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Explainer: कितना बड़ा है भारत का ड्रोन बाजार, खेती-रेलवे से लेकर रक्षा तक कैसे बढ़ रहा इसका इस्तेमाल?


आगे की योजना क्या है?

आगे सरकार का जोर सिर्फ ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाने पर नहीं, बल्कि देश में ड्रोन से जुड़े पूरे उद्योग को मजबूत करने पर है। आईबीईएफ के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 240 मिलियन डॉलर यानी 2,219 करोड़ रुपये के ड्रोन प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन कार्यक्रम का प्रस्ताव है। इसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक ड्रोन क्षेत्र में 40 प्रतिशत स्थानीयकरण हासिल करना है। इस योजना में खासतौर पर ड्रोन के पुर्जे, सॉफ्टवेयर और सेवाओं पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा अगले तीन वर्षों में 2,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश का प्रस्ताव है।

भारत में कितने ड्रोन और पायलट हैं?

9 फरवरी 2026 तक भारत में 38,575 ड्रोन पंजीकृत थे और उन्हें विशिष्ट पहचान संख्या दी गई थी।

वहीं 39,890 रिमोट पायलट प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके थे। देश में 244 प्रशिक्षण संस्थानों को डीजीसीए की मंजूरी मिली थी।

ड्रोन से कैसे खुले रोजगार के मौके?

ड्रोन उद्योग में रोजगार सिर्फ पायलट बनने तक सीमित नहीं है। इसके साथ ड्रोन बनाने, सॉफ्टवेयर विकसित करने, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार करने, ड्रोन की मरम्मत, आंकड़ों का विश्लेषण और सर्वे जैसे काम जुड़े हैं।

सरकार का स्वायन कार्यक्रम ड्रोन और मानव रहित विमान तकनीक के क्षेत्र में कौशल विकास पर काम कर रहा है। इसके तहत 857 से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं और 26,000 से ज्यादा लोगों को फायदा हुआ है।

छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए निडार जैसे कार्यक्रम भी हैं, जिनमें स्वचालित ड्रोन के नए इस्तेमाल पर काम करने का अवसर मिलता है। इसमें 40 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए सहायता का प्रावधान है।

आईबीईएफ के अनुमान के मुताबिक, इस क्षेत्र से 1.20 लाख से ज्यादा विनिर्माण क्षेत्र की नौकरियां और छह लाख से अधिक सेवा क्षेत्र की नौकरियां पैदा हो सकती हैं।

 



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