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ANI vs OpenAI: दिल्ली हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, एआई और कॉपीराइट विवाद पर आएगा ऐतिहासिक आदेश


भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और कॉपीराइट नियमों के भविष्य को तय करने वाले पहले सबसे बड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। समाचार एजेंसी एशियन न्यूज इंटरनेशनल यानी एएनआई और चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के बीच चल रहे इस विवाद पर कोर्ट का अंतरिम आदेश जल्द ही आने की उम्मीद है। यह आदेश एआई मॉडल ट्रेनिंग और कंटेंट के उपयोग से जुड़े मामलों के लिए मार्गदर्शक सबित होगा। इस मामले में डीएनपीए समेत कई अन्य संगठनों ने भी एएनआई के समर्थन में अदालत के सामने अपना पक्ष रखा है।

डीएनपीए ने किया एएनआई का समर्थन

इस मुकदमें में एएनआई और ओपनएआई के अलावे छह अन्य पक्षों ने भी हिस्सा लिया। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए), इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री और फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स ने इस मामले में एएनआई का समर्थन किया। उनका तर्क है कि आउटपुट मूल रचनाओं की जगह ले सकते हैं, जिससे मीडिया और रचनाकारों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। वहीं, ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम, फ्लक्स लैब्स एआई और आईजीएपी प्रोजेक्ट एलएलपी ने ओपनएआई का समर्थन करते हुए कहा कि बड़े लैंग्वेज मॉडल कॉपीराइट कार्यों की नकल नहीं करते और सार्वजनिक जानकारी का सारांश बनाना कोई अपराध नहीं है।

विवाद का मूल कारण और एनआई के आरोप

यह कानूनी लड़ाई 19 नवंबर 2024 को शुरू हुई थी और 27 मार्च 2026 तक इसमें कुल 32 बार लंबी सुनवाई हुई। जस्टिस अमित बंसल की अदालत में एएनआई ने मुख्य रूप से आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने बिना अनुमति या लाइसेंस फीस दिए उसके कॉपीराइट वाले समाचारों का उपयोग चैटजीपीटी को प्रशिक्षित करने के लिए किया है।



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ECHS: ’72 लाख पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य व भत्ते की अनदेखी कर रही सरकार’, जानिए राहुल गांधी ने क्यों लगाए आरोप


कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के कामकाज में गंभीर खामियों का मुद्दा उठाते हुए गुरुवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सेवानिवृत्त सशस्त्र बल कर्मियों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे इस योजना पर निर्भर 72 लाख से अधिक पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर कमियां

‘जनसंसद’ कार्यक्रम के दौरान देश की रक्षा करते हुए घायल हुए पूर्व सैनिकों से मुलाकात का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों ने ईसीएचएस के भीतर मौजूद गंभीर कमियों को उजागर किया है। 

योजना को लेकर राहुल गांधी द्वारा बताई गई प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं:


  • भुगतान में देरी: चिकित्सा खर्चों की प्रतिपूर्ति में अत्यधिक देरी हो रही है।

  • दवाओं का अभाव: योजना के तहत दवाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

  • इलाज से इनकार: बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण पैनल में शामिल अस्पताल पूर्व सैनिकों का इलाज करने से मना कर रहे हैं या उन्हें योजना से बाहर कर रहे हैं।

सरकार के रुख के बारे में क्या बोले राहुल गांधी?

राहुल गांधी ने बताया कि जब उन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाया, तो मोदी सरकार ने उनके सवालों से बचने की कोशिश की। सरकार के पास बकाया राशि के संबंध में कोई डेटा नहीं है और न ही देरी का कोई स्पष्ट कारण दिया गया है; सरकार ने केवल यह स्वीकार किया है कि देरी होती है।

इसके अलावा, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि ईसीएचएस को पर्याप्त फंड (निधि) नहीं मिल रहा है। कांग्रेस नेता ने सरकार से जवाब मांगा कि पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए आवश्यक फंड क्यों आवंटित नहीं किए जा रहे हैं।

विकलांगता पेंशन पर टैक्स का विरोध

स्वास्थ्य योजना के अलावा, राहुल गांधी ने सेवारत सैनिकों के लिए विकलांगता पेंशन पर प्रस्तावित कराधान का भी कड़ा विरोध किया। वित्त विधेयक के प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई सैनिक सेवा में बने रहने का विकल्प चुनता है, तो उसकी विकलांगता पेंशन पर कर लगाया जाएगा। गांधी ने इस कदम को देश की सेवा करने वाले सैनिकों को “दंडित करने” के समान बताया।



कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमारे बहादुर सैनिक देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को कम से कम उन्हें वह सम्मान और समर्थन देना चाहिए जिसके वे वास्तव में हकदार हैं। ईसीएचएस और पेंशन पर उठाए गए ये सवाल रक्षा कल्याण नीतियों के क्रियान्वयन पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकते हैं।





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आम जनता को राहत! इन प्रोडक्ट पर Customs Duty खत्म, बाजार जाने से पहले चेक करें क्या होगा सस्ता?


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oi-Sohit Kumar

Customs Duty Exemption: मिडिस ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय उद्योगों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने कई महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट (Full Customs Duty Exemption) देने का निर्णय लिया है। यह छूट 30 जून तक लागू रहेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य घरेलू उद्योगों पर बढ़ते लागत के बोझ को कम करना है। आइए जानतें हैं इस फैसले से आम आदमी और उद्योगों को क्या लाभ होने वाला है…

सरकार के इस कदम से कच्चे माल की लागत कम होगी, जिससे सीधे तौर पर निम्नलिखित क्षेत्रों में कीमतें घटने की उम्मीद है:

customs duty exemption

  • प्लास्टिक और पैकेजिंग: घरेलू उपयोग के प्लास्टिक उत्पाद, बाल्टियां, और पैकिंग मटेरियल सस्ते हो सकते हैं।
  • दवाइयां (Pharma): कई दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वेंट्स और रसायनों की लागत गिरेगी।
  • कपड़ा उद्योग (Textiles): सिंथेटिक कपड़ों और फाइबर की कीमतों में कमी आएगी।
  • ऑटोमोबाइल: कारों और बाइक्स में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और रबर कंपोनेंट्स की निर्माण लागत कम होगी।
  • खेती-किसानी: फर्टिलाइजर (Fertilizers) के लिए जरूरी रसायनों पर छूट से किसानों को राहत मिलेगी।

इन उत्पादों पर मिलेगी पूरी छूट (Complete List)

सरकार ने रसायनों और पॉलिमर की एक लंबी लिस्ट को ड्यूटी फ्री कर दिया है:

  • 1. केमिकल्स: एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यूनि, स्टाइरीन, मेथनॉल, आइसोप्रोपिल अल्कोहल, फिनोल, एसिटिक एसिड।
  • 2. पॉलिमर और प्लास्टिक: पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइनिन, पीवीसी (PVC), पॉलीकार्बोनेट, एपॉक्सी रेजिन।
  • 3. औद्योगिक इनपुट: विनाइल एसीटेट मोनोमर, शुद्ध टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA), एथिलिंडायमाइन, टोल्यूनि डी-आइसोसाइनेट।
  • 4. सिंथेटिक रबर: पॉली ब्यूटाडीन, स्टाइरीन ब्यूटाडीन।

खाद की उपलब्धता पर सरकार की नजर
एक तरफ जहां उद्योगों को शुल्क में राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यों के कृषि मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर यूरिया और डीएपी (DAP) की उपलब्धता की समीक्षा की है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस मुद्दे पर संसद में उच्च स्तरीय चर्चा कर रहे हैं ताकि रबी और आगामी सीजन में खाद की कोई कमी न हो।

सरकार ने क्यों उठाया ये कदम?

मिडिल ईस्ट संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से निपटने के लिए यह सरकार का एक ‘टारगेटेड’ कदम है। हालांकि इससे सरकारी खजाने पर करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ने का अनुमान है, लेकिन इससे बाजार में महंगाई को कंट्रोल करने और औद्योगिक उत्पादन को गति देने में मदद मिलेगी।



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Defence Export: FY2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 63% उछलकर पहली बार 38424 करोड़ रुपये हुआ, जानिए क्या अपडेट


आत्मनिर्भर भारत अभियान के मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर है। देश का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹38,424 करोड़ के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा न केवल भारतीय उद्योग की बढ़ती उत्पादन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की मजबूत होती साख का भी सीधा प्रमाण है।

आंकड़ों में रिकॉर्ड छलांग

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा गुरुवार को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में रक्षा निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 62.66 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। मूल्य के लिहाज से देखा जाए तो यह ₹14,802 करोड़ का बड़ा उछाल है। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस अहम उपलब्धि की जानकारी देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात की एक प्रभावशाली सफलता की कहानी लिख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्यात में आया यह भारी उछाल भारत की स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत विनिर्माण ताकत में बढ़ते वैश्विक भरोसे को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी से हासिल हुई उपलब्धि

इस रिकॉर्ड व्यावसायिक प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की मजबूत संयुक्त भागीदारी है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:


  • डीपीएसयू की हिस्सेदारी: इस कुल रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) का योगदान 54.84 प्रतिशत रहा है।

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: वहीं, निजी उद्योगों ने 45.16 प्रतिशत का अहम योगदान देकर देश में एक सहयोगी और आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र  की ताकत का प्रदर्शन किया है।

  • भविष्य की संभावनाएं: वर्तमान में, रक्षा उपकरणों और प्लेटफॉर्म्स के निर्माण में निजी उद्योग का योगदान लगभग 25 प्रतिशत है। रक्षा मंत्री के अनुसार, निकट भविष्य में इसके कुल उत्पादन मूल्य का 50 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।

उत्पादन और नौसेना में शत-प्रतिशत आत्मनिर्भरता

निर्यात के साथ-साथ घरेलू रक्षा उत्पादन भी तेज गति से बढ़ रहा है। मार्च में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने बताया था कि सरकार के प्रयासों से वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.50 लाख करोड़ के पार चला गया था, और तब निर्यात लगभग ₹24,000 करोड़ के स्तर पर था। 



आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण नौसेना के क्षेत्र में दिख रहा है। रक्षा मंत्री के मुताबिक, भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियां अब पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड में ही बन रही हैं। इनकी डिजाइनिंग से लेकर इंजीनियरिंग, निर्माण और जीवनचक्र समर्थन तक सब कुछ स्वदेशी है। राजनाथ सिंह ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा, “आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक नारा नहीं है; यह एक व्यावहारिक वास्तविकता के रूप में स्थापित हो रही है। ‘बिल्डर्स नेवी’ कोई नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है”।



सरकार ने वित्त वर्ष 2029-30 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। 62.66% की वर्तमान विकास दर और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए, भारत न केवल इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सही ट्रैक पर है, बल्कि वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में खुद को एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी स्थापित कर रहा है।





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Karmayogi Saptah: क्या है पीएम मोदी का ‘कर्मयोगी’ विजन? सरकारी कामकाज के लिए दिया सेवा का सर्वोच्च मंत्र


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oi-Kumari Sunidhi Raj

Karmayogi Saptah: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ के माध्यम से देश के प्रशासनिक ढांचे को नई ऊर्जा देने का प्रयास किया है। बदलते दौर की चुनौतियों और आम जनता की बढ़ती आकांक्षाओं के बीच, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि अब सरकारी कामकाज में केवल औपचारिकता से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसे पूरी तरह अपडेट और जवाबदेह बनाना होगा।

उन्होंने सरकारी सेवाओं में सुधार को बेहतर शासन (Good Governance) की नींव बताया। प्रधानमंत्री का मानना है कि जैसे-जैसे भारत वैश्विक पटल पर मजबूती से उभर रहा है, सार्वजनिक सेवाओं का स्वरूप भी आधुनिक और जन-केंद्रित होना चाहिए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाकर उन्हें ‘विकसित भारत’ के संकल्प से सीधे तौर पर जोड़ना है।

Karmayogi Saptah PM modi

‘नागरिक देवो भव’, सेवा का नया दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए ‘नागरिक देवो भव’ का मूल मंत्र दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर नागरिक को सर्वोच्च मानकर सेवा करना ही सरकार का प्राथमिक धर्म होना चाहिए। जब सरकारी तंत्र इस भावना के साथ काम करेगा, तभी कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।

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विकसित भारत @2047, एक विजनरी रोडमैप

पीएम मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है। इस विशाल लक्ष्य की प्राप्ति के लिए चार स्तंभों को अनिवार्य बताया गया है:

  • तेज आर्थिक विकास
  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
  • नई तकनीक का समावेश
  • कुशल और दक्ष मानव संसाधन

उन्होंने साफ किया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने में सरकारी संस्थानों और उनके कर्मचारियों की भूमिका सबसे निर्णायक रहने वाली है।

जिम्मेदारी और व्यक्तिगत बदलाव पर जोर

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को सलाह दी कि कोई भी नीतिगत फैसला लेने से पहले वे अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी को तौलें। उन्होंने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि संस्थानों में बड़ा परिवर्तन तभी आता है जब व्यक्ति स्वयं के कार्य व्यवहार में सुधार करता है।

बढ़ती उम्मीदें और आसान जीवन (Ease of Living)

आज के भारत को ‘उम्मीदों का दौर’ बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि नागरिकों के सपने अब बड़े हैं। सरकार की सफलता इस बात में है कि वह लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाए और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान (Ease of Living) करे। उन्होंने सरकारी तंत्र को आगाह किया कि आज लिए गए ठोस निर्णय ही भविष्य के सशक्त भारत की नींव रखेंगे।

With AI Inputs

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हिमाचल में अयोग्य घोषित विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन: विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित, दल-बदल पर सख्ती, चैतन्य-देवेंद्र भुट्टो की पेंशन बंद – Shimla News




हिमाचल प्रदेश में अयोग्य घोषित विधायकों को पेंशन नहीं मिलेगी। कांग्रेस सरकार ने विधानसभा बजट सेशन में आज विपक्ष के विरोध के बावजूद संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह व्यवस्था 14वीं विधानसभा या उसके बाद निर्वाचित होने वाले विधायकों पर लागू होगी। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी विधायक रणधीर शर्मा ने सदन में इसका विरोध किया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को ‘हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026’ सदन में पेश किया था। इससे पहले, उन्होंने 2024 में इसी सदन में पारित पेंशन बंद करने वाले उस विधेयक को वापस लिया, जिसे राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिल पाई। लिहाजा दोबारा यह संशोधक विधेयक लाया गया। इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई विधायक दल-बदल के चलते संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करार दिया जाता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह संशोधन विधेयक वर्ष 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव से जुड़ा है, जिसके तहत विधायकों को भत्ते और पेंशन दी जाती है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 5 वर्ष तक विधायक रहने वाले सदस्य को 50 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलती है और अतिरिक्त कार्यकाल पर प्रत्येक वर्ष के लिए एक हजार रुपए की बढ़ोतरी का प्रावधान है। चैतन्य और देवेंद्र भुट्‌टों की पेंशन बंद इस विधेयक को मंजूरी के बाद पूर्व में गगरेट से कांग्रेस के विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ से पूर्व MLA देवेंद्र कुमार भुट्टो की पेंशन भी बंद हो जाएगी, क्योंकि इन दोनों पूर्व विधायकों ने फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट और पार्टी व्हिप का भी उल्लंघन किया। इसके बाद, स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने दोनों को अयोग्य घोषित ठहराया। दोनों पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि दलबदल करने वाले अन्य 4 विधायक पहले भी हिमाचल विधानसभा में सदस्य रहे हैं। इस वजह से उनकी पेंशन पर कोई संकट नहीं है। मगर भविष्य में यदि कोई विधायक दल बदल करता है तो उस पर कानून के ने प्रावधान लागू होंगे। दल-बदल को हतोत्साहित करने के मकसद से संशोधन सीएम सुक्खू ने कहा- विधेयक का उद्देश्य दल-बदल को हतोत्साहित करना है। ऐसे में जनादेश की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और दलबदल जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए यह संशोधन आवश्यक माना गया है। सरकार का मानना है कि पेंशन जैसे दीर्घकालिक लाभ को जोड़कर दलबदल पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस संशोधन से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। हिमाचल में बनेगा किसान आयोग राज्य में किसानों की समस्याओं के समाधान और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग विधेयक, 2026’ लाया गया है। इस विधेयक के जरिए राज्य में एक संस्थागत तंत्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जो कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में नीतिगत सुझाव देगा। विधेयक के अनुसार, राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से राज्य किसान आयोग का गठन करेगी। यह आयोग कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा कर उनके विकास के लिए रणनीति तैयार करेगा। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव देगा। आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन गैर-सरकारी सदस्य होंगे। इसके अलावा कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य विभागों के निदेशक तथा कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों के कुलपति भी इसमें पदेन सदस्य के रूप में शामिल होंगे। आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा।



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Kerala Election 2026: LDF का ‘मास्टर प्लान’ जारी, घोषणापत्र में गरीबी खत्म करने से रोजगार तक किए 10 बड़े ऐलान


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oi-Puja Yadav

Kerala Election 2026: केरल की सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी की कोशिशों में जुटे वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने 2 अप्रैल को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। कोझिकोड में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने वामपंथी नेताओं की मौजूदगी में ‘प्रगतिशील केरल’ का खाका पेश किया।

LDF का यह घोषणापत्र दो खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में शासन के 60 मुख्य बिंदुओं का सारांश है, जबकि दूसरे खंड में इन वादों को धरातल पर उतारने की विस्तृत कार्ययोजना दी गई है।

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गरीबी खत्म करने का बड़ा लक्ष्य

घोषणापत्र में सबसे बड़ा फोकस राज्य से गरीबी खत्म करने पर है। LDF ने वादा किया है कि वह करीब 5 लाख सबसे गरीब परिवारों को ऊपर उठाकर गरीबी को समाप्त करने की दिशा में काम करेगा। इसके लिए विशेष योजनाएं और आर्थिक सहायता दी जाएगी।

बुजुर्गों और जरूरतमंदों के लिए विशेष योजना

LDF ने बुजुर्गों और बिस्तर पर रहने वाले मरीजों के लिए एक समग्र देखभाल मॉडल (Comprehensive Care Model) लागू करने का वादा किया है, जिससे उन्हें बेहतर स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।

युवाओं के लिए रोजगार और स्किल पर जोर

युवाओं को ध्यान में रखते हुए घोषणापत्र में कई अहम ऐलान किए गए हैं। छात्रों के लिए कैंपस प्लेसमेंट सुनिश्चित करने का वादा। युवाओं को बिना ब्याज के लोन और स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन सपोर्ट और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के जरिए रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इन कदमों से राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ें और युवा आत्मनिर्भर बनें।

महिलाओं की भागीदारी 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य

LDF ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी खास जोर दिया है। घोषणापत्र में महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी को 50% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए संस्थागत समर्थन और नई योजनाएं शुरू की जाएंगी।

‘Back to Campus’ प्रोग्राम

रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए ‘Back to Campus’ प्रोग्राम को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत संस्थानों से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए युवाओं को इंडस्ट्री के हिसाब से तैयार किया जाएगा।

केंद्र से टकराव: मनरेगा (MGNREGS) पर बड़ा स्टैंड

केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए LDF ने घोषणापत्र में स्पष्ट किया है कि वे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में किए जा रहे बदलावों का कड़ा विरोध करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो राज्य सरकार अपने फंड से इस योजना को निरंतर और मजबूत बनाए रखेगी।

आर्थिक विकास और इंडस्ट्री पर फोकस

आर्थिक मोर्चे पर LDF ने कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं। 2031 तक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 16% तक बढ़ाना, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और सेक्टर-आधारित हब विकसित करना, पब्लिक सेक्टर यूनिट्स का आधुनिकीकरण और टर्नओवर बढ़ाना और पर्यटन को दोगुना करने की योजना है।

LDF ने पर्यटन क्षेत्र को भी बड़ा इंजन बनाने की योजना बनाई है। घोषणापत्र में पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, नए डेस्टिनेशन और जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism) पर जोर होगा।

चुनावी मुकाबले में क्या बदलेगा समीकरण?

LDF का यह घोषणापत्र साफ संकेत देता है कि पार्टी इस बार वेलफेयर + रोजगार + विकास के ट्रिपल एजेंडा के साथ चुनाव मैदान में उतरी है। अब देखना होगा कि यह वादे विपक्षी UDF और BJP के मुकाबले मतदाताओं को कितना आकर्षित कर पाते हैं। केरल में चुनावी जंग तेज हो चुकी है और घोषणापत्रों के जरिए सभी दल वोटरों को साधने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि किसका एजेंडा जनता के दिल में जगह बना पाता है।



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सुप्रीम कोर्ट नाराज- पश्चिम बंगाल में 7 न्यायिक अधिकारी बंधक: कहा- उन्हें खाना-पानी तक नहीं मिला, होम सेक्रेटरी-डीजीपी से संपर्क भी नहीं हुआ




पश्चिम बंगाल में मालदा के मोताबारी में प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को चुनाव ऑफिस घेर लिया। सात इलेक्शन ऑब्जर्वर (न्यायिक अधिकारी) 9 घंटे तक अंदर बंद रहे। इस बीच कुछ लोगों ने बाहर खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ कर दी। देर रात तक हंगामा चलता रहा। बाद में पुलिस की सुरक्षा में चुनाव अधिकारियों को सुरक्षित जगह ले जाया गया। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कहा कि SIR प्रोसेस में जिन ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को ड्यूटी दी गई है, वे हमारी तरफ से ड्यूटी कर रहे हैं। कल की घटना न सिर्फ ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को डराने-धमकाने की एक खुली कोशिश है, बल्कि यह इस कोर्ट की अथॉरिटी को भी चैलेंज करने जैसा है। हम खबर लगातार अपडेट कर रहे हैं



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Ramayana Teaser: रणबीर के रूप में साक्षात उतरे राम! कैसा है रावण का लुक? टीजर में लोगों ने पकड़ ली ये गलती


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Ramayana Teaser Review: करोड़ों दिलों की आस्था को बड़े पर्दे पर जीवंत करने की शुरुआत हो चुकी है। नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ का टीजर आज रिलीज कर दिया गया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर दर्शकों के दिलों तक हलचल पैदा कर दी है। 2 मिनट 38 सेकंड का यह टीजर केवल एक फिल्म की झलक नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभव की तरह सामने आया है। आइए जानते हैं फिल्म के टीजर में ऐसा क्या खास है जो हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है।

टीजर में रणबीर कपूर भगवान राम के किरदार में बेहद शांत और सौम्य नजर आ रहे हैं। उनके चेहरे पर वह सात्विक तेज है, जिसकी कल्पना एक भक्त ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ के रूप में करता है। टीजर के विजुअल्स और VFX इतने शानदार हैं कि वे सीधे आंखों के रास्ते दिल में उतर जाते हैं। हंस जिमर और ए.आर. रहमान का बैकग्राउंड म्यूजिक इस महाकाव्य को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की भव्यता प्रदान कर रहा है।

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रणबीर कपूर ने खुलासा किया कि चार साल पहले जब उन्हें यह रोल ऑफर हुआ था, तो वे काफी हिचकिचा रहे थे। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में मुझे लगा कि मैं इस महान भूमिका के साथ न्याय नहीं कर पाऊंगा, लेकिन जल्द ही मेरा डर कृतज्ञता में बदल गया। भगवान राम करोड़ों लोगों की चेतना के रक्षक हैं, जो हमें साहस और धार्मिकता का मार्ग दिखाते हैं।’

सितारों से सजी है ‘राम’ की सेना

निर्देशक नितेश तिवारी की यह ‘रामायण’ दो भागों में रिलीज होगी। फिल्म की स्टार कास्ट बेहद प्रभावशाली है:

  • रणबीर कपूर: भगवान राम
  • साई पल्लवी: माता सीता
  • यश: रावण (सह-निर्माता भी)
  • सनी देओल: भगवान हनुमान
  • रवि दुबे: लक्ष्मण
  • अरुण गोविल: राजा दशरथ
  • लारा दत्ता: कैकेयी

Rama is the greatest of all time because he lived a life where the choices he made were always in the benefit of the greater good, duty over desire, and sacrifice over self.

His legacy continues to enhance and empower humanity over time and bring the belief in the goodness of… pic.twitter.com/FjlcgF6e8q

— Namit Malhotra (@malhotra_namit) April 2, 2026 “>

2 मिनट 38 सेकंड के टीजर पर क्या बोले लोग?

‘रामायण’ के टीजर ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है, जहां दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां बड़ी संख्या में लोग रणबीर कपूर के सौम्य अवतार और हंस जिमर के शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक की तारीफ करते नहीं थक रहे, वहीं दूसरी तरफ नेटिजन्स ने फिल्म की बारीकियों पर सवाल भी उठाए हैं। कुछ यूजर्स ने टीजर के विजुअल्स को ‘AI जनरेटेड’ जैसा बताते हुए इसकी तुलना आदिपुरुष से की है, तो वहीं कुछ लोग टीजर में हनुमान जी की अनुपस्थिति और ‘5000 साल’ वाले संदर्भ को लेकर नाराज दिखे, जिनका मानना है कि यह इतिहास कम से कम 14,000 साल पुराना है।

दर्शकों के एक वर्ग ने वीएफएक्स की भव्यता को वैश्विक स्तर का बताया है, जबकि दूसरे वर्ग ने अत्यधिक ग्रीन स्क्रीन के इस्तेमाल और कुछ दृश्यों में तकनीकी खामियों की आलोचना करते हुए मेकर्स को ‘आदिपुरुष’ जैसी गलती न दोहराने की चेतावनी दी है। कुल मिलाकर, टीजर ने जहां उत्साह बढ़ाया है, वहीं फिल्म की ऐतिहासिक सटीकता और तकनीकी गुणवत्ता को लेकर दर्शकों के मन में डर और उम्मीद दोनों पैदा कर दिए हैं।

रिलीज की तारीख

नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज और ऑस्कर विजेता कंपनी DNEG के सहयोग से बन रही यह फिल्म दुनिया भर में IMAX पर रिलीज होगी।

  • पार्ट 1: दिवाली 2026
  • पार्ट 2: दिवाली 2027

आलिया भट्ट ने भी सोशल मीडिया पर फैंस से इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने की अपील की है। नितेश तिवारी के अनुसार, ‘रामायण’ की महानता उसकी भावनात्मक गहराई में है, जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ पर्दे पर उतारने की कोशिश की है।





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Gold Silver Price: ईरान पर ट्रंप के बयानों से चिंता में निवेशक; MCX पर चांदी 5.5% लुढ़की, सोने में भी गिरावट


अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव का सीधा असर अब वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार पर दिखने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर कड़े सैन्य हमले जारी रखने की चेतावनी के बाद, गुरुवार को घरेलू वायदा बाजार (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस बयान ने युद्ध के शांत होने की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है, जिससे लगातार चार दिनों से जारी सोने की तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया है।


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वायदा बाजार और हाजिर कीमतों के आंकड़े


  • भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण कमोडिटी बाजार में भारी बिकवाली देखी जा रही है।

  • चांदी की कीमतों में क्रैश: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर मई 2026 डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 13,613 रुपये (लगभग 5.5%) की भारी गिरावट के साथ 2,29,888 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। 

  • सोना भी धड़ाम: जून 2026 डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में भी 2,574 रुपये (1.6%) की बड़ी गिरावट आई है, जिसके बाद यह 1,51,161 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। यह अपने हालिया उच्चतम स्तर से बड़ी गिरावट है।

  • मुंबई हाजिर बाजार: स्थानीय हाजिर बाजार में, मुंबई में 22 कैरेट मानक सोने की कीमत 1,12,168 रुपये प्रति 8 ग्राम और 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत 1,22,368 रुपये प्रति 8 ग्राम दर्ज की गई है।

ईरान संकट और मजबूत डॉलर 

टेलीविजन पर दिए गए एक संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर “बेहद कड़ा” प्रहार करेगा और वे अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के करीब हैं। इसके चलते पूरे कमोडिटी और वित्तीय बाजार का सेंटिमेंट बदल गया:


  • कच्चे तेल में उबाल: ट्रंप के बयानों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड 4 से 5 प्रतिशत तक उछलकर 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

  • बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स: 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और मजबूत डॉलर इंडेक्स ने सोने-चांदी पर भारी दबाव बनाया है। पृथ्वी फिनमार्ट के विशेषज्ञ मनोज कुमार जैन के अनुसार, इन दोनों में बढ़त सोने के लिए नकारात्मक साबित हो रही है।

  • ब्याज दरों पर असर: मुद्रास्फीति बढ़ने के जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2026 के अंत से पहले ब्याज दरों में कटौती की संभावना काफी कम हो गई है।

प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में भी गिरावट

इस बिकवाली का असर केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक धातु बाजार में प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में भी भारी गिरावट आई है। वैश्विक बाजार में भी स्पॉट चांदी 2.9% गिरकर 72.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। उच्च यील्ड के कारण निवेशकों का रुझान अब नॉन-यील्डिंग एसेट्स से कम हो रहा है।



विशेषज्ञों का अनुमान है कि डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण निकट भविष्य में कीमती धातुओं में भारी अस्थिरता बनी रहेगी। साप्ताहिक आधार पर चांदी को 64 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस और सोने को 4,470 डॉलर पर अहम सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में विश्लेषकों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे तेजी आने पर मुनाफावसूली करें और उच्च स्तरों पर नई लॉन्ग पोजीशन बनाने से फिलहाल परहेज करें।





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