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Aaj Ka Mausam: यूपी-राजस्थान में बढ़ेगी सूरज की तपिश, 8 राज्यों में भारी बारिश की आशंका, क्या है IMD का अपडेट?


Aaj Ka Mausam: यूपी-राजस्थान में बढ़ेगी सूरज की तपिश, 8 राज्यों में भारी बारिश की आशंका, क्या है IMD का अपडेट? | IMD Weather Forecast Today 21 April 2026 Aaj Ka Mausam Heat Wave Alert in UP-MP , Rain expected Bihar JK-UTT, Assam, in Hindi – Hindi Oneindia



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13 साल से अधूरा सपना,रिफाइनरी में आग से उठे सवाल: बेस्ट टेक्नोलॉजी और इंजीनियर्स के बावजूद हादसा, एक्सपट्‌र्स ने बताया कितना बड़ा नुकसान – Rajasthan News


राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा (पचपदरा) में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में 20 अप्रैल दोपहर 2 बजे आग लग गई। आग रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में लगी। रिफाइनरी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (आज) उद

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इस हादसे ने न सिर्फ सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राजस्थान की इकोनॉमी को बड़ा घाव भी दिया है। साल 2013 से लेकर अब तक 13 सालों में पहले ही रिफाइनरी की लागत 37 हजार 230 करोड़ से बढ़कर 79 हजार 459 करोड़ तक पहुंच चुकी है।

भास्कर ने एक्सपट्‌र्स से बात कर जाना कि शिलान्यास से उद्घाटन तक कौन सी चुनौतियां आईं, जिसके कारण बार-बार रिफाइनरी का काम रुका। साथ ही अब इस हादसे से कितना बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।

रिफाइनरी की CDU और VDU यूनिट में लगी भीषण आग।

बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के सपने के पीछे की असल कहानी की शुरुआत साल 2004 में बाड़मेर के मंगला ऑयल फील्ड की खोज से शुरू हुई। साल 2009 में यहां से प्रोडक्शन शुरू हुआ। इसी के साथ ही राजस्थान में लोकल रिफाइनिंग की जरूरत महसूस की गई।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया। उस समय अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे।

रिफाइनरी प्रोजेक्ट के मॉडल में हिंदुस्तान पेट्रोलियम काॅरपोरेशन लिमिटेड को 74 फीसदी और राजस्थान सरकार को 26 फीसदी का हिस्सेदार बनाते हुए जॉइंट वेंचर में रखा गया था। तब इसकी अनुमानित लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए थी। साल 2017–18 तक रिफाइनरी चालू करने का टारगेट रखा गया था।

शिलान्यास और घोषणा की टाइमिंग चुनाव से ऐन पहले थी। ऐसे में शिलान्यास के साथ ही राजनीति भी शुरू हो गई। प्रोजेक्ट में ठोस टेंडरिंग व कंस्ट्रक्शन स्टार्ट होता इससे पहले ही राजस्थान में आदर्श आचार संहिता लग गई। चुनाव के बाद सरकार बदली और रिफाइनरी प्रोजेक्ट री-एसेसमेंट, लागत बढ़ोतरी और नई शर्तों में उलझता चला गया।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया था।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया था।

प्रोजेक्ट को री-नेगोशिएशन और रिव्यू में डाला वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार आने के बाद प्रोजेक्ट में दी जा रही ज्यादा सब्सिडी, टैक्स बेनिफिट और कम रिटर्न की आशंका के चलते इसे री-नेगोशिएशन और रिव्यू में डाल दिया गया। इसके बाद अगले पांच साल तक ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। कांग्रेस का आरोप था कि बीजेपी ने इसे जानबूझकर रोक दिया। बीजेपी का पक्ष था कि रिव्यू के बिना ये प्रोजेक्ट घाटे का सौदा था।

करीब 5 साल की देरी और विवादों के बीच आखिरकार पचपदरा रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट को लेकर फिर से उम्मीद जगी। रिफाइनरी की शर्तों में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से इसके कार्य का शुभारंभ किया। इस समय इसकी लागत बढ़कर 43 हजार 129 करोड़ रुपए हो गई थी। इसका काम 31 अक्टूबर 2022 तक पूरा किया जाना था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ किया था।

कोविड के दौरान ठप हो गया काम इसके बाद फिर राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो गया। अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस सरकार बन गई। हालांकि इसके बाद भी पचपदरा रिफाइनरी का प्रोजेक्ट चलता रहा, लेकिन स्पीड भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, रीडिजाइन, टेक्निकल बदलावों और लागत बढ़ोतरी के चलते धीमी ही रही। कोविड के दौरान साल 2020 और 2021 में तो काम पूरा ठप ही हो गया था।

2023 में फिर राजस्थान में भजनलाल सरकार बनी। रिफाइनरी के लागत मूल्य में दूसरा संशोधन प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत करने के बाद इसकी लागत बढ़कर 79 हजार 459 करोड़ रुपए हो गई थी। इसे 8 अप्रैल 2026 को मंजूर कर दिया गया और एक जुलाई 2026 से कमर्शियल ऑपरेशन का टारगेट तय किया गया।

अब 20 अप्रैल को हुए अग्निकांड के बाद न सिर्फ रिफाइनरी का उद्घाटन बल्कि इसका कमर्शियल ऑपरेशन का टारगेट भी आगे बढ़ना तय हो गया है। एक दिन पहले की स्टेटस रिपोर्ट की मानें तो रिफाइनरी का 92 फीसदी काम पूरा हो चुका था। ऐसे में जहां तेल शोधन (ऑयल रिफाइनिंग) का बड़ा काम होना था, ठीक उसी यूनिट में आग लगने से राजस्थान में रिफाइनरी के सपनों को झटका लगा है। अब ये जख्म कब तक भरेगा, इसका फिलहाल अंदाजा लगना मुश्किल है।

20 अप्रैल की दोपहर बालोतरा के पचपदरा स्थित रिफाइनरी में आग लग गई थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम घंटों मशक्कत करती रही थी।

20 अप्रैल की दोपहर बालोतरा के पचपदरा स्थित रिफाइनरी में आग लग गई थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम घंटों मशक्कत करती रही थी।

रिपेयरिंग और डैमेज असेसमेंट में लग सकता है समय रिफाइनरी मामलों के जानकार सोर्सेज ने बताया कि इस रिफाइनरी को लेकर दावा किया जा रहा था कि इसमें दुनिया की बेस्ट टेक्नोलॉजी, बेस्ट इक्यूप्मेंट्स और बेस्ट इंजीनियर्स का इस्तेमाल हो रहा था। ऐसे में उद्घाटन से पहले ये हादसा बड़े सवाल खड़े करता है।

एक्सपट्‌र्स ने बताया कि फिलहाल इतनी बड़ी घटना को लेकर कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी ही होगी। इसके लिए सबसे पहले ये देखना होगा कि ये यूनिट किस कंपनी की थी? सप्लाई किसने किया था? क्या ये कंपनी इंजीनियर के चार्ज में थी या इसे रिफाइनरी के इंजीनियर्स ने चार्ज में ले लिया था? टेक्निकल ऑडिट किसने किया था? और उन एक्सपट्‌र्स की क्या रिपोर्ट थी। इन सभी सवालों के जवाब आने के बाद ही इस हादसे को लेकर कुछ ठोस कहा जा सकता है।

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एक्सपट्‌र्स का मानना है कि रिफाइनरी के दिल में ही आग लगी है तो नुकसान तो बड़ा ही हुआ है। रिफाइनरी की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं कमर्शियल रन समय पर स्टार्ट नहीं होने से होने वाला नुकसान अलग है। हालांकि इतनी बड़ी रिफाइनरी में सभी यूनिट और इक्यूप्मेंट्स डबल इन्स्योर्ड होते हैं। ग्लोबल सप्लायर कंपनीज की गारंटी में भी होते हैं, लेकिन रिप्लेसमेंट और दुबारा फेब्रिकेशन व इंस्टॉलेशन में लगने वाला टाइम प्रोडक्शन को बड़ा इकोनॉमिक लॉस देता है।

CDU-VDU यूनिट से क्रूड ऑयल की डिस्टिलेशन शुरू होती है। साधारण शब्दों में कहें तो यहीं क्रूड से पेट्रोल, डीजल, और दूसरे पेट्रोलियम पदार्थ निकलते हैं। इस आग के बाद इसकी रिपेयरिंग और इसके डैमेज असेसमेंट में 1 से 6 महीने लग सकते हैं। अगर जुलाई 2026 से कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होता, तो 9 MMTPA क्षमता के हिसाब से मंथली रेवेन्यू 50 हजार से 80 करोड़ के आसपास होने वाला था। अब हर महीने की देरी से यह संभावित रेवेन्यू लॉस होना तय है।

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1- राजस्थान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी में आग:कई घंटे बाद काबू पाया गया; कल प्रधानमंत्री उद्घाटन करने वाले थे, घटना के बाद कार्यक्रम स्थगित

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राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में सोमवार दोपहर 2 बजे भीषण आग लग गई। जानकारी के मुताबिक आग रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में लगी। पढ़ें पूरी खबर…

2- रिफाइनरी सही होने में लगेंगे 4 महीने:क्रूड ऑयल की प्रोसेसिंग रुकी, रिफाइनरी में आग की लपटें देख भागा सिक्योरिटी स्टाफ, जानें कैसे लगी आग

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राजस्थान के बालोतरा में पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार को सिस्टम फेलियर की वजह से आग लगी थी। प्रत्यक्षदर्शी इंजीनियर का कहना है- रिफाइनरी की 2 महत्वपूर्ण यूनिट में मशीनों के बीच फ्रिक्शन(घर्षण) हुआ। इससे चिंगारी निकली। पढ़ें पूरी खबर…



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Aaj Ka Panchang: आज का पंचांग, 21 अप्रैल 2026, मंगलवार


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LPG: ‘क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति सामान’, सरकार ने बताया


पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को बताया कि जनवरी में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत करीब 63 डॉलर प्रति बैरल थी, जो मार्च में बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। अप्रैल में इसका औसत मूल्य लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया है।

हालांकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार ने कहा कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पड़ोसी देशों की तुलना में अब भी सबसे कम स्तरों में शामिल हैं।

एलपीजी आपूर्ति पर उन्होंने कहा कि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सामान्य है और किसी भी वितरक के यहां कमी की शिकायत नहीं मिली है। वर्तमान में गैस सिलेंडर डिलीवरी दक्षता 93 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग में कुछ गिरावट आई है और यह फिलहाल 45 से 46 लाख प्रतिदिन के दायरे में है, जबकि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति लगभग पूरी तरह बहाल हो चुकी है।

सरकार ने प्रवासी आबादी को राहत देने के लिए पांच किलो वाले छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता भी बढ़ाई है। 3 अप्रैल से अब तक 7,400 जागरूकता शिविर लगाए गए हैं और 1.07 लाख से अधिक छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।

प्राकृतिक गैस आपूर्ति को लेकर भी सरकार ने स्थिति सामान्य बताई है। घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और सीएनजी परिवहन की आपूर्ति 100 प्रतिशत बनाए रखी गई है। अब तक 5.68 लाख नए उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि 39,400 से अधिक उपभोक्ताओं ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर पीएनजी अपनाया है।

सरकार ने कहा कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर किसी भी उत्पाद की कमी नहीं है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। अनियमितताओं को रोकने के लिए सोमवार को 2,200 से अधिक औचक निरीक्षण और छापेमारी भी की गई।

सरकार ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया संकट के असर पर लगातार नजर रखी जा रही है और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।



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Delhi Power Cut: 21 अप्रैल को हौज खास, पंजाबी बाग समेत इन इलाकों में बिजली कटौती, देखें शटडाउन का पूरा शेड्यूल


Delhi Power Cut: 21 अप्रैल को हौज खास, पंजाबी बाग समेत इन इलाकों में बिजली कटौती, देखें शटडाउन का पूरा शेड्यूल | Delhi Power Cut Schedule 21 April 2026 Hauz Khas, Punjabi Bagh Saket BSES Maintenance – Hindi Oneindia



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रिपोर्ट: तेल की कीमतों में नरमी से भारत को व्यापार घाटे में मिलेगी राहत, सोने-चांदी के आयात ने बढ़ाई चिंता


कई देशों के साथ व्यापार समझौते और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी के बाद आने वाली नरमी से भारत को रिकॉर्ड व्यापार घाटे के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक रिपोर्ट में कहा, प्रमुख रूप से सोने और चांदी के आयात में वृद्धि से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 333.3 अरब डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। अगर भू-राजनीतिक मोर्चे पर हालात नियंत्रित रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत के व्यापार घाटे में कमी आने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद उपजे वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के आर्थिक बुनियादी आधार स्थिर बने हुए हैं। भू-राजनीतिक बाधाएं जैसे-जैसे दूर होंगी और विभिन्न देशों से नए व्यापार समझौतों का समर्थन मिलेगा, भारत के बाहरी क्षेत्र के प्रदर्शन में काफी सुधार होने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ देश का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि कमोडिटी की कीमतों में नरमी से आयात बिल में कमी आएगी और व्यापार घाटे के मोर्चे पर राहत मिलेगी। हालांकि, अगर ये बाधाएं बनी रहती हैं एवं कच्चे तेल समेत कमोडिटी की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो देश के चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.5 से 2 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से 441.7 अरब डॉलर की वस्तुओं का निर्यात किया गया, जो सिर्फ 0.9 फीसदी की वृद्धि दिखाता है। 2024-25 में यह 0.2 फीसदी बढ़ा था। आयात भी 721 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 775 अरब डॉलर पहुंच गया। इस तरह, कुल व्यापार घाटा बढ़कर 333 अरब डॉलर के पार पहुंच गया।

सेवाओं का निर्यात बढ़ने से कुल व्यापार घाटा (वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर) 119.3 अरब डॉलर रहा। 2024-25 में देश का कुल व्यापार घाटा 94.7 अरब डॉलर रहा था।

2025-26 के दौरान क्रूड का आयात 6.5 फीसदी कम हो गया, जबकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण होर्मुज मार्ग बंद होने से तेल की कीमतें 58 फीसदी बढ़ गई थीं। 2025-26 के अप्रैल से फरवरी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में सालाना आधार पर एक फीसदी की गिरावट आई, जिससे क्रूड आयात बिल पर पड़ने वाले पूरे साल के नुकसान को सीमित करने में मदद मिली।

ये भी पढ़ें: एपल को मिला नया सीईओ: टिम कुक पद से देंगे इस्तीफा, कंपनी के हार्डवेयर प्रमुख जॉन टर्नस संभालेंगे कमान

चीन से आयात 2024-25 के 11.5 फीसदी के मुकाबले 16 फीसदी बढ़ गया। अमेरिका से आयात भी 8.1 फीसदी से बढ़कर 15.9 फीसदी पहुंच गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतों में उछाल के कारण सोना और चांदी आयात बिल पर सबसे ज्यादा दबाव डालने वाले कारक बने रहे। सोने का आयात 2024-25 में 27 फीसदी बढ़ने के बाद 2025-26 में 26 फीसदी बढ़ गया। चांदी के आयात में बीते वित्त वर्ष के दौरान 151 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि 2024-25 में 11.3 फीसदी की गिरावट आई थी।



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तमिलनाडु में ₹1,200 करोड़+ के कैश-गोल्ड और फ्रीबीज जब्त: PM मोदी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप, चुनाव आयोग को 700 नागरिकों ने लेटर लिखा




तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में 1,200 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी, सोना-चांदी, फ्रीबीज, शराब और ड्रग्स जब्त किए हैं। इसमें ₹169.85 करोड़ कैश, ₹650.87 करोड़ के सोना-चांदी शामिल हैं। वहीं महिला आरक्षण बिल को लेकर 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश को संबोधन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 700 से अधिक नागरिकों ने चुनाव आयोग को लेटर लिखकर इसे आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन बताया है। लेटर लिखने वालों में पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, एक्टिविस्ट और पत्रकार शामिल हैं। शिकायत में कहा गया है कि यह संबोधन दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुआ, जो चुनाव के दौरान पक्षपातपूर्ण प्रचार के समान है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर इस प्रसारण को अनुमति दी गई थी, तो अन्य राजनीतिक दलों को भी समान समय दिया जाना चाहिए। चुनाव से जुड़े 3 अपडेट्स…



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एपल को मिला नया सीईओ: टिम कुक पद से देंगे इस्तीफा, कंपनी के हार्डवेयर प्रमुख जॉन टर्नस संभालेंगे कमान


एपल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। स्टीव जॉब्स के बाद उन्होंने यह पद संभाला था। अब उनका लगभग 15 साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है।

जॉन टर्नस बनेंगे एपल के नए सीईओ

इस दौरान कंपनी का बाजार मूल्य बहुत तेजी से बढ़ा। आईफोन के दौर में एपल का मूल्य 3.6 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया। टिम कुक (65 वर्षीय) एक सितंबर से सीईओ के पद से हट जाएंगे। उनकी जगह कंपनी के हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख जॉन टर्नस नए सीईओ बनेंगे।

कंपनी के कामकाज में सीमित भूमिका निभाते रहेंगे कुक

हालांकि, टिम कुक कंपनी से पूरी तरह नहीं हटेंगे। वह एपल में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जुड़े रहेंगे और कंपनी के कामकाज में भूमिका निभाते रहेंगे। यह बदलाव अमेजन के जेफ बेजोस और नेटफ्लिक्स के रीड हेस्टिंग्स की तरह है। उन्होंने भी सीईओ पद छोड़ने के बाद कंपनी में सीमित भूमिका निभाई थी।

टिम कुक को स्टीव जॉब्स जैसी दूरदर्शिता वाला तकनीकी दिग्गज नहीं माना गया। लेकिन उन्होंने जॉब्स द्वारा बनाए गए आईफोन और अन्य तकनीकी नवाचारों का उपयोग किया। इसके जरिए उन्होंने एपल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। एपल कंपनी 1990 के दशक में लगभग दिवालिया होने की स्थिति में थी। कुक के नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो गई।

भारत में एपल पर सख्ती, लग सकता है 3.56 लाख करोड़ का जुर्माना

उधर, आईफोन एप्स मार्केट में दबदबे वाली स्थिति का गलत इस्तेमाल करने के मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने एपल के खिलाफ जांच तेज करते हुए अंतिम सुनवाई की तारीख 21 मई तय कर दी है। यह कदम एपल की ओर से वित्तीय डाटा देने से लगातार इन्कार करने और जांच के निष्कर्षों पर उसकी आपत्तियों के बाद उठाया गया है। मामले में दोषी पाए जाने पर एपल पर 38 अरब डॉलर (करीब 3.56 लाख करोड़ रुपये) तक का भारी-भरकम जुर्माना लग सकता है।

सीसीआई न अपने आदेश में क्या कहा?

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने 8 अप्रैल के एक आदेश में कहा, एंटीट्रस्ट मामले में जांच के लिए एपल से कुछ वित्तीय जानकारियां मांगी गई थीं। लेकिन, अमेरिकी कंपनी अक्तूबर, 2024 से अब तक ये विवरण जमा करने में नाकाम रही। साथ ही, उसने दिल्ली हाई कोर्ट में भारत के एंटीट्रस्ट जुर्माना कानून को चुनौती दी है। सूत्रों का कहना है कि एंटीट्रस्ट जुर्माना कानून को चुनौती देने सहित एपल का रुख सीसीआई को तेजी से आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रहा है। नियामक एपल के इन कदमों को जांच में देरी करने की कोशिश के तौर पर देख रहा है। 

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मामला कहां से शुरू हुआ?

यह मामला 2021 में तब शुरू हुआ था, जब मैच ग्रुप्स और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने एपल के कारोबारी तरीकों का विरोध किया था। मामले की जांच के बाद सीसीआई के जांचकर्ताओं ने 2024 में एक रिपोर्ट में कहा, एपल ने ऐप्स मार्केट में अपनी दबदबे वाली स्थिति का गलत फायदा उठाया। डेवलपर्स को अनिवार्य इन-एप पर्चेज (आईएपी) सिस्टम इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया। ये कदम बाजार में प्रतिस्पर्धा कम करते हैं।

मामले से जुड़े वकीलों का कहना है कि अंतिम सुनवाई की तारीख तय होना इस बात का संकेत है कि सीसीआई अपना रुख सख्त कर रहा है। दुआ एसोसिएट्स में एंटीट्रस्ट पार्टनर गौतम शाही ने कहा, एपल के पास अब भी मौका है कि वह ऑडिटर के सर्टिफिकेट के साथ अपने वित्तीय विवरण जमा करे और सुनवाई के दौरान इन डाटा के आधार पर जुर्माने की रकम पर बहस करे, जिसे कंपनी के वैश्विक टर्नओवर के आधार पर तय किया गया है। अगर वह ऐसा करने में नाकाम रहती है, तो जुर्माने की रकम पर उसकी दलीलें सीमित हो जाएंगी।



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The Bonus Market Update: शेयर बाजार में बढ़त के साथ क्लोजिंग; सेंसेक्स 753 अंक चढ़ा, निफ्टी 24550 के पार


पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच मंगलवार को घरेलू शेयर बाजारों ने शानदार वापसी की और एक मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद में कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों को नई ऊर्जा दी। 

शुरुआती कारोबार में धीमी चाल के बाद बाजार ने तेज रफ्तार पकड़ी। बीएसई सेंसेक्स 753.03 अंकों यानी 0.96 प्रतिशत की दमदार बढ़त के साथ 79,273.33 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 211.75 अंक या 0.87 प्रतिशत चढ़कर 24,576.60 पर पहुंच गया। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से ट्रेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक प्रमुख विजेताओं में शामिल थे।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.75 प्रतिशत गिरकर 94.76 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

एफएमसीजी और रियल्टी सेक्टर से बाजार में आई मजबूती

बाजार की इस चौतरफा तेजी में विभिन्न सेक्टर्स का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:


  • शीर्ष गेनर्स: निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 2 प्रतिशत से अधिक उछलकर इस रैली का नेतृत्व कर रहा था। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में भी 2.11 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की गई।

  • अन्य बढ़त वाले सेक्टर: निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.53 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी ऑटो 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,616 के स्तर पर पहुंच गया।

  • पिछड़ने वाले सेक्टर: इस तेजी के बीच केवल निफ्टी मेटल और निफ्टी फार्मा ही दो ऐसे सेक्टर रहे, जिन्होंने अपना सत्र लाल निशानके साथ समाप्त किया।

बाजार की चाल पर विशेषज्ञों की क्या राय?

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, निवेशकों ने मध्य पूर्व में निकट भविष्य में तनाव कम होने की उम्मीद के साथ अपना रुख तय किया है, जिससे भारतीय शेयर बाजारों ने सकारात्मक नोट पर कारोबार किया। उन्होंने बताया कि निफ्टी ने पूरे सत्र में एक स्थिर ऊपर का रुझान बनाए रखा। पोनमुडी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऊर्जा बाजार अभी समेकन के दौर में हैं, क्योंकि कारोबारी युद्ध-विराम वार्ता को लेकर चल रही अनिश्चितता और समाधान की उम्मीदों का आकलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, बाजार अब धीरे-धीरे वॉर-रिस्क प्रीमियम (युद्ध के जोखिम) को कम कर रहा है और एक संभावित कूटनीतिक सफलता की ओर देख रहा है। 



बाजार के प्रतिभागियों की नजरें विशेष रूप से पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली दूसरे दौर की वार्ता पर टिकी हैं। हालांकि, कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों के बावजूद अनिश्चितता का साया बरकरार है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं होता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिसमें ईरानी ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर संभावित हमले शामिल हैं। इसी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं और वर्तमान में यह लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

एशियाई बाजारों में भी दिखा सकारात्मक रुझान

वैश्विक स्तर पर सकारात्मक भावनाओं का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ असर दिखा। जापान का निक्केई 225 0.94 प्रतिशत बढ़कर 59,385 पर, हांगकांग का हैंग सेंग  0.62 प्रतिशत बढ़कर 26,525 पर और दक्षिण कोरिया का कोस्पी  2.65 प्रतिशत की बड़ी छलांग के साथ 6,388 पर पहुंच गया। इसके साथ ही, ताइवान का वेटेड इंडेक्स 1.72 प्रतिशत और सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

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व्यापक आधार पर दर्ज की गई यह बढ़त दर्शाती है कि निवेशक फिलहाल आशावादी हैं। हालांकि, भविष्य में बाजार की दिशा पूरी तरह से पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता के वास्तविक नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव पर ही निर्भर करेगी। किसी भी कूटनीतिक विफलता से बाजार में एक बार फिर अस्थिरता देखने को मिल सकती है।





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