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अपग्रेड हो रहा शी-बॉक्स पोर्टल, 17000 थाने कनेक्ट होंगे: कोई ताने मारे, छेड़खानी करे तो पोर्टल में शिकायत दें, नजदीकी थाने से तुरंत मदद पहुंचेगी


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नई दिल्ली19 घंटे पहले

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महिलाओं को उत्पीड़न के माहौल से बचाने के लिए केंद्र सरकार तकनीकी निगरानी तंत्र को देश के सभी 17 हजार पुलिस थानों से जोड़ने जा रही है। इसके लिए शी-बॉक्स पोर्टल को अपग्रेड किया जा रहा है।

अभी पोर्टल के जरिए सरकारी और निजी क्षेत्र के दफ्तर जुड़े हैं, जहां काम करने वाली महिलाएं किसी भी तरह के लैंगिक उत्पीड़न की शिकायत बिना अपनी पहचान बताए पोर्टल पर दर्ज कर सकती हैं।

पोर्टल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत काम करता है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने भास्कर को बताया कि पोर्टल पर अब घर से ऑफिस तक आने-जाने वाले रास्ते पर होने वाले शोषण, उत्पीड़न और ताने मारने की भी शिकायत दर्ज हो सकेगी।

इसमें बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बस, ट्रेन, मार्केट आदि भी शामिल रहेंगे। इसके लिए पोर्टल को तकनीकी रूप से अपग्रेड किया जा रहा है। अगले एक-दो महीनों में अपग्रेडेशन पूरा हो जाएगा और महिलाओं को सुविधा मिलने लगेगी।

एप भी तैयार हो रहा, ताकि शिकायत में आसानी हो

कार्यस्थलों पर लैंगिक उत्पीड़न रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 2024 में शी-बॉक्स पोर्टल शुरू हुआ था। इसका मकसद ऐसी शिकायतों का रजिस्ट्रेशन और निगरानी करना है। शिकायत के समाधान के लिए क्या उपाय किए गए, इसका विवरण भी पोर्टल पर संबंधित जांच अधिकारी को दर्ज करना पड़ता है। शी-बॉक्स पोर्टल का एप वर्जन भी तैयार हो रहा है, ताकि, महिलाओं को शिकायत दर्ज करने में और आसानी रहे।

अभी ऐसे काम करता है शी-बॉक्स

अभी शी-बॉक्स पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के बाद इसकी जांच संबंधित कंपनी की समिति को POSH एक्ट 2013 के नियमों के तहत करनी होती है। इसमें पीड़िता और आरोपी दोनों पक्षों की सुनवाई होती है। कानूनन इस पूरी जांच प्रक्रिया को 90 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य है, जिसके बाद अगले 60 दिनों में उचित कार्रवाई किया जाना निर्धारित है।

शिकायत करने के लिए प्रोसेस क्या…

  • महिलाओं को रास्ते में होने वाले उत्पीड़न की शिकायत shebox.wcd.gov.in पर करनी होगी।
  • इस पर पीड़िता को नाम, पता, लोकेशन और घटना का संक्षिप्त विवरण देना होगा। रास्ते में जहां छेड़खानी हुई होगी, वहां के संबंधित थाने में पोर्टल से तुरंत शिकायत पहुंचेगी।
  • इसके लिए पोर्टल के मेन सर्वर को शुरुआत में संवेदनशील इलाकों के थानों से जोड़ा जाएगा।
  • थाने में शिकायत पहुंचते ही पुलिस संबंधित रूट के परिवहन स्पॉट, वेटिंग स्टैंड, लोकेशन आदि पर गश्त बढ़ाएगी।
  • एक तरह से पुलिस शिकायत करने वाली महिलाओं के लिए जासूस का काम करेगी। आरोपियों को मौके से ही पकड़ेगी।



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RBI Export Credit Relief: पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों को RBI ने दी राहत, बढ़ी भुगतान समय सीमा की तारीख


पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर अब भारत के व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है। इसी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने निर्यातकों को बड़ी राहत दी है। आरबीआई ने एक्सपोर्ट क्रेडिट की समय सीमा बढ़ाने का फैसला लिया है, जिससे कारोबारियों को मौजूदा मुश्किल हालात में राहत मिल सके। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स प्रभावित हैं।


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आरबीआई ने मंगलवार को कहा कि प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट फाइनेंस के लिए 450 दिनों की जो बढ़ी हुई अवधि थी, उसे अब 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पहले यह छूट 31 मार्च 2026 तक के लिए थी। आरबीआई ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण निर्यातकों को समय पर भुगतान और शिपमेंट में दिक्कत आ रही है, इसलिए यह कदम उठाया गया है।

क्या है एक्सपोर्ट क्रेडिट और यह राहत क्यों जरूरी है?

एक्सपोर्ट क्रेडिट वह कर्ज होता है, जो बैंकों द्वारा निर्यातकों को दिया जाता है ताकि वे सामान तैयार कर सकें और विदेश भेज सकें। मौजूदा हालात में शिपमेंट में देरी और भुगतान अटकने की समस्या बढ़ी है। ऐसे में समय सीमा बढ़ाने से निर्यातकों पर कर्ज चुकाने का दबाव कम होगा और उनका कारोबार जारी रह सकेगा।

खबर अपडेट की जा रही है…



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IT रूल बदलेंगे- निर्देश नहीं माने तो सेफ हार्बर खत्म: अब हर कंटेंट के लिए सोशल मीडिया कंपनियां ही जिम्मेदार; डेटा डिलीट नहीं कर सकेंगे


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नई दिल्ली14 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिक

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केंद्र सरकार ने आईटी नियमन- 2021 में बदलाव का नया मसौदा जारी कर दिया है। इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सरकारी निर्देशों की अनदेखी नहीं कर सकेंगे। उन्हें निर्देश, गाइडलाइन, एडवाइजरी माननी ही होगी। यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित डिजिटल मीडिया कंपनियां सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराई जाएंगी।

इससे इन कंपनियों को सेफ हार्बर के तहत मिलने वाली कानूनी ढाल खत्म कर दी जाएगी। आईटी नियमों में सबसे अहम बदलाव यह है कि प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए हर कंटेंट के लिए खुद जिम्मेदार होंगे। फिलहाल 14 अप्रैल तक सरकार ने इस मसौदे पर सार्वजनिक सुझाव, आपत्तियां मांगी हैं।

डिलीट नहीं कर सकेंगे डेटा

  • नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी अन्य कानून के तहत डेटा सुरक्षित रखना जरूरी है तो प्लेटफॉर्म उसे डिलीट नहीं कर सकेंगे। वित्त, टैक्स या जांच से जुड़े मामलों को सुरक्षित रखना होगा।
  • अभी डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड सिर्फ न्यूज पब्लिशर्स पर लागू होता था, लेकिन सोशल मीडिया पर न्यूज या करंट अफेयर्स पोस्ट करने वाले यूजर भी इसके दायरे में होंगे।
  • सरकार किसी भी कंटेंट से जुड़े मामले को सीधे समीक्षा कमेटी के पास भेज सकती है। इसके लिए किसी की शिकायत का इंतजार करना जरूरी नहीं होगा।

सेफ हार्बर’ को आसान भाषा में ऐसे समझें

कानूनी ढाल: यह सोशल मीडिया कंपनियों को मिला एक सुरक्षा कवच है, जो कहता है कि अगर किसी यूजर ने प्लेटफॉर्म पर कोई गलत पोस्ट या वीडियो डाला है, तो उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।

शर्तिया सुरक्षा: यह सुरक्षा तभी तक मिलती है जब तक कंपनियां सरकार के नियमों को मानती हैं। अगर वे शिकायत मिलने पर 3 घंटे के भीतर SGI नहीं हटातीं, तो यह सुरक्षा कवच खत्म हो जाता है और पुलिस कंपनी पर भी केस दर्ज कर सकती है।

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने कहा- सरकार सेंसरशिप लगा रही

आईटी नियमों में बदलाव का विरोध शुरू हो गया है। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि सरकार ऑनलाइन कंटेंट पर सेंशरशिप लगाना चाहती है। इसका मकसद सरकार पर तंज कसने, मखौल उड़ाने, नकल करने वाले कंटेंट पर अंकुश लगाना है। सरकार सेफ हार्बर पर चोट करके आम यूजर्स पर नकेल कसना चाह रही है।

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AI कंटेंट पर लेबल जरूरी, आज से नए नियम लागू: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक फोटो-वीडियो 3 घंटे में हटाने होंगे

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अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई की मदद से बनाया गया है, तो उस पर ‘लेबल’ लगाना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू हुए। 10 फरवरी को इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ था। पूरी खबर पढ़ें…

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Hyderabad Gold Silver Rate Today: मार्च के आखिरी दिन सोना-चांदी ने फिर किया हैरान, कहां पहुंचा भाव?


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घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज महंगे होंगे: रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी; कॉमर्शियल LPG की कमी से हजारों प्लास्टिक यूनिट बंद




पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ रही है और कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इससे बोतलबंद पानी, नमक, तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें, एसी, फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल से लेकर नॉन-सर्जिकल मेडिकल आइटम के दाम बढ़ सकते हैं। वजह यह है कि इस जंग ने प्लास्टिक उद्योग की रीढ़ तोड़ दी है। बीते 30 दिनों में कच्चे माल के दाम 50-70% तक बढ़ चुके हैं। सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाले प्लास्टिक दाने एलडीपीई के दाम 110 रु/ किलो से 180 रुपए तक पहुंच गए हैं। अन्य पॉलीमर और रॉ मटेरियल भी 30 हजार से 70 हजार रुपए प्रति टन तक वृद्धि हुई है। ऐसे में अप्रैल में प्लास्टिक की कीमतें 50-60% तक बढ़ सकती हैं। प्लास्टिक टंकी व कंटेनर के दाम 30-40% तक बढ़ने की आशंका है। ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुनील शाह कहते हैं कि प्लास्टिक इंडस्ट्री से 5 लाख लोग जुड़े हैं। संकट बढ़ा तो दो-तीन लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं। हमारी मांग है कि स्थिति सामान्य होने तक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स पर 18% जीएसटी को कम करके 5% तक लाया जाए। बैंक वर्किंग कैपिटल लिमिट 20% तक बढ़ा दें। इससे कैश फ्लो समस्या हल होगी। एलपीजी संकट से 20 हजार छोटे उद्योगों पर लगा ताला असर 50 हजार प्लास्टिक फैक्ट्रियों पर पड़ा है। कॉमर्शियल एलपीजी की कमी झेल रहे अधिकांश यूनिट्स ने उत्पादन बंद कर दिया या घटा दिया। करीब 20 हजार कारखाने बंद होने का अनुमान है। हैदराबाद के एक ईपीई निर्माता ने बताया, ‘हम गैस के बिना उत्पादन नहीं कर सकते। 80 रुपए/किलो तो छोड़िए 150 में भी नहीं मिल रही।’ गुजरात के राजकोट में 40 से ज्यादा प्लांट बंद हो चुके हैं। मध्यप्रदेश, रायपुर और हैदराबाद में भी कई प्लांट बंद हैं। प्लास्टिक पैकेजिंग निर्माता लंबे समय तक मार्जिन का दबाव नहीं झेल पा रहे। कई यूनिट्स ने पुराने ऑर्डर रद्द कर दिए हैं। बड़े शहरों में घरेलू कामगारों के लौटने से ‘रेडी टू ईट’ प्रोडक्ट्स की मांग में कई गुना उछाल एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और प्रवासी घरेलू कामगारों के लौटने के कारण शहरी घरों में खाना पकाने का तरीका बदल रहा है। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रेडी-टु-ईट खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ रही हैै। शहरी परिवार अब कम मेहनत वाले भोजन के विकल्पों की ओर झुक रहे हैं। बिगबॉस्केट के चीफ मर्चेंडाइजिंग ऑफिसर शेषु कुमार तिरुमाला ने बताया कि रेडी-टू-ईट कैटेगरी की बिक्री सामान्य स्तर से 10% अधिक है। बीते पांच दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री सामान्य से 10 गुना रही है। रेडी-टू-ईट उत्पाद बनाने वाली कंपनी फ्रेशकॉन इंडिया के सह-संस्थापक अनुपम बोके ने कहा, उपभोक्ता और खाद्य व्यवसाय अब कुशल कुकिंग सॉल्यूशंस की ओर बढ़ रहे हैं। जो प्रोडक्ट खाना पकाने के समय को 80% तक कम करते हैं और 60% गैस बचाते हैं, उनमें डिस्ट्रीब्यूटर्स और एक्सपोर्टर्स की भारी रुचि देखी जा रही है। वहीं, अमेजन इंडिया के प्रवक्ता के अनुसार, इंस्टेंट नूडल्स, जूस, नट्स और प्रोटीन-आधारित स्नैक्स की मांग में ‘उल्लेखनीय वृद्धि’ हुई है। इसके लिए एक समर्पित ‘रेडी टू ईट स्टोर’ भी बनाया है। सीमेंट के दाम बढ़ाए, फिर वापस ली वृद्धि इस संकट के चलते पेटकोक, कोयले और पैकेजिंग सामग्री की कीमतें एक झटके में बढ़ गई है। इससे सीमेंट इंडस्ट्री पर असर पड़ा है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट आशुतोष मुरारका के अनुसार, इस भू-राजनीतिक संकट से उत्पादन लागत में 150 से 200 प्रति टन की बढ़ोतरी हो सकती है, जो सीधे तौर पर कंपनियों के मुनाफे को चोट पहुंचाएगी। सीमेंट की बोरियों के लिए इस्तेमाल होने वाला पॉलीप्रोपाइलीन सीधे कच्चे तेल से जुड़ा है। इस नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियों को कीमतों में 4-5% की वृद्धि करनी होगी, लेकिन बाजार की मौजूदा स्थिति इसे स्वीकार करने के पक्ष में नहीं दिखती। चौथी तिमाही में कंपनियों ने प्रति बोरी 15-20 रुपए की बढ़ोतरी की, लेकिन अत्यधिक आपूर्ति के कारण बढ़ोतरी वापस लेनी पड़ी। हालांकि उत्तर में 10-15 रु/बोरी की बढ़ोतरी टिकी हुई है। एक्सपर्ट क्या कहते हैं… अभी के शुरुआती रुझान किसी आपातकालीन खरीदारी का संकेत नहीं देतीं। लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष के चौथे सप्ताह तक मांग में उल्लेखनीय अंतर दिख सकता है, क्योंकि रेस्त्रां परिचालन में दिक्कत आ रही है। शहर से कुछ प्रवासी गृहनगर लौट रहे हैं। सतीश मेहना, फाउंडर, डेटम इंटेलिजेंस कच्चे माल के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में कीमतें 7-10 प्रतिशत तक बढ़ेंगी। हम मई तक अपनी फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से चलाने का इरादा रखते हैं, लेकिन चुनौती यह है कि इन बढ़ी हुई कीमतों का मांग पर क्या असर पड़ेगा। कमल नंदी, अप्लायंसेज बिजनेस हेड, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप ———————– बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… टोल प्लाजा कल से कैशलेस होंगे: टैक्स बचाने के लिए आज आखिरी दिन, 4 जरूरी काम निपटाएं, अप्रैल से बदलेंगे 10 नियम कल यानी 1 अप्रैल से देश के सभी टोल प्लाजा कैशलेस हो जाएंगे। वाहन चालक सिर्फ फास्टैग या UPI पेमेंट के जरिए ही टोल टैक्स चुका सकेंगे। इसके अलावा, आज रात 12 बजे के बाद देश में टैक्स और बैंकिंग से जुड़े 3 बड़े कामों की डेडलाइन खत्म हो रही है। पूरी खबर पढ़ें…



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घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज सब महंगे होंगे: रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी; कमर्शियल LPG की कमी से हजारों प्लास्टिक यूनिट बंद




पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ रही है और कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इससे बोतलबंद पानी, नमक, तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें, एसी, फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल से लेकर नॉन-सर्जिकल मेडिकल आइटम के दाम बढ़ सकते हैं। वजह यह है कि इस जंग ने प्लास्टिक उद्योग की रीढ़ तोड़ दी है। बीते 30 दिनों में कच्चे माल के दाम 50-70% तक बढ़ चुके हैं। सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाले प्लास्टिक दाने एलडीपीई के दाम 110 रु/ किलो से 180 रुपए तक पहुंच गए हैं। अन्य पॉलीमर और रॉ मटेरियल भी 30 हजार से 70 हजार रुपए प्रति टन तक वृद्धि हुई है। ऐसे में अप्रैल में प्लास्टिक कीमतें 50-60% तक बढ़ सकती हैं। प्लास्टिक टंकी व कंटेनर के दाम 30-40% तक बढ़ने की आशंका है। ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुनील शाह कहते हैं कि प्लास्टिक इंडस्ट्री से 5 लाख लोग जुड़े है। संकट बढ़ा तो दो-तीन लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं। हमारी मांग है कि स्थिति सामान्य होने तक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स पर 18% जीएसटी को कम करके 5% तक लाया जाए। बैंक वर्किंग कैपिटल लिमिट 20% तक बढ़ा दें। इससे कैश फ्लो समस्या हल होगी। एलपीजी संकट से 20 हजार छोटे उद्योगों पर लगा ताला असर 50 हजार प्लास्टिक फैक्ट्रियों पर पड़ा है। कमर्शियल एलपीजी की कमी झेल रहे अधिकांश यूनिट्स ने उत्पादन बंद कर दिया या घटा दिया। करीब 20 हजार कारखाने बंद होने का अनुमान है। हैदराबाद के एक ईपीई निर्माता ने बताया, ‘हम गैस के बिना उत्पादन नहीं कर सकते। 80 रुपए/किलो तो छोड़िए 150 में भी नहीं मिल रही।’ गुजरात के राजकोट में 40 से ज्यादा प्लांट बंद हो चुके हैं। मध्यप्रदेश, रायपुर और हैदराबाद में भी कई प्लांट बंद हैं। प्लास्टिक पैकेजिंग निर्माता लंबे समय तक मार्जिन का दबाव नहीं झेल पा रहे। कई यूनिट्स ने पुराने ऑर्डर रद्द कर दिए हैं। बड़े शहरों में घरेलू कामगारों के लौटने से ‘रेडी टू ईट’ प्रोडक्ट्स की मांग में कई गुना उछाल

एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और प्रवासी घरेलू कामगारों के लौटने के कारण शहरी घरों में खाना पकाने का तरीका बदल रहा है। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रेडी-टु-ईट खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ रही हैै। शहरी परिवार अब कम मेहनत वाले भोजन के विकल्पों की ओर झुक रहे हैं। बिगबॉस्केट के चीफ मर्चेंडाइजिंग ऑफिसर शेषु कुमार तिरुमाला ने बताया कि रेडी-टू-ईट कैटेगरी की बिक्री सामान्य स्तर से 10% अधिक है।बीते पांच दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री सामान्य से 10 गुना रही है। रेडी-टू-ईट उत्पाद बनाने वाली कंपनी फ्रेशकॉन इंडिया के सह-संस्थापक अनुपम बोके ने कहा, उपभोक्ता और खाद्य व्यवसाय अब कुशल कुकिंग सॉल्यूशंस की ओर बढ़ रहे हैं। जो प्रोडक्ट खाना पकाने के समय को 80% तक कम करते हैं और 60% गैस बचाते हैं, उनमें डिस्ट्रीब्यूटर्स और एक्सपोर्टर्स की भारी रुचि देखी जा रही है। वहीं, अमेजन इंडिया के प्रवक्ता के अनुसार, इंस्टेंट नूडल्स, जूस, नट्स और प्रोटीन-आधारित स्नैक्स की मांग में ‘उल्लेखनीय वृद्धि’ हुई है। इसके लिए एक समर्पित ‘रेडी टू ईट स्टोर’ भी बनाया है। सीमेंट के दाम बढ़ाए, फिर वापस ली वृद्धि इस संकट के चलते पेटकोक, कोयले और पैकेजिंग सामग्री की कीमतें एक झटके में बढ़ गई है। इससे सीमेंट इंडस्ट्री पर असर पड़ा है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट आशुतोष मुरारका के अनुसार, इस भू-राजनीतिक संकट से उत्पादन लागत में 150 से 200 प्रति टन की बढ़ोतरी हो सकती है, जो सीधे तौर पर कंपनियों के मुनाफे को चोट पहुंचाएगी। सीमेंट की बोरियों के लिए इस्तेमाल होने वाला पॉलीप्रोपाइलीन सीधे कच्चे तेल से जुड़ा है। इस नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियों को कीमतों में 4-5% की वृद्धि करनी होगी, लेकिन बाजार की मौजूदा स्थिति इसे स्वीकार करने के पक्ष में नहीं दिखती। चौथी तिमाही में कंपनियों ने प्रति बोरी 15-20 रुपए की बढ़ोतरी की, लेकिन अत्यधिक आपूर्ति के कारण बढ़ोतरी वापस लेनी पड़ी। हालांकि उत्तर में 10-15 रु/बोरी की बढ़ोतरी टिकी हुई है। एक्सपर्ट क्या कहते हैं… अभी के शुरुआती रुझान किसी आपातकालीन खरीदारी का संकेत नहीं देतीं। लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष के चौथे सप्ताह तक मांग में उल्लेखनीय अंतर दिख सकता है, क्योंकि रेस्त्रां परिचालन में दिक्कत आ रही है। शहर से कुछ प्रवासी गृहनगर लौट रहे हैं। सतीश मेहना, फाउंडर, डेटम इंटेलिजेंस कच्चे माल के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में कीमतें 7-10 प्रतिशत तक बढ़ेंगी। हम मई तक अपनी फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से चलाने का इरादा रखते हैं, लेकिन चुनौती यह है कि इन बढ़ी हुई कीमतों का मांग पर क्या असर पड़ेगा। कमल नंदी, अप्लायंसेज बिजनेस हेड, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप



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Mahavir Jayanti 2026 Wishes: ‘जियो और जीने दो’, अपनों को भेजें खास संदेश



Mahavir Jayanti 2026 Wishes: आज महावीर जयंती जैन का पावन पर्व है, यह पर्व हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस खास मौके पर अपनों को भेजें खास संदेश।



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Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: महावीर जयंती पर बैंक-स्कूल में छुट्टी? चेक कर लें मेट्रो और बाजार का हाल


Delhi

oi-Kumari Sunidhi Raj

Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: महीने के आखिरी दिन यानी आज, 31 मार्च 2026 को पूरे देश में महावीर जयंती का पावन पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों के मन में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज सरकारी दफ्तर, स्कूल, कॉलेज और बाजार खुले हैं या नहीं। आपको बता दें कि महावीर जयंती एक ‘गजेटेड हॉलिडे’ है, जिसके कारण राष्ट्रीय राजधानी में अधिकांश शैक्षणिक संस्थान और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे।

हालांकि, आज की तारीख वित्तीय वर्ष (Financial Year 2025-26) का आखिरी दिन भी है, जिसकी वजह से बैंकिंग सेवाओं और टैक्स संबंधी कार्यों के लिए नियमों में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं। अगर आप आज घर से बाहर किसी जरूरी काम के लिए निकल रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बैंक क्लोजिंग और सार्वजनिक अवकाश दोनों का तालमेल है।

Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh

बैंकों का क्या है स्टेटस? (Bank Holiday or Open?)

आमतौर पर महावीर जयंती पर बैंकों की छुट्टी होती है, लेकिन RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) के विशेष आदेश के अनुसार, आज 31 मार्च को सभी ‘एजेंसी बैंक’ (जो सरकारी लेन-देन संभालते हैं) खुले रहेंगे।

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वजह: वित्त वर्ष 2025-26 की क्लोजिंग के कारण सरकारी रसीदों और भुगतानों को समय पर पूरा करने के लिए बैंकों को कार्यशील रहने का निर्देश दिया गया है।

ध्यान दें: आम जनता के लिए चेक क्लियरिंग या अन्य निजी काम की सुविधा सीमित हो सकती है। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग, UPI और ATM सेवाएं सामान्य रूप से काम करेंगी।

स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर

स्कूल और कॉलेज: दिल्ली के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल आज बंद हैं। कई बड़े प्राइवेट स्कूलों ने भी महावीर जयंती की छुट्टी घोषित की है।

सरकारी दफ्तर: केंद्र और राज्य सरकार के अधिकांश कार्यालयों में आज सार्वजनिक अवकाश रहेगा।

बाजार और सार्वजनिक परिवहन

बाजार: दिल्ली के मुख्य व्यापारिक केंद्र जैसे चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली और करोल बाग में जैन समुदाय की बहुलता वाले कुछ हिस्सों में दुकानें बंद रह सकती हैं, लेकिन अधिकांश खुदरा बाजार और मॉल्स खुले रहेंगे।

मेट्रो और बसें: दिल्ली मेट्रो और DTC बसें अपने निर्धारित समय के अनुसार सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।

शेयर बाजार (Stock Market Holiday)

आज 31 मार्च को NSE और BSE में कोई ट्रेडिंग नहीं होगी। महावीर जयंती के उपलक्ष्य में इक्विटी, डेरिवेटिव और SLB सेगमेंट पूरी तरह बंद रहेंगे। अब बाजार कल, 1 अप्रैल को खुलेगा।

With AI Inputs

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Toll Plaza: टोल प्लाजा पर अब नहीं चलेगा कैश, एक अप्रैल से केवल डिजिटल भुगतान ही होगा मान्य


भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने टोल से जुड़े नियमों में बदलाव किया है और अब एक अप्रैल से टोल प्लाजा पर डिजिटल भुगतान ही मान्य होगा, यानी अब हाइवे यूजर्स कैश में टोल का भुगतान नहीं कर पाएंगे। एनएचएआई का यह कदम पूरे देश में उसके सभी टोल प्लाजा पर लागू होगा। 

एनएचएआई के मुताबिक, एक अप्रैल से यात्री केवल टोल प्लाजा पर डिजिटल माध्यम जैसे फास्टैग और यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर पाएंगे। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली में दक्षता बढ़ाना और पारदर्शिता लाना है। अधिकारियों का मानना है कि पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली से वाहनों को टोल प्लाजा से तेजी से गुजरने में मदद मिलेगी, जिससे लंबी कतारें कम होंगी और यात्रा का समय बचेगा।

बैलेंस न होने पर वाहनों पर जुर्माना?

कैश लेन को हटाने से अधिकारियों को उम्मीद है कि यातायात खासकर व्यस्त समय में सुचारू रूप से चलेगा। टोल बूथों पर तेजी से प्रोसेसिंग से ईंधन की खपत और वाहन उत्सर्जन में भी कमी आने की संभावना है, जिससे स्वच्छ पर्यावरण में योगदान मिलेगा। हालांकि, इस बदलाव से कुछ यात्रियों को असुविधा हो सकती है, खासकर उन लोगों को जो डिजिटल भुगतान के लिए तैयार नहीं हैं। वैध फास्टैग या पर्याप्त बैलेंस न होने पर वाहनों पर जुर्माना लग सकता है या उन्हें टोल प्लाजा पर रोका भी जा सकता है।

ऐसे मामलों में, यात्रियों के पास टोल बूथों पर उपलब्ध क्यूआर कोड को स्कैन करके यूपीआई के माध्यम से तुरंत भुगतान करने का विकल्प होगा। लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नेटवर्क संबंधी समस्याओं के कारण कभी-कभी ये लेनदेन प्रभावित हो सकते हैं, जिससे देरी हो सकती है।

चालू यूपीआई एप रखने की सलाह

बाधाओं से बचने के लिए, यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले सुनिश्चित करें कि उनका फास्टैग सक्रिय है, उनके बैंक खाते से ठीक से जुड़ा हुआ है और उसमें पर्याप्त शेष राशि है। अपने स्मार्टफोन में बैकअप के रूप में एक चालू यूपीआई एप रखने की सलाह भी दी गई है। यह बदलाव भारत के डिजिटल अवसंरचना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे राजमार्ग यात्रा तेज, सुगम और अधिक कुशल बनेगी।

इनपुट: आईएएनएस



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BIZ Updates: फरवरी में 80.4 फीसदी रहा देश का राजकोषीय घाटा; रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए 30 दिन की मोहलत



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– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

केंद्र का राजकोषीय घाटा फरवरी में 2025-26 के बजट लक्ष्य का 12.52 लाख करोड़ रुपये यानी 80.4 प्रतिशत रहा। एक साल पहले इसी अवधि में यह 85.8 प्रतिशत था। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार ने 2025-26 में राजकोषीय घाटा (व्यय और राजस्व के बीच का अंतर) सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत यानी 15.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान रखा है। महालेखा नियंत्रक के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी, 2026 के अंत तक केंद्र की कुल प्राप्तियां 27.91 लाख करोड़ रुपये रहीं, जो बजट लक्ष्य का 82 प्रतिशत है। इन प्राप्तियों में 21.45 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व (शुद्ध) और 5.8 लाख करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व शामिल है। सीजीए के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल-फरवरी, 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार का कुल व्यय 40.44 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य का 81.5 प्रतिशत है। 


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