Homeटेक्नोलॉजीFCRA संशोधन बिल पर JPC की पहली बैठक: 31 सदस्यीय समिति...

FCRA संशोधन बिल पर JPC की पहली बैठक: 31 सदस्यीय समिति NGO और विदेशी फंडिंग पर प्रस्तावित कड़े नियमों की जांच करेगी


6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

नई दिल्ली में शुक्रवार, 18 सितंबर को FCRA संशोधन बिल की जांच कर रही JPC की पहली बैठक हुई। समिति बिल के प्रावधानों की विस्तार से जांच करेगी।

BJP सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति विदेशी फंडिंग और NGO पर सरकारी निगरानी बढ़ाने वाले बिल की समीक्षा करेगी। समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक लोकसभा में रिपोर्ट देनी है।

फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल (FCRA), 2026 में लाइसेंस खोने वाले संगठन की संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है।

विपक्ष का आरोप है कि बिल ईसाई NGO और अल्पसंख्यक संस्थानों की वैध फंडिंग रोककर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है। सरकार ने आरोप खारिज करते हुए कहा है कि बिल धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है।

बिल के मुख्य प्रावधान

यह बिल देश में NGO और विदेशी फंडिंग पर सरकारी निगरानी कड़ी करने का प्रस्ताव रखता है। इसमें विदेशी योगदान को नियंत्रित करने के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने की बात कही गई है।

यह प्राधिकरण उस संगठन की संपत्तियों का प्रबंधन और निपटारा करेगा, जिसका FCRA लाइसेंस खत्म हो जाएगा।

विपक्षी दलों ने FCRA बिल पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इसके कुछ प्रावधान ईसाई NGO और अल्पसंख्यकों द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक कल्याण और शैक्षणिक संस्थानों की वैध फंडिंग रोक देंगे।

सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार ने विपक्षी दलों से ऐसा एक भी प्रावधान बताने को कहा है, जो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता हो।

सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून धर्म विशेष के लिए नहीं है। इसका मकसद विदेशी योगदान को नियंत्रित करना है।

लोकसभा में पेश होने से JPC तक

यह बिल इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्षी दलों की लगातार मांग के बाद इसे 12 अगस्त को JPC को भेजा गया।

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि बिल के कुछ प्रावधान बेहद आपत्तिजनक हैं। समिति अब बिल के सभी प्रावधानों की विस्तृत जांच करेगी।

समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश करनी है।

सरकार ने पारदर्शिता का तर्क दिया

लोकसभा में बिल पेश करते समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि कानून का लक्ष्य पारदर्शिता बढ़ाना है। उन्होंने कहा था कि इससे विदेश से मिले फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

विपक्ष के बिल को “खतरनाक” बताए जाने पर राय ने पलटकर कहा था कि यह कानून उन लोगों के लिए “वास्तव में खतरनाक” है, जो विदेशी योगदान से “जबरन धर्मांतरण” कराते हैं।

उन्होंने यह भी कहा था कि यह कानून विदेशी फंडिंग का “व्यक्तिगत लाभ के लिए गलत इस्तेमाल” करने वालों के खिलाफ है।

विपक्ष और राज्यों की आपत्तियां

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बिल पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह अल्पसंख्यकों और NGO को निशाना बनाता है।

वेणुगोपाल ने कहा था कि विपक्ष बिल को मौजूदा रूप में पास नहीं होने देगा।

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा और ईसाई संगठनों ने पहले केंद्र से बिल को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने की मांग की थी।

लालदुहोमा और ईसाई संगठनों ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बिल पर अपनी चिंताएं बताई थीं।

नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने भी केंद्र से बिल को संयुक्त समिति के पास भेजने की मांग की थी। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इसके प्रावधानों पर केंद्र के सामने चिंता जताई थी।

DMK सांसद पी. विल्सन ने चर्च नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बिल वापस लेने और मौजूदा कानून की सेक्शन 15 हटाने की मांग की थी।

DMK प्रमुख एमके स्टालिन ने भी केंद्र से FCRA बिल वापस लेने की मांग की थी।

NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बिल के मौजूदा रूप का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि विदेशी फंडिंग को हमेशा शक की नजर से नहीं देखा जा सकता।

सुले ने केंद्र से बिल वापस लेने या इसे संयुक्त समिति के पास भेजने की मांग की थी।

अमेरिकी सांसदों ने भी चिंता जताई

डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों दलों के कुछ अमेरिकी सांसदों ने FCRA में प्रस्तावित बदलावों पर चिंता जताई थी।

सीनेटर जेम्स रिस्क भी इनमें शामिल हैं। वह सीनेट की विदेश संबंध समिति के प्रमुख हैं।

अमेरिकी सांसदों ने कहा था कि प्रस्तावित बदलावों से ईसाई संगठनों और दूसरे सिविल सोसाइटी समूहों पर बुरा असर पड़ सकता है।

भारत ने इस आलोचना को खारिज किया था। भारत ने इसे अपना आंतरिक मामला बताया था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि FCRA में प्रस्तावित बदलाव भारत का आंतरिक विधायी मामला है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया था कि कुछ समुदायों को गुमराह करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राज्यसभा सदस्यों जावेद अली खान और जेम्स पांगसांग कोंगकल संगमा को JPC में विशेष आमंत्रित सदस्य नामित किया था।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments