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ECLGS 5.0: ईसीएलजीएस 5.0 को मंजूरी से किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ, जानिए उद्योग जगत की क्या राय


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से एमएसएमई क्षेत्र के उभरते हुए उद्योग व्यापार पर बढ़ रहे तनाव को कम करने के लिए सरकार आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0 को बढ़ाया जाने की मंजूरी दी है। जिसको सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई क्षेत्र) ने इसको राहत भरा कदम बताया है। उद्योग और संगठनों का कहना है, सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को युद्ध की वजह से हो रही परेशानियों को माना और उसके लिए क्रेडिट लाइन योजना का विस्तार किया यह महत्वपूर्ण है। इससे उद्योग को आवश्यक तरलता प्रदान करेगी साथ ही रोजगार, उत्पादन और आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने में सहायक होगी।

महाराष्ट्र उद्योग व व्यापार संघ के चैंबर के अध्यक्ष दीपेन अग्रवाल ने अमर उजाला डॉटकॉम से बातचीत में बताया कि सरकार द्वारा आपातकालीन ऋण गारंटी योजना 5.0 के फैसले का एमएसएमई क्षेत्र स्वागत करता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से आयात-निर्यात आधारित कारोबार और एलपीजी पर निर्भर कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। जिनके सामने कारोबार बंद करने या फिर कम काम करने की समस्या बनी हुई उनके लिए यह सबसे बड़ी राहत लेकर आया है। अग्रवाल कहते हैं, इस योजना के तहत पात्र उधारकर्ता उपयोग की गई अधिकतम कार्यशील पूंजी के 20 प्रतिशत तक का ऋण ले सकते है। जिसकी सीमा अधिकतम 100 करोड़ रुपये है। यह आवश्यक तरलता तो प्रदान करने और रोजगार, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में बहुत सहायक होगी। सरकार ऐसे समय में जब उद्योग सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब इसक योजना को बढ़ाया यह दर्शाता है कि सरकार एमएसएमई क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है और उनकी परेशानियों को कम करने के लिए काम कर रही है।

मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेट्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग को मिलेगा लाभ  

महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज एंड एग्री के अध्यक्ष ललित गांधी ने बताया कि सरकार ने एमसएमसई क्षेत्र के लिए क्रेडिट गारंटी योजना को बढ़ाने का फैसला उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला साबित होगा। विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेट्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री, फार्मा, हेल्थकेयर, लॉजिस्टक्स सहित स्टार्टअप्स और सेवा क्षेत्र को इससे बड़ा लाभ मिलेगा।

बैंकों को स्पष्ट निर्देश की जरूरी

गांधी कहते हैं, वैश्विक भू-राजनीतिक और व्यापारिक अनिश्चतता के समय सरकार का यह फैसला उद्योग के लिए नई ऊर्जा और विश्वास पैदा करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल योजना की सीमा बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। वास्तविकता यह है कि अधिकतर बैंक आज भी 5 करोड़ रुपये के ऋण भारी कोलेटरल बिना मंजूर करने में काफी हिचकिचाहट दिखाते हैं, जबकि सीजीटीएमएसई जैसी गारंटी योजना पहले से ही मौजूद हैं। इसलिए बैंकों को

गारंटी वाले ऋणों में अनावश्यक कोलेटरल मांगने पर नियंत्रण हो, बैंक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और एमएसएमई ऋण स्वीकृति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और उद्योग अनुकूल बनाया जाए। यदि यह सभी फैसले प्रभावी रूप से क्रियान्वयन किया गया तो देश के एमएसएमई क्षेत्र को नई गति देने के साथ मेक इन इंडिया, निर्यात में वृद्धि, रोजगार निर्मा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

छोटे उद्योग को मिले इसका फायदा

भारत मर्चेंट्स चैंबर के अध्यक्ष मनोज जालान, कहते हैं सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला का हम स्वागत करते हैं। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है इससे उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह होगी कि इसका फायदा छोटे उद्योग को मिले, न कि बड़े कारोबारियों को। कई उद्यमियों को व्यवहारिक स्तर पर अब भी प्रॉपर्टी मॉर्गेज, अतिरिक्त गारंटर एवं अत्यधिक दस्तावेजी शर्तों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण सरकार की योजनाओं का पूर्ण लाभ उद्योगों तक नहीं पहुंच पाता।

क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 5.0 से संभावित रूप से लगभग 1.1 करोड़ एमएसएमई खातों को लाभ

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने हाल ही में रिपोर्ट जारी कर बताया कि हाल ही में स्वीकृत आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 5.0 से संभावित रूप से लगभग 1.1 करोड़ एमएसएमई खातों को लाभ हो सकता है, जिससे व्यवसायों को पश्चित एशिया में चल रहे संघर्ष से पैदा होने वाली रुकावटों से उबरने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट के अनुसार पात्र उधारकर्ता वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में उपयोग की गई अधिकतम कार्यशील पूंजी के 20 प्रतशित तक का अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर सकते हैं, जिसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये है। वहीं एयरलाइंय के लिए यह सहायता 100 प्रतिशत तक हो सकती है, जिसमें प्रति उधारकर्ता 1,500 करोड़ रुपये से अधिकतम सीमा है। सरकार ने ईसीएलजीएस 5.0 के तहत कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण प्रवाह का लक्ष्य रखा है, जिसमें विमानन क्षेत्र 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, कि समय पर किया गया हस्तक्षेप तरलता सहायता सुनिश्चित करेगा, नौकरियों की रक्षा के साथ आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को मजबूत करेगा।

रिपोर्ट अनुसार वित्त वर्ष 2026 में एमएसएमई ऋण मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। जिसमें अनुमान लगाया गया है कि एमएसमएई ऋण लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे कुल बैंक ऋण में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 18.5 प्रतिशत हो गई है। वहीं, यह योजना इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर तनाव को रोकने के लिए मदद तो मिलेगी। पिछली ईसीएलजीएस योजना में कम से कम 13.5 लाख एमएसएमई खातों को गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की स्थिति में जाने से बचाया गया था।



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