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Arshdeep Singh Girlfriend: कौन हैं अर्शदीप सिंह की गर्लफ्रेंड समरीन कौर? कैसे चुराया यॉर्कर किंग का दिल?


Arshdeep Singh Girlfriend: कौन हैं अर्शदीप सिंह की गर्लफ्रेंड समरीन कौर? कैसे चुराया यॉर्कर किंग का दिल? | Who is Arshdeep Singh Girlfriend Samreen Kaur Punjabi Actress and Model IPL 2026 PBKS Bowler – Hindi Oneindia



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राफ्टिंग के ‘Grades’ क्या होते हैं? Level-1 से 6 तक बढ़ता जाता है खतरा


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Rishikesh News: अगर आप राफ्टिंग पर जाने की सोच रहे हैं या कभी इसका प्लान बनाया है, तो ‘ग्रेड’ शब्द जरूर सुना होगा. ये छोटे-छोटे नंबर ही तय करते हैं कि आपका एक्सपीरियंस मजेदार होगा या चुनौती भरा. आइए जानते हैं कि राफ्टिंग में किन-किन टारगेट से होकर गुजरना पड़ता है.

ऋषिकेश: रिवर राफ्टिंग सिर्फ एक एडवेंचर एक्टिविटी नहीं, बल्कि पानी की ताकत और इंसान के साहस का असली टेस्ट है. आपने अक्सर सुना होगा कि राफ्टिंग में ‘ग्रेड’ होते हैं, लेकिन ये ग्रेड असल में क्या बताते हैं. दरअसल इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुसार, नदियों को ग्रेड 1 से लेकर ग्रेड 6 तक बांटा जाता है. ये ग्रेड पानी के बहाव, लहरों की ऊंचाई, रैपिड्स की जटिलता और रिस्क फैक्टर को दर्शाते हैं. जैसे-जैसे ग्रेड बढ़ता है, वैसे-वैसे चुनौती और खतरा भी बढ़ता जाता है. इसलिए राफ्टिंग पर जाने से पहले इन ग्रेड्स को समझना बेहद जरूरी होता है, ताकि आप अपने अनुभव और फिटनेस के हिसाब से सही चुनाव कर सकें.

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान धर्मेंद्र सिंह नेगी गंगा नदी राफ्टिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि अगर आप राफ्टिंग पर जाने की सोच रहे हैं या कभी इसका प्लान बनाया है, तो ‘ग्रेड’ शब्द जरूर सुना होगा. ये छोटे-छोटे नंबर ही तय करते हैं कि आपका एक्सपीरियंस मजेदार होगा या चुनौती भरा. बात करें तो ग्रेड 1 सबसे आसान और सुरक्षित स्तर होता है. इसमें पानी शांत रहता है, लहरें बहुत हल्की होती हैं और किसी खास तकनीकी स्किल की जरूरत नहीं पड़ती है. पहली बार राफ्टिंग करने वाले बच्चे और बुजुर्ग भी इसमें आसानी से हिस्सा ले सकते हैं.

बेसिक पैडलिंग जरूरी
इसके बाद आता है ग्रेड-2, जहां पानी का बहाव थोड़ा तेज होता है और छोटे-छोटे रैपिड्स देखने को मिलते हैं. यहां राफ्ट को कंट्रोल करने के लिए बेसिक पैडलिंग जरूरी हो जाती है. यह लेवल उन लोगों के लिए सही है, जो हल्का एडवेंचर चाहते हैं लेकिन ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते. ग्रेड-3 को असली ‘व्हाइट वॉटर राफ्टिंग’ की शुरुआत माना जाता है. इसमें मीडियम से बड़े रैपिड्स, तेज बहाव और ऊंची लहरें होती हैं. यहां टीमवर्क, सही टाइमिंग और गाइड के निर्देशों का पालन बेहद जरूरी हो जाता है. कई लोकप्रिय राफ्टिंग रूट्स में इसी ग्रेड के रैपिड्स देखने को मिलते हैं, जो एडवेंचर और सेफ्टी का अच्छा बैलेंस देते हैं.

ग्रेड-4 और ग्रेड-5 में ऐसे रास्ते
ग्रेड-4 को एडवांस लेवल माना जाता है. इसमें पानी का बहाव बहुत तेज होता है, रैपिड्स जटिल होते हैं और रास्ते में चट्टानें या अचानक मोड़ जैसी बाधाएं आती हैं. यहां सिर्फ फिटनेस ही नहीं, बल्कि अच्छा अनुभव और मजबूत कोऑर्डिनेशन भी जरूरी होता है. राफ्ट के पलटने की संभावना भी बढ़ जाती है, इसलिए यह लेवल सिर्फ अनुभवी राफ्टर्स के लिए ही उपयुक्त होता है. इसके बाद आता है ग्रेड-5, जिसे एक्सट्रीम और हाई रिस्क कैटेगरी में रखा जाता है. इसमें लगातार शक्तिशाली रैपिड्स, अनिश्चित बहाव, बड़े ड्रॉप्स और बेहद जटिल रास्ते होते हैं. यहां हर मूवमेंट सोच-समझकर करना पड़ता है, क्योंकि रेस्क्यू ऑपरेशन भी मुश्किल हो सकता है. यह लेवल आमतौर पर प्रोफेशनल और बहुत अनुभवी राफ्टर्स के लिए ही होता है और इसे बिना सही ट्रेनिंग के करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

ग्रेड-6 कमर्शियल राफ्टिंग के लिए इस्तेमाल
सबसे आखिर में आता है ग्रेड-6, जिसे ‘एक्सप्लोरेटरी’ या ‘अनरनेबल’ कैटेगरी कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि इस लेवल के रैपिड्स इतने कठिन और अनिश्चित होते हैं कि इन्हें आमतौर पर कमर्शियल राफ्टिंग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसमें बड़े झरने जैसे ड्रॉप्स, बेहद तेज बहाव और ऐसी परिस्थितियां हो सकती हैं, जहां सुरक्षित तरीके से पार करना लगभग असंभव हो. बहुत कम एक्सपर्ट टीमें ही रिसर्च या एडवेंचर एक्सपेडिशन के तहत इसे ट्राय करती हैं, वो भी पूरी तैयारी और रिस्क एनालिसिस के साथ.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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Parliament Special Session: 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश, महिला आरक्षण और परिसीमन पर जमकर हुआ घमासान


Parliament Special Session: 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश, महिला आरक्षण और परिसीमन पर जमकर हुआ घमासान | Parliament Special Session: Women Reservation Bill, Delimitation Bill & Constitution 131st Amendment Sparks Major Political Debate – Hindi Oneindia



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नासिक TCS धर्मांतरण-यौन शोषण केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: कंपनी ने ऑफिस के सभी कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा; अब तक 7 गिरफ्तार




महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS ऑफिस से जुड़ा धर्मांतरण और योन उत्पीड़ने का मामला गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला पहले से लंबित है। नासिक के TCS मामले को लेकर उसी केस में नई अर्जी दाखिल की गई है। याचिका वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा कि यह सिर्फ धर्मांतरण का मामला नहीं, बल्कि देश के खिलाफ सुनियोजित साजिश है। उन्होंने कहा कि धोखे से कराया गया धर्मांतरण देश की संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता के लिए खतरा है। किसी संगठन के जरिए जबरन या धोखे से कराए गए धर्मांतरण को आतंकी कृत्य की कैटेगरी में रखा जाना चाहिए। याचिका में तीन बड़े आरोप लगाए… कोर्ट से दो मांग की गई… कंपनी ने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दिया कंपनी ने कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए नासिक ऑफिस के स्टाफ को घर से काम करने को कहा। सूत्रों के मुताबिक यह कदम मौजूदा हालात को देखते हुए उठाया गया है। जांच के दौरान पुलिस को करीब 78 संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और चैट मिले हैं। कुछ वित्तीय लेनदेन के संकेत भी सामने आए हैं। इस केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी नई जॉइन करने वाली कर्मचारियों की निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते थे। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता था। TCS चेयरमैन बोले- केस परेशान करने वाला टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि ये केस परेशान करने वाला है। हम पुलिस का सहयोग कर रहे हैं। TCS किसी भी तरह के उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति लंबे समय से ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाता रहा है। इस मामले में भी कंपनी सख्त रुख अपना रही है। ——– ये खबर भी पढ़ें… नासिक TCS में यौन शोषण-धर्मांतरण केस के पीछे संगठित नेटवर्क:आर्थिक रूप से कमजोर नई कर्मचारियों को टारगेट करते थे, शिकायत करने पर फटकारती थी मैनेजर महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS कंपनी ऑफिस में धर्म परिवर्तन, यौन शोषण केस की पुलिस जांच में सामने आया है कि एक संगठित नेटवर्क नए कर्मचारियों को निशाना बनाता था। इस केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी नई जॉइन करने वाली कर्मचारियों की निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते थे। पूरी खबर पढ़ें…



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नासिक TCS धर्मांतरण-यौन शोषण केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: याचिका में कहा- देश के खिलाफ सुनियोजित खेल, संगठित रैकेट को आतंकी घोषित करने की मांग


नासिक3 मिनट पहले

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महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS ऑफिस से जुड़ा धर्मांतरण और योन उत्पीड़ने का मामला गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला पहले से लंबित है। नासिक के TCS मामले को लेकर उसी केस में नई अर्जी दाखिल की गई है।

याचिका वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा कि यह सिर्फ धर्मांतरण का मामला नहीं, बल्कि देश के खिलाफ सुनियोजित खेल है। उन्होंने कहा कि धोखे से कराया गया धर्मांतरण देश की संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता के लिए खतरा है। किसी संगठन के जरिए जबरन या धोखे से कराए गए धर्मांतरण को आतंकी कृत्य की कैटेगरी में रखा जाना चाहिए।

याचिका में तीन बड़े आरोप लगाए…

  • जबरदस्ती या धोखे से धर्म बदलवाना देश के लिए एक गंभीर खतरा है। जब यह काम किसी बड़े संगठित और दबाव बनाकर चलाए जा रहे अभियान के तहत होता है तो इसे आंतकवादी कृत्य माना जाना चाहिए।
  • यह जबरन या धोखे से धर्म बदलवाना कोई अकेली धांर्मिक घटना नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र है। इस षड्यंत्र को अक्सर विदेसी ताकतें पैसा देती हैं। इसका मकसद देश के धार्मिक जनसंख्या संतुलन को बदलना है जिससे भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा पैदा हो।
  • धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार किसी को धोखे, दबाव, लालच या जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन कराने की अनुमति नहीं देता। संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य जैसी शर्तों के अधीन है।

कोर्ट से दो मांग की गई…

  • केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं ताकि धोखे या जबरदस्ती से होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाई जा सके।
  • केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए कि धर्म परिवर्तन के मामलों को सुनने के लिए अलग से स्पेशल कोर्ट यानी विशेष अदालतें बनाई जाएं।

अदालत ने 2023 में इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि से सहायता मांगी थी। कोर्ट ने तब कहा था कि धर्म परिवर्तन का मुद्दा गंभीर है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। यह याचिका उसी लंबित मामले के तहत दाखिल की गई है, जिसमें देशभर में धोखाधड़ी से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए सख्त कदमों की मांग की गई है।

कंपनी ने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दिया

कंपनी ने कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए नासिक ऑफिस के स्टाफ को घर से काम करने को कहा। सूत्रों के मुताबिक यह कदम मौजूदा हालात को देखते हुए उठाया गया है। जांच के दौरान पुलिस को करीब 78 संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और चैट मिले हैं। कुछ वित्तीय लेनदेन के संकेत भी सामने आए हैं।

इस केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी नई जॉइन करने वाली कर्मचारियों की निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते थे। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता था।

गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस ने 9 अप्रैल को नासिक कोर्ट में पेश किया।

गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस ने 9 अप्रैल को नासिक कोर्ट में पेश किया।

वित्तीय लेन-देन की जांच में सहयोग नहीं कर रही

पीड़ित लड़कियों ने जब आरोपियों के खिलाफ शिकायत की तो अश्विनी ने शिकायत को जानबूझकर नजरअंदाज किया। उलटा उसने पीड़ित को ही फटकार लगाई। सोमवार को तीन दिन की हिरासत समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया। वह वित्तीय लेन-देन की जांच में पुलिस का बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रही है। इसलिए उसकी पांच दिन की हिरासत मांगी गई थी। हालांकि, अदालत ने उसे दो दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया।

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रशिक्षण के दौरान हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती थी। जब पीड़ित परेशान होते थे, तब HR मैनेजर उनसे संपर्क कर भरोसा जीतती थी और धीरे-धीरे उनके रहन-सहन में बदलाव के लिए दबाव बनाया जाता था।

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Bengal का SIR विवाद ट्रिब्यूनल पहुंचा, 21-27 अप्रैल को लाखों मतदाताओं के वोटिंग अधिकार का फैसला


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सुप्रीम कोर्ट बोला- बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने: ट्रिब्यूनल जिन्हें 21 अप्रैल तक वोटर मानेगा, वो 23 को वोट डाल सकेंगे




सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (16 अप्रैल) को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह पश्चिम बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करे। इसमें उन वोटर्स को शामिल किया जाए, जिनकी अपीलों पर ट्रिब्यूनल में फैसला हो गया है। कोर्ट ने कहा कि जिनकी अपीलें पेंडिंग हैं, उन्हें वोट डालने की इजाजत नहीं होगी। बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 90.83 लाख वोटर्स के नाम काट दिए गए हैं। इन वोटर्स की अपील सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए दो फेज में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोटिंग होना है। पहले फेज में जहां वोटिंग होना है वहां 21 अप्रैल तक वोटर्स की अपील पर फैसला हो जाने पर वे वोट दे सकेंगे। वहीं दूसरे फेज वाले इलाकों के वोटर्स 27 अप्रैल तक अपील पर फैसला होने पर वोट डाल सकेंगे। जैसे ही ट्रिब्यूनल नाम जोड़ने का आदेश देगा, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तुरंत सूची में संशोधन करे। CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।
ट्रिब्यूनल पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जाना चाहिए 19 ट्रिब्यूनल के सामने 34 लाख से ज्यादा अपीलें सुनवाई के दौरान बताया गया कि 19 ट्रिब्यूनल के सामने 34 लाख से ज्यादा अपीलें लंबित हैं। ये ट्रिब्यूनल रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों की अगुवाई में बनाए गए हैं। पश्चिम बंगाल में SIR अभियान का मकसद वोटर लिस्ट से डुप्लिकेट और अयोग्य नाम हटाना बताया जा रहा है। हालांकि इस पर सियासी विवाद तेज है। सत्ताधारी पार्टी ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं को बाहर करने का आरोप लगाया है, जबकि ECI इसे निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी बता रहा है।
बंगाल में 11.85% नाम हटे, ज्यादातर बांग्लादेश बॉर्डर के पास पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे। इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए। लगभग 11.85% वोटर कम हो गए। यानी अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं। चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटे। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। वहीं, 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटे। 8 अप्रैल: TMC चुनाव आयोग से मिला, आरोप- भगा दिया गया 8 अप्रैल को सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में TMC का प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा था। लेकिन बैठक के बाद डेरेक ने कहा कि हमने SIR के मुद्दे पर समय मांगा था, लेकिन मीटिंग के दौरान हमारे साथ खराब व्यवहार किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने हमें सिर्फ 5 मिनट में भगा दिया। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, डेरेक ओ’ब्रायन ने CEC को बोलने से रोका और धमकी दी। वह कोई बात सुन ही नहीं रहे थे। —————————————————– ये खबर भी पढें… पश्चिम बंगाल में SIR ही सबसे बड़ा मुद्दा:नई वोटर लिस्ट से CM ममता की परेशानी बढ़ी, 50 सीटों पर TMC को ज्यादा चुनौती 8 अप्रैल की सुबह बूंदाबांदी के बीच करीब सुबह 10:25 बजे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समर्थकों के हुजूम के साथ पैदल ही हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने घर से नामांकन के लिए निकलीं। पूरी खबर पढे़ं…



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