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IPO: आय के पाई-पाई का हिसाब देना होगा आसान, अध्यक्ष बोले- ‘सिर्फ जानकारी का अंबार लगाना पारदर्शिता नहीं’


भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड होने वाली कंपनियों के लिए अब आईपीओ से जुटाए गए पैसे के इस्तेमाल का हिसाब-किताब देना और भी पारदर्शी और आसान होने जा रहा है। बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को स्पष्ट किया है कि सेबी आईपीओ फंड के उपयोग की निगरानी और इसके खुलासे से जुड़े नियमों की समीक्षा कर रहा है। 

इंस्टीट्यूट ऑफ डायरेक्टर्स के एनुअल डायरेक्टर्स कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित करते हुए चेयरमैन ने कॉरपोरेट जगत को पारदर्शिता का नया मंत्र दिया। उन्होंने साफ कहा कि केवल ढेर सारी जानकारियां दे देना सच्ची पारदर्शिता नहीं है, बल्कि जानकारी की गुणवत्ता, समयबद्धता और उसकी उपयोगिता ही असली पारदर्शिता तय करती है।

आईपीओ फंड के इस्तेमाल की निगरानी में क्या बदलाव करने जा रहा है सेबी?

क्या कंपनियां आईपीओ से जुटाए गए फंड का सही इस्तेमाल कर रही हैं? इस पर पैनी नजर रखने के लिए सेबी अपने मौजूदा नियमों की समीक्षा कर रहा है। चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय के अनुसार, इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य फंड के उपयोग से जुड़े खुलासे को अधिक समयबद्ध बनाना और पूरी अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना है। इससे जहां एक तरफ निवेशकों को यह जानने में आसानी होगी कि उनका पैसा किस काम में लगाया जा रहा है, वहीं कंपनियों के लिए कागजी कार्रवाई पहले से अधिक आसान हो जाएगी।

सेबी चेयरमैन के अनुसार कॉर्पोरेट पारदर्शिता का असली पैमाना क्या है?

अक्सर कंपनियां नियमों का पालन करने के लिए दस्तावेजों और जानकारियों का अंबार लगा देती हैं, लेकिन सेबी प्रमुख का मानना है कि यह वास्तविक पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता केवल सूचना की मात्रा में नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, समयबद्धता और उपयोगिता में छिपी है। जानकारी ऐसी होनी चाहिए जो निवेशकों को महत्वपूर्ण मुद्दों को समझने में मदद करे। इसी दिशा में सेबी ने पहले ही संवेदनशील जानकारियों के खुलासे के ढांचे को मजबूत किया है, जिसमें नियमों में एकरूपता लाने के लिए स्पष्ट ‘मटेरियलिटी थ्रेसहोल्ड’ और सख्त समय सीमाएं तय की गई हैं।

रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शन (आरपीटी) और जुर्माने के नियमों को लेकर क्या है सेबी की नई योजना?

कंपनियों के भीतर होने वाले आपसी लेन-देन यानी ‘रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शन’ (आरपीटी) में पारदर्शिता लाने के लिए सेबी अपने मौजूदा ढांचे को और अधिक सुस्पष्ट करने का प्रस्ताव रख रहा है। चेयरमैन ने बताया कि सेबी का उद्देश्य इन नियमों को कंपनियों के लिए व्यावहारिक व काम करने के अनुकूल बनाना है, जबकि निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों (सेफगार्ड्स) को भी पूरी तरह से बरकरार रखा जाएगा।



इसके साथ ही, लिस्टेड कंपनियों को दोहरे जुर्माने से बचाने के लिए सेबी एक नया ढांचा पेश कर रहा है। वर्तमान में यदि कोई कंपनी एक से अधिक एक्सचेंज पर लिस्टेड है, तो कई बार एक ही गलती के लिए अलग-अलग एक्सचेंज उस पर दोहरा जुर्माना लगा देते हैं। इस दोहरे जुर्माने की विसंगति को दूर करने के लिए सेबी एक नया ढांचा पेश कर रहा है। इसका उद्देश्य नियमों के मूल उद्देश्य और गरिमा को बनाए रखते हुए पूरी नियामक व्यवस्था को अधिक कुशल बनाना है।

सेबी के नए प्रस्ताव और समीक्षा नीतियां भारतीय शेयर बाजार को अधिक पारदर्शी, निवेशक-अनुकूल और व्यापार-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। नियमों को सरल बनाकर और जुर्माने के दोहराव को खत्म करके सेबी जहां कंपनियों का बोझ कम कर रहा है, वहीं आईपीओ फंड की सख्त निगरानी और आरपीटी नियमों को स्पष्ट कर निवेशकों के भरोसे को और मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में इन सुधारों के लागू होने से भारतीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस में नया सकारात्मक मोड़ देखने को मिल सकता है।



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