनुसार, भारत में वर्ष 2050 तक केयरगिवर्स की मांग तीन करोड़ के पार जाने का अनुमान है। पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने इस क्षेत्र के लिए एक समर्पित फंड बनाने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही, कुशल और बेहतर वेतन पाने वाले केयर वर्कफोर्स के निर्माण पर भी जोर दिया है। ईएसी-पीएम के वर्किंग पेपर री-इमेजिनिंग द केयर इकोनॉमी में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड को भी इस क्षेत्र की ओर मोड़ने का प्रस्ताव है।  

केयरप्रेन्योर फंड स्थापित करने का सुझाव

रिपोर्ट में केयरप्रेन्योर फंड स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। यह फंड उद्यमियों और सहकारी समितियों को सस्ती दरों पर वित्त उपलब्ध कराएगा। मंत्रालय से सिफारिश की गई है कि निजी क्षेत्र में वैधानिक सवेतन पितृत्व अवकाश शुरू किया जाए। इसके बाद धीरे-धीरे जेंडर न्यूट्रल पैरेंटल लीव पॉलिसी लागू की जाए।  

परिषद ने वित्त मंत्रालय के तहत परिवार सेवा कोष बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह एक परिणाम-आधारित सरकारी कोष होगा। रिपोर्ट के अनुसार, केयर सेक्टर घरेलू और वैश्विक बाजारों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सकता है। इससे परिवार अनुकूल नीतियां गहरी होंगी और समय की कमी कम होगी।

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निवेश की जिम्मेदारी सरकार पर आएगी- रिपोर्ट

निवेश से देखभाल की जिम्मेदारी घरों से हटकर बाजार और सरकार पर आएगी। भारत का जनसांख्यिकीय ढांचा बदल रहा है। बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है और प्रजनन दर कम हो रही है। शहरीकरण के कारण पारंपरिक पारिवारिक ढांचे टूट रहे हैं। वर्तमान में महिलाओं के बिना वेतन वाले देखभाल कार्यों का जीडीपी में योगदान 15-17 प्रतिशत है। इसके बावजूद औपचारिक देखभाल के क्षेत्र में निवेश सीमित है। बाजार की विफलताओं के कारण औपचारिक देखभाल वर्तमान में महंगी और अपर्याप्त है।  

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