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Medha Roopam कौन हैं? नोएडा DM ने मोर्चा संभाल कर शांत करवाया श्रमिक आंदोलन,ओवटाइम पेमेंट के फैसले से जीता दिल


Medha Roopam कौन हैं? नोएडा DM ने मोर्चा संभाल कर शांत करवाया श्रमिक आंदोलन,ओवटाइम पेमेंट के फैसले से जीता दिल | Who is Medha Roopam? How Noida DM Calmed factory Workers Protest with Key Decisions – Hindi Oneindia



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Wholesale Price Inflation: मार्च में महंगाई दर बढ़कर 3.88% हुई, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का दिखा असर


देश में थोक महंगाई (WPI) लगातार पांचवें महीने बढ़ते हुए मार्च 2026 में 3.88 फीसदी पर पहुंच गई। यह फरवरी के 2.13 फीसदी और पिछले साल मार्च के 2.25 फीसदी से काफी ज्यादा है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस तेजी के पीछे मुख्य वजह ईंधन, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कीमतों का तेज उछाल है।

उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा कि मार्च में महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आर्टिकल्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रही।

ईंधन और कच्चे तेल में बड़ा उछाल

WPI आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई फरवरी के -3.78 फीसदी (गिरावट) से बढ़कर मार्च में 1.05 फीसदी हो गई। खासतौर पर कच्चे तेल (क्रूड पेट्रोलियम) में महंगाई 51.57 फीसदी तक पहुंच गई, जो फरवरी में -1.29 फीसदी थी।

मैन्युफैक्चरिंग महंगी, लेकिन खाने-पीने की रफ्तार धीमी

मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की महंगाई भी फरवरी के 2.92 फीसदी से बढ़कर मार्च में 3.39 फीसदी हो गई। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार थोड़ी कम हुई है।


  • फूड आर्टिकल्स महंगाई: 1.90% (फरवरी: 2.19%)

  • सब्जियों की महंगाई: 1.45% (फरवरी: 4.73%)

पश्चिम एशिया संकट का असर

अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है। 28 फरवरी से अब तक कच्चे तेल के दाम 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। एक महीने के भीतर कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

सरकार का कदम: एक्साइज ड्यूटी में कटौती

तेल कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई, ताकि कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर न डालें।

रिटेल महंगाई भी बढ़ी, आरबीआई ने दरें स्थिर रखीं

इससे पहले जारी आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई (CPI) मार्च में बढ़कर 3.4 फीसदी हो गई, जो फरवरी में 3.21 फीसदी थी। रिजर्व बैंक ने हाल ही में अपनी द्वैमासिक मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को यथावत रखा है। केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से खुदरा महंगाई के आधार पर ही नीतिगत दरों का फैसला करता है।कुल मिलाकर, ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने थोक महंगाई को ऊपर धकेला है, जबकि खाद्य महंगाई में थोड़ी नरमी देखने को मिली है।





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Census 2027: क्या है सेल्फ-एन्यूमरेशन, कैसे करें रजिस्ट्रेशन? पहली बार डिजिटल जनगणना से खुद भर सकेंगे जानकारी


Census 2027: क्या है सेल्फ-एन्यूमरेशन, कैसे करें रजिस्ट्रेशन? पहली बार डिजिटल जनगणना से खुद भर सकेंगे जानकारी | Census 2027: How to Do Self-Enumeration Online from Home Step-by-Step Guide Digital Janganana – Hindi Oneindia



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ये हैं भारत के 7 सबसे बेहतरीन समर ट्रेक्स, जहां गर्मी में मिलेगी बर्फीली ठंडक!


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Best Summer Treks In India: गर्मियों का मौसम पहाड़ों की सैर करने और भारत के शानदार ट्रेकिंग स्थलों को घूमने का सबसे अच्छा समय है. जहां देश के ज़्यादातर हिस्सों में तापमान काफ़ी बढ़ जाता है, वहीं पहाड़ और ऊंचे इलाक़े ठंडा मौसम, मनमोहक नज़ारे और रोमांचक एडवेंचर के अनुभव देते हैं. उत्तर में बर्फ़ से ढके हिमालय से लेकर दक्षिण के हरे-भरे नज़ारों तक, भारत में प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों, दोनों के लिए ही गर्मियों में ट्रेकिंग करने के लिए खूबसूरत जगहों की कोई कमी नहीं है.

वैली ऑफ़ फ्लावर्स ट्रेक, उत्तराखंड: भारत के सबसे मशहूर गर्मियों के ट्रेक में से एक, वैली ऑफ़ फ्लावर्स अपने रंग-बिरंगे घास के मैदानों के लिए जाना जाता है, जो दुर्लभ पहाड़ी फूलों से ढके रहते हैं. शिमला ज़िले में स्थित, यह खूबसूरत जगह मनमोहक नज़ारे, ताज़ी पहाड़ी हवा और पहाड़ी रास्तों पर चलने वालों के लिए सही ट्रेकिंग रास्ते देती है.

From Kashmir To Karnataka: Best Summer Treks In India To Explore This Year

हम्प्ता पास ट्रेक, हिमाचल प्रदेश: हम्प्ता पास ट्रेक उन लोगों के लिए एकदम सही है जो शानदार नज़ारे देखना चाहते हैं. यह आपको हरे-भरे पहाड़ों, बर्फ से ढकी चोटियों, ऊबड़-खाबड़ चट्टानी रास्तों और ग्लेशियर वाली घाटियों से होकर ले जाता है. यह हिमालय की सबसे अलग-अलग तरह की ट्रेकिंग जगहों में से एक है, जो इसे उन नए लोगों के लिए बहुत अच्छा बनाती है जो एक मीडियम लेवल का ट्रेकिंग अनुभव चाहते हैं.

From Kashmir To Karnataka: Best Summer Treks In India To Explore This Year

कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक, जम्मू और कश्मीर: भारत के सबसे खूबसूरत ट्रेक में से एक माना जाने वाला यह रास्ता, पहाड़ी झीलों, हरे-भरे घास के मैदानों और बर्फ से ढकी ऊंची चोटियों के मनमोहक नज़ारे दिखाता है. कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक का हर मोड़ एक पोस्टकार्ड जैसी खूबसूरत तस्वीर जैसा लगता है, जो इसे ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए एक सपनों की जगह बनाता है.

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From Kashmir To Karnataka: Best Summer Treks In India To Explore This Year

संदकफू ट्रेक, पश्चिम बंगाल: पूर्वी हिमालय में स्थित, संदकफू दुनिया की पांच सबसे ऊँची चोटियों में से चार एवरेस्ट, कंचनजंगा, ल्होत्से और मकालू के शानदार नज़ारों के लिए मशहूर है. यह ट्रेक खास तौर पर अपने खूबसूरत पहाड़ी नज़ारों और शानदार सूर्योदय के दृश्यों के लिए जाना जाता है.

From Kashmir To Karnataka: Best Summer Treks In India To Explore This Year

तारसर मारसर ट्रेक, जम्मू और कश्मीर: कश्मीर का एक और मनमोहक ट्रेक, तारसर मारसर अपनी शांत पहाड़ी झीलों और हरे-भरे घास के मैदानों के लिए खास है. यह ट्रेक शांति और कुदरती खूबसूरती से भरा है, जो इसे उन लोगों के लिए एक बेहतरीन जगह बनाता है जो भीड़-भाड़ वाली टूरिस्ट जगहों से दूर, एकदम शांत और जंगली माहौल चाहते हैं.

From Kashmir To Karnataka: Best Summer Treks In India To Explore This Year

कुद्रेमुख ट्रेक, कर्नाटक: इस लिस्ट में दक्षिण भारत की नुमाइंदगी करने वाला, कुद्रेमुख ट्रेक इस इलाके की सबसे मशहूर ट्रेकिंग जगहों में से एक है. पश्चिमी घाट में स्थित, यह ट्रेक अपने हरे-भरे पहाड़ों, धुंध भरे मौसम, लहराते घास के मैदानों और खूबसूरत जंगली नज़ारों के लिए जाना जाता है. यह नए लोगों और उन लोगों के लिए एकदम सही है जो कुदरत के बीच एक रोमांचक अनुभव चाहते हैं.

From Kashmir To Karnataka: Best Summer Treks In India To Explore This Year

ज़ुकू वैली ट्रेक, नागालैंड: नागालैंड और मणिपुर की सीमा पर स्थित, ज़ुकू वैली सचमुच भारत के छिपे हुए खज़ानों में से एक है। अपने खिलते फूलों और हरे-भरे नज़ारों के लिए मशहूर, यह ट्रेक एक अनोखा अनुभव देता है जो उत्तर में पाए जाने वाले हिमालयी ट्रेक से बिल्कुल अलग है. (सभी तस्वीरें Instagram से हैं).



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Vijay Kumar Chaudhary कौन हैं, इनकी जाति क्‍या है? बने बिहार के नए डिप्‍टी सीएम


Vijay Kumar Chaudhary कौन हैं, इनकी जाति क्‍या है? बने बिहार के नए डिप्‍टी सीएम | Vijay Kumar Chaudhary profile caste bihar deputy cm speculation – Hindi Oneindia



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वीकेंड पर भागना है शहर से? न ट्रैफिक, न टेंशन! बेंगलुरु के पास ये 3 हिल स्टेशन बना देंगे आ


Hill Stations Near Bangalore: अगर आप बेंगलुरु की भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं, तो पहाड़ों का ख्याल सबसे पहले आता है. लेकिन अक्सर प्लान वहीं अटक जाता है लंबा सफर, ट्रैफिक, और खर्च. अच्छी बात ये है कि बेंगलुरु के आसपास ही ऐसी कई जगहें हैं जहां आप कुछ घंटों में पहुंच सकते हैं और बिना ज्यादा पैसे खर्च किए शानदार वीकेंड बिता सकते हैं. यहां न सिर्फ हरियाली और ठंडी हवा आपका स्वागत करती है, बल्कि शहर के शोर से दूर एक सुकून भरा अनुभव भी मिलता है. खास बात ये है कि इनमें से कई जगहों पर ट्रेन या बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है, यानी ड्राइविंग की झंझट भी खत्म. अगर आप भी इस वीकेंड कुछ अलग करना चाहते हैं, तो ये 3 हिल स्टेशन आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए.

1. रामनगर हिल्स: एडवेंचर और शांति का मेल
बेंगलुरु से करीब 50 किलोमीटर दूर रामनगर हिल्स उन लोगों के लिए है जिन्हें थोड़ी एक्टिविटी पसंद है.

क्यों जाएं?
यह जगह अपने ग्रेनाइट हिल्स के लिए मशहूर है. यहां माइक्रो ट्रेकिंग और रॉक क्लाइम्बिंग का मजा लिया जा सकता है.

खास बात
अगर आपने कभी ‘शोले’ फिल्म देखी है, तो उसका कुछ हिस्सा यहीं शूट हुआ था. आज भी यहां की चट्टानें उसी तरह खड़ी हैं खामोश, लेकिन आकर्षक.

अनुभव कैसा रहेगा?
यहां का माहौल शांत है. भीड़ कम होती है, इसलिए आप प्रकृति के करीब महसूस करते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

2. नंदी हिल्स: सुबह का जादू, सुकून का अहसास
बेंगलुरु से सिर्फ डेढ़ घंटे की दूरी पर स्थित नंदी हिल्स उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो जल्दी निकलकर जल्दी लौटना चाहते हैं.

क्यों जाएं?
यहां का सूर्योदय सच में देखने लायक होता है. सुबह-सुबह जब बादल नीचे और आप ऊपर होते हैं, तो नजारा किसी फिल्म जैसा लगता है. हल्की ठंडी हवा और छोटा सा ट्रेक इसे और खास बना देता है.

अनुभव कैसा रहेगा?
अगर आप सुबह 5 बजे निकलते हैं, तो 6:30 तक पहुंच सकते हैं. वहां चाय की चुस्की के साथ सूरज को उगते देखना एक अलग ही सुकून देता है.

साकलेशपुर: हरियाली, कॉफी और कोहरा
अगर आप थोड़ा लंबा वीकेंड प्लान कर रहे हैं, तो साकलेशपुर एक शानदार विकल्प है. यह बेंगलुरु से करीब 220 किलोमीटर दूर है, लेकिन सफर पूरी तरह वर्थ इट लगता है.

क्यों जाएं?
कॉफी एस्टेट, घने जंगल और कोहरे से ढकी पहाड़ियां इसे खास बनाती हैं.

देखने लायक जगहें
मंजराबाद फोर्ट और ग्रीन रूट ट्रेक यहां के प्रमुख आकर्षण हैं.

अनुभव कैसा रहेगा?
यहां पहुंचते ही आपको लगेगा कि आप किसी और दुनिया में आ गए हैं शांत, ठंडा और बेहद खूबसूरत.

बजट और प्लानिंग टिप्स
इन तीनों जगहों की खास बात यह है कि यहां जाने के लिए आपको ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं है. लोकल ट्रेन, बस या शेयर कैब से आसानी से पहुंचा जा सकता है.

क्या रखें ध्यान में?
-सुबह जल्दी निकलें
-पानी और हल्का स्नैक साथ रखें
-मौसम के हिसाब से कपड़े पहनें

बेंगलुरु के आसपास ये हिल स्टेशन उन लोगों के लिए एकदम सही हैं जो कम समय और कम बजट में एक शानदार ब्रेक चाहते हैं. चाहे आप अकेले जाएं या दोस्तों के साथ, ये जगहें आपको ताजगी और नई ऊर्जा जरूर देंगी.



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China: अमेरिका को पीछे छोड़ चीन बना भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार, व्यापार घाटा भी बढ़ा


चीन, अमेरिका को पीछे छोड़कर 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान चीन के साथ देश का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया। अमेरिका 2024-25 तक लगातार चार वर्षों तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।

व्यापार घाटा भी रिकॉर्ड स्तर पर

चीन 2013-14 से 2017-18 तक और फिर 2020-21 में भी भारत का शीर्ष व्यापारिक साझेदार रहा। चीन से पहले यूएई देश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। पिछले वित्त वर्ष के दौरान चीन को भारत का निर्यात 36.66 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 16 फीसदी बढ़कर 131.63 अरब डॉलर रहा। व्यापार घाटा 2025-26 में बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के अब तक के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर था।

व्यापार संतुलन में बदलाव

2025-26 में अमेरिका को निर्यात मामूली रूप से 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 15.95 फीसदी बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। व्यापार अधिशेष 2024-25 के 40.89 अरब डॉलर से घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया। जिन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ भारत का निर्यात घटा है, उनमें नीदरलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर, बांग्लादेश, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और मलयेशिया शामिल हैं। जिन प्रमुख देशों के साथ 2025-26 में आयात बढ़ा है, उनमें रूस, इराक, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, कतर और ताइवान शामिल हैं।



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MP Board Result 2026 Topper List: जारी हुए एमपी बोर्ड के नतीजे, 10वीं-12वीं में कौन बना टॉपर? चेक करें लिस्ट


MP Board Result 2026 Topper List: जारी हुए एमपी बोर्ड के नतीजे, 10वीं-12वीं में कौन बना टॉपर? चेक करें लिस्ट | MP Board Result 2026 Topper List Class 10th and 12th Results Declared Pratibha Singh and Durga Prasad Emerge as State Toppers – Hindi Oneindia



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खजुराहो में युवक जिंदा जला, VIDEO: हेरिटेज रिसोर्ट से बंदर भगा रहा था; हाईटेंशन लाइन से टकराया पाइप – khajuraho News




खजुराहो रेलवे स्टेशन के पास स्थित ‘दि खजुराहो हेरिटेज रिसोर्ट’ में एक कर्मचारी की करंट लगने से मौत हो गई। यह घटना मंगलवार शाम 6 बजे छत से बंदर भगाते समय हुई। घटना का वीडियो बुधवार सुबह सामने आया। मृतक की पहचान खजुराहो निवासी रिंकू रैकवार के रूप में हुई। उसने आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पांच दिन पहले ही होटल में काम शुरू किया था। 5 तस्वीरों में देखिए पूरा घटनाक्रम… छत पर बंदर भगाने के लिए लोहे का पाइप उठाया था वीडियो में होटल कर्मचारी रिंकू रैकवार रिसोर्ट से निकलकर आस-पास देखता है। उसे छत पर बंदर नजर आते हैं। वह दीवार के पास रखा करीब 15 फीट ऊंचा लोहे का पाइप उठाता है। वह दो बार पाइप को जमीन पर पटकता है। इसके बाद वह पाइप सीधा खड़ा कर देता है। कुछ देर बाद वह पीछे की ओर चलने लगता है। तेज धमाके के साथ आग की लपटों में घिरकर गिरा इसी दौरान पाइप हाईटेंशन लाइन से टकरा जाता है। तेज धमाके के साथ रिंकू आग की लपटों में घिरकर जमीन पर गिर जाता है। धमाके की आवाज सुनकर एक महिला कर्मचारी बाहर आती है और चीखते हुए अंदर चली जाती है। वीडियो में दिखता है कि पेट से छाती तक का हिस्सा पूरी तरह जला हुआ है। छाती से पेट तक बड़ा छेद नजर आता है। हादसे की सूचना मिलते ही बमीठा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। बुधवार सुबह पीएम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया। पुलिस जांच कर रही है कि छत के करीब से हाईटेंशन लाइन गुजरना नियमों के खिलाफ था या होटल प्रबंधन की लापरवाही थी।



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होर्मुज जलडमरूमध्य पर कानूनी टकराव: अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री नियमों पर फंसा पेंच, तेल आपूर्ति संकट कायम


वैश्विक तेल आपूर्ति के 20 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहरे कानूनी विवादों में भी उलझा हुआ है। दोनों देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के संचालन के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला दे रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र में माल ढुलाई और कच्चे तेल के व्यापार पर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है।

कानूनी व्याख्याओं की अलग-अलग दुनिया

समुद्री कानून के विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान दोनों ही ‘लॉ ऑफ द सी’ (समुद्री कानून) के मामले में दो अलग-अलग वैचारिक दुनिया में जी रहे हैं। वाशिंगटन होर्मुज को पूरी तरह से एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानता है, जबकि तेहरान इसे अपने क्षेत्रीय जल (territorial waters) का हिस्सा मानता है। इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ईरान द्वारा टोल वसूलने को अमेरिका अवैध मानता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई नाकेबंदी को ईरान अपनी संप्रभुता का ‘गंभीर उल्लंघन’ बता रहा है।

UNCLOS समझौते का अभाव और नियमों की कमी

विवाद की मुख्य जड़ 1982 में तैयार और 1994 में लागू हुई ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS) से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के लिए सुचारू नियम तय करना था। दिलचस्प बात यह है कि 171 देशों और यूरोपीय संघ द्वारा इस संधि को लागू किए जाने के बावजूद, अमेरिका और ईरान दोनों ने ही अब तक इसे औपचारिक रूप से लागू (ratify) नहीं किया है। इसके चलते युद्ध के इस मौजूदा माहौल में दोनों देशों के बीच ऐसा कोई सर्वमान्य नियम नहीं है जिसके आधार पर विवाद को सुलझाया जा सके।

‘इनोसेंट पैसेज’ बनाम ‘ट्रांजिट पैसेज’ का संघर्ष

ईरान पुराने अंतरराष्ट्रीय मानकों (जैसे 1958 टेरिटोरियल सीज कन्वेंशन) का हवाला देते हुए विदेशी जहाजों को केवल ‘इनोसेंट पैसेज’ (शांतिपूर्ण मार्ग) का अधिकार देता है। इसके तहत विदेशी जहाज बिना किसी सुरक्षा को नुकसान पहुंचाए गुजर सकते हैं, लेकिन ईरान मानता है कि वह अपने क्षेत्रीय जल में इस मार्ग को निलंबित कर सकता है। 

इसके विपरीत, अमेरिका UNCLOS के नए नियमों के तहत ‘ट्रांजिट पैसेज’ की मांग करता है। यह नियम तटीय देशों के नियंत्रण को सीमित करता है और निर्बाध नौवहन, विमानों की उड़ान और पनडुब्बियों की आवाजाही सुनिश्चित करता है। अमेरिका अपने इस रुख को ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ गश्त के जरिए नियमित रूप से लागू करने की कोशिश करता है और ईरान के दावों को खारिज करता है। वहीं, तेहरान का तर्क है कि वह शुरुआत से ही इन नए नियमों का विरोध करता आया है, इसलिए उस पर ये नियम लागू नहीं होते।

आगे का रास्ता और व्यापारिक दृष्टिकोण

होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा सैन्य स्थिति और आर्थिक व्यवधान इस जटिल कानूनी लड़ाई का ही एक हिस्सा हैं। जब तक दोनों देश किसी साझा कानूनी ढांचे पर सहमत नहीं होते और उसका पालन करने की प्रतिबद्धता नहीं दिखाते, तब तक इस जलमार्ग की स्थिति अस्थिर बनी रहेगी। इस कानूनी गतिरोध के लंबे खिंचने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की सुचारू आपूर्ति पर पड़ेगा।



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