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Raghav Chadha:’परिणीति ने खत्म किया पति का करियर’,अभिनेत्री पर क्यों भड़के लोग? क्या है PM मटेरियल वाली बात?


India

oi-Ankur Sharma

Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी (आप) के स्टार नेताओं में से एक राघव चड्ढा इस वक्त सोशल मीडिया से लेकर न्यूज रूम तक चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल पार्टी ने उन्हें ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटा दिया है और उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिसके बाद से ये कहा जाने लगा कि ‘पार्टी का शीर्ष कमान राघव चड्डा से खुश नहीं हैं।’

इन बातों को हवा उस वक्त और मिल गई जिस वक्त अपने खिलाफ हुए एक्शन पर राघव चड्ढा ने प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करके कहा कि ‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।’

Raghav Chadha

वाीडियो में राघव ने कहा कि ‘आम आदमी पार्टी ने मेरे बोलने पर रोक लगाई है। मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी ना समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।’ जिसके बाद आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेताओं ने राघव पर धावा बोल दिया है।

Raghav Chadha भाजपा से डरे हुए हैं: सौरभ भारद्वाज

वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना ने राघव के बारे में कहा है कि ‘वो बीजेपी से डरे हुए हैं’ तो वहीं आप नेता संजय सिंह ने कहा कि ‘हम लोग अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं। मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हैं। कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर आपने चुप्पी साध रखी है। देश की जनता यह जानना चाहती है कि Raghav Chadha मोदी सरकार से सवाल क्यों नहीं पूछते हैं?’

Raghav Chadha

‘परिणीति ने खत्म किया Raghav Chadha का करियर’

जहां नेताओं की ओर से इस तरह की बयानबाजी हो रही है वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर लोग राघव की पत्नी और बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा को ट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ ने तो यहां तक लिख दिया कि ‘राघव चड्डा के साथ ये सबकुछ जो हो रहा है उसके पीछे कारण उनका परिणीति चोपड़ा से शादी करना है, वो खुद तो फ्लॉप रहीं हैं अब राघव को भी फ्लाप करा दिया है।’

Raghav Chadha

‘परिणीति अपने पति Raghav Chadha के लिए पनौती ‘

एक यूजर ने लिखा कि ”परिणीति से शादी राघव के राजनीतिक करियर के लिए ‘महंगा’ साबित हुई है’। तो वहीं एक ने लिखा कि ‘परिणीति अपने पति राघव के लिए पनौती हैं’। एक यूजर ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, ‘परिणीति चोपड़ा से शादी उनके करियर के पतन का बड़ा कारण है, जिस तरह से जांच एजेंसियों का दबाव बढ़ रहा है, राघव एक आसान निशाना हो सकते थे, जिससे चोपड़ा परिवार की छवि को नुकसान पहुंचता।’

‘Raghav Chadha ने पूरे दिल से BJP जॉइन कर ली है’

एक अन्य ट्वीट में लिखा गया, ‘प्रियंका चोपड़ा और परिणीति चोपड़ा ने उनका राजनीतिक करियर खत्म कर दिया है। असल में, उन्होंने पूरे दिल से BJP जॉइन कर ली है। अब बस उनके राज्यसभा कार्यकाल के समाप्त होने का इंतजार है। आने वाले वक्त में केजरीवाल के साथ एक जबरदस्त खेल होने वाला है।’ वहीं, एक तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ‘अच्छे इंसान के साथ हमेशा बुरा होता है।’

Raghav Chadha

‘प्रधानमंत्री मटेरियल हैं Raghav Chadha’, पोस्ट ने बिगाड़ा खेल

वैसे ये यूजर्स इसलिए भी परिणीति के पीछे पड़े क्योंकि कुछ वक्त पहले परिणीति की एक पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें उन्होंने राघव चड्ढा को ‘भविष्य का प्रधानमंत्री मटेरियल’ बताया था। आलोचकों का मानना है कि ‘आप’ में जब किसी नेता को ‘सर्वोच्च नेता’ से अधिक प्रचार या महत्व मिलने लगता है, तो उनके ‘पर कतर दिए जाते है, राघव के साथ भी इसलिए ऐसा हो रहा है क्योंकि वो इन दिनों पार्टी का लोकप्रिय फेस हैं।’

To a great Extent… His marriage to Parineeti is a big Reason. The way BJP has been hounding AAP Leaders and sending them to Jail on Fake cases, Raghav was also a potential candidate. And this wud hv seriously dented the Chopra Familys Brand.

— Gurmeet Bedi (@GurmeetBedi39) April 2, 2026 “>

Khujli was jealous since he married parineeti

— WiseNut (@wisenut) April 2, 2026 “>





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Oi Explained: Suez Canal पर टोल जायज तो होर्मुज पर नाजायज कैसे? क्या कहता है अंतर्राष्ट्रीय कानून?


International

oi-Siddharth Purohit

Oi Explained: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब Strait of Hormuz को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। ईरान इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों पर “टोल” लगाने की बात कर रहा है। कुछ लोग इसकी तुलना Suez Canal से कर रहे हैं, जहां पहले से ही जहाजों से शुल्क लिया जाता है। लेकिन क्या ये तुलना सही है? इसी सवाल ने ये पूरी बहस खड़ी कर दी है।

स्वेज कनाल कैसे जायज?

Suez Canal एक पूरी तरह मानव निर्मित नहर है, जिसे 1869 में फ्रांसीसी इंजीनियरों की मदद से बनाया गया था। यह भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) को लाल सागर (Red Sea) से जोड़ती है और यूरोप से एशिया के बीच समुद्री दूरी को हजारों किलोमीटर कम कर देती है।

Oi Explained Hormuz Vs Suez Canal

• इस नहर को बनाने में करीब 10 साल लगे
• यह पूरी तरह मिस्र (Egypt) के कंट्रोल में है
• यहां से गुजरने वाले हर जहाज को टोल देना पड़ता है
• यह टोल एक तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर यूज़ फीस है

Oi Explained Hormuz Vs Suez Canal

2021: जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंस गया था जहाज

यानी सरल शब्दों में, जो रास्ता इंसान ने बनाया, उसका इस्तेमाल करने के लिए शुल्क लेना जायज माना जाता है।

किसने बनाया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

दूसरी तरफ Strait of Hormuz एक प्राकृतिक जलडमरुमध्य (Natural Strait) है, जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर से जोड़ता है।

• दुनिया के लगभग 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है
• इसकी चौड़ाई कुछ जगहों पर सिर्फ 33 किलोमीटर है
• यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग (International Waters) के तहत आता है

यहां सबसे अहम बात है कि यह किसी एक देश की बनाई हुई संपत्ति नहीं है, बल्कि प्राकृतिक रूप से बना समुद्री मार्ग है।

क्या कहता है अंतर्राष्ट्रीय कानून?

अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS), साफ कहता है कि:

• अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से सभी देशों के जहाजों को फ्री ट्रांजिट (Transit Passage) का अधिकार है।
• कोई भी देश वहां मनमाने तरीके से टोल नहीं लगा सकता।
• केवल सुरक्षा या पर्यावरण कारणों से सीमित नियम लागू हो सकते हैं।
इसका मतलब, होर्मुज पर स्वेज जैसा टोल लागू करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना जा सकता है।

अगर ईरान टोल लगाता है तो क्या होगा?

अगर ईरान वास्तव में टोल लगाने की कोशिश करता है, तो इसके बड़े असर हो सकते हैं। जैसे-पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में अचनाक से तेज उछाल आ जाएगा, जो लगभग हर उस देश में। महंगाई ला सकता है जहां ईरानी तेल का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, समुद्री व्यापार की लागत बढ़ेगी जिससे अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ तनाव बढ़ेगा। टोल लगने की वजह से सैन्य टकराव का खतरा भी बार-बार बनता रहेगा।

दुनिया में कितने समुद्री रास्ते प्रमुख हैं?

अगर होर्मुज पर टोल लागू होता है, तो दुनिया के अन्य अहम स्ट्रेट्स पर भी इसका असर पड़ सकता है:

1. Strait of Malacca- एशिया का सबसे व्यस्त मार्ग
2. Bab el-Mandeb- यूरोप-एशिया कनेक्शन
3. Bosporus Strait- यूरोप और एशिया के बीच
4. Strait of Gibraltar
5. Panama Canal (यह भी स्वेज की तरह मानव निर्मित है)

6. Bering Strait (रूस-अमेरिका के बीच सबसे विवादित स्ट्रेट)

इनमें से ज्यादातर प्राकृतिक स्ट्रेट्स हैं, जहां टोल लगाना अंतरराष्ट्रीय विवाद को जन्म दे सकता है।

तो फिर ईरान की तुलना क्यों गलत है?

सीधी भाषा में कहें तो, स्वेज नहर इंसानों द्वारा बनाई गई। इसको बनाने में उस जमाने में भी खर्च अच्छा खासा हुआ था। इसे बनाने के दो मकसद थे, पहला- समुद्री रास्ता छोटा हो और माल ढुलाई आसाना। दूसरा- इसको बनाकर टोल लिया जा सके जो देश के राजस्व में बढ़ोतरी करे। इसके अलावा इसको मेनटेन करने में काफी खर्च होता है। इसमें हाल के सालों में जहाज भी फंस गया था। जो बताता है कि ऐसी घटनाओं के लिए मिस्र को काफी खर्चा करना पड़ता है। इसके एक साल के मेनटेनेंस में 20 से 40 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं। जबकि 2023 में इजिप्ट ने इससे करीब 95 हजार करोड़ रुपए कमाए थे। इसलिए टोल को जायज कहा जा सकता है।

वहीं दूसरी तरफ, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, प्रकृति द्वारा बना बना है। न इसमें किसी इंजीनियर का योगदान है और न ही इसे मेनटेन करने का कोई सालाना खर्च है। भले ही यह ईरान के करीब हो लेकिन यह अंतर्राष्ट्रीय सीमा में माना गया है। न ईरान इसे मेनटेन करता है, न इसकी सुरक्षा में कुछ खर्च करता है और न ही यहां से गुजरने वाले जहाजों को कोई एक्स्ट्रा सर्विस उपलब्ध कराता है। इसलिए यहां पर टोल विवादित और गैरकानूनी है।

क्या होगा अगर ईरान टोल लगाएगा?

अगर ईरान होर्मुज पर टोल लगाने की कोशिश करता है, तो यह सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं होगा। यह ग्लोबल पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल लॉ और ऑयल मार्केट को हिला देने वाला कदम होगा।यानी मामला सिर्फ टोल का नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के ट्रेड सिस्टम के बैलेंस का है।

इस एक्सप्लेनर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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Congress Candidate List: TN चुनाव में कांग्रेस की पहली सूची जारी, सेल्वापेरुंथगई समेत ये दिग्गज मैदान में


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oi-Puja Yadav

Congress Candidate List TN Election: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आज अपने 27 उम्मीदवारों की पहली आधिकारिक सूची जारी कर दी है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा जारी इस सूची में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ क्षेत्रीय क्षत्रपों पर भरोसा जताया गया है।

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कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) द्वारा मंजूर की गई इस सूची में सबसे प्रमुख नाम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) के. सेल्वापेरुन्थागाई का है, जो श्रीपेरंबुदूर (SC) विधानसभा क्षेत्र से अपनी किस्मत आजमाएंगे। वहीं, पूर्व सांसद डॉ. ए. चेल्ला कुमार को कृष्णागिरी सीट से चुनावी मैदान में उतारा गया है।

कांग्रेस ने PCC चीफ सेल्वापेरुन्थागाई और चेल्ला कुमार को उतारा मैदान में

कांग्रेस ने अपनी इस सूची में राज्य के दिग्गज नेताओं को चुनावी रण में उतारा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थागाई को उनकी मौजूदा सीट श्रीपेरंबुदूर (SC) से फिर से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कृष्णागिरी के पूर्व सांसद डॉ. ए. चेल्ला कुमार को कृष्णागिरी विधानसभा क्षेत्र से टिकट देकर कांग्रेस ने अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। कांग्रेस की पहली सूची में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से कद्दावर नेताओं को जगह मिली है। मुख्य उम्मीदवारों की सूची इस प्रकार है:

चेन्नई और आसपास: वेलाचेरी सीट से जेएमएच हसन मौलाना को टिकट दिया गया है, जबकि श्रीपेरंबुदूर की सुरक्षित सीट से पीसीसी चीफ खुद मैदान में हैं। पोनेरी (SC) से दुरई चंद्रशेखर को उम्मीदवार बनाया गया है।

पश्चिमी और उत्तरी तमिलनाडु: कृष्णागिरी से डॉ. ए. चेल्ला कुमार और शोलिंगुर से ए.एम. मुनिरत्नम को प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा, इरोड (पूर्व) से गोपीनाथ पलानीअप्पन और उधगमंडलम (ऊटी) से बी. रामचंद्रन चुनाव लड़ेंगे।

दक्षिणी तमिलनाडु: शिवकाशी से गणेशन आशकन और नांगुनेरी से रूबी मनोहरन को फिर से मौका दिया गया है। वहीं, कन्याकुमारी जिले की महत्वपूर्ण सीट किलयूर से एडवोकेट एस. राजेश कुमार और विलावनकोड से टी.टी. प्रवीण को मैदान में उतारा गया है।

महिलाओं और युवा चेहरे पर भी जताया भरोसा

कांग्रेस की इस सूची में महिला नेतृत्व को भी स्थान मिला है। डॉ. थरागाई कथबर्ट को कोलाचेल से और एस. कोर्वशी अमृतराज को अंबासमुद्रम से टिकट दिया गया है। इसके साथ ही, सिंगनल्लूर से वी. श्रीनिधि नायडू को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने एक नया चेहरा पेश किया है।

पार्टी ने अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटों पर भी विशेष ध्यान दिया है। उथनगराई (SC) से आर. कुप्पु सामी, अत्तूर (SC) से एस.के. अर्थनारी, थुरैयूर (SC) से एम. विचु लेनिन प्रसाद और शंकरनकोविल (SC) से वी.पी. दुरई को उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा, अंबासमुद्रम से एस. कोर्वशी अमृतराज और तिरुवदानई से रणमा करुमानिकम को प्रत्याशी घोषित किया गया है।

Congress-DMK गठबंधन की मजबूती का दावा

ऐसा कयास लगाया जा रहा था कि Congress-DMK गठबंधन के बीच सीट बंटवारे को लेकर मनमुटाव चल रहा है। हालांकि, उम्मीदवारों की घोषणा के बाद चेन्नई में पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। के. सेल्वापेरुन्थागाई ने कहा कि यह सूची ‘जमीनी कार्यकर्ताओं और अनुभवी दिग्गजों’ का मिश्रण है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और DMK का गठबंधन राज्य की सभी सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा और ‘द्रविड़ियन मॉडल’ की सरकार को और मजबूती प्रदान करेगा।

विपक्षी दल AIADMK और भाजपा के खिलाफ कांग्रेस ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी का मुख्य फोकस शिक्षा, रोजगार और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ राज्य के अधिकारों की रक्षा करना है।

तमिलनाडु चुनाव को लेकर क्या है कांग्रेस की स्ट्रैटेजी?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने इस बार उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय समीकरण, जातीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखा है। हालांकि असली परीक्षा चुनावी मैदान में होगी, जहां पार्टी को DMK के साथ तालमेल बैठाते हुए AIADMK और BJP के खिलाफ मजबूत प्रदर्शन करना होगा।

कांग्रेस की यह 27 उम्मीदवारों की सूची तमिलनाडु चुनाव में पार्टी की रणनीति की झलक देती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इन चेहरों के दम पर कांग्रेस राज्य की राजनीति में कितनी पकड़ बना पाती है और गठबंधन को जीत दिलाने में कितना योगदान दे पाती है।



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लव ट्राइंगल, साजिश और दफन लाश! रायपुर में बड़ा खुलासा, नाबालिगों समेत 5 पकड़ाए


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रायपुर के अभनपुर में हुए युवक हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. जांच में लव ट्राइंगल और साजिश का एंगल सामने आया है. युवती ने बातचीत के बहाने युवक को बुलाया, जहां उस पर हमला किया गया और बाद में गला दबाकर हत्या कर दी गई. शव को दफनाया गया. पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अभी फरार है.

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रायपुर पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है.

विशु शुक्‍ला
रायपुर. 
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अभनपुर क्षेत्र में सामने आए बहुचर्चित हत्याकांड का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है. इस मामले में लव ट्राइंगल, साजिश और सुनियोजित तरीके से की गई वारदात ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है. पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक युवक को पहले बातचीत के बहाने बुलाया गया और फिर योजनाबद्ध तरीके से उस पर हमला किया गया. इस पूरे घटनाक्रम में एक युवती सहित पांच आरोपियों की भूमिका सामने आई है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं.

जांच के मुताबिक, इस हत्या के पीछे व्यक्तिगत संबंधों का जटिल जाल था, जिसमें एक ही युवती से जुड़े रिश्तों ने विवाद को हिंसक रूप दे दिया. पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है. इस खुलासे ने न केवल स्थानीय स्तर पर सनसनी फैला दी है, बल्कि यह भी दिखाया है कि किस तरह आपसी संबंधों के टकराव ने एक सुनियोजित अपराध का रूप ले लिया.

क्या है पूरा मामला
अभनपुर थाने में दर्ज इस मामले में मृतक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में गुमशुदगी के बाद जांच शुरू हुई थी. पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर हत्या का खुलासा किया. जांच में सामने आया कि मृतक और मुख्य आरोपी श्याम सुंदर एक ही युवती के संपर्क में थे, जिससे विवाद की स्थिति बनी.

लव ट्राइंगल बना वजह
पुलिस के अनुसार, युवती और मृतक के बीच बातचीत के बहाने मुलाकात तय कराई गई. इसी दौरान मौके का फायदा उठाकर युवती ने लोहे के पाइप से वार किया. हमले के बाद जब युवक जमीन पर गिर गया, तो मुख्य आरोपी श्याम सुंदर ने उसका गला दबाया. इसके बाद उसे मृत समझ लिया गया.

लाश ठिकाने लगाने की साजिश
हत्या के बाद आरोपी घबरा गए और सबूत मिटाने के लिए लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. श्याम सुंदर ने अपने साथियों, जिनमें दो नाबालिग और अन्य सहयोगी शामिल थे, की मदद से शव को ऑटो में ले जाकर सुनसान इलाके में दफन कर दिया. बताया गया है कि गड्ढा खोदने के बदले नाबालिगों को पैसे और शराब दी गई थी.

गिरफ्तारी और फरार आरोपी
पुलिस ने मुख्य आरोपी श्याम सुंदर और युवती को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) के एक होटल से गिरफ्तार किया. अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया गया है, जबकि माइकल नाम का आरोपी अभी फरार है, जिसकी तलाश हो रही है. पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है. अधिकारियों के अनुसार, इस केस में सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है, ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके.

About the Author

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Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें



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केंद्र सरकार ने NCERT को डीम्‍ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया: खुद एंट्रेस लेने, कोर्स और सिलेबस डिजाइन करने, डिग्री देने की छूट मिली


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26 मिनट पहले

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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा दिया। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की सलाह पर शिक्षा मंत्रालय ने 30 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की।

इस घोषणा के साथ ही NCERT के पांच रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन और भोपाल में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन डीम्ड यूनिवर्सिटी बन गए हैं। ये यूनिट्स है-

  1. रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, अजमेर, राजस्थान।
  2. रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, भोपाल, मध्य प्रदेश।
  3. रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, भुवनेश्वर, ओडिशा।
  4. रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, मानसगंगोत्री, मैसूर, कर्नाटक।
  5. नॉर्थ ईस्ट रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, शिलांग, मेघालय।
  6. पंडित सुंदरलाल शर्मा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन, भोपाल, मध्य प्रदेश।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, UGC की सलाह पर, नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को एक अलग श्रेणी के तहत ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ (मानित विश्वविद्यालय) घोषित करता है।एक अधिसूचना में, मंत्रालय कहता है, “UGC पोर्टल पर नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल अनुसंधान और प्रशिक्षण… pic.twitter.com/2Ar89jpYb0— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 3, 2026

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‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का क्या मतलब है

NCERT को यह दर्जा मिलने का मतलब है कि NCERT अब सिर्फ स्कूल कोर्स डिजाइन करने तक सीमित नहीं है। NCERT अब अपने नए एकेडिमक प्रोग्राम्स के साथ ही डॉक्टरेट और नए डिग्री कोर्सेज भी लॉन्च कर सकता है।

यूनिवर्सिटीज के अलावा हायर एजुकेशन के स्पेशलाइज्ड इंस्टीट्यूट्स को केंद्र सरकार UGC की सलाह पर ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा देती है।

  • खुद का अलग एडमिशन प्रोसेस तय कर सकती है।
  • खुद का सिलेबस तय कर सकती है।
  • खुद एग्जाम कंडक्ट करवा सकती है।
  • खुद स्टूडेंट्स को डिग्री दे सकती है।

स्कूल करिकुलम तैयार करने के लिए बनी NCERT

NCERT एक ऑटोनोमस बॉडी है, जिसे 1 सितंबर 1961 को भारत सरकार ने सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट्स को एकेडमिक और स्कूल से जुड़े मुद्दों पर सलाह देने और गाइड करने के लिए बनाया है।NCERT डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने से पहले तक भारत में सर्वोच्च शैक्षणिक निकाय के रूप में काम करती थी। इसके मुख्य काम हैं-

  • स्कूलों के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क तैयार करना।
  • क्लास 1 से 12वीं तक के बच्चों के लिए क्वालिटी टेक्स्ट बुक्स तैयार करना।
  • टीचर्स को ट्रेन करना।
  • स्कूल एजुकेशन से जुड़ी रिसर्च कंडक्ट और प्रमोट करना।
  • ई-पाठशाला और दीक्षा ई-लर्निंग प्लैटफॉर्म्स के लिए ऑनलाइन रिसोर्स तैयार करना।

नोटिफिकेशन के मुताबिक, UGC पोर्टल पर NCERT को एक स्पेशल केटेगरी के तहत ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा देने के लिए एक ऑनलाइन आवेदन अपलोड किया गया था। ये आवेदन UGC एक्ट, 1956 के सेक्शन 3 के तहत NCERT के 6 इंस्टीट्यूशंस को इसमें शामिल किया गया था।

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कवियित्री से कहानीकार बनीं ममता कालिया को साहित्‍य अकादमी मिला: लेखक का गुरूर तोड़ने को गद्य लिखा, 11 महीने बाद उसी से शादी की; जानें प्रोफाइल

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31 मार्च को ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। ये सम्मान 2021 में प्रकाशित उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए मिला है। पूरी खबर पढ़ें…

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Malda Violence: न्यायपालिका पर हमला, कानून-व्यवस्था की विफलता और पश्चिम बंगाल चुनाव पर गहराता संकट


Opinion

oi-Keshav Karna

Malda Violence: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से सामने आई हालिया घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कालियाचक गांव में जो कुछ हुआ, वह सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं था, बल्कि उसने लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोचिए, जिन न्यायिक अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने खुद नियुक्त (सात न्यायिक अधिकारी, जिनमें तीन महिला) किया हो, उन्हें ही घंटों तक बंधक बना लिया जाए, यह स्थिति अपने आप में कितनी गंभीर है।

1 अप्रैल 2026 को ये अधिकारी कालियाचक प्रखंड कार्यालय में SIR से जुड़ी आपत्तियों और दावों को सुनने के लिए मौजूद थे। लेकिन अचानक स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा। मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों ने लोगों में नाराजगी पैदा कर दी थी, जो धीरे-धीरे हिंसक विरोध में बदल गई। हालात इतने बिगड़ गए कि अधिकारियों को घंटों तक घेरकर रखा गया और उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी गईं। Supreme Court of India द्वारा इस घटना को ‘सुनियोजित’ और ‘चिंताजनक’ बताया जाना इस बात का संकेत है कि मामला साधारण प्रशासनिक विफलता से कहीं आगे बढ़ चुका है।

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मालदा की यह घटना केवल एक कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और राज्य की जवाबदेही की एक कठोर परीक्षा है। SIR को लेकर राज्य सरकार का टकरावपूर्ण रुख और यह घटना दोनों मिलकर एक बड़े सवाल को जन्म देते हैं कि क्या पश्चिम बंगाल में शासन संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप चल रहा है, या राजनीतिक संघर्ष के दबाव में संघीय ढांचा चरमरा रहा है? इस आलेख में इस घटना और इससे उपजे सवालों पर एक नजर डालते हैं….

राज्य की कानून-व्यवस्था सवालों के घेरे में

मालदा की घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह घंटों तक चलती रही और राज्य प्रशासन प्रभावी हस्तक्षेप नहीं कर सका। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, और ऐसे में राज्य सरकार की जवाबदेही से इनकार नहीं किया जा सकता। मालदा कांड में दोपहर 3:30 बजे शुरू हुए घेराव को रात 1 बजे तक समाप्त नहीं किया गया, तुर्रा बंधक बने अधिकारियों को भोजन-पानी तक नहीं दिया गया। सीजेआई सूर्यकांत ने स्वयं रात 2 बजे तक निगरानी की और कलकत्ता हाईकोर्ट के सीजेआई से संपर्क कर डीजीपी-मुख्य सचिव को फटकार लगाई। बकौल सुप्रीम कोर्ट, “पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई न होना ‘कर्तव्य का त्याग’ है।” चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह कहना कि ‘कानून व्यवस्था उनके हाथ में नहीं है, महज अपनी जिम्मेदारी को टालना है, जबकि राज्य में पुलिस और प्रशासन की विफलता स्पष्ट है।

बंगाल में सत्ताधारी पार्टी के कारिंदों का अराजक आचरण हमेशा चर्चा में रहता है। जो लोग पश्चिम बंगाल की राजनीति को जानते हैं वे यह समझ सकते हैं कि राजनीतिक कार्यकर्त्ता प्रशासनिक शक्तियों को कैसे अपने इशारे पर नचाते हैं। मालदा की इस घटना ने ममता बनर्जी के एकांगी प्रशासन की पोल खोल दी। राज्य में सुप्रीम कोर्ट के ऑबजर्बर तक सुरक्षित नहीं है और अपने कर्त्तव्यों का स्वतंत्रतापूर्वक निर्वहन नहीं कर सकते तो प्रशासन की निष्पक्षता सवालों के घेरे में आएगी ही। सवाल यह है कि जब राज्य में न्यायिक अधिकारी तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक खासकर वैचारिक साम्य न रखने वाले नागरिकों की सुरक्षा का क्या आश्वासन रह जाता है? यह सवाल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक भी है।

पश्चिम बंगाल चुनाव और SIR विवाद: अविश्वास की जड़

इस पूरे विवाद की जड़ में है मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR)। चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भारत के चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाता है। यह प्रक्रिया पिछले साल विधान सभा चुनाव से पहले बिहार में भी हुई थी। इस वर्ष पश्चिम बंगाल, समेत तमिलनाडु, केरल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी किया गया है और चुनाव आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि बिहार की तर्ज़ पर देश भर में मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा।

विपक्षी दलों में SIR को लेकर हमेशा असंतोष रहा है और जहां विपक्षी दलों की सरकारें हैं वहां अमूमन SIR पर प्रशासनिक तकरार भी हुए हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच इस प्रक्रिया ने आक्रामक रुख ले लिया है। लाखों आपत्तियां, बड़े पैमाने पर नामों का हटना और हाई रिजेक्शन रेट, इन सबने मतदाताओं के बीच संदेह और असंतोष को जन्म दिया। यही असंतोष मालदा में उग्र विरोध के रूप में सामने आया, जहां प्रदर्शनकारियों ने न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया, बल्कि न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बना लिया। यह स्थिति केवल विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास प्रतीत होती है।

न्यायपालिका पर दबाव: खतरनाक संकेत

भारतीय लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि न्यायपालिका स्वतंत्र और सुरक्षित रहे। मालदा कांड में जिस तरह न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाया गया, वह सीधे तौर पर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। ममता बनर्जी की सरकार एसआईआर से असंतुष्ट हो सकती है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार से उनका चिर-विरोध या अविश्वास तर्कसंगत हो सकता है लेकिन चुनाव आयोग जैसी संबैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं करना और उसी चुनावी प्रक्रिया से चुनकर दशकों तक सत्ता-सुख उपभोग करना दोहरे मानदंड का द्योतक है।

मालदा का ममला चुनाव आयोग से भी एक कदम आगे है। मालदा में SIR के दावों और आपत्तियों को रिजॉल्व करने के लिए ही ये न्यायिक अधिकारी भेजे गए थे। SIR और ऐसी अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयत पर सवाल उठते रहे हैं और संबंधित संवैधानिक संस्थाएं उन सवालों के जवाब भी देती रही हैं। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है जहां पर जनता का प्रजातांत्रिक अधिकार सर्वोपरि है और किसी भी प्रक्रिया, संस्था अथवा पद पर सवाल उठाने का अधिकार भी संविधान ही देता है। लेकिन प्रजातांत्रिक अधिकारों की भी अपनी मर्यादा है। कोई भी अधिकार सीमाविहीन नहीं हो सकता।

मालदा मामले पर Supreme Court of India का स्वत: संज्ञान लेना और Central Bureau of Investigation या National Investigation Agency से जांच की संभावना जताना यह दर्शाता है कि शीर्ष अदालत इसे केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि संस्थागत सुरक्षा का मामला मान रही है। मालदा हो, बंगाल या कहीं और… यदि SIR में त्रुटी थी तो सुधार का विकल्प भी मौजूद है। यदि तय समयसीमा में सुधार नहीं हो रहा है तो न्यायालय का द्वार भी खुला है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के प्रतिनिधि तक को कार्य नहीं करने देना या उस पर दबाव बनाना लोकतंत्र को गिरवी रखने जैसा है।

केंद्र राज्य संबंध: संघीय ढांचे में बढ़ता तनाव

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची केंद्र, राज्य और समवर्ती सूचियों के माध्यम से संघीय ढांचा स्थापित करती है। चुनाव, राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे विषय केंद्र के अधीन रखे गए हैं जबकि राज्य सूची, अनुच्छेद 246 के अनुसार कानून-व्यवस्था राज्य का दायित्व है, लेकिन जब हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएं, तो केंद्र की एजेंसियों का हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है। संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत केंद्र को किसी राज्य में कानून-व्यवस्था के पतन की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाने का अधिकार भी मिला है। मालदा कांड ने एक बार फिर केंद्र और राज्य के बीच संतुलन के प्रश्न को सामने ला दिया है। ऐसी घटनाएं केंद्र-राज्य संबंधों को तनावपूर्ण बनाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी कर केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी को जांच सौंपी है। यह संघीय सहयोग की बजाय केंद्र-राज्य के टकराव को दर्शाता है, जो अंततः अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अंतर-राज्य परिषद की भूमिका को कमजोर करता है।

बंगाल चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के बाद अब एनआईए की भी एंट्री हो चुकी है। पूरे घटनाक्रम में राज्य सरकार के अतिरिक्त Election Commission of India की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम है, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता उसी पर निर्भर करती है। लेकिन यदि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सहयोग कमजोर हो, तो संवैधानिक प्रावधान भी प्रभावहीन हो जाते हैं।

लोकतंत्र के लिए चेतावनी

मालदा की घटना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए चेतावनी है। यदि मतदाता सूची जैसे मूलभूत मुद्दे पर ही हिंसा और अविश्वास का माहौल बनेगा, तो निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा कमजोर पड़ जाएगी। न्यायपालिका, चुनाव-आयोग और प्रशासन – ये तीनों मिलकर लोकतंत्र की रीढ़ बनाते हैं। इनमें से किसी एक पर भी हमला पूरे ढांचे को अस्थिर कर सकता है।

समाधान: संयम, जवाबदेही और सुधार की जरूरत

पश्चिम बंगाल में मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अब टकराव में बदल रही है। ऐसे समय में सभी पक्षों को संयम बरतने और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने की आवश्यकता है। मालदा कांड एक चेतावनी है कि यदि इसे केवल एक घटना मानकर नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में ऐसे घटनाक्रम लोकतंत्र की जड़ों को और कमजोर कर सकते हैं। आवश्यक है कि कानून का राज स्थापित हो, संस्थाओं की गरिमा बनी रहे और चुनावी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बहाल किया जाए और इसके लिए केंद्र, राज्य और देश की संवैधानिक संस्थाओं को परस्पर सम्मान और एका बनाकर काम करना होगा।



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Rashmika Mandanna Pregnant: शादी के एक महीने बाद प्रेग्नेंट हुईं रश्मिका मंदाना? मचा हंगामा, लिखा- हम 3 हो गए


Entertainment

oi-Purnima Acharya

Rashmika Mandanna Pregnant: साउथ इंडस्ट्री से लेकर बॉलीवुड तक अपनी दमदार एक्टिंग और खूबसूरती का जलवा बिखेरनी वाली एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर जबरदस्त चर्चा में हैं। रश्मिका मंदाना ने गत 26 फरवरी 2026 को साउथ के फेमस एक्टर और अपने लॉन्ग टाइम बॉयफ्रेंड विजय देवरकोंडा (Vijay Deverakonda) के साथ शादी की थी।

रश्मिका-विजय की शादी की तस्वीरें हुई थीं वायरल
रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की शादी से लेकर मेहंदी व हल्दी की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थीं। लोगों ने इन तस्वीरों पर खूब प्यार लुटाया था।

Rashmika Mandanna

साल 2018 से शुरू हुआ रश्मिका-विजय का प्यार

आपको बता दें कि रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की दोस्ती साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘गीता गोविंदम’ से शुरू हुई थी जो कि फरवरी 2026 में ही शादी के खूबसूरत रिश्ते में बदल चुकी है। हालांकि अब शादी के कुछ ही समय बाद रश्मिका मंदाना की नई पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है।

शादी के एक महीने बाद नया सरप्राइज

-आपको बता दें कि रश्मिका मंदाना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक खास वीडियो शेयर किया है, जिसमें उनके और पति विजय देवरकोंडा जैसे दिखने वाले एनिमेटेड कैरेक्टर्स नजर आ रहे हैं। वीडियो में एक पीला फूल और रेड हार्ट इमोजी भी दिखाई दे रहा है।

-दरअसल रश्मिका मंदाना के इस पोस्ट में सबसे ज्यादा ध्यान खींचा उनके कैप्शन ने, जिसमें उन्होंने लिखा था- अब हम तीन हो गए। बस इसी एक लाइन ने फैंस के बीच सवालों की झड़ी लगा दी।

क्या सच में प्रेग्नेंट हैं रश्मिका मंदाना?

-रश्मिका मंदाना के इस इंस्टाग्राम पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग इस पोस्ट पर जमकर कमेंट्स कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है- क्या रश्मिका मंदाना मां बनने वाली हैं?

-वहीं एक शख्स ने पूछा है- क्या ये प्रेग्नेंसी का इशारा है। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में लिखा है- तीसरा मेंबर फूल है या जूनियर विरोश? हालांकि रश्मिका मंदाना या फिर उनके पति विजय देवकोंडा की तरफ से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पोस्ट के पीछे छिपा है कोई और राज?

रश्मिका मंदाना ने इस पोस्ट में ‘Terribly Tiny Post’ और ‘Rashmika & Ru’ जैसे अकाउंट्स को टैग किया है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि ये किसी नए क्रिएटिव प्रोजेक्ट का हिस्सा हो सकता है या फिर बच्चों से जुड़ा कोई कंटेंट या सीरीज लॉन्च होने वाली है। आपको बता दें कि रश्मिका मंदाना पहले से ही रश्मिकारू नाम के प्लेटफॉर्म पर छोटे-छोटे नोट्स और पर्सनल थॉट्स शेयर करती रहती हैं।

रश्मिका मंदाना के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स

-जानकारी के अनुसार रश्मिका मंदाना के पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। वह जल्द ही रणबीर कपूर के साथ फिल्म ‘एनिमल पार्क’ में नजर आएंगी। इसके अलावा रश्मिका साउथ के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन के साथ ‘पुष्पा 3’ में भी दिखाई देंगी।

-रश्मिका मंदाना फिलहाल ‘कॉकटेल 2’ और ‘मैसा’ जैसी फिल्मों की शूटिंग में बिजी चल रही हैं। आपको बता दें कि शादी के तुरंत बाद रश्मिका के प्रोजेक्ट ‘राणाबली’ का पहला गाना भी रिलीज हुआ था।

रश्मिका के पोस्ट ने फैंस को किया कंफ्यूज

रश्मिका मंदाना के लेटेस्ट पोस्ट ने फैंस को कन्फ्यूज भी किया है और एक्साइटेड भी। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये प्रेग्नेंसी का संकेत है या फिर किसी नए प्रोजेक्ट का क्रिएटिव टीजर। फिलहाल सच्चाई क्या है, ये तो आने वाले दिनों में ही साफ होगा लेकिन इतना तय है कि रश्मिका एक बार फिर सुर्खियों में छा गई हैं।



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Jobs in Bihar: बिहार में 92 हजार से ऊपर की सैलरी पाने का मौका, कौन कर सकता है अप्लाई, कब तक है लास्ट डेट?


Bihar

oi-Kumari Sunidhi Raj

Patna High Court Recruitment: बिहार के उन युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है जो सरकारी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, खासकर उनके लिए जिनकी रुचि कंप्यूटर और तकनीकी कार्यों में है। पटना उच्च न्यायालय ने टेक्निकल असिस्टेंट (Technical Assistant) के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर आवेदन आमंत्रित किए हैं।

यह भर्ती ग्रुप-सी स्तर की है, जो राज्य के तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एक प्रतिष्ठित मंच प्रदान करती है। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। समय पर आवेदन और परीक्षा की सटीक तैयारी आपको पटना हाई कोर्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा बना सकती है। नीचे इस भर्ती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी विस्तार से दी गई है।

Jobs in Bihar: बिहार में 92 हजार से ऊपर की सैलरी पाने का मौका, कौन कर सकता है अप्लाई, कब तक है लास्ट डेट?

महत्वपूर्ण तिथियां, समय का रखें खास ध्यान

भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खुल चुकी है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे सर्वर की संभावित समस्याओं से बचने के लिए अंतिम तिथि का इंतजार न करें।

  • आवेदन शुरू होने की तिथि: 1 अप्रैल 2026
  • आवेदन करने की अंतिम तिथि: 30 अप्रैल 2026
  • आवेदन शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि: 2 मई 2026

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पदों का विवरण और वेतनमान

पटना हाई कोर्ट इस अभियान के माध्यम से कुल 53 रिक्त पदों को भरने जा रहा है। चयनित उम्मीदवारों को बेहतरीन सैलरी पैकेज दिया जाएगा:

पद का नाम: टेक्निकल असिस्टेंट (ग्रुप-सी)

वेतनमान: ₹29,200 से ₹92,300 प्रति माह (इसके साथ ही नियमानुसार अन्य सरकारी भत्ते भी देय होंगे)।

योग्यता और आयु सीमा

इस भर्ती के लिए केवल वे ही उम्मीदवार पात्र हैं जो निर्धारित शैक्षणिक मानदंडों को पूरा करते हैं:

शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स या कम्युनिकेशन में आईटीआई (ITI) या डिप्लोमा होना अनिवार्य है।

आयु सीमा: न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 37 वर्ष निर्धारित है। (आरक्षित श्रेणियों जैसे SC, ST, महिला और दिव्यांग वर्ग को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी)।

चयन प्रक्रिया, तीन चरणों में होगी परीक्षा

भर्ती के लिए उम्मीदवारों को तीन प्रमुख चरणों से गुजरना होगा:

लिखित परीक्षा: यह 100 अंकों की होगी जिसके लिए 2 घंटे का समय मिलेगा। इसमें सामान्य ज्ञान, रीजनिंग, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। पास होने के लिए न्यूनतम 40% अंक लाना अनिवार्य है।

स्किल टेस्ट: लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की तकनीकी दक्षता जांची जाएगी।

इंटरव्यू: अंतिम चयन साक्षात्कार में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

आवेदन शुल्क

विभिन्न श्रेणियों के लिए आवेदन शुल्क इस प्रकार है:

सामान्य वर्ग: ₹1,100

SC/ST वर्ग: ₹550
(नोट: फीस का भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा।)

Patna High Court Recruitment: कैसे करें आवेदन?

इच्छुक उम्मीदवार पटना हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘Recruitments’ सेक्शन में इस पद के लिए लिंक पर क्लिक करें। अपनी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी सावधानीपूर्वक भरें, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और शुल्क जमा करने के बाद भविष्य के संदर्भ के लिए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट जरूर ले लें।

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Soldierathon के चलते Delhi Metro ने बदला शेड्यूल, कितने बजे शुरू होगी मेट्रो सेवा, किन लाइनों पर होगा असर?


Delhi

oi-Puja Yadav

Delhi Metro Timing Update: राजधानी दिल्ली में आगामी रविवार, 5 अप्रैल 2026 को आयोजित होने वाली ‘पीएनबी सोल्जरथॉन’ (PNB Soldierathon) मैराथन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने धावकों और प्रतिभागियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।

रविवार को आमतौर पर देर से शुरू होने वाली मेट्रो सेवा इस बार तड़के सुबह 3 बजे से ही उपलब्ध होगी। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (JLN Stadium) में आयोजित होने वाली इस मैराथन में देश भर से हजारों की संख्या में रक्षा कर्मी, पूर्व सैनिक और नागरिक हिस्सा लेने वाले हैं।

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प्रतिभागियों को समय पर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने और सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति से बचने के लिए डीएमआरसी ने यह विशेष इंतजाम किए हैं।

Delhi Metro Timings Schedule: किन लाइनों पर चलेगी सुबह 3 बजे मेट्रो?

दिल्ली मेट्रो की येलो, ब्लू और वायलेट लाइन पर यह विशेष सेवा उपलब्ध होगी। येलो लाइन पर समयपुर बदली से मिलेनियम सिटी सेंटर गुरुग्राम तक, ब्लू लाइन पर द्वारका सेक्टर-21 से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी/वैशाली तक और वायलेट लाइन पर कश्मीरी गेट से राजा नाहर सिंह तक मेट्रो सुबह 3 बजे से चलनी शुरू हो जाएगी।

DMRC ने यह भी बताया कि सुबह 3 बजे से 6 बजे के बीच इन लाइनों पर मेट्रो ट्रेनें हर 30 मिनट के अंतराल पर चलेंगी। इसके बाद सुबह 6 बजे से मेट्रो सेवाएं अपने सामान्य रविवार के शेड्यूल के अनुसार संचालित होंगी।

  • येलो लाइन (Yellow Line): समयपुर बादली से मिलेनियम सिटी सेंटर गुरुग्राम तक।
  • ब्लू लाइन (Blue Line): द्वारका सेक्टर-21 से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी और वैशाली तक।
  • वॉयलेट लाइन (Violet Line): कश्मीरी गेट से राजा नाहर सिंह (बल्लभगढ़) तक।

नोट: अन्य सभी लाइनों पर मेट्रो सेवा अपने निर्धारित रविवार के समय के अनुसार ही संचालित होगी।

Early metro services at 03:00 AM on 5th April, 2026 (Sunday) to facilitate participants of the PNB Soldierathon Marathon at Jawaharlal Nehru Stadium.#DelhiMetro pic.twitter.com/zBDMHzB3Yx

— Delhi Metro Rail Corporation (@OfficialDMRC) April 2, 2026 “>

सड़कों पर भीड़ कम करने के लिए DMRC की कवायद

मेट्रो प्रशासन का मानना है कि सुबह 3 बजे सेवा शुरू होने से हजारों प्रतिभागी अपनी निजी कारों या टैक्सियों के बजाय मेट्रो का उपयोग करेंगे। इससे न केवल जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के आसपास सड़कों पर दबाव कम होगा, बल्कि प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी और प्रतिभागियों की यात्रा बाधा मुक्त होगी।

DMRC ने मैराथन में भाग लेने वाले धावकों और नियमित यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें। साथ ही, अलग-अलग स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों (Entry/Exit Gates) के खुलने के समय की जानकारी भी पहले से जांच लें, क्योंकि शुरुआती घंटों में कुछ चुनिंदा गेट ही खुले रखे जा सकते हैं।

क्या है PNB सोल्जरथॉन?

‘पीएनबी सोल्जरथॉन’ एक प्रतिष्ठित मैराथन है जो हमारे सैनिकों के सम्मान और कल्याण के उद्देश्य से आयोजित की जाती है। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम इस भव्य आयोजन का गवाह बनेगा, जहां बड़ी संख्या में दिग्गज और युवा जोश के साथ हिस्सा लेंगे।

Soldierathon के लिए मेट्रो का यह विशेष कदम न केवल एक बेहतर ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बड़े आयोजनों के दौरान सार्वजनिक परिवहन को कैसे प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।





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INS Taragiri INS Aridhaman: भारतीय नौसेना को मिली डबल स्ट्राइक पावर, दो घातक युद्धपोत बेड़े में शामिल


India

oi-Smita Mugdha

INS Taragiri INS Aridhaman: 3 अप्रैल 2026 का दिन भारतीय नौसेना के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गया है। नौसेना के बेडे़ में दो अत्याधुनिक और स्वदेशी युद्धपोतों आईएनएस तारागिरी और आईएनएस अरिधमान को आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल किया गया है। विशाखापत्तनम में आयोजित एक भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन दोनों प्लेटफॉर्म्स को कमीशन किया। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारत की समुद्री शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।

इन दोनों युद्धपोतों की मारक क्षमता काफी घातक है और यह नौसेना को मजबूती देने और आधुनिक बनाने के लिहाज से अहम है। साउथ एशिया में चीन की समुद्री ताकत बढ़ाने की चल रही लगातार कोशिशों के बीच भारतीय नौसेना का अहम कदम है।

INS Taragiri INS Aridhaman

INS Taragiri रहेगा दुश्मन की रडार से सुरक्षित

– INS तारागिरी, प्रोजेक्ट 17A के तहत विकसित ‘नीलगिरि-क्लास’ की चौथी स्टेल्थ फ्रिगेट है। यह युद्धपोत दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता रखता है। इससे यह समुद्री युद्ध में बेहद प्रभावी बनता है।

– इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) की ओर से मुंबई में किया गया है। लगभग 6,670 टन वजनी यह फ्रिगेट ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम और अत्याधुनिक रडार से लैस है।

– खास बात यह है कि इसमें 75% से अधिक स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को दर्शाता है।

INS Aridhaman बनेगा साइलेंट गार्डियन

– INS अरिधमान भारत की समुद्री सुरक्षा का ‘साइलेंट गार्डियन’ माना जा रहा है। यह अरिहंत-क्लास की तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जिसे ‘S4’ कोडनेम दिया गया है।

– यह पनडुब्बी पानी के भीतर रहकर लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम है, जिससे भारत की परमाणु त्रि-आयामी क्षमता (Nuclear Triad) और मजबूत होती है।

– यह 24 K-15 ‘सागरिका’ (750 किमी रेंज) या K-4 (3,500 किमी रेंज) बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस हो सकती है।

Indian Navy की मारक क्षमता होगी बेजोड़

इन दोनों युद्धपोतों के शामिल होने से Indian Navy की रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है। खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है, जहां चीन और पाकिस्तान की बढ़ती गतिविधियों के बीच यह एक बड़ा संतुलनकारी कदम माना जा रहा है। INS तारागिरी और INS अरिधमान का नौसेना में शामिल होना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और समुद्री प्रभुत्व को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा।



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