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West Asia Conflict: भारत पर जल्द दिख सकता है वैश्विक तनाव का असर, विकास दर अनुमान में एक फीसदी की कटौती संभव


पश्चिम एशिया संघर्ष के आगामी वित्त वर्ष तक जारी रहने पर भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर में करीब एक फीसदी  तक कमी आ सकती है, जबकि खुदरा महंगाई में लगभग 1.5 फीसदी  बढ़त हो सकती है।

ईवाई इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट के अनुसार कपड़ा, पेंट, रसायन, उर्वरक, सीमेंट व टायर जैसे कई क्षेत्र सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में रोजगार या आय में किसी भी कमी से मांग पर और दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 फीसदी आयात करता है, इसलिए वह ऐसे बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील है।

घट सकती है भारत की जीडीपी वृद्धि

ईवाई ने फरवरी की अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि 6.8 से 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।  इससे पहले आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन ने अनुमान लगाया था, भारत की जीडीपी वृद्धि घटकर 6.1 फीसदी  रह सकती है।

बढ़ सकती है मंहगाई

रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि खुदरा महंगाई लगभग 1.5 फीसदी  बढ़कर अपने मूल अनुमान सात फीसदी  से ऊपर जा सकती है। इसकी वजह है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति का संकट। युद्ध ने कच्चे तेल और ऊर्जा बाजारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इससे तेल की घरेलू आपूर्ति और भंडारण पर असर पड़ा है। संघर्ष जल्दी समाप्त हो जाने पर भी देश में स्थिति सामान्य होने में कुछ महीनों का समय लग सकता है।

रुपये में गिरावट दुनिया की अन्य मुद्राओं जैसी : एसबीआई

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय रुपये में हालिया कमजोरी देखी गई, लेकिन एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार यह गिरावट असामान्य नहीं है। ये अन्य वैश्विक मुद्राओं के समान ही है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, 27 फरवरी को पश्चिम एशिया में मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपये में गिरावट आई है। यह गिरावट दुनिया की अन्य मुद्राओं जैसी है, इसलिए ज्यादा चिंता की बात नहीं है। 27 फरवरी के बाद रुपये की गिरावट अन्य मुद्राओं के मुकाबले न सिर्फ संतुलित है, बल्कि उन मुद्राओं से बेहतर है जो पहले काफी मजबूत हुई थीं। एसबीआई के मुताबिक, रुपये की भी दबाव सहने की एक सीमा है। मौजूदा हालात में वैश्विक अनिश्चितता का असर सभी देशों की मुद्राओं पर पड़ा है। जो मुद्राएं पहले मजबूत हुई थीं, उनमें अब ज्यादा गिरावट देखी जा रही है।

2013 जैसी स्थिति नहीं

मौजूदा हालात 2013 जैसे नहीं हैं, जब रुपये में भारी उतार-चढ़ाव था और भारतीय रिजर्व बैंक को बाजार संभालने के लिए खास कदम उठाने पड़े थे। इस बार विदेशी कर्ज जुटाने जैसे विकल्प भी खज्यादा प्रभावी नहीं माने जा रहे, क्योंकि विकसित देशों में खुद ब्याज दरों का संतुलन बिगड़ा हुआ है।  

भारत की स्थिति मजबूत


  • देश के पास 700 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है।

  • यह भंडार 10 महीने से ज्यादा के आयात को कवर करता है।

  • अल्पावधि कर्ज कुल भंडार का 20 फीसदी से भी कम है।

  • इससे रुपये पर सट्टेबाजी के दबाव को कम करने में मदद मिल रही है।

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LPG Crisis: क्रूड 100 डॉलर के पार, फिर भी देश में तेल की कीमतें स्थिर; सरकार ने दिया पर्याप्त आपूर्ति का भरोसा


सरकार ने कहा कि है कि हमारे पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है, और देश ने अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति की पर्याप्त व्यवस्था कर ली है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारतीय उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। उन्होंने कहा है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत ने अपनी ईंधन और कृषि आपूर्ति शृंखला को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। 

ईंधन बाजार: अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता और घरेलू राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। लगभग दो महीने पहले 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करने वाला ब्रेंट क्रूड अब 100 डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है। हालांकि, इस तेज उछाल के बावजूद भारत में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। 

आंकड़ों के अनुसार, 6 अप्रैल, 2022 के बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं; इसके विपरीत, मार्च 2024 में दोनों ईंधनों की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों की अस्थिरता से घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए उत्पाद शुल्क को कम किया है, ताकि मूल्य वृद्धि का कोई भी भार सीधे जनता पर न पड़े। सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में देश की रिफाइनरियां अपनी चरम क्षमता पर काम कर रही हैं।

पांच किलो के एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई पर शर्मा ने बताया कि कई सारे माइग्रेंट परिवारों ने उज्जवला योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें सिलिंडर मुहैया कराया गया। बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनके पास कनेक्शन नहीं हैं उनकी मदद के लिए पांच किलो का सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। पांच किलो के सिलिंडर की योजना तकरीबन 10 साल पुरानी है। यह सिलिंडर डिस्ट्रिब्यूटर्स के पास उपलब्ध रहता है।

कृषि क्षेत्र पर प्रभाव और खरीफ सीजन की तैयारियां 

ईंधन के साथ-साथ कृषि क्षेत्र की आपूर्ति शृंखला भी स्थिर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने आगामी खरीफ सीजन के लिए आवश्यक इनपुट सामग्री की व्यापक समीक्षा की है। 



कृषि और किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी ने प्रमुख कृषि संकेतकों पर स्थिति स्पष्ट की है:


  • थोक मूल्य नियंत्रण में: सभी कृषि जिंसों  की थोक कीमतों की लगातार निगरानी की जा रही है। ये कीमतें पिछले कुछ वर्षों की तरह ही सामान्य दायरे में हैं। 

  • सब्जियों के दाम: शीर्ष फसलों जैसे टमाटर, प्याज और आलू की कीमतें भी निर्धारित दायरे में हैं और थोक स्तर पर इनमें सुधार की प्रवृत्ति दिख रही है।

  • बीज की उपलब्धता: राज्यों के साथ समन्वय के माध्यम से यह पुष्टि की गई है कि खरीफ सीजन के लिए बीजों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। इस सीजन के लिए कुल 166.46 लाख क्विंटल बीज की आवश्यकता का अनुमान है, और सभी प्रमुख फसलों के लिए बीज का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

अंतर-मंत्रालयी समन्वय से दूर हुई बाधाएं

इस व्यापक आपूर्ति प्रबंधन में मंत्रालयों के बीच का समन्वय अहम साबित हो रहा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, पिछले महीने हाइब्रिड मक्का के बीजों को सुखाने के लिए एलपीजी की आवश्यकता एक छोटी बाधा के रूप में सामने आई थी। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ त्वरित समन्वय कर एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध कराई गई। मनिंदर कौर द्विवेदी ने इस पूरी स्थिति पर संतोष जताते हुए कहा, “हम खुद को एक आरामदायक स्थिति में पाते हैं”।



अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के 100 डॉलर के पार जाने और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत सरकार की रणनीतिक योजनाएं जमीन पर काम कर रही हैं। उत्पाद शुल्क में कटौती और महत्वपूर्ण मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल से न केवल आम नागरिक को महंगाई के सीधे झटके से बचाया गया है, बल्कि आगामी कृषि सीजन के लिए भी एक मजबूत और सुरक्षित आधार तैयार कर लिया गया है।





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राजस्थान के मंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों की रामेश्वरम और मदुरै तीर्थयात्रा ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना


India

-Bhavna Pandey

Senior Citizen Pilgrimage train: राजस्थान के देवस्थान मंत्री जाराराम कुमावत ने मंगलवार को दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन से रामेश्वरम-मदुरै के लिए एक विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। देवस्थान विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने बजट 2025-26 के तहत वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना के तहत अंतिम ट्रेन यात्रा को चिह्नित किया। वित्तीय वर्ष के समापन के साथ, जयपुर, कोटा और भरतपुर संभागों के 990 वरिष्ठ नागरिकों ने इस तीर्थयात्रा पर प्रस्थान किया।

अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन में दुर्गापुरा से 400 यात्री, सवाई माधोपुर से 120 यात्री और कोटा रेलवे स्टेशन से 470 यात्री सवार थे।

Senior Citizen Pilgrimage train

तीर्थयात्रियों की ट्रेन कब पहुंचेगी रामेश्वरम?

ट्रेन 2 अप्रैल को रामेश्वरम पहुंचने वाली है, जहां यह एक दिन रुकेगी। इस पड़ाव के दौरान, तीर्थयात्री चार धाम तीर्थस्थल, रामनाथस्वामी मंदिर का दौरा करेंगे और ज्योतिर्लिंग और मणि दर्शन करेंगे। इसके अतिरिक्त, वे राम सेतु से जुड़े तैरते पत्थरों को देखने के लिए धनुषकोडी का भी भ्रमण करेंगे।

मदुरै के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर का तीर्थयात्री करेंगे दर्शन

अगले दिन, तीर्थयात्री मीनाक्षी मंदिर के दर्शन के लिए मदुरै जाएंगे। जयपुर वापसी की यात्रा 7 अप्रैल को निर्धारित है। कुमावत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बजट 2025-26 की घोषणा के तहत, लगभग 50,000 वरिष्ठ नागरिकों ने मार्च 2026 तक 56 ट्रेनों के माध्यम से पूरे भारत में तीर्थयात्राओं में भाग लिया है।

इसके अलावा, इस योजना के तहत लगभग 6,000 वरिष्ठ नागरिकों ने 83 उड़ानों के माध्यम से नेपाल के काठमांडू में पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए यात्रा की है। मंत्री ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना 2026-27 की तैयारियाँ चल रही हैं। इसमें प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू करना शामिल है।

कई अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया, जो इसके महत्व को दर्शाता है। यह पहल राजस्थान की अपने वरिष्ठ नागरिकों के लिए आध्यात्मिक यात्राओं को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वे इन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध अनुभवों में भाग ले सकें।



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IAS Tukaram Mundhe का 21 साल के आईएएस करियर में 24वीं बार हुआ ट्रांसफर


Maharashtra

-Bhavna Pandey

IAS Tukaram Mundhe Transfer: महाराष्ट्र सरकार ने तुकाराम मुंढे समेत कई वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों का तबादला कर दिया है, जो उनके 21 साल के करियर में 24वीं पोस्टिंग है। अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाने वाले मुंढे को दिव्यांग कल्याण विभाग में सचिव के पद से राज्य सचिवालय में आपदा प्रबंधन, राहत और पुनर्वास, राजस्व और वन विभाग में सचिव के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया है।

अगस्त 2025 से एक वर्ष से कम समय के लिए दिव्यांग कल्याण विभाग में मुंढे की पिछली पोस्टिंग थी। मुंढे के साथ, इन तबादलों में अश्विनी भिड़े का नाम भी शामिल हैं। जो बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 154 साल के इतिहास में पहली महिला कमिश्‍नर बनी हैंद्य भिड़े पहले मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत थीं।

IAS Tukaram Mundhe

विकास चंद्र रस्तोगी, जो मंत्रालय में कृषि और पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव थे, को वित्त विभाग में वित्तीय सुधारों के अतिरिक्त मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। लोकेश चंद्र, जो पहले महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक थे, अब मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।

विनिता वैद्य सिंगाल को आपदा प्रबंधन, राहत और पुनर्वास, राजस्व और वन विभाग के प्रमुख सचिव के पद से मृदा और जल संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया है। परिमल सिंह, जो मुंबई में नानाजी देशमुख कृषिसंनिवनी परियोजना (POCRA) के परियोजना निदेशक थे, अब मंत्रालय में कृषि और संबद्ध विभागों में कृषि सचिव हैं।

पृथ्वीराज बी पी को मुंबई के पास वसई-विरार महानगरपालिका का नया नागरिक प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह पहले पुणे के अतिरिक्त नगर आयुक्त के रूप में कार्यरत थे।



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Russia: ‘भारतीय तेल बाजार पर अमेरिका का दबाव मंजूर नहीं’, भारत की विदेश नीति स्वतंत्र : रूसी राजदूत


भारत के तेल बाजार को लेकर अमेरिका के दबाव के आरोपों पर रूस ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने कड़े शब्दों में कहा है कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी भी तरह के अमेरिकी दबाव को पूरी तरह खारिज करता है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है। डेनिस अलिपोव ने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिशें वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से बिल्कुल सही नहीं हैं।

जब अलिपोव से पूछा गया कि क्या टैरिफ विवाद के बीच भारत रूसी तेल का आयात कम कर रहा है, तो उन्होंने कहा, “मैं अमेरिका-भारत व्यापार पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूं। लेकिन हम वैश्विक राजनीति में किसी भी तरह के दबाव को सख्ती से खारिज करते हैं। यह व्यापार करने का सही तरीका नहीं है।”

अमेरिका भारत में रूस के लिए बाधा खड़ी करने की कोशिश कर रहा

उन्होंने आगे कहा, “हम साफ तौर पर देख रहे हैं कि अमेरिका भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिश कर रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और व्यापार के लिए सही तरीका नहीं है। हम भारतीय तेल बाजार पर अमेरिकी दबाव को खारिज करते हैं। भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और हम ऐसे दबाव नहीं मानने के उनके रुख का स्वागत करते हैं।”

रूस के राजदूत ने यह भी कहा कि मॉस्को और नई दिल्ली के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि हाल के समय में भारत ने रूस से तेल आयात काफी बढ़ा दिया है।डेनिस अलिपोव ने कहा, “हम दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों का विस्तार कर रहे हैं। हाल ही में भारत को रूस से तेल की आपूर्ति में काफी बढ़ोतरी हुई है। हम इस दिशा में लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे दोनों देशों को लाभ हो।”

मौजूदा हालात में ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव: अलिपोव

पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। उन्होंने इसे ‘अमेरिकी ऑयल डिसरप्शन डिप्लोमेसी’ का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के बीच ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। लेकिन रूस और भारत के बीच व्यापार, खासकर तेल के क्षेत्र में, तेजी से आगे बढ़ रहा है और हम इसे जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”



वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित रूस यात्रा को लेकर अलिपोव ने कहा कि मॉस्को इस साल उनकी यात्रा का दिल से स्वागत करेगा। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच हर साल शिखर बैठक का एक तंत्र है और पिछले साल दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति ने भारत का दौरा किया था।

अमेरिका-ईरान की लड़ाई पर क्या बोले अलीपोव?

अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान की जवाबी कार्रवाई पर रूस के रुख के बारे में पूछे जाने पर, भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा, “स्पष्ट रूप से, ईरान हमलों को नाकाम कर रहा है। इसके परिणाम अमेरिका की कथित इच्छाओं के बिल्कुल विपरीत रहे हैं। ज्यादातर समय, ईरान ने आंतरिक रूप से हमलों, अपने ऊपर हुए हवाई हमलों के जवाब में अपनी प्रतिक्रिया को और मजबूत किया है। लेकिन फिर भी, यह संकट के विस्तार का संकेत है और इस समय हम सभी को क्या करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सैन्य कार्रवाई को रोकने और विरोधाभासों के समाधान के लिए राजनयिक वार्ता शुरू करने की दिशा में अधिक प्रयास करने चाहिए।”





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The Bonus Market Update: बढ़त के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 1187 अंक चढ़ा, निफ्टी 22600 के पार


पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में संभावित तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते वैश्विक बाजारों में आई तेज तेजी के साथ-साथ बुधवार को बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार की भावना को बढ़ावा दिया।



नए वित्तीय वर्ष की शानदार शुरुआत करते हुए, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,186.77 अंक या 1.65 प्रतिशत बढ़कर 73,134.32 पर बंद हुआ। दिन के दौरान, इसमें 2,017.03 अंक या 2.80 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 73,964.58 पर पहुंच गया। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 348 अंक या 1.56 प्रतिशत चढ़कर 22,679.40 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स की कंपनियों का हाल

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से ट्रेंट, इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इटरनल प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियों के रूप में उभरीं। एनटीपीसी, सन फार्मा, पावर ग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट और भारती एयरटेल पिछड़ने वाली कंपनियां रहीं।

यूरोपीय बाजारों में दिखी तेजी 

एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक तेजी से ऊपर चढ़कर बंद हुए। कोस्पी में 8.44 प्रतिशत की उछाल आई, जबकि निक्केई 225 सूचकांक 5.24 प्रतिशत चढ़ गया। यूरोप के बाजारों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। मंगलवार को अमेरिकी बाजार में उल्लेखनीय तेजी देखी गई। नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स में 3.83 प्रतिशत, एसएंडपी 500 में 2.91 प्रतिशत और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 2.49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों ने नए वित्तीय वर्ष की सकारात्मक शुरुआत की है, पश्चिम एशिया संघर्ष में संभावित कमी और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधानों में कमी को लेकर नए सिरे से आशावाद के चलते शेयरों में उछाल आया है।



पोनमुडी ने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प की यह टिप्पणी कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर ईरान से समझौते के बावजूद या बिना समझौते के पीछे हट सकता है, बाजारों के लिए उस उत्प्रेरक का काम किया जिसका वे इंतजार कर रहे थे, जिससे वैश्विक जोखिम परिसंपत्तियों में व्यापक राहत की लहर दौड़ गई।



जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पश्चिम एशिया संघर्ष के संभावित समाधान की ओर इशारा करने वाली टिप्पणियों के बाद जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार के चलते भारतीय शेयर बाजारों ने वित्त वर्ष 2027 की मजबूत शुरुआत की।

ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 103.7 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 0.22 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 103.7 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। श्री महावीर जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को शेयर बाजार बंद रहे।



बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 11,163.06 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 14,894.72 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। सोमवार को सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ। निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत गिरकर 22,331.40 पर समाप्त हुआ।



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West Asia Crisis: क्या भारत में महंगे हो जाएंगे कंडोम? 7000 करोड़ रुपये के कारोबार पर संकट क्यों, जानिए सबकुछ


अमेरिका-इस्राइल-ईरान के बीच जारी संकट पहले एलपीजी के रूप में रसोई पर भारी पड़ा, अब इसके दूसरे असर भी सामने आने लगे हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ पारंपरिक तेल और ऊर्जा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेडरूम तक पहुंच गया है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के चलते भारत के कंडोम उद्योग को कच्चे माल की भारी कमी और सप्लाई चेन की बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। आइए पांच सवालों के जरिए समझते हैं कि यह पूरा संकट क्या है और इसका आपकी जेब व समाज पर क्या असर पड़ेगा।

भारत में कंडोम का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और 2023 में इसका कुल कारोबार लगभग 861.3 मिलियन डॉलर यानी करीब 7,000 करोड़ रुपये से अधिक था। यह बाजार 2030 तक 11% की दर से बढ़कर लगभग 1.8 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

कंडोम उद्योग पर अचानक यह संकट क्यों मंडरा रहा है?

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण पूरी दुनिया की आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। लॉजिस्टिक्स के मार्चे पर आई रुकावटों और प्रमुख उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने उत्पादन को मुश्किल बना दिया है। इसके अलावा, सरकार अहम क्षेत्रों के लिए पेट्रोकेमिकल संसाधनों को प्राथमिकता दे रही है, जिससे कंडोम जैसे उद्योगों के लिए पेट्रोकेमिकल आवंटन में 35 फीसदी तक की कटौती हो सकती है और सप्लाई आगे और सिकुड़ सकती है।

आखिर किन चीजों की कमी हुई है जो कंडोम बनाने के लिए जरूरी हैं?

कंडोम बनाने के लिए मुख्य रूप से दो चीजें बहुत जरूरी हैं- सिलिकॉन तेल (जिसका इस्तेमाल लुब्रिकेंट के लिए होता है) और अमोनिया (जो लेटेक्स को स्थिर करने के लिए अहम है)। वर्तमान में कंपनियों को सिलिकॉन तेल की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अमोनिया की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक का भारी उछाल आने की उम्मीद है। इसके साथ ही पीवीसी और एल्युमीनियम फॉयल जैसी पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो गई है, जिससे कंपनियों पर लागत का भारी दबाव आ गया है।

संकट से भारत की कौन सी बड़ी कंपनियां जूझ रही हैं?

इस सप्लाई चेन के झटके का असर भारत की प्रमुख कंडोम निर्माता कंपनियों पर सीधा पड़ रहा है। इनमें सरकारी कंपनी एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड शामिल है, जो हर साल लगभग 221 करोड़ कंडोम बनाती है। इसके अलावा, मैनकाइंड फार्मा लिमिटेड और क्यूपिड लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियां भी इस संकट से प्रभावित हैं। कर्नाटक ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के जतिश एन. शेठ ने कहा है, “हर पेट्रोकेमिकल्स वाला उत्पाद वर्तमान में प्रभावित है। असर तो है, लेकिन अभी असर की गहराई का आकलन किया जा रहा है।”

क्या बाजार में कंडोम के दाम बढ़ने वाले हैं?

इसकी पूरी आशंका बनी हुई है। भारत का कंडोम बाजार ‘कम लागत और अधिक बिक्री’ के मॉडल पर चलता है ताकि यह आम लोगों की पहुंच में रहे। लेकिन उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी से कंपनियों के मुनाफे (बॉटम लाइन) पर सीधा दबाव पड़ रहा है। उद्योग के जानकारों का मानना है कि मजबूरन कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे राजस्व तो बढ़ सकता है लेकिन बिक्री के आंकड़ों में गिरावट आने की संभावना है।

इसका आम लोगों और समाज पर क्या असर पड़ेगा?

उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यह केवल एक कारोबारी संकट नहीं, बल्कि एक संभावित सामाजिक जोखिम भी है। कंडोम परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण का एक अहम हिस्सा है। अगर कीमतें बढ़ती हैं और इसके इस्तेमाल में थोड़ी सी भी कमी आती है, तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम हो सकते हैं। भारत के कंडोम उद्योग पर पड़ा यह दबाव बताता है कि कैसे दुनिया के किसी कोने में हो रहे वैश्विक संघर्ष रोजमर्रा के लिए जरूरी उत्पादों और उनकी आपूर्ति शृंखला को प्रभावित कर रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में कंपनियां इस लागत वृद्धि को कैसे संभालती हैं।





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Crude: जंग जल्द खत्म होने की उम्मीदों के बीच तेल की कीमतों में गिरावट; एक हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा भाव


वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड बुधवार को 15% से अधिक गिरकर 99.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो एक सप्ताह का निचला स्तर है। इससे पहले मंगलवार रात ब्रेंट क्रूड 118.35 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। 

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर अब घरेलू बाजार पर भी साफ दिखने लगा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चे तेल के अप्रैल वायदा में मंगलवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। क्रूड ऑयल अप्रैल फ्यूचर्स 474 रुपये यानी 4.95% गिरकर 9,093 रुपये प्रति बैरल पर कारोबार करते दिखे। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि घरेलू कीमतें फिलहाल पूरी तरह वैश्विक रुझानों का अनुसरण कर रही हैं।

क्यों आई गिरावट?

कीमतों में यह अचानक गिरावट भू-राजनीतिक मोर्चे पर आए नए संकेतों के बाद देखने को मिली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अगले दो से तीन हफ्तों में कम हो सकता है। साथ ही, यह भी संकेत मिले कि ईरान कुछ शर्तों के तहत तनाव कम करने को तैयार हो सकता है।

इन संकेतों के बाद बाजार में बने रिस्क प्रीमियम में कमी आई। जिन निवेशकों ने कीमतों में तेजी पर दांव लगाया था, उन्होंने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।

जोखिम अभी भी बरकरार

हालांकि कीमतों में आई इस गिरावट के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अहम संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है और यहां किसी भी तरह का व्यवधान कीमतों को फिर तेजी से ऊपर ले जा सकता है।



इसके अलावा, अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से मिल रहे मिले-जुले आर्थिक संकेतों ने भी बाजार को अस्थिर बना रखा है, जिससे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं कीमतें

विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा गिरावट को एक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतें मार्च के अधिकांश समय में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही हैं। व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो आपूर्ति संबंधी चिंताएं और भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी बाजार को सहारा दे रही हैं।


 



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GST Collection: मार्च में जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ रुपये के पार, सरकार की तिजोरी में जमा हुए 22.27 लाख करोड़


देश में जीएसटी संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। वित्त मंत्रालय के जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में सकल जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 2,00,064 करोड़ रुपये हो गया, जो मार्च 2025 के 1,83,845 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.8% अधिक है।

जीएसटी संग्रह बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपये से 8.3% ज्यादा है। यह आंकड़े टैक्स कलेक्शन में लगातार बने हुए मजबूत रुझान को दर्शाते हैं। मार्च में दो लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना साल के अंत में बेहतर अनुपालन और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत माना जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, घरेलू जीएसटी राजस्व मार्च में 5.9% बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो देश के भीतर स्थिर खपत को दर्शाता है। वहीं, आयात से जुड़े जीएसटी कलेक्शन में 17.8% की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़ती आयात गतिविधियों और बेहतर कस्टम्स कलेक्शन की ओर इशारा करती है।

आयात में हुई वृद्धि से आईसीएसटी संग्रह बढ़ा

आयात में भारी वृद्धि के चलते मार्च में आईजीएसटी संग्रह बढ़कर 1.06 लाख करोड़ रुपये हो गया। सीजीएसटी और एसजीएसटी संग्रह में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जो केंद्र और राज्य कर घटकों में संतुलित वृद्धि को दर्शाती है।

जीएसटी रिफंड में हुई 13.8% की वृद्धि

मार्च में कुल जीएसटी रिफंड में सालाना आधार पर 13.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 22,074 करोड़ रुपये हो गया। रिफंड को समायोजित करने के बाद, शुद्ध जीएसटी राजस्व में सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 1.77 लाख करोड़ रुपये हो गया।



वित्त वर्ष 2026 के लिए शुद्ध जीएसटी संग्रह 19.34 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक है, जो उच्च धनवापसी के बावजूद लगातार राजस्व वृद्धि को दर्शाता है।

एसजीएसटी को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र (+17%), कर्नाटक (+14%) और तेलंगाना (+19%) जैसे कई बड़े राज्यों में मार्च में एसजीएसटी में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि तमिलनाडु (-8%) और असम (-15%) जैसे कुछ राज्यों में गिरावट देखी गई।






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IndiGo: इंडिगो की फ्लाइट में टिशू पेपर पर लिखा मिला ये मैसेज; पढ़ते ही मचा हड़कंप, जानें पूरा मामला


मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर बुधवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब इंडिगो की एक फ्लाइट के शौचालय में डेंजर लिखा हुआ टिशू पेपर मिला। यह घटना उस वक्त सामने आई जब इंडिगो की फ्लाइट 911 अपनी अगली उड़ान के लिए तैयार की जा रही थी।

संदिग्ध संदेश मिलने के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों ने तुरंत मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम और नजदीकी पुलिस स्टेशन को अलर्ट किया। विमान उस समय गेट नंबर 5 के पास खड़ा था, जिससे संभावित खतरे की आशंका को गंभीरता से लिया गया।

सूचना मिलते ही बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) मौके पर पहुंचा और पूरे विमान की विस्तृत जांच शुरू की गई। सुरक्षा एजेंसियों ने मानक प्रोटोकॉल के तहत विमान के हर हिस्से की बारीकी से तलाशी ली। साथ ही फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं को भी सतर्क कर दिया गया, जिससे एयरपोर्ट परिसर में कुछ समय के लिए तनाव और सतर्कता का माहौल बन गया।

हालांकि, गहन जांच के बाद किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। अधिकारियों ने विमान को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया, जिसके बाद स्थिति पर काबू पा लिया गया और एयरपोर्ट संचालन धीरे-धीरे सामान्य हो गया।

पुलिस ने बताया कि अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। यह घटना दर्शाती है कि विमानन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी छोटे से संकेत को भी गंभीरता से लेते हुए यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कार्रवाई करती हैं।



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