भारत की उर्वरक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अमोनिया उत्पादन में दक्षता और तकनीकी नवाचार की जरूरत है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) ने इस पर जोर दिया है। देश अपनी फीडस्टॉक जरूरतों के करीब 77 फीसदी के लिए आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। एफएआई ने पुराने अमोनिया संयंत्रों को आधुनिक बनाने की मांग करते हुए यह बातें कही है।
एफएआई के महानिदेशक सुरेश कुमार चौधरी ने दुर्गापुर एक सामुहिक चर्चा के दौरान कहा कि हाल के वर्षों में कई अत्याधुनिक अमोनिया संयंत्र स्थापित हुए हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में इकाइयां 25 से 50 साल पुरानी हैं। इन पुराने संयंत्रों को उच्च दक्षता और सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार बदलाव चाहिए। अमोनिया उत्पादन की औद्योगिक प्रक्रिया में भारी ऊर्जा की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा कि यह पूरे नाइट्रोजन की मूल्य शृंखला के लिए महत्वपूर्ण है। संयंत्र संचालन, रखरखाव प्रथाओं और ऊर्जा दक्षता में सुधार महत्वपूर्ण हैं। यह प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत करने के लिए आवश्यक है। भारत में वर्तमान में 36 अमोनिया संयंत्र हैं। इनकी कुल स्थापित क्षमता लगभग 190 लाख टन है। घरेलू उर्वरक उत्पादन बनाए रखने के लिए परिचालन विश्वसनीयता और ऊर्जा दक्षता आवश्यक है।
प्राकृतिक गैस पर निर्भरता और उत्सर्जन में कमी
प्राकृतिक गैस अमोनिया उत्पादन के लिए एक प्राथमिक कच्चा माल है। भारत इस पर बहुत अधिक निर्भर करता है। चौधरी ने बताया कि उर्वरक उद्योग ने पिछले चार दशकों में अच्छा काम किया है। प्रौद्योगिकी अपनाने, प्रक्रिया सुधारों और ऊर्जा संरक्षण उपायों के माध्यम से। उद्योग ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 50 फीसदी की कमी की है। यह इसे देश के सबसे कुशल औद्योगिक क्षेत्रों में से एक बनाता है।
उन्नयन और नवाचार की आवश्यकता
पुराने अमोनिया संयंत्रों को लगातार आधुनिकीकरण की जरूरत है। इनमें नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना महत्वपूर्ण है। इससे उच्च स्तर की दक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। एफएआई ने इस पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया है। यह भारत की आत्मनिर्भरता और उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा देगा। यह देश की दीर्घकालिक उर्वरक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
तकनीकी मंच और भविष्य की दिशा
दुर्गापुर में हुए कार्यक्रम में करीब 50 वरिष्ठ इंजीनियर और तकनीकी पेशेवर शामिल हुए। ये 19 स्थानों के 25 अमोनिया संयंत्रों से आए थे। मैट्रिक्स फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स, हर्ल, इफको और एनएफएल के अधिकारियों ने भी भाग लिया।



