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LPG: 2030 तक सड़कों से हटेंगे एलपीजी गैस टैंकर, ₹12500 करोड़ के निवेश से सरकार बिछाएगी 2500 किमी लंबी पाइपलाइन


घरों और कमर्शियल उपयोग के लिए एलपीजी गैस की सप्लाई को अब और अधिक सुरक्षित, सस्ता और भरोसेमंद बनाने की तैयारी हो रही है। देश के ऑयल एंड गैस रेगुलेटर, ‘पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड’ (पीएनजीआरबी) ने बड़े पैमाने पर एलपीजी पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की एक अहम पहल की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और साल 2030 तक सड़क मार्ग से होने वाले थोक एलपीजी परिवहन को पूरी तरह से खत्म करना है। 

2,500 करोड़ रुपये का विशाल निवेश और चार प्रमुख रूट्स

इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत देश भर में कुल 9 पाइपलाइन परियोजनाओं की पहचान की गई है। वर्तमान में पीएनजीआरबी लगभग 2,500 किलोमीटर लंबी चार प्रमुख पाइपलाइनों के लिए बोली प्रक्रिया पूरी करने के अंतिम चरण में है। जिन चार प्रमुख रूट्स पर काम चल रहा है, उनमें चेरलापल्ली-नागपुर, शिक्रापुर-हुबली-गोवा, पारादीप-रायपुर और झांसी-सितारगंज पाइपलाइन शामिल हैं। रेगुलेटर के अनुसार, इन परियोजनाओं में करीब 12,500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने का अनुमान है।

आम आदमी और अर्थव्यवस्था के लिए इसके मायने

वर्तमान में रिफाइनरियों और आयात टर्मिनलों से बॉटलिंग प्लांट तक गैस पहुंचाने के लिए भारी संख्या में सड़क टैंकरों का इस्तेमाल होता है। पाइपलाइन बिछने से यह थोक परिवहन सीधे तौर पर पाइपलाइन व्यवस्था में शिफ्ट हो जाएगा। पीएनजीआरबी का कहना है कि यह कदम अन्य परिवहन साधनों के मुकाबले अधिक किफायती साबित होगा। इसके अलावा, संकट के समय में ये पाइपलाइनें ‘स्टोरेज’ के रूप में भी काम करेंगी, जिससे देश में गैस सप्लाई की कोई कमी नहीं होगी। 

पर्यावरण संरक्षण और हादसों में कमी

सड़कों से भारी गैस टैंकरों के हटने से सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे सुरक्षित सप्लाई सुनिश्चित होगी। ट्रांजिट के दौरान गैस के नुकसान में कमी आएगी और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटने से भारत के जलवायु लक्ष्यों को भी समर्थन मिलेगा। 

इस पहल के संदर्भ में पीएनजीआरबी ने साफ किया है, “कुकिंग और कमर्शियल उपयोग में भारत की एलपीजी खपत महत्वपूर्ण मानी जाती है। बंदरगाहों और रिफाइनरियों को बॉटलिंग प्लांट से कुशलतापूर्वक जोड़ने की आवश्यकता है। हालांकि परिवहन के लिए पाइपलाइन पसंदीदा साधन हैं, फिर भी एक महत्वपूर्ण मात्रा अभी भी थोक टैंकरों द्वारा ले जाई जाती है”।

सरकार की घोषणा से जुड़े मुख्य बिंदू


  • लक्ष्य:2030 तक सड़क मार्ग से थोक एलपीजी परिवहन को पूरी तरह खत्म करना।

  • प्रोजेक्ट की लागत:लगभग 12,500 करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश।

  • दायरा: शुरुआत में 2,500 किलोमीटर लंबी 4 प्रमुख पाइपलाइन का विकास।

  • फायदे: सड़क दुर्घटनाओं में कमी, कम उत्सर्जन, और किफायती गैस सप्लाई।

सरकार के इस एलान का क्या मतलब?

पीएनजीआरबी की ओर से स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई यह पहल भारत के एनर्जी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। 2030 तक सड़क परिवहन से पूरी तरह मुक्ति पाने का लक्ष्य न केवल रोजगार पैदा करेगा और क्षेत्रीय विकास को गति देगा, बल्कि यह सभी के लिए सुलभ, कुशल और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने के भारत सरकार के विजन को भी साकार करेगा।





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