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FPI: छूट के बाद एफपीआई ने एफएआर प्रतिभूतियों में 8,795 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया, जानिए इस बारे में


सरकार द्वारा कर छूट दिए जाने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में बड़ा निवेश किया है। एफपीआई ने इन बॉन्डों में ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट मिलने के बाद 8,794.743 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह कदम भारत के घरेलू ऋण बाजार को मजबूत करने और रुपये को बाहरी दबावों से सहारा देने के लिए उठाया गया है।

क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, तीन जून को एफएआर प्रतिभूतियों में एफपीआई की होल्डिंग 3.23 लाख करोड़ रुपये थी। यह मंगलवार, 7 जून को बढ़कर 3.32 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाती है। एफएआर अनिवासी निवेशकों को भारत सरकार की प्रतिभूतियों (शेयरों) में बिना किसी निवेश सीमा के निवेश करने की अनुमति देता है। 

एरेट कैपिटल के उपाध्यक्ष माताप्रसाद पांडे ने इस कदम को सकारात्मक बताया है। उन्होंने बताया कि अप्रैल और मई में हुई शुद्ध खरीद का करीब 75 फीसदी एफएआर श्रेणी में निवेश किया गया। यह भारत के प्रमुख वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल होने के मामले को भी मजबूत करता है। सरकार ने 5 जून को आयकर अधिनियम में संशोधन के लिए एक अध्यादेश जारी किया था। यह छूट 1 अप्रैल 2025 से पूर्वव्यापी रूप से लागू है, जिससे निवेशकों को तत्काल लाभ मिला है।

कर छूट क्यों दी गई?

सरकार ने यह कदम घरेलू ऋण बाजार में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाया है। इसका उद्देश्य बाहरी दबावों के बीच रुपये को समर्थन देना भी है। पहले विदेशी निवेशकों पर सूचीबद्ध शेयरों और बॉन्ड पर 12.5 फीसदी का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लगता था। यह कर उन प्रतिभूतियों पर लगता था जिन्हें 12 महीने से अधिक समय तक रखा जाता था। सरकारी बॉन्ड पर अर्जित ब्याज पर 20 फीसदी का विदहोल्डिंग कर भी लगता था। नई छूट से निवेशकों को बड़ा लाभ मिलेगा, जिससे निवेश के प्रति उनकी रुचि बढ़ेगी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने क्या अतिरिक्त उपाय किए?

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी जून मौद्रिक नीति घोषणा में महत्वपूर्ण बदलाव किए। उसने एफएआर के तहत उपलब्ध प्रतिभूतियों का दायरा बढ़ाया है। इसमें 15-वर्षीय, 30-वर्षीय और 40-वर्षीय अवधि की सभी नई सरकारी प्रतिभूतियां शामिल की गईं। केंद्रीय बैंक ने सामान्य मार्ग के तहत एफपीआई निवेश के लिए कुछ सीमाएं भी हटाईं। इनमें अल्पकालिक निवेश, एकाग्रता और व्यक्तिगत प्रतिभूतियों से संबंधित सीमाएं शामिल हैं। आरबीआई ने कहा कि ये उपाय सरकारी उधारी के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद करेंगे। इन उपायों से बाजार में तरलता भी बढ़ेगी।

इन कदमों का क्या महत्व है?

भारत सरकार इन उपायों के माध्यम से बॉन्ड बाजार को गहरा करना चाहती है। इसका लक्ष्य वैश्विक निवेशकों की अधिक भागीदारी को सुविधाजनक बनाना है। इन कदमों से सरकारी प्रतिभूति बाजार विदेशी निवेशकों के लिए और अधिक खुल गया है। माताप्रसाद पांडे के अनुसार, यह भारत की वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल होने की संभावनाओं को बढ़ाता है। इन सूचकांकों में ब्लूमबर्ग का सॉवरेन बॉन्ड सूचकांक भी शामिल है। इसका समावेश निर्णय इस वर्ष की शुरुआत में टाल दिया गया था। अब भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।

एफएआर रूट है क्या?

एफएआर रूट मुख्य रूप से शेयरों के लिए नहीं, बल्कि भारत के सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश के लिए बनाया गया ढांचा है। एफएआर का पूरा नाम है फुली एक्सीसिबल रूट। इसे 2020 में भारतीय रिजर्व बैंक ने शुरू किया था। इसके तहत विदेशी निवेशक कुछ निर्धारित सरकारी बॉन्ड्स में बिना किसी निवेश सीमा के निवेश कर सकते हैं। मान लीजिए आरबीआई ने 100,000 करोड़ रुपये का एक सरकारी बॉन्ड एफएआर के तहत जारी किया। सामान्य नियमों में विदेशी निवेशकों के लिए इसमें निवेश की सीमा हो सकती है। एफएआर बॉन्ड में विदेशी निवेशकों पर ऐसी सीमा नहीं होती। वे अपनी इच्छा के अनुसार निवेश कर सकते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक के उपाय लाएंगे 55-65 अरब डॉलर

भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया उपाय विदेशी पूंजी आकर्षित करेंगे। इससे चालू वित्त वर्ष में 55-65 अरब डॉलर का प्रवाह आने की उम्मीद है। यह रुपये को स्थिर करने और देश के भुगतान संतुलन को अधिशेष में बदलने में मदद करेगा।



भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग की नवीनतम इकोरैप रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी और जून 2026 में घोषित भारतीय रिजर्व बैंक की पहल एक समन्वित रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य रुपये को मजबूत करना और भारत के घरेलू ऋण बाजार को गहरा करना है। यह स्थिर विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और बाहरी वित्तपोषण तक पहुंच को आसान बनाने के लिए है। जून की मौद्रिक नीति घोषणा के बाद, केंद्रीय बैंक ने कई उपाय पेश किए। इनका लक्ष्य विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देना था।

विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के उपाय

इन उपायों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार को प्रोत्साहित करने के लिए एक रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा शामिल है। इसी तरह की सुविधा बैंकों के लिए भी है। यह बैंक तीन से पांच साल की परिपक्वता अवधि वाले नए विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) जमा जुटाने के लिए है। ये कदम विदेशी पूंजी को आकर्षित करने में सहायक होंगे।

फरवरी और जून की पहल का अंतर

रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में किए गए उपाय संरचनात्मक सुधारों और बाजार विकास पर केंद्रित थे। वहीं, जून की पहल विशेष रूप से विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करने के लिए बनाई गई थी। इसका उद्देश्य घरेलू ब्याज दरों को बढ़ाए बिना रुपये का समर्थन करना था। यह रणनीति रुपये को मजबूत करने में मदद करेगी।



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