ब्याज दरों में बदलाव का कैसा रहा ट्रेंड?
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी ईपीएफओ ने पीएफ पर ब्याज दर 8.25% ही रखी है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया।
मार्च 2022 में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ब्याज दर घटाकर 8.10% कर दी गई थी, जो चार दशक का सबसे निचला स्तर था। इससे पहले 2020-21 में यह 8.50% थी। बाद में 2022-23 में ब्याज दर 8.15% रही, जिसे 2023-24 में बढ़ाकर 8.25% किया गया। 2024-25 और 2025-26 में भी इसे इसी स्तर पर बरकरार रखा गया।
अगर इतिहास पर नजर डालें तो 2021-22 की 8.10% ब्याज दर 1977-78 के बाद सबसे कम थी। वहीं पिछले एक दशक में सबसे अधिक 8.80% ब्याज 2015-16 में दिया गया था। 2013-14 और 2014-15 में 8.75%, 2016-17 में 8.65%, 2017-18 में 8.55% और 2011-12 में 8.25% ब्याज दिया गया था।
क्या है पीएफ कटौती का नया नियम?
केंद्र सरकार ने ईपीएफ स्कीम, 2026 लागू कर पीएफ योगदान को लेकर एक अहम स्पष्टता दी है। नए नियम के तहत 12% पीएफ योगदान की दर और ₹15,000 की वेतन सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन अब यह साफ कर दिया गया है कि कानूनी रूप से कर्मचारी और नियोक्ता के लिए अधिकतम अनिवार्य पीएफ योगदान ₹1,800 प्रति माह (₹15,000 का 12%) ही होगा। इससे अधिक पीएफ जमा करना अनिवार्य नहीं, बल्कि स्वैच्छिक होगा।
पहले क्या होता था?
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 से अधिक थी और कंपनी पूरे बेसिक वेतन पर पीएफ काट रही थी, तो कर्मचारी और नियोक्ता दोनों उसी आधार पर 12% योगदान देते थे। इससे कई कर्मचारियों के खाते में हर महीने ₹1,800 से कहीं अधिक पीएफ जमा होता था।
अब क्या बदलेगा?
अब अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 से अधिक है, तो वह और उसका नियोक्ता सिर्फ ₹1,800-₹1,800 का अनिवार्य पीएफ योगदान करने का विकल्प चुन सकते हैं। यदि दोनों पक्ष सहमत हों, तो इससे अधिक योगदान जारी रखा जा सकता है, लेकिन वह स्वैच्छिक माना जाएगा। यह बदलाव अपने-आप लागू नहीं होगा, बल्कि कंपनी की वेतन नीति और कर्मचारी की सहमति पर निर्भर करेगा।



