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MoU: भारत-ऑस्ट्रिया के बीच व्यापार, निवेश और रक्षा संबंधों से जुड़े छह अहम समझौते, बना फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म


भारत और ऑस्ट्रिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, अंतरिक्ष और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कुल छह समझौतों, समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और सहमति पत्रों (एलओआई) का आदान-प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ऑस्ट्रियाई चांसलर के सम्मान में आयोजित एक विशेष लंच के बाद इन समझौतों को अंतिम रूप दिया गया।

सरकार की ओर से क्या बताया गया?

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इस उच्च स्तरीय दौरे पर एक विशेष ब्रीफिंग में बताया कि हैदराबाद हाउस में दोनों देशों के नेताओं के बीच व्यापक बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं को कवर किया और आपसी हित के क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विस्तार से विचारों का आदान-प्रदान किया। 

भारत-ऑस्ट्रिया के बीच समझौतों का किस क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?

व्यापारिक जगत के लिए इस वार्ता का सबसे बड़ा आकर्षण निवेश और उद्योग से जुड़े फैसले रहे:


  • निवेश के लिए फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म: दोनों देशों की ओर से द्विपक्षीय निवेश को तेजी से बढ़ावा देने के लिए एक ‘फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म’ (त्वरित तंत्र) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए एक-दूसरे के देश में पूंजी प्रवाह और व्यापार करना ज्यादा आसान हो जाएगा।

  • खाद्य सुरक्षा और मानक: दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा और मानकों पर एक अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और कृषि व्यापार से जुड़े क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

रक्षा, अंतरिक्ष और अन्य अहम समझौते

भारत और ऑस्ट्रिया ने अपनी रणनीतिक साझेदारी का दायरा बढ़ाते हुए कई अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग की रूपरेखा तैयार की है:


  • रक्षा और तकनीक क्षेत्र: सैन्य मामलों, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी साझेदारी में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट पर मुहर लगी है। यह समझौता इस साल जनवरी में हस्ताक्षरित ‘भारत-ईयू रक्षा और सुरक्षा साझेदारी’ के आधार पर आगे बढ़ेगा।

  • ऑडियो-विजुअल और मीडिया: मीडिया और मनोरंजन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन’ के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है।

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग: अंतरिक्ष उद्योग को नई गति देने के लिए दोनों पक्ष वर्ष 2026 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में एक संयुक्त रूप से द्विपक्षीय अंतरिक्ष उद्योग सेमिनार आयोजित करने पर सहमत हुए हैं। 

  • रोजगार और शांति स्थापना: युवाओं और पेशेवरों की गतिशीलता के लिए ‘वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम’ को शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही ‘इंडिया सेंटर फॉर यूएन पीसकीपिंग’ (संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के लिए भारत केंद्र) और ‘ऑस्ट्रियाई आर्म्ड फोर्सेज इंटरनेशनल सेंटर’ के बीच एक नई साझेदारी का भी ऐलान किया गया है।

कुल मिलाकर, ऑस्ट्रियाई चांसलर की यह भारत यात्रा दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। विशेषकर निवेश के लिए स्थापित किया गया ‘फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म’ और रक्षा व अंतरिक्ष उद्योग में होने वाले संयुक्त प्रयास आने वाले समय में दोनों देशों के व्यापारिक समुदाय के लिए नए और मजबूत अवसर पैदा करेंगे।



समझौतों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “चांसलर स्टॉकर, आपकी पहली भारत यात्रा पर मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ। हमे बहुत खुशी है कि आपने यूरोप के बाहर अपनी पहली यात्रा के लिए भारत को चुना। यह आपके विज़न और भारत-ऑस्ट्रीया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”



पीएम मोदी ने कहा कि चार दशकों के बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026 के ऐतिहासिक भारत -यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड अग्रीमन्ट के बाद, भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच संबंधों में एक नए सुनहरे अध्याय की शुरुआत हुई है। चांसलर स्टॉकर की विज़िट से, हम भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को भी एक नए कालखंड में ले जा रहे हैं।



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