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लोन गारंटर बनने के हैं बड़े खतरे: एक चूक से पेंशन से संपत्ति और क्रेडिट स्कोर तक, ये सब हो सकते हैं प्रभावित


जब आप किसी के लोन पेपर पर गारंटर के तौर पर दस्तखत करते हैं, तो आप सिर्फ गवाही नहीं देते, बल्कि कानूनी तौर पर कर्ज को अपने सिर पर लेते हैं। सेवानिवृत्त व्यक्तियों के लिए यह जोखिम और भी बड़ा है, क्योंकि उनके पास आय के सीमित साधन होते हैं। आइए समझते हैं गारंटर बनना आपके भविष्य के लिए कैसे भारी पड़ सकता है…

जिम्मेदारी आपकी, लाभ किसी और का

ऋण का गारंटर बनने का सीधा मतलब यह है कि यदि असली कर्जदार पैसा नहीं चुका पाता, तो उस पूरे धन की वसूली आपसे की जाएगी। बैंक को इससे कोई मतलब नहीं कि आपने वह पैसा इस्तेमाल किया है या नहीं। यदि कर्जदार भाग गया या मुकर गया, तो बैंक आपके दरवाजे पर दस्तक देगा। आपकी पेंशन, जमा पूंजी और यहां तक कि घर भी इस वसूली की चपेट में आ सकता है।

क्रेडिट स्कोर पर प्रहार


  • बहुत से लोग यह नहीं जानते कि यदि मुख्य कर्जदार किस्त चुकाने में एक दिन की भी देरी करता है, तो उसका बुरा असर आपके क्रेडिट प्रोफाइल पर भी पड़ता है।

  • भविष्य के रास्ते बंद: यदि कभी आपको स्वयं किसी काम के लिए धन की आवश्यकता पड़ी, तो बैंक आपको ऋण देने से मना कर सकता है, क्योंकि आप पहले ही किसी और के कर्ज के लिए उत्तरदायी हैं।

  • साख में गिरावट: कर्जदार की एक चूक आपके वर्षों से बनाए गए वित्तीय सम्मान को मिट्टी में मिला सकती है।

कानूनी पचड़े और मानसिक तनाव


उम्र के इस पड़ाव पर जब व्यक्ति को शांति और अच्छे स्वास्थ्य की जरूरत होती है, तब अदालती नोटिस और वसूली एजेंटों के चक्कर आपको मानसिक रूप से तोड़ सकते हैं।


कानूनी कार्रवाई: बैंक आपके विरुद्ध मुकदमा चला सकता है।


रिश्तों में खटास: पैसे का लेनदेन बड़े-बड़े रिश्तों में दरार डाल देता है। जिस अपने की मदद के लिए आप गारंटर बने थे, वही व्यक्ति विवाद होने पर आपका सबसे बड़ा शत्रु बन सकता है।



इमरजेंसी फंड पर संकट


बुढ़ापे में बीमारियां और आकस्मिक खर्चे कभी भी बताकर नहीं आते। यदि आपकी पूंजी का बड़ा हिस्सा किसी और का कर्ज चुकाने में चला गया, तो आप अपनी स्वयं की चिकित्सा और आपात स्थिति के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाएंगे।



गारंटर बनने से पहले याद रखें


कभी भी केवल मौखिक भरोसे पर दस्तखत न करें। नियम और शर्तों को बारीकी से समझें।


गारंटर बनने के बजाय कर्जदार को बीमा कराने की सलाह दें, ताकि उसकी अनुपस्थिति में बीमा कंपनी कर्ज का बोझ उठाए।


मदद करना धर्म है, लेकिन अपनी आर्थिक सुरक्षा की बलि देकर नहीं। यदि आपका मन गवाही नहीं दे रहा, तो विनम्रता से ‘ना’ कहें।



डिस्क्लेमर: अपना पैसा में छपे विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव अलग-अलग विशेषज्ञों, ब्रोकर फर्मों या रिसर्च संस्थानों के हैं। इनसे अखबार या उसके प्रबंधन की सहमति जरूरी नहीं है। कृपया किसी भी तरह का निवेश फैसला लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी अखबार या उसके प्रबंधन की नहीं होगी।



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LPG Crisis: ‘सप्लाई प्रभावित होने के बावजूद हर दिन दिए जा रहे 50 लाख सिलिंडर’, जानिए सरकार ने क्या बताया


पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव और 35 दिनों से अधिक समय से चल रहे संकट के बीच, भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर देश के उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र से भारत की एलपीजी सप्लाई भले ही प्रभावित हुई है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला को टूटने नहीं दिया गया है। उनके मुताबिक, वर्तमान विपरीत परिस्थितियों में भी भारत भर में प्रतिदिन लगभग 50 लाख एलपीजी सिलेंडरों की निर्बाध डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है।

पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पर कड़ी निगरानी

सुजाता शर्मा ने स्थिति की गंभीरता को समझाते हुए बताया कि हमारी एलपीजी जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से ही आता है, जिसके कारण मौजूदा संकट से सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। हालांकि, सरकार ने हर संभव प्रयास किया है कि किसी भी आम उपभोक्ता को पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत का सामना न करना पड़े। जमीनी स्तर पर स्थिति को संभालने के लिए तेल विपणन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी लगातार फील्ड में जाकर निरीक्षण कर रहे हैं। सुजाता शर्मा ने कहा कि ये अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सप्लाई सुचारू रहे और किसी भी संभावित गड़बड़ी को तुरंत रोका जाए। राहत की बात यह है कि देश के किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के पास से ‘एलपीजी ड्राईआउट’ (गैस खत्म होने) की कोई खबर नहीं है। 

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि आज 35 दिन से अधिक हो गए हैं। उन्होंने कहा, “हमारी एलपीजी की जरूरत का बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से ही आता है, इसलिए इससे सप्लाई प्रभावित हुआ है। हालांकि, भारत सरकार ने हर संभव प्रयास किया है कि किसी भी उपभोक्ता को पेट्रोलियम पदार्थों की दिक्कत न हो।  किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के पास एलपीजी ड्राईआउट की खबर नहीं है। हम लगभग 50 लाख सिलिंडर की डिलिवरी हर रोज दे रहे हैं। पिछले पांच हफ्ते में लगभग 18 करोड़ घरों को एलपीजी सिलिंडर पहुंचाया गया है। ऑनलाइन बुकिंग 97% है।” उन्होंने ताया कि ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए डिलिवरी ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था की गई है। हमारे डिस्ट्रीब्यूटर छुट्टी और रविवार के दिन भी काम कर रहे हैं। 

भारतीय नाविक सुरक्षित

ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सरकार महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भी पैनी नजर बनाए हुए है। राजनयिक स्तर पर, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पश्चिम एशियाई संकट को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर और ईरान के विदेश मंत्रियों के साथ अहम चर्चा की है, जिसकी पुष्टि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने की है।

व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं:


  • पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान में 16 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर 433 भारतीय नाविक तैनात हैं और सभी सुरक्षित हैं।

  • पिछले 24 घंटों में भारतीय जहाजों से जुड़ी किसी भी दुर्घटना की कोई रिपोर्ट नहीं है।

  • एलपीजी ले जाने वाले दो भारतीय जहाज, ‘ग्रीन संघवी’ और ‘ग्रीन आशा’, सुरक्षित रूप से तनावग्रस्त ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से गुजर चुके हैं।

खाद्यान्न का बफर स्टॉक मानकों से तीन गुना ज्यादा

वैश्विक आपूर्ति संकट के बीच भारत की खाद्य सुरक्षा भी बेहद मजबूत स्थिति में है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा के अनुसार, देश के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है, जो निर्धारित मानकों का तीन गुना है। 



वर्तमान में सरकार के पास 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 380 LMT चावल उपलब्ध है, जिससे कुल खाद्यान्न भंडार 602 LMT के पार पहुंच गया है। यह विशाल स्टॉक सार्वजनिक वितरण प्रणाली के साथ-साथ किसी भी आपातकालीन जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, इंडोनेशिया, मलेशिया, रूस, यूक्रेन, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे प्रमुख भागीदार देशों से खाद्य तेलों का आयात स्थिर बना हुआ है, और घरेलू स्तर पर सरसों के बेहतर उत्पादन ने भी आपूर्ति को मजबूत किया है।



पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट ने वैश्विक ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी की हैं। हालांकि, पेट्रोलियम, नौवहन और खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों के बयानों से स्पष्ट है कि भारत सरकार का समन्वित दृष्टिकोण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखने में कारगर साबित हो रहा है। सरकार स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए पूरी तरह तैयार है।





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The Bonus Market Update: बिकवाली के बाद बाजार में हरियाली; सेंसेक्स 787 अंक चढ़ा, निफ्टी 22900 के पार


पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध में संघर्ष विराम के प्रयासों की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में सुधार के बाद शुरुआती कारोबार में गिरावट के बाद सोमवार को बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में तेज उछाल देखने को मिला। इसके अलावा, बैंक शेयरों में भारी खरीदारी ने भी निवेशकों के मनोबल को समर्थन दिया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 13 पैसे बढ़कर 93.05 (अस्थायी) पर बंद हुआ।

एक उतार-चढ़ाव भरे सत्र में, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 787.30 अंक या 1.07 प्रतिशत बढ़कर 74,106.85 पर बंद हुआ। दिन के दौरान, यह 887.91 अंक या 1.21 प्रतिशत बढ़कर 74,207.46 पर पहुंच गया था। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 255.15 अंक या 1.12 प्रतिशत बढ़कर 22,968.25 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स की कंपनियों का हाल

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से ट्रेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा 7.89 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। एक्सिस बैंक, टाइटन, लार्सन एंड टुब्रो, अल्ट्राटेक सीमेंट और बजाज फाइनेंस भी प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं। दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचसीएल टेक और सन फार्मा पिछड़ गए।

एशयाई बाजारों में दिखी तेजी

एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। हांगकांग और शंघाई में छुट्टी के कारण बाजार बंद रहे। गुड फ्राइडे के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अमेरिकी और घरेलू शेयर बाजार बंद रहे।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि घरेलू शेयर बाजारों में जोरदार उछाल देखने को मिला क्योंकि सभी क्षेत्रों में वैल्यू बाइंग को बढ़ावा मिला। युद्धविराम प्रयासों की खबरों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी आई, जबकि उत्साहजनक अस्थायी बैंकिंग आंकड़ों ने ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में रुचि को बल दिया। 



हालांकि, लगातार मुद्रास्फीति के दबाव और वैश्विक व्यापार में संभावित व्यवधानों को लेकर चिंताओं के कारण समग्र जोखिम लेने की प्रवृत्ति सतर्क बनी हुई है, उन्होंने आगे कहा।



ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि आज की रिकवरी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट के कारण हुई, जिसमें ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 अमेरिकी डॉलर से नीचे आ गई। मध्य पूर्व के मध्यस्थों द्वारा प्रस्तावित अस्थायी युद्धविराम की खबरों के बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने निचले स्तरों पर स्थिरता बनाए रखी, जिससे बिकवाली का दबाव कम हुआ और व्यापक बाजार संरचना को समर्थन मिला।

रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे बढ़कर 92.90 पर बंद हुआ

भारतीय मुद्रा में सट्टेबाजी की प्रवृत्ति को रोकने और अस्थिरता को कम करने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए कदमों के बाद सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे बढ़कर 92.90 पर बंद हुआ।



विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि हालांकि आरबीआई के उपाय रुपये के लिए सकारात्मक हैं, लेकिन विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी, मजबूत डॉलर और अस्थिर भू-राजनीतिक स्थिति के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये पर दबाव डालना जारी रखे हुए हैं।



आरबीआई ने सट्टेबाजी की स्थितियों पर अंकुश लगाने के लिए अपने नियमों को सख्त किया और बैंकों की शुद्ध खुली स्थिति को 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक सीमित कर दिया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.13 पर खुला और दिन के कारोबार में गति पकड़ते हुए डॉलर के मुकाबले 92.79 के उच्च स्तर को छू गया। सोमवार के कारोबारी सत्र के अंत में, रुपया डॉलर के मुकाबले 92.90 पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 28 पैसे अधिक था।


 

ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 108.3 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 0.71 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 108.3 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 9,931.13 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,208.41 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 185.23 अंक या 0.25 प्रतिशत बढ़कर 73,319.55 पर बंद हुआ। निफ्टी 33.70 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 22,713.10 पर बंद हुआ।





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शराब नीति मामला- केजरीवाल हाईकोर्ट में आज खुद रखेंगे पक्ष: जस्टिस स्वर्ण कांता को केस से अलग करने की मांग; निष्पक्षता पर सवाल उठाए


नई दिल्ली1 घंटे पहले

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27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट से बरी होने के बाद केजरीवाल अपने घर पहुंचे और पत्नी को गले लगाकर रोने लगे।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब घोटाले मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी दलील रखेंगे।

यह मामला CBI की उस याचिका पर से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को राहत देने के आदेश को चुनौती दी गई है।

रविवार को केजरीवाल और अन्य 22 पूर्व आरोपियों ने इस मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को मामले से अलग (रिक्यूज) करने की मांग करते हुए आवेदन दाखिल किया है।

आरोपियों ने कहा कि उन्हें शक है कि इस मामले की सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से हो पाएगी। इसलिए मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर किया जाए।

रीक्यूजल का मतलब होता है कि कोई जज संभावित हितों के टकराव, पक्षपात या निष्पक्षता पर सवाल उठने की स्थिति में खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर ले।

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ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी किया था

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दे दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी।

ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है।

साथ ही, जस्टिस शर्मा की बेंच ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी।

केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट तक जज बदलने की मांग कर चुके

इसके बाद केजरीवाल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय को लेटर लिखकर जज बदलने की मांग की और कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ टिप्पणी करने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा पहले इस मामले में कई आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर चुकी हैं, जबकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी।

हालांकि, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पहले ही केजरीवाल की यह मांग खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि खुद जज ही तय करेंगे कि उन्हें सुनवाई से अलग होना है या नहीं।

इसके बाद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा की टिप्पणियों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अलग से विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी दाखिल की है।

केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे

दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया।

इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ।

इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था।

बरी होने पर केजरीवाल ने कहा था- मैंने सिर्फ ईमानदारी कमाई

27 फरवरी को बरी होने के बाद कोर्ट से बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल भावुक हो गए। उन्होंने कहा- मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है। आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार हैं।

वहीं, कोर्ट के फैसले पर मनीष सिसोदिया ने कहा- हमें एक बार फिर गर्व हो रहा हैं अपने संविधान पर और बी.आर. अंबेडकर पर, जिन्होंने हमें ऐसा संविधान दिया। सच की फिर से जीत हुई है। पूरी खबर पढ़ें…

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केजरीवाल बोले- कोर्ट का फैसला भाजपा के मुंह पर तमाचा:हमें खत्म करने के लिए मोदी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे

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आम आदमी पार्टी(AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि शराब घोटाले में कोर्ट का फैसला भारतीय जनता पार्टी के मुंह पर जोरदार तमाचा है। उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर 1 मार्च को एक रैली में कहा कि AAP को खत्म करने के लिए मोदी जी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे। उन्होंने मोदी और शाह पर 4 साल तक परेशान करने का आरोप लगाया। पूरी खबर पढ़ें…

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RBI MPC: अमेरिका-ईरान जंग के बीच रिजर्व बैंक की अहम बैठक, क्या बदलेंगी ब्याज दरें? जानें हर सवाल का जवाब


भारतीय रिजर्व बैंक (आबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अप्रैल महीने की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका-ईरान युद्ध, दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर रहा है, तब भारतीय अर्थव्यवस्था की नजरें इस नीतिगत बैठक पर टिकी हैं। निवेशकों और आम जनता के मन में उठ रहे तमाम सवालों के जवाब हमने इस रिपोर्ट में दिए हैं:

सवाल: आरबीआई की एमपीसी बैठक कब तक चलेगी और इसका मुख्य एजेंडा क्या है?

जवाब: रिजर्व बैंक की एमपीसी बैठक 6 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जा रही है। इस तीन दिवसीय बैठक का मुख्य एजेंडा ब्याज दरों की समीक्षा करना और अर्थव्यवस्था में महंगाई के आउटलुक का आकलन करना है। इस बार समिति का सबसे ज्यादा ध्यान मौजूदा अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण महंगाई पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।

सवाल: क्या इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव होने की संभावना है?

जवाब: आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि एमपीसी अपनी अप्रैल की इस समीक्षा में ब्याज दरों को 5.25% पर स्थिर रख सकती है। रॉयटर्स की जनवरी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के अंत तक केंद्रीय बैंक द्वारा 5.25% की प्रमुख ब्याज दर को बनाए रखने की उम्मीद है, ताकि पिछली कटौतियों के प्रभाव का आकलन किया जा सके। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वैश्विक हालात में आए नाटकीय बदलावों के कारण आरबीआई भविष्य में भी सतर्क दृष्टिकोण अपनाएगा।

सवाल: अमेरिका-ईरान युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर क्या असर पड़ रहा है?

जवाब: मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बुरी तरह बाधित किया है, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के अनिश्चित काल के लिए बंद होने से भारत का ऊर्जा आयात भी प्रभावित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय रुपये में 4% से अधिक की भारी गिरावट आई है, जो वित्तीय वर्ष 2026 को एक दशक से अधिक समय में रुपये के लिए सबसे खराब साल बनाता है।

सवाल: महंगाई और ब्याज दरों के मोर्चे पर आरबीआई का हालिया रुख कैसा रहा है?

जवाब: रिजर्व बैंक ने फरवरी 2025 से अब तक ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। दर में आखिरी कटौती दिसंबर में की गई थी, जिसके बाद से विशेषज्ञों ने काफी हद तक ठहराव का अनुमान लगाया था। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भविष्य में रुपये और ब्याज दरों की दिशा काफी हद तक वैश्विक मैक्रो कारकों द्वारा ही निर्धारित होगी।

सवाल: मौजूदा संकट के बीच दुनिया के अन्य देशों के केंद्रीय बैंक क्या कदम उठा रहे हैं?

जवाब: जहां भारत में दरें स्थिर रहने का अनुमान है, वहीं वैश्विक स्तर पर कई देश आक्रामक कदम उठा रहे हैं। हाल ही में, ऑस्ट्रेलिया और जापान के केंद्रीय बैंकों ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इसके अलावा कोलंबिया और ब्राजील ने भी महंगाई पर काबू पाने के लिए इसी तरह के कदम उठाए हैं।

सवाल: आरबीआई के फैसले और गवर्नर का संबोधन कब और कहां देखा जा सकता है?

जवाब: मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का आधिकारिक बयान तीन दिवसीय बैठक के समापन के बाद 8 अप्रैल को जारी किया जाएगा। आरबीआई की इस घोषणा को आरबीआई के सोशल मीडिया हैंडल्स पर लाइव देखा जा सकता है। दर्शक एनडीटीवी नेटवर्क के यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया चैनलों पर भी लाइव अपडेट्स ट्रैक कर सकते हैं। घोषणा के बाद, दोपहर 12 बजे आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। युद्ध के कारण यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो विशेषज्ञों के अनुसार रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि आरबीआई ने अस्थायी राहत देने के लिए कुछ उपाय किए हैं, लेकिन अप्रैल एमपीसी की बैठक से मिलने वाले संकेत इस बात की दिशा तय करेंगे कि भारतीय अर्थव्यवस्था निकट भविष्य में इन बाहरी चुनौतियों का सामना किस प्रकार करेगी।





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Crude Oil: मई से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाएगा ओपेक प्लस, सऊदी अरब और रूस की होगी 60% से अधिक हिस्सेदारी


वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आठ प्रमुख ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने मई 2026 से कच्चे तेल के उत्पादन में वृद्धि करने का रणनीतिक निर्णय लिया है। 5 अप्रैल 2026 को हुई एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक के बाद, इन देशों ने कुल 2,06,000 बैरल प्रतिदिन की उत्पादन वृद्धि को लागू करने की घोषणा की है। इस सामूहिक कदम का नेतृत्व सऊदी अरब और रूस करेंगे, जो इस अतिरिक्त उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बाजार में उतारेंगे। यह निर्णय मौजूदा वैश्विक बाजार स्थितियों और भविष्य की ऊर्जा मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

उत्पादन वृद्धि का संदर्भ और प्रमुख आंकड़े

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह वृद्धि उन स्वैच्छिक कटौतियों में एक क्रमिक समायोजन है जो पूर्व में लागू की गई थीं। विशेष रूप से, अप्रैल 2023 में जो 1.65 मिलियन बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त स्वैच्छिक उत्पादन कटौती घोषित की गई थी, उसी में से अब 2,06,000 बैरल प्रतिदिन को बाजार में वापस लाया जा रहा है। यह वापसी बाजार की बदलती परिस्थितियों के आधार पर क्रमिक रूप से की जाएगी।

इस नई नीति के तहत विभिन्न देशों का मई 2026 के लिए नया उत्पादन लक्ष्य इस प्रकार निर्धारित किया गया है:


  • सऊदी अरब और रूस: ये दोनों प्रमुख देश 62-62 kbd की सर्वाधिक वृद्धि करेंगे। इसके बाद मई के लिए सऊदी अरब का आवश्यक उत्पादन लक्ष्य 10,228 kbd और रूस का 9,699 kbd हो जाएगा।

  • इराक और यूएई: इराक अपने उत्पादन में 26 kbd का इजाफा करेगा, जिससे उसका लक्ष्य 4,326 kbd होगा। वहीं, यूएई 18 kbd की वृद्धि के साथ 3,447 kbd का उत्पादन करेगा।

  • कुवैत और अन्य देश: कुवैत 16 kbd की वृद्धि करेगा, जिससे उसका नया लक्ष्य 2,612 kbd हो जाएगा। इसके अलावा कजाकिस्तान 10 kbd, अल्जीरिया 6 kbd और ओमान 5 kbd का अतिरिक्त तेल उत्पादन करेंगे, जिससे उनका नया लक्ष्य क्रमशः 1,589 kbd, 983 kbd और 821 kbd तय किया गया है।

ऊर्जा आपूर्ति शृंखला और भू-राजनीतिक चुनौतियां

उत्पादन के आंकड़ों से आगे बढ़ते हुए, ओपेक+ के इन आठ देशों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं और समुद्री शिपिंग मार्गों की सुरक्षा पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। हाल के समय में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों के संदर्भ में समूह ने स्पष्ट किया कि क्षतिग्रस्त ऊर्जा संपत्तियों को पूरी क्षमता में बहाल करना अत्यंत खर्चीला और समय लेने वाला काम है। इसका सीधा असर समग्र आपूर्ति उपलब्धता और वैश्विक बाजार पर पड़ता है।



समूह ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचे पर हमलों या अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में किसी भी प्रकार के व्यवधान से बाजार में अस्थिरता बढ़ती है। इस तरह की कार्रवाइयां उत्पादकों, उपभोक्ताओं और संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लाभ के लिए बाजार स्थिरता का समर्थन करने वाले सामूहिक प्रयासों को कमजोर करती हैं। 

आगे का रास्ता और बाजार का दृष्टिकोण

सऊदी अरब, रूस और अन्य भागीदार देशों ने स्पष्ट किया है कि वे बाजार की स्थितियों का बारीकी से आकलन करना जारी रखेंगे। बाजार में स्थिरता बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत, उन्होंने एक सतर्क दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। तेल उत्पादक देशों ने अपनी नीति में पूरी तरह लचीलापन बनाए रखा है; अर्थात्, यदि परिस्थितियां बदलती हैं, तो स्वैच्छिक उत्पादन समायोजन के चरणबद्ध तरीके को रोका या वापस भी लिया जा सकता है। इसमें नवंबर 2023 में घोषित 2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कटौती के फैसले को पलटने का विकल्प भी शामिल है।



उत्पादन अनुशासन और 2024 की शुरुआत से दर्ज किए गए किसी भी अधिक उत्पादन के मुआवजे की निगरानी के लिए ये देश नियमित रूप से मासिक बैठकें करेंगे। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अगली महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक 3 मई, 2026 को निर्धारित की गई है।





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असम में राहुल बोले- हिमंता देश के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री: कानून उन्हें जेल में डालेगा; बंगाल में TMC-BJP की एकदूसरे के खिलाफ EC से शिकायत


नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम/गुवाहाटी/कोलकाता/चेन्नई27 मिनट पहले

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असम के कामरूप में राहुल गांधी ने रविवार को जनसभा को संबोधित किया।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को असम के कामरूप में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला। राहुल ने कहा- हिमंता देश के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं। वे कितना भी कुछ कर लें, अंत में कानून उन्हें पकड़कर जेल में डालेगा।

राहुल ने आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री 24 घंटे नफरत और हिंसा की राजनीति करते हैं। उन्होंने दिवंगत गायक जुबिन गर्ग का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सोच और सरमा की विचारधारा में बड़ा अंतर है। राहुल ने वादा किया कि कांग्रेस के सत्ता में आने पर 100 दिनों के भीतर जुबिन गर्ग को न्याय दिलाया जाएगा।

इधर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा ने एक-दूसरे के खिलाफ हेट स्पीच का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि BJP उम्मीदवार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ आपत्तिजनक और धमकी भरे बयान दिए हैं।

वहीं BJP ने पलटवार करते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक बयान दिए।

बंगाल के कूचबिहार में रविवार को भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

बंगाल के कूचबिहार में रविवार को भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

चुनाव राज्यों के बड़े अपडेट्स…

  • राहुल गांधी सोमवार को पुडुचेरी में जनसभा को संबोधित करेंगे और पार्टी का चुनावी घोषणापत्र जारी करेंगे। कांग्रेस के तमिलनाडु और पुडुचेरी प्रभारी गिरीश चोडंकर ने बताया कि यह रैली सुबह 11 बजे होगी।
  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने रविवार को केंद्र सरकार पर राज्य के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र तमिलनाडु से टैक्स तो लेती है, लेकिन उसका उचित हिस्सा वापस नहीं देती और उल्टा सवाल करती है कि पैसा कहां जा रहा है।
  • महाराष्ट्र के बारामती उपचुनाव में कांग्रेस ने सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को उम्मीदवार बनाया है। इस फैसले से महा विकास अघाड़ी (MVA) में मतभेद सामने आए हैं, क्योंकि शरद पवार गुट की NCP (SP) ने सुनेत्रा पवार के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया था। शिवसेना (UBT) ने भी चुनाव को निर्विरोध रखने के संकेत दिए थे।

खबरें और भी हैं…



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JAL अधिग्रहण मामला: सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका, अदाणी की ₹14535 करोड़ की बोली पर नहीं लगाई रोक


भारत के कॉरपोरेट जगत से जुड़ी एक अहम कानूनी लड़ाई में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अदाणी ग्रुप की ₹14,535 करोड़ की बोली के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल)  के अधिग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

हालांकि, अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए जेएएल की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी को बिना नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इस मामले में सभी पक्ष खासतौर पर वेदांता लिमिटेड और अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड अपनी दलीलें एनसीएलएटी के सामने रखें। अदालत ने एनसीएलएटी को निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करे। एनसीएलएटी इस विवाद पर 10 अप्रैल से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

दरअसल, वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनसीएलएटी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अदाणी ग्रुप की बोली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।

इससे पहले:


  • 24 मार्च को एनसीएलएटी ने अंतरिम रोक देने से इनकार किया था।

  • 25 मार्च को वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।

  • एनसीएलएटी ने जेएएल के कर्जदाताओं की समिति (CoC) से जवाब मांगा था।

 

अधिग्रहण की कहानी

जेएएल दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है और इसके अधिग्रहण के लिए कई कंपनियां दौड़ में थीं। अंततः नवंबर में कर्जदाताओं ने अदाणी एंटरप्राइजेज की योजना को मंजूरी दी, जिसे बाद में कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने भी हरी झंडी दे दी।



वेदांता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग अपीलें दायर की हैं


  • रेजोल्यूशन प्लान की वैधता पर सवाल।

  • सीओसी और एनसीएलटी द्वारा मंजूरी पर आपत्ति।

अब आगे क्या?

अब इस पूरे मामले का फैसला एनसीएलएटी में होने वाली सुनवाई पर टिका है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से साफ है कि फिलहाल अदाणी ग्रुप की बोली पर कोई रोक नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।


 



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रुतुराज गायकवाड़ ने आरसीबी के खिलाफ चेन्नई सुपर किंग्स की लगातार तीसरी हार की जिम्मेदारी स्वीकार की।


Sports

-Oneindia Staff

चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के कप्तान रुतुराज गायकवाड़ अपनी टीम की लगातार तीसरी हार के बाद हतप्रभ रह गए, और उन्होंने इस हार की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) से CSK को 43 रनों से हार का सामना करना पड़ा, जिसमें टिम डेविड की विस्फोटक पारी और जैकब डफी के शुरुआती ब्रेकथ्रू निर्णायक साबित हुए।

 गायकवाड़ ने सीएसके की हार की जिम्मेदारी ली

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“अगर मैंने अधिक योगदान दिया होता, तो शायद स्थिति अलग होती। यह हार निश्चित रूप से आज मेरी वजह से हुई,” गायकवाड़ ने स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि गेंदबाजी पारी के 13वें या 14वें ओवर तक CSK का नियंत्रण था, लेकिन उसके बाद उन्होंने गति खो दी।

RCB की जीत में टिम डेविड का 25 गेंदों पर 70 रन का शानदार प्रदर्शन महत्वपूर्ण था। गायकवाड़ ने डेविड को पहले आउट न कर पाने पर अफसोस व्यक्त किया, क्योंकि अंशुल कंबोज की वह गेंद जिस पर उनका विकेट गिर सकता था, उसे नो-बॉल करार दिया गया था। “लगभग उसका विकेट मिल गया था लेकिन वह अवैध डिलीवरी थी। उसके बाद, उसने पूरे मैदान में छक्के-चौके जड़े। उसे सलाम,” गायकवाड़ ने कहा।

डेविड ने अपनी जीत का श्रेय RCB के बल्लेबाजी कोच दिनेश कार्तिक से मिली अंतर्दृष्टि को दिया, जिसने उन्हें परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में मदद की। “मैं अपने खेल में ज्यादा बदलाव नहीं करता, लेकिन मुझे मेरे द्वारा की गई सारी तैयारी से आत्मविश्वास मिलता है,” डेविड ने मैच के बाद की प्रस्तुति के दौरान कहा।

RCB की शानदार जीत

RCB ने 3 विकेट खोकर 250 रन बनाए, जिसमें डेविड ने आठ छक्के और तीन चौके जड़े। कप्तान रजत पाटीदार ने डेविड को “सर्वश्रेष्ठ फिनिशर” बताया जिसे उन्होंने कभी देखा है। पाटीदार ने स्वयं 19 गेंदों पर 48 रनों की तेजतर्रार पारी खेलकर महत्वपूर्ण योगदान दिया।

“बहुत खुश हूं – ऐसा हमेशा नहीं होता है,” डेविड ने अपने प्रदर्शन के बारे में कहा। उन्होंने मैच के दौरान अपने आत्मविश्वास के लिए टीम के साथियों जितेश शर्मा और रोमारियो शेफर्ड के समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।

क्रुणाल पांड्या की अहम भूमिका

पाटीदार ने वरिष्ठ खिलाड़ी क्रुणाल पांड्या को भी एक ओवर में सरफराज खान और कार्तिक शर्मा को आउट करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए स्वीकार किया। “जब भी मैं दबाव में आता हूं, मैं केपी (क्रुणाल पांड्या) को देखता हूं और मुझे उनमें इतना विश्वास है,” पाटीदार ने कहा।

इस मैच ने RCB की मजबूत टीम की गतिशीलता और रणनीतिक तैयारी को रेखांकित किया, जिसके कारण अंततः CSK पर उनकी प्रभावी जीत हुई।

With inputs from PTI



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बंगाल एसआईआर ट्रिब्यूनल ने कांग्रेस उम्मीदवार मोहताब शेख का नाम बहाल करने का आदेश दिया


India

-Oneindia Staff

एक महत्वपूर्ण कानूनी विकास में, कांग्रेस उम्मीदवार मोहतब शेख को एक ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद चुनावी सूची में फिर से शामिल कर लिया गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणनम के नेतृत्व वाले एक ट्रिब्यूनल द्वारा सुनाया गया यह फैसला, तार्किक विसंगतियों के कारण किसी उम्मीदवार से जुड़े एकमात्र न्यायिक मामले को सुलझाने वाले ट्रिब्यूनल का पहला मामला है।

 ट्रिब्यूनल ने मोहताब शेख की उम्मीदवारी बहाल की

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विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान शेख का नाम हटा दिया गया था, जिससे उन्हें अपनी पार्टी द्वारा आधिकारिक रूप से नामित किए जाने के बावजूद अपना नामांकन दाखिल करने से रोका गया था। राहत व्यक्त करते हुए, शेख ने कहा, “आखिरकार न्याय मिल गया है। मेरा नाम साफ हो गया है और बहाल हो गया है, और अब मैं अपना नामांकन दाखिल कर सकता हूं।”

ट्रिब्यूनल का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग (EC) ने 28 फरवरी को अंतिम निर्वाचक नामावली प्रकाशित की थी, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया के तहत कई मतदाताओं की सूची थी। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद, न्यायिक अधिकारियों ने इन मामलों का सत्यापन शुरू कर दिया। शीर्ष अदालत ने प्रभावित व्यक्तियों को भी नामित ट्रिब्यूनलों से संपर्क करने की अनुमति दी थी यदि उनके नाम सूची से बाहर रखे गए थे।

शेख को शुरू में चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि ट्रिब्यूनल अभी तक संचालित नहीं हुए थे, जिससे उनके नामांकन पत्र दाखिल करने की उनकी क्षमता में देरी हुई। उन्होंने बाद में सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने उनकी याचिका में तेजी लाई और उन्हें एक पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के नेतृत्व वाले ट्रिब्यूनल के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत करने की अनुमति दी।

पहचान सत्यापन और ट्रिब्यूनल का निर्णय

साल्ट लेक के बिजोन भवन स्थित ट्रिब्यूनल में, शेख ने आधार, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र सहित कई पहचान दस्तावेज जमा किए। उनके वकील ने तर्क दिया कि उनके पिता के नाम से संबंधित विसंगतियों का उनकी अपनी पहचान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ट्रिब्यूनल ने इस तर्क को स्वीकार किया और देखा कि उनके पिता के विवरण में डेटा की विसंगति थी, लेकिन शेख को मतदाता सूची से बाहर करने का कोई वैध कारण नहीं था।

ट्रिब्यूनल ने रविवार रात को पूरक सूची में शेख का नाम फिर से शामिल करने का निर्देश दिया। इस फैसले से शेख के लिए आगामी चुनाव में भाग लेने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जबकि फराक्का में मतदान का पहला चरण नजदीक है और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अप्रैल निर्धारित है।

भविष्य के मामलों के लिए निहितार्थ

यह फैसला मतदाता डेटा में तार्किक विसंगतियों से जुड़े भविष्य के मामलों के लिए एक मिसाल कायम करता है। यह प्रशासनिक चुनौतियों के बीच नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है। ईसी अधिकारी ने नोट किया कि यह किसी भी SIR अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा दिया गया पहला फैसला था जिसमें एक चुनाव उम्मीदवार शामिल था।

शेख का मामला सटीक मतदाता डेटा प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करता है और भविष्य की चुनावी प्रक्रियाओं में समान मुद्दों को संबोधित करने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है। जैसे-जैसे न्यायिक अधिकारी चरणों में न्यायिक मामलों का समाधान जारी रखते हैं, यह निर्णय प्रभावित कर सकता है कि भविष्य में समान विवादों को कैसे संभाला जाता है।

With inputs from PTI

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