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Ketan Murder Case: ‘गेट एनालिसिस’ तय करेगी चेतन की किस्‍मत! कभी इसी टेक्‍नोलॉजी ने CIA पहुंची थी ओसामा तक


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‘गेट एनालिसिस’ तय करेगी चेतन की किस्‍मत! इसी ट्रिक से CIA पहुंची थी ओसामा तक

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पुणे पुलिस केतन हत्याकांड में आरोपी चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस कराने जा रही हे. आखिर गेट एनालिसिस क्या होता है, यह कैसे किया जाता है, सीसीटीवी फुटेज में इसकी क्या भूमिका होती है और फोरेंसिक जांच में इसे कितना भरोसेमंद माना जाता है? जानिए गेट एनालिसिस की पूरी प्रक्रिया और इसके पीछे की साइंस.

फोरेंसिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक गेट एनालिसिस एक उपयोगी और तेजी से विकसित होती टेक्नोलॉजी है, लेकिन यह 100 फीसदी आइडेंटिफिकेशन की गारंटी नहीं देती. इसकी विश्वसनीयता काफी हद तक सीसीटीवी फुटेज की क्वालिटी, रिकॉर्डिंग के एंगल, उपलब्ध डेटा और एक्सपर्ट्स के एनालिसिस पर निर्भर करती है.

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कई देशों में फोरेंसिक जांच के हिस्से के रूप में गेट एनालिसिस रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाती है. भारत में भी जांच एजेंसियां जरूरत पड़ने पर इसका सहारा लेती हैं. हालांकि, अदालत सिर्फ गेट एनालिसिस के आधार पर फैसला नहीं करती. कोर्ट यह देखती है कि यह रिपोर्ट बाकी साइंटिफिक और परिस्थितिजन्य एविडेंस से कितनी मैच करती है.

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गेट एनालिसिस को आमतौर पर सपोर्टिव फोरेंसिक एविडेंस माना जाता है. यानी यह जांच में मदद करने वाला एक साइंटिफिक टूल है, लेकिन अकेले इसके आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं किया जा सकता. पुलिस आमतौर पर इसे सीसीटीवी फुटेज, डीएनए, फिंगरप्रिंट, मोबाइल लोकेशन, गवाहों के बयान और दूसरे एविडेंस के साथ जोड़कर देखती है.

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कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए अपनी चाल बदलने की कोशिश जरूर कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना आसान नहीं होता. अगर कोई जानबूझकर अलग तरीके से चलता है, तो शरीर के दूसरे हिस्सों की मूवमेंट में अक्सर असंतुलन दिखाई देने लगता है. प्रशिक्षित फोरेंसिक एक्सपर्ट ऐसे बदलावों को पहचानने की कोशिश करते हैं.

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साइंटिस्ट्स का मानना है कि हर व्यक्ति की चाल कई फैक्टर्स से मिलकर बनती है. इसमें हड्डियों की बनावट, मांसपेशियों की ताकत, शरीर का वजन, कद, उम्र, पुराने फ्रैक्चर, चोट, आदतें और दिमाग का शरीर को कंट्रोल करने का तरीका शामिल होता है. यही वजह है कि हर इंसान की चाल में कुछ ऐसी यूनिक बातें होती हैं, जो उसे दूसरों से अलग बनाती हैं.

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गेट एनालिसिस में सिर्फ यह नहीं देखा जाता कि कोई तेज चल रहा है या धीरे. एक्सपर्ट कई छोटी-छोटी बातों पर फोकस करते हैं, जैसे कदमों की लंबाई, दोनों पैरों के बीच की दूरी, पैर जमीन पर किस एंगल से पड़ रहा है, शरीर कितना झुक रहा है, हाथों का मूवमेंट कैसा है, गर्दन और कंधों की पोजिशन कैसी है और चलने की स्पीड क्या है. इन सभी बातों को मिलाकर व्यक्ति की चाल का प्रोफाइल तैयार किया जाता है.

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सबसे पहले घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा किए जाते हैं. इसके बाद संदिग्ध व्यक्ति को सामान्य तरीके से चलने के लिए कहा जाता है और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है. कई बार अलग-अलग एंगल से रिकॉर्डिंग होती है, ताकि शरीर की हर मूवमेंट साफ दिखाई दे. इसके बाद दोनों वीडियो को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद से फ्रेम-बाय-फ्रेम कंपेयर किया जाता है.

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कई बार अपराधी अपना चेहरा मास्क, हेलमेट या हुडी से छिपा लेते हैं. ऐसे मामलों में फेस आइडेंटिफिकेशन मुश्किल हो जाता है. लेकिन किसी इंसान की चाल को पूरी तरह बदलना आसान नहीं होता. इसलिए जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे व्यक्ति की चाल का स्टडी करती हैं और उसकी तुलना संदिग्ध व्यक्ति की चाल से करती हैं.

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गेट एनालिसिस किसी व्यक्ति के चलने के तरीके यानी उसकी वॉकिंग पैटर्न की साइंटिफिक स्टडी है. इसमें देखा जाता है कि कोई इंसान कैसे कदम रखता है, कितनी लंबाई का कदम उठाता है, हाथ कैसे हिलाता है, शरीर का बैलेंस कैसा रहता है और चलते समय उसकी पूरी बॉडी कैसे मूव करती है. फोरेंसिक इंवेस्टिगेशन में इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी घटना का सीसीटीवी फुटेज मौजूद हो, लेकिन आरोपी का चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा हो.

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