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Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 11 April: चेन्नई सुपर किंग्स vs दिल्ली कैपिटल्स, IPL 2026


Cricket

oi-Naveen Sharma

Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta: चेन्नई के ऐतिहासिक एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में आज ‘सुपर सैटरडे’ के डबल हेडर का दूसरा मुकाबला होने जा रहा है, चेन्नई सुपर किंग्स का सामना दिल्ली कैपिटल्स से है, लेकिन इस बार चेपॉक के इस ‘पीले समंदर’ में उत्साह के साथ-साथ चेन्नई के लिए दबाव भी काफी अधिक होगा। दिल्ली कैपिटल्स ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी।

​सीजन के आंकड़ों पर नजर डालें तो चेन्नई की राह अब तक काफी कठिन रही है, टीम को इस सीजन के अपने शुरुआती तीनों मैचों में लगातार हार का सामना करना पड़ा है। इसके उलट, दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत काफी संतुलित रही है, जिन्होंने अब तक खेले तीन मैचों में से दो में जीत दर्ज की है और उन्हें सिर्फ एक मैच में हार मिली है। ऐसे में आज का मुकाबला जहां चेन्नई के लिए वापसी की जंग है, वहीं दिल्ली अपनी लय को बरकरार रखना चाहेगी।

Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta

चेन्नई सुपर किंग्स की बैटिंग और गेंदबाजी दोनों प्रभाव छोड़ने में नाकाम रही है, ऋतुराज गायकवाड़, संजू सैमसन और शिवम दुबे के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है। तीनों ही अपने गेम से असरकारक प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं, इसी वजह से चेन्नई को लगातार हार का सामना करना पड़ा है।

दिल्ली कैपिटल्स के लिए स्टब्स, केएल राहुल, समीर रिजवी जैसे बल्लेबाज तहलका मचाने का प्रयास करेंगे। इस सीजन रिजवी ने दमदार प्रदर्शन किया है, दो बार उनके बल्ले से मैच जिताऊ पारियां देखने को मिली है। अगर उनका बल्ला चलता है, तो दिल्ली के लिए अच्छा होगा।

चेन्नई सुपर किंग्स में महेंद्र सिंह धोनी का नहीं होना भी एक बड़ी चिंता रही है, आज के मैच में तो वह नहीं हैं लेकिन अगले मैच तक शायद फिट होकर वापस मैदान का रुख कर सकते हैं।

दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन

चेन्नई सुपर किंग्स: संजू सैमसन (विकेटकीपर), ऋतुराज गायकवाड़ (कप्तान), आयुष म्हात्रे, सरफराज खान, शिवम दुबे, डेवाल्ड ब्रेविस, जेमी ओवरटन, नूर अहमद, अंशुल कंबोज, गुरजपनीत सिंह, खलील अहमद

दिल्ली कैपिटल्स: पाथुम निसांका, केएल राहुल (विकेटकीपर), समीर रिज़वी, अक्षर पटेल (कप्तान), डेविड मिलर, ट्रिस्टन स्टब्स, अकीब नबी डार, लुंगी एनगिडी, कुलदीप यादव, टी नटराजन, मुकेश कुमार



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Adani Group JAL acquisition: ‘अडानी के हाथों में सुरक्षित है जेपी की विरासत’, अधिग्रहण पर बोले जयप्रकाश गौड़


India

oi-Sumit Jha

Adani Group JAL acquisition: जेपी एसोसिएट्स (Jaiprakash Associates Ltd) के संस्थापक श्री जयप्रकाश गौड़ ने कंपनी के दिवालिया समाधान प्रक्रिया के तहत अडानी ग्रुप को सफल बोलीदाता चुने जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कर्जदाताओं (Lenders) के इस निर्णय को कंपनी के भविष्य और सभी हितधारकों के लिए एक सकारात्मक कदम बताया है।

बैंकर्स और कर्जदाताओं ने अडानी ग्रुप की बोली को मंजूरी दी है, जिसे गौड़ ने एक पारदर्शी और सही फैसला बताया है। लंबे समय से कर्ज के बोझ तले दबी इस कंपनी के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, वेदांता ग्रुप की कानूनी चुनौती ने इस मामले को दिलचस्प बना दिया है, लेकिन फिलहाल अडानी ग्रुप रेस में सबसे आगे है।

Adani Group JAL acquisition

अडानी पर जताया भरोसा

जयप्रकाश गौड़ का मानना है कि गौतम अडानी के पास वो अनुभव और काबिलियत है, जो जेपी एसोसिएट्स को दोबारा पटरी पर ला सकती है। उन्होंने कहा कि अडानी ग्रुप न सिर्फ बिजनेस को नई ऊंचाई पर ले जाएगा, बल्कि कंपनी की पुरानी जिम्मेदारियों को भी बेहतर तरीके से निभाएगा। गौड़ के मुताबिक, अडानी के हाथों में कंपनी का भविष्य सुरक्षित है और वे रुके हुए कामों को रफ्तार देने में सक्षम हैं।

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राष्ट्र निर्माण का सफर

अपनी कंपनी को याद करते हुए गौड़ ने कहा कि 1979 से शुरू हुआ यह सफर सिर्फ पैसा कमाने के लिए नहीं, बल्कि देश बनाने के लिए था। बिजली, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में जेपी ग्रुप ने बड़े योगदान दिए हैं। उनके लिए यह भावुक पल है क्योंकि जिस विरासत को उन्होंने दशकों तक सींचा, उसे अब एक नई शुरुआत की जरूरत है ताकि कंपनी की पहचान और उसका काम बना रहे।

खरीदारों और कर्मचारियों की चिंता

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा राहत उन लोगों को मिलने की उम्मीद है जिन्होंने जेपी के प्रोजेक्ट्स में घर खरीदे हैं या जो वहां सालों से काम कर रहे हैं। गौड़ ने भरोसा दिलाया है कि इस नए बदलाव से घर खरीदारों, कर्मचारियों और बिजनेस पार्टनर्स के हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि दिवालिया प्रक्रिया का मकसद ही यही है कि सभी का बकाया चुकाया जा सके और व्यवस्था बनी रहे।

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वेदांता ग्रुप की चुनौती

भले ही जयप्रकाश गौड़ अडानी के साथ खड़े हैं, लेकिन दूसरी तरफ वेदांता ग्रुप ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है। वेदांता का कहना है कि उनकी बोली 17,926 करोड़ रुपये की थी, जो अडानी की 14,535 करोड़ रुपये की बोली से काफी ज्यादा है। अब मामला अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के पास है। गौड़ ने वेदांता की दिलचस्पी की भी तारीफ की और इसे कंपनी की साख का सबूत बताया।

क्या होगा आगे का असर

जेपी एसोसिएट्स का यह केस भारत के बैंकिंग और बिजनेस जगत के लिए एक बड़ा उदाहरण बनने वाला है। इस फैसले से यह साफ होगा कि जब बड़ी कंपनियां संकट में फंसती हैं, तो उन्हें कैसे बचाया जा सकता है। जयप्रकाश गौड़ ने कर्जदाताओं और प्रोफेशनल टीम की भी तारीफ की, जिन्होंने इस मुश्किल दौर में कंपनी की संपत्तियों का सही मोल लगाने और एक मजबूत खरीदार चुनने में मदद की।



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Nepal News: रूबी ठाकुर कौन? 26 साल की उम्र में नेपाली संसद की बनीं डिप्टी स्पीकर, पिता सऊदी में मजदूर


International

oi-Sumit Jha

Ruby Thakur Youngest Deputy Speaker Nepal: नेपाल की राजनीति में आए इस बड़े बदलाव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां “जेन जी” (Gen Z) युवाओं ने पुरानी राजनीतिक पार्टियों को हटाकर सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली है।

36 वर्षीय बालेंद्र शाह देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने हैं, तो वहीं मात्र 26 साल की रूबी ठाकुर सबसे कम उम्र की डिप्टी स्पीकर बनकर उभरी हैं। यह बदलाव दिखाता है कि अब नेपाल के युवा सिर्फ वोट देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश चलाने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहे हैं।

Ruby Thakur Youngest Deputy Speaker Nepal

Ruby Thakur: संघर्ष से संसद तक

रूबी ठाकुर का सफर किसी मिसाल से कम नहीं है। उनका जन्म साल 2000 में धनुषा के एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता सऊदी अरब में मजदूरी करते हैं और मां खेती का काम संभालती हैं। रूबी ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद एक कंसल्टेंसी में 20,000 रुपये की नौकरी भी की। अपनी मेहनत और हरक साम्पांग की विचारधारा से प्रेरित होकर वह राजनीति में आईं और आज नेपाल की प्रतिनिधि सभा में दूसरी सबसे बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

Gen Z politics Nepal: ऐतिहासिक चुनावी जीत

नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) में कुल 275 सीटें हैं। डिप्टी स्पीकर के चुनाव में रूबी ठाकुर को भारी समर्थन मिला। उन्हें कुल 229 वोट हासिल हुए, जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है। खास बात यह है कि उन्हें अपनी पार्टी ‘श्रम संस्कृति’ के अलावा सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों का साथ मिला। नेपाल के संविधान के मुताबिक स्पीकर या डिप्टी स्पीकर में से एक महिला होनी चाहिए, और रूबी ने इस जिम्मेदारी को युवा जोश के साथ स्वीकार किया है।

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Nepal 2026 elections: कैसे चुनी गईं रूबी ठाकुर?

नेपाल में चुनाव के लिए “मिक्स्ड इलेक्टोरल सिस्टम” का इस्तेमाल होता है। इसमें एक वोट उम्मीदवार को और दूसरा पार्टी को दिया जाता है। रूबी ठाकुर को समानुपातिक प्रणाली (PR) के जरिए चुना गया है। इस व्यवस्था का मकसद समाज के हर तबके को संसद तक पहुंचाना है। रूबी को मधेशी समुदाय के कोटे से सांसद बनाया गया। इस सिस्टम की वजह से ही आज एक साधारण पृष्ठभूमि वाली लड़की देश के सर्वोच्च सदन के महत्वपूर्ण पद पर बैठ पाई है।

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सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी जारी

राजनीति के साथ-साथ रूबी अपनी सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि वह संसद में सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज प्रथा, बाल विवाह और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाएंगी। उनका मानना है कि कानून होने के बावजूद मधेशी इलाकों में ये समस्याएं आज भी मौजूद हैं। रूबी का चुना जाना नेपाल की लाखों लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है कि कड़ी मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।



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Bombay HC Staring Verdict: ‘अपनी महिला सहकर्मी को घूरना अपराध नहीं’, बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले छिड़ी नई बहस


India

oi-Puja Yadav

Bombay HC Staring Verdict: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कार्यस्थल (Workplace) पर महिलाओं की सुरक्षा और कानूनी सीमाओं को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी महिला सहकर्मी को गलत तरीके से घूरना निश्चित रूप से अनैतिक और अनुचित व्यवहार है, लेकिन इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354C के तहत ‘ताक-झांक’ (Voyeurism) का अपराध नहीं माना जा सकता।

जस्टिस अमित बोरकर की सिंगल बेंच ने एक बीमा कंपनी के एग्जीक्यूटिव के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि कानून की व्याख्या को उसकी मूल परिभाषा से बाहर जाकर नहीं खींचा जा सकता।

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क्या था पूरा मामला जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया फैसला?

यह कानूनी विवाद एक प्रसिद्ध बीमा कंपनी के भीतर शुरू हुआ था। कंपनी में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने अपने वरिष्ठ सहकर्मी (आरोपी निगुडकर) पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिला का आरोप था कि ऑफिस की मीटिंग्स के दौरान आरोपी उनसे नजरें मिलाने (Eye-contact) के बजाय जानबूझकर उनके सीने की तरफ टकटकी लगाकर देखता था।

शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि आरोपी अक्सर अनुचित टिप्पणियां करता था, जिससे काम का माहौल बेहद असहज और अपमानजनक हो जाता था। पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 354C (ताक-झांक) के तहत मामला दर्ज किया था।

Can staring at female colleague lead to FIR? कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

जस्टिस अमित बोरकर ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी का व्यवहार, यदि सच भी मान लिया जाए, तो वह नैतिक रूप से गलत और काम के माहौल के खिलाफ है। हालांकि, यह धारा 354C के कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करता है। धारा 354C की परिभाषा देते हुए कोर्ट ने समझाया कि ताक-झांक (Voyeurism) तब माना जाता है जब कोई व्यक्ति किसी महिला को उसकी ‘निजी गतिविधियों’ के दौरान देखता है या उसकी फोटो लेता है-जैसे शौचालय का उपयोग करना, कपड़े बदलना या कोई निजी यौन कृत्य।

कोर्ट ने कहा कि ऑफिस की मीटिंग के दौरान किसी को घूरना इस श्रेणी में नहीं आता क्योंकि मीटिंग एक सार्वजनिक या अर्ध-सार्वजनिक स्थान पर होती है और वहां कोई ‘निजी कृत्य’ नहीं हो रहा होता। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने पहले ही मामले की जांच की थी और आरोपी को बरी (क्लीन चिट) कर दिया था।

ऐसे में आपराधिक मामला जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस अमित बोरकर ने कहा कि- आरोप सिर्फ इतना है कि उन्होंने ऑफिस मीटिंग के दौरान महिला को घूरा था। घूरना, भले ही अनैतिक हो, लेकिन यह आईपीसी की धारा 354C के तहत ‘ताक-झांक’ के अपराध जैसा नहीं है।

हाई कोर्ट के इस फैसले का ऑफिस कल्चर पर क्या होगा असर/

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला कार्यस्थलों पर होने वाले विवादों में धाराओं के चयन को लेकर एक स्पष्टता प्रदान करेगा। हालांकि कोर्ट ने घूरने को ‘अनैतिक’ करार दिया है, जिससे यह साफ होता है कि ऐसे व्यवहार के लिए विभागीय कार्रवाई (Internal disciplinary action) की जा सकती है, लेकिन हर अनुचित व्यवहार ‘ताक-झांक’ की गंभीर आपराधिक श्रेणी में नहीं आता।

बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि आपराधिक कानून की व्याख्या करते समय कड़ाई से शब्दों का पालन करना जरूरी है। एफआईआर रद्द होने से आरोपी एग्जीक्यूटिव को बड़ी राहत मिली है, लेकिन यह मामला कार्यस्थल पर शिष्टाचार और पेशेवर व्यवहार की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।



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SRH vs PBKS: पंजाब किंग्स टीम ने हैदराबाद के खिलाफ मैच में क्यों पहनी काली पट्टी? दुखद घटना कर देगी भावुक


Cricket

oi-Naveen Sharma

SRH vs PBKS: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के 17वें मुकाबले में आज क्रिकेट के मैदान से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने फैंस का दिल जीत लिया। सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के खिलाफ महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम में उतरी पंजाब किंग्स (PBKS) की टीम के सभी खिलाड़ी और स्टाफ बाजु पर काली पट्टी बांधे हुए नजर आए।

पंजाब किंग्स ने यह कदम उत्तर प्रदेश के वृंदावन में हुई हालिया नाव दुर्घटना के पीड़ितों के प्रति सम्मान और संवेदना प्रकट करने के लिए उठाया है। बता दें कि शुक्रवार (10 अप्रैल) को वृंदावन के केसी घाट के पास यमुना नदी में एक नाव पलट गई थी, जिसमें सवार अधिकांश लोग पंजाब के लुधियाना और मुक्तसर के रहने वाले थे। इस दुखद हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल और लापता हैं।

SRH vs PBKS

पंजाब किंग्स फ्रेंचाइजी ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “हम वृंदावन हादसे से बेहद दुखी हैं। यह काली पट्टी उन परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने का हमारा एक छोटा सा तरीका है जिन्होंने इस कठिन समय में अपनों को खोया है।”

SRH vs PBKA: हैदराबाद का विशाल स्कोर

हैदराबाद के लिए अभिषेक शर्मा ने मात्र 28 गेंदों में 74 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 8 छक्के और 5 चौके शामिल थे। ट्रेविस हेड (38) के साथ मिलकर उन्होंने पावरप्ले में ही 105 रन जोड़कर आईपीएल इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर खड़ा कर दिया।

एक समय लग रहा था कि हैदराबाद 250 पार जाएगी, लेकिन पंजाब के शशांक सिंह ने एक ही ओवर में हेड और अभिषेक को आउट कर मैच में जान फूंक दी। अंत में हैदराबाद ने 20 ओवर में 219/6 का विशाल स्कोर बनाया।

पंजाब किंग्स के इस नेक कदम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। फैंस का कहना है कि आईपीएल की चकाचौंध के बीच समाज की दुखद घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाना एक बड़ी मिसाल है।



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Mumbai Cheap Rental Homes: किराया भरने में नहीं जाएगी बाहरी लोगों की जान! सस्ते घर देगी महाराष्ट्र सरकार


Maharashtra

oi-Smita Mugdha

Mumbai Cheap Rental Homes: सहित राज्य के बड़े शहरों में किराए पर रहने वाले लोगों को राहत देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने सस्ते किराए के घर उपलब्ध कराने, किराया विवादों का तेजी से निपटारा करने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम निर्देश दिए हैं। इसेसे रोजगार और दूसरे कारणों से मुंबई आने वाले प्रवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।

सह्याद्री स्टेट गेस्ट हाउस में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में रेंटल हाउसिंग पॉलिसी की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नौकरी या व्यवसाय के लिए मुंबई और अन्य महानगरों में आने वाले लोगों के लिए किफायती किराए पर घर उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। इसके लिए एक व्यवस्थित और प्रभावी सिस्टम तैयार किया जाएगा।

Mumbai Cheap Rental Homes

Mumbai Cheap Rental Homes: घरों का किराया होगा सस्ता

– मुख्यमंत्री ने हाउसिंग डिपार्टमेंट को निर्देश दिया कि किफायती रेंटल हाउसिंग के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाए, जिससे लोगों को आसानी से किराए के घर उपलब्ध हो सकें।

– यह पोर्टल मांग और आपूर्ति के सिद्धांत पर काम करेगा और पारदर्शी तरीके से आवास उपलब्ध कराएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किराए से जुड़े सभी लेन-देन और प्रक्रियाएं कानूनी एग्रीमेंट के तहत ही की जानी चाहिए।

Mumbai Cheap Rental: महाराष्ट्र सरकार की बड़ी पहल

किराया नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम, 1999’ के तहत पुलिस उपायुक्त (DCP) को ‘सक्षम प्राधिकारी’ के रूप में नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी। इससे किराए से जुड़े मामलों में प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।

Maharashtra Government ने किराया विवादों पर लिया फैसला

इसके अलावा, किराया विवादों के लंबित मामलों को जल्दी निपटाने के लिए राज्य में 100 विशेष अदालतें स्थापित करने का भी फैसला लिया गया है। इन अदालतों में रिटायर्ड जजों की नियुक्ति की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर शाम की अदालतें (Evening Courts) भी चलाई जाएंगी। यदि स्थान की कमी होती है, तो किराए पर जगह लेकर इन अदालतों का संचालन किया जाएगा।

बैठक में हाउसिंग डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी असीम कुमार गुप्ता, मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सरकार का मानना है कि इन कदमों से न केवल किराएदारों को राहत मिलेगी, बल्कि रेंटल हाउसिंग सेक्टर में पारदर्शिता और भरोसा भी बढ़ेगा।



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Surya Grahan 2026 Kab hai: इस तारीख को लगने जा रहा है साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, क्या भारत में आएगा नजर?


Astrology

oi-Ankur Sharma

Surya Grahan 2026 Kab hai: सूर्य ग्रहण वैसे तो खगोलीय घटना है लेकिन इसका असर सभी राशियों पर पड़ता है इसलिए ज्योतिष के मद्देनजर ग्रहण का होना शुभ नहीं माना जाता है। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा लेकिन ये इंडिया में नजर नहीं आएगा।

भारतीय समयानुसार ये ग्रहण 12 अगस्त रात 9:04 PM से सुबह 4:25 AM बजे तक रहेगा लेकिन इस वक्त हमारे देश में रात होगी इसलिए ये दिखाई नहीं देगा और ना ही इसका सूतक काल लगेगा इसलिए इस दिन पूजा-पाठ भी वर्जित नहीं होंगे।

Surya Grahan 2026 Kab hai

क्यों खास है यह Surya Grahan 2026?

यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, यानी चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेगा। इस दौरान दिन में भी कुछ मिनटों के लिए अंधेरा छा जाएगा, यह दृश्य बेहद दुर्लभ और रोमांचक होता है लेकिन भारत के लोग इस सुंदर नजारे का लुत्फ नहीं उठा पाएंगे। यह ग्रहण मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और यूरोप के कई हिस्सों में पूरी तरह दिखाई देगा।

28 अगस्त को लगेगा साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण

मालूम हो कि साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा था लेकिन ये भी भारत में नजर नहीं आया था और दूसरा भी देश में प्रभावी नहीं है। बल्कि साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को यानी की फाल्गुनी पूर्णिमा के दिन लगा था, ये भारत में नजर आया था इसलिए इसका सूतक काल मान्य था जबकि साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा लेकिन ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

अगस्त के महीने में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों लगेंगे

खास बात ये है कि अगस्त के महीने में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों हैं। मालूम हो कि सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को और चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा को लगता है। सूर्य ग्रहण को हिंदू धर्म और ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता है, माना जाता है कि इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, इसलिए शास्त्रों में कुछ उपाय और नियम बताए गए हैं जो कि निम्नलिखित हैं…।

  • सूर्य ग्रहण के समय “ॐ सूर्याय नमः”, “ॐ नमः शिवाय”का जाप विशेष फलदायी होता है, इस समय किया गया जाप कई गुना अधिक फल देता है और मानसिक शांति भी मिलती है।
  • सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना जरूरी माना जाता है, इससे शरीर और मन की शुद्धि होती है, गंगा जल मिलाकर स्नान करना और भी शुभ माना जाता है।
  • सूर्य ग्रहण के बाद दान करना बहुत पुण्यदायी होता है।जरूरतमंदों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।



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Iran Frozen Funds: शांति वार्ता पर लगा ग्रहण! ईरानी पैसों पर से अमेरिका नहीं हटाएगा प्रतिबंध


International

oi-Sumit Jha

Iran Frozen Funds: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक हलचल ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच, वित्तीय लेन-देन की एक खबर ने सनसनी फैला दी। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका, कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमीं ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को मुक्त करने पर सहमत हो गया है। यह खबर एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र के हवाले से दी गई थी, जिससे लगा कि दशकों पुराने आर्थिक गतिरोध को सुलझाने की दिशा में कोई बड़ी सफलता मिली है।

हालांकि, वाशिंगटन ने तुरंत इस दावे को खारिज कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संपत्तियों को अनफ्रीज करने का फिलहाल कोई समझौता नहीं हुआ है। दावों और खंडन का यह दौर न केवल दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कूटनीतिक मेज पर समझौतों की राह अभी भी कितनी जटिल और चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

Iran Frozen Funds

US Iran Assets: क्या है पूरा मामला?

ईरान की बहुत सारी रकम दुनिया के अलग-अलग बैंकों में ‘फ्रीज’ यानी फंसी हुई है। प्रतिबंधों की वजह से ईरान इन पैसों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। हाल ही में यह चर्चा शुरू हुई कि अमेरिका मानवीय आधार पर इस पैसे को छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया कि कतर के बैंकों में रखे गए पैसों को लेकर दोनों देशों के बीच गुपचुप तरीके से कोई बड़ी डील हुई है, जिससे ईरान को बड़ी राहत मिल सकती है।

Islamabad Peace Talks: ईरान का दावा और उम्मीद

ईरान की ओर से आए बयानों में काफी सकारात्मकता देखी गई। वहां के एक बड़े अधिकारी ने संकेत दिए कि बातचीत सफल रही है और जल्द ही उन्हें अपनी रुकी हुई संपत्ति मिल जाएगी। ईरान का मानना है कि यह पैसा उनका हक है और इसकी मदद से वे अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था और बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। ईरान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी इस फंसी हुई रकम को वापस पाने की मांग उठाता रहा है।

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अमेरिका की सफाई और इनकार

जब यह खबर आग की तरह फैली, तो अमेरिकी प्रशासन ने तुरंत अपनी स्थिति साफ की। एक अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संपत्तियों को अनफ्रीज करने की रिपोर्ट में कोई सच्चाई नहीं है। अमेरिका का कहना है कि ईरान पर लगे प्रतिबंध अभी भी प्रभावी हैं और जब तक सभी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, पैसा जारी नहीं किया जाएगा। वाशिंगटन ने इसे महज एक अफवाह या समय से पहले दी गई जानकारी करार दिया है।

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रिश्तों पर इसका असर

इस तरह की विरोधाभासी खबरों से दोनों देशों के बीच का अविश्वास और गहरा जाता है। एक तरफ जहां ईरान समझौते की उम्मीद कर रहा है, वहीं अमेरिका का कड़ा रुख दिखाता है कि राह इतनी आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय जानकारों का मानना है कि पर्दे के पीछे बातचीत तो चल रही है, लेकिन अंतिम फैसला होने तक कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है। इस बयानबाजी का असर वैश्विक तेल बाजार और मध्य-पूर्व की राजनीति पर भी पड़ सकता है।



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Vaibhav Suryavanshi के लिए खुला टीम इंडिया का दरवाजा? क्या टूटेगा सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड!


Cricket

oi-Amit Kumar

IPL 2026, Vaibhav Suryavanshi: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में क्या एक नया अध्याय जुड़ने वाला है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि आईपीएल 2026 में अपने बल्ले से आग उगलने वाले वैभव सूर्यवंशी ने बीसीसीआई (BCCI) के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राजस्थान रॉयल्स के इस 15 वर्षीय बल्लेबाज के मुरीद अब खुद आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल भी हो गए हैं। धूमल ने स्पष्ट रूप से वकालत की है कि वैभव को भारत के लिए डेब्यू करने वाला सबसे युवा खिलाड़ी बनाया जाना चाहिए।

खतरे में सचिन का ये बड़ा रिकॉर्ड (IPL 2026, Vaibhav Suryavanshi)

अगर वैभव सूर्यवंशी को आगामी आयरलैंड सीरीज या साल के अंत में जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए टीम इंडिया में चुना जाता है तो वे महान सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। सचिन ने 16 साल 205 दिन की उम्र में डेब्यू किया था। आईसीसी नियमों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष होनी चाहिए। वैभव इसी साल 27 मार्च को 15 साल के हो चुके हैं, यानी वे अब तकनीकी रूप से नीली जर्सी पहनने के हकदार हैं।

Vaibhav Suryavanshi 1

अरुण धूमल ने की सूर्यवंशी की जमकर तारीफ

अरुण धूमल ने सोशल मीडिया पर वैभव की तारीफों के पुल बांधते हुए लिखा कि वैभव ने इस सीजन में जो बल्लेबाजी दिखाई है, वह अद्भुत है। यह निश्चित रूप से टीम इंडिया के लिए सबसे कम उम्र में डेब्यू करने का हकदार है। ऐसा टैलेंट मिलना बहुत मुश्किल से मिलता है, उसका नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज होना ही चाहिए। वैभव का चयन केवल उनकी उम्र की वजह से नहीं, बल्कि उनके प्रदर्शन के दम पर मांगा जा रहा है।

RCB के खिलाफ बल्ले से मचाई तबाही

वैभव सूर्यवंशी की 26 गेंदों में 78 रनों की पारी ने चयनकर्ताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आईपीएल से पहले उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ 80 गेंदों में 175 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली थी। बीसीसीआई आमतौर पर युवाओं को छोटे दौरों या एशियन गेम्स जैसे आयोजनों में आजमाता है। साल 2026 के व्यस्त टी20 कैलेंडर को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव को एक्सपोज़र देने का यह सबसे सही समय है।



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Munir Dress Diplomacy: ईरान से वर्दी, तो अमेरिका से सूट में क्यों मिले मुनीर? क्या है बार-बार ड्रेस बदलने की व


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oi-Siddharth Purohit

Munir Dress Diplomacy: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही है। यहां अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बाद क्षेत्र में शांति स्थापित करने को लेकर बातचीत चल रही हैं। लेकिन इस बार चर्चा किसी बड़ी डील की नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir की ड्रेस स्टाइल की हो रही है। दरअसल उन्होंने ईरान और अमेरिका दोनों के डेलिगेट्स को अलग-अलग ड्रेस में रनवे पर रिसीव किया। जिसके बाद इस बात पर कई लोगों का ध्यान गया। आइए जानते हैं इसका क्या मतलब है।

एक दिन, दो लुक, लेकिन क्यों?

जनरल असीम मुनीर ने एक ही दिन में दो अलग-अलग तरह की ड्रेस पहनकर सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। पहले वे पूरी तरह मिलिट्री कॉम्बैट यूनिफॉर्म में नजर आए, और कुछ ही घंटों बाद वे एक फॉर्मल ब्लैक सूट में दिखे। इस बदलाव ने एक्सपर्ट्स को सोचने पर मजबूर कर दिया कि इसके पीछे कोई खास मैसेज छिपा है।

Munir Dress Diplomacy

ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में कॉम्बैट लुक

जब 70 सदस्यीय ईरानी डेलिगेशन इस्लामाबाद पहुंचा, तब जनरल मुनीर ने उनसे मिलिट्री कॉम्बैट यूनिफॉर्म में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने खुद को एक सख्त और अलर्ट सैन्य कमांडर के रूप में पेश किया, जो हर स्थिति के लिए तैयार है। इस दौरान उनके हाथ में एक छड़ी भी थी, जो आर्मी में उनके ओहदे को दिखा रही थी।

आज पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता होगी

ईरान के नेता पाकिस्तान पहुंच चुके है-

-मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़: संसद के अध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख।
-अब्बास अराघची: विदेश मंत्री।
-अली अकबर अहमदीन: सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (या रक्षा परिषद) के सचिव।… pic.twitter.com/ERsdpAA84q

— Narendra Pratap (@hindipatrakar) April 11, 2026 “>

जेडी वेंस के स्वागत में बदले कपड़े

कुछ ही समय बाद, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance का विमान एयरबेस पर उतरा, तो जनरल मुनीर का पूरा लुक बदल चुका था। इस बार वे एक फॉर्मल ब्लैक सूट में नजर आए, जो एक डिप्लोमैटिक और राजनीतिक छवि को दिखाता है।

NEW: VP JD Vance has landed in Pakistan for negotiations. He was received by senior Pakistani officials and Field Marshal General Asim Munir. pic.twitter.com/TNphRDEZ9w

— Levent Kemal (@leventkemaI) April 11, 2026 “>

“ड्रेस डिप्लोमेसी” का क्या मतलब?

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह “ड्रेस डिप्लोमेसी” थी, यानी कपड़ों के जरिए मैसेज देना। यह एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसमें अलग-अलग देशों को अलग-अलग संकेत दिए गए। इसमें ईरानी प्रतिनिधिमंडल से कॉम्बैट यूनिफॉर्म में मिलकर मुनीर ने साफ संकेत दिया कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। खासतौर पर 2024 में पाकिस्तान और ईरान के बीच हुए मिसाइल हमलों के बाद यह एक मजबूत संदेश था कि पाकिस्तान हर स्थिति के लिए तैयार है।

अमेरिका को डिप्लोमैटिक संकेत

वहीं JD Vance के सामने सूट पहनकर मुनीर ने खुद को एक राजनेता और डिप्लोमैटिक लीडर के रूप में पेश किया। इसका मकसद अमेरिका के साथ रिश्तों को मजबूत दिखाना और बातचीत को सहज बनाना था। यह पहली बार नहीं है जब जनरल मुनीर ने ऐसा किया हो। इससे पहले भी वे Donald Trump से मुलाकात के दौरान सूट पहन चुके हैं। उस समय भी उन्होंने खुद को एक मॉडर्न और इंटरनेशनल लीडर के रूप में पेश करने की कोशिश की थी।

पाकिस्तान के अंदरूनी पावर का संकेत

यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संदेश नहीं था, बल्कि पाकिस्तान के अंदर की राजनीति का भी संकेत था। पाकिस्तान में सेना का प्रभाव पहले से ही मजबूत माना जाता है, और मुनीर ने यह दिखाने की कोशिश की कि असली ताकत उन्हीं के पास है।

रेड कार्पेट पर दिखी ताकत

JD Vance के साथ उनकी मुस्कुराते हुए रेड कार्पेट पर बातचीत इस बात का संकेत थी कि पाकिस्तान में बड़े फैसले आखिरकार सेना के हाथ में ही होते हैं न कि प्रधानमंत्री के पास। यहां तक कि पाकिस्तान में पीस टॉक को लेकर लगे ज्यादातर पोस्टर में आसिम मुनीर को ही आगे दिखाया गया है।

सूट को लेकर पिनक चुका है अमेरिका

याद होगा जब डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में जब यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को बातचीत करने बुलाया था तब जेडी वेंस और ट्रंप की जेलेंस्की से कपड़ों को लेकर भी बहस हो गई थी। उस दौरान जेलेंस्की एक जैकेट में पहुंचे थे, जिस पर जेडी वेंस और ट्रंप भड़क गए थे। शायद ये डर भी एक कारण हो सकता है कि मुनीर उनसे सूट-बूट में मिले।

कुल मिलाकर क्या समझें?

इस्लामाबाद में जहां फोकस अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर होना चाहिए था, वहां जनरल असीम मुनीर ने अपनी रणनीतिक “ड्रेस डिप्लोमेसी” से पूरी लाइमलाइट ले ली। उन्होंने साफ संकेत दिया कि पाकिस्तान में सिर्फ कूटनीति ही नहीं, बल्कि असली पावर भी सेना के हाथों में है।

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