अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और बढ़ते कर्ज को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बार-बार आ रहे वैश्विक झटकों के कारण दुनिया भर में सार्वजनिक कर्ज “खतरनाक” स्तर पर पहुंच रहा है। जॉर्जीवा के अनुसार, दुनिया भर में बढ़ते वित्तीय दबावों के बीच अनुमान है कि वर्ष 2029 तक वैश्विक सार्वजनिक ऋण जीडीपी के 100% को पार कर जाएगा। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऋण का सबसे उच्चतम स्तर होगा। इसके साथ ही, मौजूदा संकट के बीच 20 से 50 अरब डॉलर की नई वैश्विक वित्तीय मांग पैदा होने की संभावना है।
भारत और आसियान के लिए राहत के संकेत
वैश्विक स्तर पर मंडराते इस कर्ज संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बीच, आईएमएफ प्रमुख ने भारत की स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। इस संबंध में मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- भारत की मजबूत स्थिति: जॉर्जीवा के अनुसार, भारत जैसी मजबूत बुनियादी अर्थव्यवस्थाओं के इस संकट के बीच बेहतर प्रदर्शन करने की पूरी संभावना है।
- मंदी का जोखिम नहीं: उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारत में किसी भी प्रकार की तीव्र आर्थिक मंदी का कोई खतरा नहीं दिखाई देता है।
- निगरानी की आवश्यकता: हालांकि भारत सुरक्षित स्थिति में है, लेकिन जॉर्जीवा ने भारतीय वित्तीय क्षेत्र को अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘प्रमुख निगरानी बिंदु’ (मॉनिटरिंग पॉइंट) बताया है, जिस पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।
- आसियान का प्रदर्शन: भारत के अलावा, आसियान देश भी वैश्विक झटके को अपेक्षाकृत काफी अच्छी तरह से झेल रहे हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव और संभावित आपूर्ति संकट
एक तरफ जहां भारत और आसियान मजबूत बने हुए हैं, वहीं अन्य क्षेत्रों में गहराता संकट चिंता का विषय है। जॉर्जीवा के मुताबिक, मौजूदा संघर्षों के कारण मध्य पूर्व को विकास के मोर्चे पर भारी झटका लगेगा और वहां के आर्थिक आउटलुक (अनुमान) में 2.3% तक की कटौती की गई है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एशिया में तेल, गैस, नेफ्था और हीलियम की कमी होने की आशंका भी जताई है। जॉर्जीवा ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष जल्दी समाप्त भी हो जाता है, तब भी वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान और अधिक बढ़ सकता है। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें लंबी अवधि तक ऊंची बनी रहती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को “आगे आने वाले कठिन समय” के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।
मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों के लिए नीतिगत सलाह
महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि फिलहाल अल्पकालिक मुद्रास्फीति (महंगाई) की उम्मीदें बढ़ रही हैं, लेकिन इसका दीर्घकालिक दृष्टिकोण अभी भी स्थिर बना हुआ है। उन्होंने नीति निर्माताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि केंद्रीय बैंकों को मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन ब्याज दरों या नीतियों पर जल्दबाजी में कार्रवाई करने से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कमजोर विश्वसनीयता वाले केंद्रीय बैंकों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए बाजार में मजबूत संकेत भेजने की आवश्यकता हो सकती है।
मौजूदा वैश्विक झटकों से बचाव का रास्ता सुझाते हुए आईएमएफ प्रमुख ने देशों से ऊर्जा-बचत के कदम उठाने का आग्रह किया है। इसमें उन्होंने परिवहन प्रोत्साहन औररिमोट वर्क/वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों का हवाला दिया है। उनका मानना है कि मजबूत अर्थव्यवस्थाएं ही संकट के समय सबसे अच्छा बचाव होती हैं, इसलिए उन्होंने सभी देशों से आह्वान किया है कि वे मौजूदा संकट के बाद अपनी नीतिगत गुंजाइश को फिर से बनाने पर काम करें।



