अब केवल ब्रांड इंडिया नाम से विदेशों में भारतीय सामान बिकेंगे। भारत सरकार इसके लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार करने जा रही है। इसके तहत निर्यात होने वाले सामानों को वैश्विक मानकों के अनुरूप पैकेजिंग एवं डिजइनिंग कर बाजार में उतारा जाएगा।
असल में भारत को केवल वस्तु-निर्यातक से ब्रांड-निर्यातक में परिवर्तित करने की तैयारी की जा रही है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की सॉफ्ट पावर को सशक्त बनाना भी है। सरकार की नई योजना में नए फ्रेमवर्क व वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसके लिए वाणिज्य मंत्रालय ने एक नई योजना तैयार कर निर्यातकों व उद्यमियों से इस पर सुझाव भी मांगे हैं।
दुनिया के बाजार में भारत को सशक्त बनाने की पहल
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, प्रथम बार निर्यात करने वालों, स्टार्ट-अप्स और निर्यात क्लस्टरों की वैश्विक बाजारों में भागीदारी बढ़ेगी। मूल्य-सृजन में होने वाली हानि को कम किया जाएगा। वैश्विक व्यापार के प्रीमियम वर्गों में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। निर्यातकों और साझा ब्रांड परिसंपत्तियों का निर्माण होगा।
दो साल के लिए ट्रस्ट मार्क शुल्क माफ रहेगा
ब्रांड इंडिया समिति एकीकृत ब्रांड इंडिया ढांचा बनाएगी। यह उप-ब्रांडों का मार्गदर्शन करेगा। एकीकृत ब्रांड इंडिया में भारतीय मूल्य, कार्य-संस्कृति, विश्वास-चिह्न , गुणवत्ता, निरंतरता, संस्कृति एवं विरासत, नवाचार, शिल्प-कौशल, पर्यावरणीय स्थिरता पर जोर होगा। एमएसएमई तथा उभरते निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए ट्रस्ट मार्क शुल्क प्रारंभिक दो वर्षों के लिए माफ रहेगा।



