ईरान संकट के बीच भारत कारोबार के लिए नए बाजारों में जमने की तैयारी में है। इसके लिए कनाडा, इस्राइल, श्रीलंका, पेरू, चिली, ऑस्ट्रेलिया और मेक्सिको के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर तेजी से काम हो रहा है। फिलीपींस और मालदीव के साथ भी बातचीत आगे बढ़नी है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी अमेरिका (विशेषकर अमेरिका) और यूरोप (नीदरलैंड्स के नेतृत्व में) जैसे पारंपरिक बाजार निर्यात के प्रमुख आधार बने रहे। उत्तर-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका जैसे उभरते क्षेत्र महत्व प्राप्त कर रहे हैं। यह धीरे-धीरे विविधीकरण को दर्शाता है। मुक्त व्यापार समझौतों के जरिये भारत का कुल व्यापार 2024 में बढ़कर 28.8 फीसदी पहुंच गया, जो 2006 में 4.6 फीसदी था। अमेरिका के साथ व्यापार समझौता लागू हो जाने के बाद यह हिस्सेदारी और बढ़ेगी।
आयात-निर्यात में खाड़ी क्षेत्र का 12 फीसदी हिस्सा
- भारत के कुल निर्यात-आयात में खाड़ी क्षेत्र की करीब 12 फीसदी है। इसमें यूएई (निर्यात 7.5 फीसदी एवं आयात 6.1 फीसदी) और सऊदी अरब (निर्यात 2.36 फीसदी व आयात 3.9 फीसदी) प्रमुख साझेदार हैं। यूएई एक प्रमुख पुनः निर्यात केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो भारत के व्यापार को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप से जोड़ता है।
- भारत के कुल निर्यात में अमेरिका, यूएई और हांगकांग की संयुक्त हिस्सेदारी 70-75 फीसदी है। वहीं, स्पेन भारत के लिए शीर्ष-10 निर्यात गंतव्यों में शामिल हुआ। उत्तर-पूर्व एशिया में निर्यात 33.5 फीसदी बढ़ा है।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि खाड़ी क्षेत्र में प्रमुख ऊर्जा ढांचों पर मिसाइल हमलों ने आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। वैश्विक स्तर पर परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ रही है। बहुपक्षीय संस्थानों ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा कीमतों में लगातार वृद्धि वैश्विक जीडीपी को धीमा कर सकती है और विशेष रूप से ईंधन आयात पर निर्भर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार सुधार की गति को कमजोर कर सकती है।