LPG Price Today: ‘एलपीजी संकट की खबरें केवल अफवाह’, सरकार ने जारी किया बयान, क्या है आज सिलेंडर का रेट?
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Crude Prices: होर्मुज खुलने के एलान से कच्चे तेल में 10% की भारी गिरावट, वैश्विक बाजार में लौटी खरीदारी
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत के रूप में, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने की घोषणा के बाद शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस कदम से फारस की खाड़ी से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है, जिससे दुनिया भर में ग्राहकों तक कच्चे तेल की आपूर्ति सुचारू हो सकेगी। कच्चे तेल की आपूर्ति बहाल होने और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद के बीच अमेरिकी शेयर बाजार एक और रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ गए हैं।
कच्चे तेल के बाजार में भारी नरमी
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे खराब स्थिति से बचने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसका सबसे बड़ा और सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिखा है। बेंचमार्क अमेरिकी क्रूड की कीमत 10.8 प्रतिशत लुढ़ककर 81.28 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 10.3 प्रतिशत टूटकर 89.13 डॉलर पर आ गया है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड अभी भी युद्ध से पहले के 70 डॉलर के स्तर से ऊपर बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि वित्तीय बाजारों में अभी भी कुछ हद तक सतर्कता मौजूद है।
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शेयर बाजार में शानदार उछाल
वॉल स्ट्रीट पर हैलोवीन के बाद से लगातार तीसरे सप्ताह सबसे बड़ी बढ़त का दौर जारी है। एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.8 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 678 अंक या 1.4 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। तकनीकी शेयरों से भरपूर नैस्डैक में भी 1 प्रतिशत की तेजी देखी गई। देर मार्च में अपने निचले स्तर को छूने के बाद से अब तक अमेरिकी शेयरों में 11 प्रतिशत से अधिक का जबरदस्त उछाल आ चुका है।
कॉर्पोरेट नतीजे और ग्लोबल मार्केट्स
अमेरिका की बड़ी कंपनियों के 2026 की शुरुआत के लिए आए शानदार तिमाही नतीजों ने भी शेयर बाजार को अहम समर्थन दिया है।
- बैंकिंग और फाइनेंस: उम्मीद से बेहतर नतीजों के बाद स्टेट स्ट्रीट के शेयरों में 2.9 प्रतिशत और फिफ्थ थर्ड बैनकॉर्प में 1.9 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
- टेक और एंटरटेनमेंट: अनुमान से बेहतर मुनाफा कमाने के बावजूद नेटफ्लिक्स के शेयरों में 11.5 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। कंपनी ने पूरे साल के लिए अपनी राजस्व वृद्धि का अनुमान नहीं बढ़ाया, जिससे निवेशक निराश हुए। इसके अलावा, सह-संस्थापक रीड हेस्टिंग्स जून में अपने कार्यकाल की समाप्ति पर निदेशक मंडल से इस्तीफा दे देंगे।
- यूरोप और एशिया: यूरोपीय बाजारों ने ईरान की घोषणा पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी; फ्रांस का सीएसी40 2 प्रतिशत और जर्मनी का डैक्स 2.2 प्रतिशत उछल गया। हालांकि, एशियाई बाजारों में गिरावट रही क्योंकि यह घोषणा वहां कारोबार बंद होने के बाद आई थी। जापान का निक्केई 225 1.8 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग 0.9 प्रतिशत गिर गया।
बॉन्ड बाजार पर मुद्रास्फीति का कम होता दबाव
कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने मुद्रास्फीति के दबाव को कम कर दिया है, जिससे बॉन्ड बाजार में ट्रेजरी यील्ड में तेजी से नरमी आई है। 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड गुरुवार देर रात के 4.32 प्रतिशत से घटकर 4.24 प्रतिशत पर आ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का फिर से खुलना वैश्विक बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। इसके साथ ही, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी गुरुवार देर रात एक भाषण में कहा कि युद्ध जल्द ही समाप्त होना चाहिए। हालांकि, युद्ध शुरू होने के बाद से वॉल स्ट्रीट का आशावाद कई बार संदेह में तब्दील हुआ है, जिसके कारण शेयरों से लेकर बॉन्ड और तेल की कीमतों में अचानक और भारी उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। ऐसे में, बाजार की स्थायी स्थिरता पूरी तरह से युद्ध समाप्ति की आधिकारिक घोषणाओं और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता पर निर्भर करेगी।
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LPG: 2030 तक सड़कों से हटेंगे एलपीजी गैस टैंकर, ₹12500 करोड़ के निवेश से सरकार बिछाएगी 2500 किमी लंबी पाइपलाइन
घरों और कमर्शियल उपयोग के लिए एलपीजी गैस की सप्लाई को अब और अधिक सुरक्षित, सस्ता और भरोसेमंद बनाने की तैयारी हो रही है। देश के ऑयल एंड गैस रेगुलेटर, ‘पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड’ (पीएनजीआरबी) ने बड़े पैमाने पर एलपीजी पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की एक अहम पहल की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और साल 2030 तक सड़क मार्ग से होने वाले थोक एलपीजी परिवहन को पूरी तरह से खत्म करना है।
2,500 करोड़ रुपये का विशाल निवेश और चार प्रमुख रूट्स
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत देश भर में कुल 9 पाइपलाइन परियोजनाओं की पहचान की गई है। वर्तमान में पीएनजीआरबी लगभग 2,500 किलोमीटर लंबी चार प्रमुख पाइपलाइनों के लिए बोली प्रक्रिया पूरी करने के अंतिम चरण में है। जिन चार प्रमुख रूट्स पर काम चल रहा है, उनमें चेरलापल्ली-नागपुर, शिक्रापुर-हुबली-गोवा, पारादीप-रायपुर और झांसी-सितारगंज पाइपलाइन शामिल हैं। रेगुलेटर के अनुसार, इन परियोजनाओं में करीब 12,500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने का अनुमान है।
आम आदमी और अर्थव्यवस्था के लिए इसके मायने
वर्तमान में रिफाइनरियों और आयात टर्मिनलों से बॉटलिंग प्लांट तक गैस पहुंचाने के लिए भारी संख्या में सड़क टैंकरों का इस्तेमाल होता है। पाइपलाइन बिछने से यह थोक परिवहन सीधे तौर पर पाइपलाइन व्यवस्था में शिफ्ट हो जाएगा। पीएनजीआरबी का कहना है कि यह कदम अन्य परिवहन साधनों के मुकाबले अधिक किफायती साबित होगा। इसके अलावा, संकट के समय में ये पाइपलाइनें ‘स्टोरेज’ के रूप में भी काम करेंगी, जिससे देश में गैस सप्लाई की कोई कमी नहीं होगी।
पर्यावरण संरक्षण और हादसों में कमी
सड़कों से भारी गैस टैंकरों के हटने से सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे सुरक्षित सप्लाई सुनिश्चित होगी। ट्रांजिट के दौरान गैस के नुकसान में कमी आएगी और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटने से भारत के जलवायु लक्ष्यों को भी समर्थन मिलेगा।
इस पहल के संदर्भ में पीएनजीआरबी ने साफ किया है, “कुकिंग और कमर्शियल उपयोग में भारत की एलपीजी खपत महत्वपूर्ण मानी जाती है। बंदरगाहों और रिफाइनरियों को बॉटलिंग प्लांट से कुशलतापूर्वक जोड़ने की आवश्यकता है। हालांकि परिवहन के लिए पाइपलाइन पसंदीदा साधन हैं, फिर भी एक महत्वपूर्ण मात्रा अभी भी थोक टैंकरों द्वारा ले जाई जाती है”।
सरकार की घोषणा से जुड़े मुख्य बिंदू
- लक्ष्य:2030 तक सड़क मार्ग से थोक एलपीजी परिवहन को पूरी तरह खत्म करना।
- प्रोजेक्ट की लागत:लगभग 12,500 करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश।
- दायरा: शुरुआत में 2,500 किलोमीटर लंबी 4 प्रमुख पाइपलाइन का विकास।
- फायदे: सड़क दुर्घटनाओं में कमी, कम उत्सर्जन, और किफायती गैस सप्लाई।
सरकार के इस एलान का क्या मतलब?
पीएनजीआरबी की ओर से स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई यह पहल भारत के एनर्जी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। 2030 तक सड़क परिवहन से पूरी तरह मुक्ति पाने का लक्ष्य न केवल रोजगार पैदा करेगा और क्षेत्रीय विकास को गति देगा, बल्कि यह सभी के लिए सुलभ, कुशल और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने के भारत सरकार के विजन को भी साकार करेगा।
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स्पेस में 18 बार खतरे में आए भारतीय उपग्रह: इसरो ने रास्ता बदलकर मलबे से बचाया; 2025 में 1.5 लाख बार अलर्ट जारी
इसरो की ‘इंडियन स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस रिपोर्ट-2025’ के मुताबिक, 2025 में भारत को अपने सैटेलाइट्स को सुरक्षित रखने के लिए बहुत सतर्कता बरतनी पड़ी। 2025 में इसरो के सैटेलाइट्स के लिए करीब डेढ़ लाख से ज्यादा क्लोज अप्रोच अलर्ट जारी हुए। ये अलर्ट अमेरिकी स्पेस कमांड से मिले, जिनका विश्लेषण भारतीय वैज्ञानिकों ने अधिक सटीक ऑर्बिटल डेटा के साथ किया। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि लो-अर्थ ऑर्बिट (लियो) अब खतरनाक रूप से भीड़भाड़ वाला हो चुका है। अंतरिक्ष में मलबों के आपस में टकराने के खतरों से बचने के लिए इसरो को कुल 18 बार ‘कोलोजन अवॉइडेंस मैन्यूवर’ करना पड़ा जो 14 बार लियो सैटेलाइट्स के लिए और 4 बार जियो सैटेलाइट्स के लिए किया गया। इन मैन्यूवर्स में सैटेलाइट की गति और ऊंचाई में बदलाव कर संभावित टकराव को टाला जाता है। चिंता: चंद्रयान-2 के लिए 2025 में 16 ऑर्बिट मैन्यूवर भविष्य के जोखिम को देखते हुए भी इसरो को 84 बार अपनी ऑर्बिट मैन्यूवर प्लानिंग बदलनी पड़ी। गहरे अंतरिक्ष में चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर के लिए 2 बार प्लान बदला गया, ताकि नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर से टकराव से बचा जा सके। अकेले चंद्रयान-2 के लिए 2025 में 16 ऑर्बिट मैन्यूवर किए गए। इसरो ने 2025 में अपने सभी 5 लॉन्च के लिए लिफ्ट-ऑफ से पहले कोलोजन अवॉइडेंस एनालिसिस किया। एक मामले में एलवीएम3-एम6 मिशन की लॉन्चिंग को 41 सेकंड तक टालना पड़ा, ताकि मलबे से दूरी सुनिश्चित की जा सके। 10 सेंटीमीटर से बड़े 40,000 मलबों से खतरा अंतरिक्ष अब कचरे का डिब्बा: आईएसएसएआर 2025 और डब्ल्यूईएफ 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक अंतरिक्ष अब ‘कचरे का डिब्बा’ बनता जा रहा है। डराने वाले हैं ये आंकड़े: शोध के अनुसार, अंतरिक्ष में 10 सेंटीमीटर से बड़े 40,000 और 1 सेंटीमीटर से बड़े करीब 12 लाख मलबे के टुकड़े मौजूद हैं। तेजी से बढ़ रही स्पेस में भीड़: 2025 में 328 लॉन्च प्रयास हुए जिससे 4,198 सैटेलाइट्स स्थापित हुए और कुल 4,651 नए स्पेस ऑब्जेक्ट्स जुड़ गए। बुलेट से भी होती है तेज रफ्तार: स्पेस में कचरा 28,000 किमी/घंटा की रफ्तार से घूम रहा है। एक छोटा सा पेंच भी सैटेलाइट को तबाह कर सकता है। दूसरे देश कैसे कर रहे सैटेलाइट की सुरक्षा अमेरिका: उन्नत रडार नेटवर्क और सेंसर से से 40 हजार मलबों की रियल-टाइम ट्रैकिंग। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी: अत्याधुनिक कोलिजन अवॉइडेंस सॉफ्टवेयर। चीन: विशाल ग्राउंड-बेस्ड टेलीस्कोप और अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स को एक कक्षा से दूसरी में ले जाने वाली ‘ऑन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग’ तकनीक। जापान: निजी कंपनियों के साथ मिलकर चुंबकीय और बिजली के तारों जैसी तकनीकों से मलबे को खींचकर वापस धरती के वातावरण में लाने का प्रयोग। —————————— ये खबर भी पढ़ें… गगनयान मिशन का दूसरा क्रू मॉड्यूल टेस्ट सफल:चिनूक हेलिकॉप्टर से 3 किमी ऊंचाई से छोड़ा गया; पैराशूट के साथ समुद्र में सेफ लैंडिंग भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारी में बड़ी कामयाबी मिली है। ISRO ने शुक्रवार को दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-1) सफलतापूर्वक पूरा किया। पूरी खबर पढ़ें…
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